Monday, February 2, 2009

सत्यम की कीमत

70 का कांटा डालने पर तो मछलियां आ रही हैं..यानी कांटे का वजन कुछ बढ़ाना चाहिए सत्यम की सही कीमत पर अटकलें तेज हो गई हैं। आखिर क्या होना चाहिए सत्यम के प्रति शेयर की कीमत। सत्यम को खरीदने के लिए लाइन में खड़ी कंपनियों ने सेबी से सत्यम के मामले में विशेष छूट देने की मांग की हैं। और एक तरह से सेबी ने इसे मान भी लिया है। सेबी ने कहा है कि राजू की चिट्ठी से पहले सत्यम के शेयरों की कीमतों के बारे में अब कुछ सोचने का सवाल ही नहीं है। यानी कि 7 जनवरी से पहले सत्यम के शेयर कितने में मिल रहे थे इसपर सेबी की नजर नहीं है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं की 7 जनवरी के बाद के 10 दिनों के एवरेज या दो हफ्ते के एवरेज पर सत्यम की 20 फीसदी हिस्सेदारी सेबी किसी को सौंप देगी। सेबी इसके लिए बीच का रास्ता अपनाने पर विचार कर रही है। अब तक ये नियम था कि कोई भी इंस्टीट्यूट या आदमी या कोई कंपनी किसी कंपनी का 15 फीसदी शेयर खरीदती है। तो उसे उस कंपनी के 20 फीसदी शेयर और खरीदना होगा। इसके लिए उस आदमी या इंस्टीट्यूट या कंपनी को 20 फीसदी शेयर खरीदने के लिए ओपेन ऑफर लाना होगा। और ओपेन ऑफर में कंपनी के शेयरों की कीमत होगी पिछले 6 महीनों के एवरेज कीमत के बराबर। लेकिन सत्यम के मामले में ऐसा नहीं होगा। क्योंकि सत्यम के प्रति शेयर की कीमत पिछले 6 महीनों के एवरेज निकालने से आता है 275 रुपए के करीब। लेकिन इस कीमत पर कोई इसे खरीदने को तैयार नहीं है। ऐसे में अब सेबी की तरफ लोगों की निगाहें टिकी हैं। लेकिन सेबी जिसकी पहली प्राथमिकता है निवेशकों के हितों का ध्यान रखना। ऐसे में सत्यम के लिए कतार में खड़ी कंपनियों को ये उम्मीद छोड़ देनी चाहिए कि उसे कौड़ियों के भाव सत्यम के शेयर मिल जाएंगे। भले ही सेबी ने ये कहा है कि 7 जनवरी से पहले की सत्यम की कीमत अब मायने नहीं रखती। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि फिलहाल बाजार में शेयर की जो कीमत(करीब 60 रु) है उससे नीचे सेबी इसकी कीमत तय करेगी। हां, सेबी कंपनियों को अलग अलग तरह का चारा देगी। और उसमें अगर कोई हिंदुजा, महिंद्रा, एल एंड टी या आई गेट फंसते हैं तो ठीक है। नहीं तो सरकार को अभी इतनी भी जल्दबादी नहीं है सत्यम को बेचने की।