रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान सीआरआर यानी कैश रिजर्व रेशियो में आधा फीसदी की कटौती का ऐलान किया है। आरबीआई के इस कदम से वित्तीय व्यवस्था में 32 हजार करोड़ रुपए आएंगे। नई दरें 28 जनवरी से लागू होंगी। हालांकि ईएमआई से फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
मार्च 2010 से लगातार सख्त मौद्रिक नीति अपनाने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इस साल की गई पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में कारोबारियों को कुछ खुश करने की कोशिश की है। आरबीआई ने सीआरआर यानी कैश रिजर्व रेशियो में आधा फीसदी की कटौती कर दी है। जिससे सीआरआर 6 फीसदी से घटकर 5.5 फीसदी रह गया है।
सीआरआर में कटौती से बैंकों को राहत मिली है। क्योंकि बैंकों को अपने कारोबार करने के लिए रिजर्व बैंक में अब कम पैसे रखने पड़ेंगे। इससे बैंकों के पास करीब 32 हजार करोड़ रुपए बच पाएंगे। जानकारों का मानना है कि सीआआर में कमी से वित्त व्यवस्था में तरलता तो आएगी लेकिन कर्ज दरों में फिलहाल कुछ राहत नहीं मिलेगी। यानी की ईएमआई के बोझ से फिलहाल आम लोगों को निजात मिलने की कम उम्मीद है। क्योंकि रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की है। साथ ही रिवर्स रेपो रेट को भी जस का तस बनाए रखा है।
रिजर्व बैंक की इस मौद्रिक नीति समीक्षा में महंगाई दर की एक बार फिर से बढ़ने का डर और दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल का खौफ साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में अब मार्च में होने वाली वार्षिक मौद्रिक नीति के ऐलान पर लोगों की नज़रें टिक गई हैं।
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