मंगलवार, 31 जुलाई 2012

ईेएमआई का भार नहीं होगा कम


ईएमआई के भार से फिलहाल लोगों को राहत नहीं मिलेगी। क्योंकि आरबीआई ने क्रेडिट पॉलिसी के तहत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। महंगाई की चिंता की वजह से आरबीआई ने ये कदम उठाया है।

लोगों पर ईएमआई की मार फिलहाल जारी रहेगी। उन्हें हर महीने कार और होम लोन के बदले महंगी ईएमआई भरते रहना होगा। क्योंकि आरबीआई ने अपनी तिमही मौद्रिक नीति समीक्षा में अहम दरों में कोई कटौती नहीं की है। ऐसे में रेपो रेट 8 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 7 फीसदी पर कायम रहेगा। वहीं सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये 4.75 फीसदी पर कायम है।

हालांकि आरबीआई ने एसएलआर 24 फीसदी से घटाकर 23 फीसदी कर दिया है जो 11 अगस्त से लागू होगा। एसएलआर यानी स्टैचटॉरी लिक्विडिटी रेशियो वो अमाउंट है जो कैश या गोल्ड या सरकारी बांड के तौर पर बैंकों को रखना होता है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2013 में महंगाई दर का अनुमान 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है। वित्त वर्ष 2013 में जीडीपी दर का अनुमान 7.3 फीसदी से घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया है। आरबीआई गवर्नर डी सुब्बाराव का कहना है कि महंगाई दर 7 फीसदी के ऊपर बने रहना काफी चिंताजनक है। आरबीआई की पहली प्राथमिकता महंगाई को काबू करने में होगी। और महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ब्याज की ऊंची दरें ज़रूरी हैं। यानी जबतक महंगाई कम नहीं होती..भारी ईएमआई से निजात मिलना संभव नहीं है।

सोमवार, 23 जुलाई 2012

17 हज़ार के नीचे पहुंचा सेंसेक्स





हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स पौने तीन सौ अंक लुढ़ककर 17 हजार के नीचे बंद हुआ। जबकि निफ्टी में 80 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। दुनियाभर के बाजारों के लुढ़कने और जबरदस्त बिकवाली के दबाव में भारतीय शेयर बाजार औंधे मुंह गिर पड़ा।

281 अंकों की गिरावट के साथ सेंसेक्स 17 हजार से नीचे यानी 16877 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी 87 अंक लुढ़ककर 5117 पर बंद हुआ। पिछले ढ़ाई महीनों में ये सबसे बड़ी गिरावट है।
एशियाई बाजारों की गिरावट की वजह से भारतीय शेयर बाजार खुलते ही लुढ़क गया। दोपहर बाद जब यूरोपीय बाजार में बिकवाली आई तो भारतीय शेयर बाजार में गिरावट और बढ़ने लगी। यानी कि विदेशी बाजारों ने आज घरेलू बाजारों को जोरदार झटका दिया। यूरोजोन के कर्ज को लेकर फिर से संकट सिर उठाने लगा है। इसका भारतीय बाजार पर दिखा।

यूपीए टू के सहयोगी दलों में मनमुटाव से आर्थिक सुधारों की गाड़ी में तेजी की उम्मीद अब टूटती दिख रही है। साथ ही रिटेल सेक्टर में एफडीआई का विरोध बढ़ने की वजह से रिटेल शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। मानेसर प्लांट को लेकर जारी अनिश्चितताओं के चलते मारुति सुजुकी का शेयर करीब 6 फीसदी लुढ़ककर 1,081 रुपए पर बंद हुआ। शेयर बाजार में पिटने वाले शेयरों में दिग्गज शेयरों के साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी शुमार हुए।

70 पैसे महंगा हुआ पेट्रोल



राष्ट्रपति चुनाव के बाद पेट्रोल की कीमतें बढ़ाकर सरकार ने लोगों को झटका दिया है। सोमवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर करीब 70 पैसे की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। बढ़ी हुई कीमतें आज मध्य रात्रि से लागू हो जाएगी। 

महंगाई से पहले से ही परेशान लोगों को सरकार ने एक और झटका दे दिया है। राष्ट्रपति चुनाव खत्म होते ही तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर करीब 70 पैसे की बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। देशभर में पेट्रोल की कीमतें सोमवार मध्यरात्री से बढ़ जाएंगी।

दिल्ली में प्रति लीटर पेट्रोल के भाव 67.78 रुपए से बढ़कर 68.48 रुपए हो गया है। जबकि कोलकाता में भाव 72.74 रुपए से बढ़कर 73.61 रुपए पर जा पहुंचा है। वहीं मुंबई में प्रति लीटर पेट्रोल के भाव 73.35 रुपए से बढ़कर 74.23 रुपए पर जा पहुंचा है। और चेन्नई में भाव 72.27 रुपए से बढ़कर 73.16 रुपए पर पहुंच गया है।

तेल मार्केटिंग कंपनियों ने कुछ समय पहले पेट्रोल के दामों में 7.50 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था। उसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बाद 2 जून को पेट्रोल के दाम करीब 2 रुपये कम किये गए थे। होलसेल महंगाई दर 7 फीसदी से ऊपर बनी हुई है वहीं रिटेल महंगाई दर 10 फीसदी के पार है। ऐसे में पेट्रोल की कीमतों में इजाफा करने से पहले से परेशान लोगों के घर का बजट और बिगड़ेगा।

गुरुवार, 19 जुलाई 2012

मारुति प्लांट में बाउंसर और कर्मचारियों में भिड़ंत

कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में आज उत्पादन ठप्प है। प्लांट में कल हुईं हिंसा के बाद मैनेजमेंट ने इसे बंद करने का फैसला किया है। फिलहाल पुलिस कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है।


मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में कर्मचारियों और मैनेजमेंट के बीच 18 मई को हुई हिंसा में जिस अधिकारी की मौत हुई थी। उनकी पहचान प्लांट के जेनरल मैनेजर एचआर अवनिश कुमार देव के रुप में कर ली गई है। इस मामले में फिलहाल पुलिस ने करीब 100 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। और उनसे पूछताछ की जा रही है। हिंसा के दौरान करीब 40 लोग घायल हुए हैं।
मानेसर प्लांट के कर्मचारी यूनियन ने कहा है कि एक कर्मचारी को मैनेजमेंट के एक अधिकारी ने दलित शब्दों के साथ गाली दी जिसका विरोध करने पर उस कर्मचारी को काम से हटा दिया गया। जब दूसरे कर्मचारियों ने इसका विरोध किया को मैनेजमेंट ने बाहर से बाउंसर बुलाकर विरोध को कुचलने की कोशिश की। जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। 


इस प्‍लांट में 33 हजार करोड़ रुपये की पूंजी लगी हुई है। यहां हर साल साढ़े पांच लाख कारें बनती हैं। इस हंगामे की वजह से मारुति के शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 8 फीसदी तक लुढ़क गए। मैनेजमेंट की मनमानी और कर्मचारी यूनियन नहीं बनने देने की वजह से पिछले एक साल में कई बार मारुति के इस मानेसर प्लांट में हड़ातालें हुई हैं। जिससे कंपनी को सैकड़ों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

बुधवार, 18 जुलाई 2012

LPG- अमीरों और गरीबों के लिए अलग-अलग भाव


सरकार रसोई गैस की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि ये बढ़ी कीमतें आर्थिक तौर पर मजबूत लोगों के लिए होगी। सरकार का मानना है कि ऐसा करने से सब्सिडी में हजारों करोड़ रुपए की कटौती की जा सकती है।

सरकार अपनी खर्चों पर लगाम लगाने के लिए सब्सिडी में कटौती करने की तैयारी में लगी है। इसके लिए सबसे पहले रसोई गैस पर से सब्सिडी कम करेगी। इस सब्सिडी कटौती के बाद गरीब लोगों को उसी कीमत पर रसोई गैस मिलेगी जिसपर फिलहाल मिल रही है। लेकिन आर्थिक तौर पर मजबूत परिवारों और लोगों को इसके लिए 400 रुपए से ज्यादा कीमत वसूली जाएगी। पेट्रोलियम राज्य मंत्री ने इसकी पुष्टि की है।

सरकार का मानना है कि ऐसा करने से हर साल केवल रसोई गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी में से 8000 से 10000 करोड़ रुपए की बचत की जा सकती है। इसके साथ ही डीजल पर दी जाने वाली सब्सिडी में कुछ कटौती की जाएगी जिससे डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 5 रुपए तक का इजाफा हो जाएगा। हालांकि ऐसा होने पर महंगाई की मार से लोग और बेहाल हो जाएंगे। क्योंकि खुदरा महंगाई दर फिलहाल 10 फीसदी से ऊपर और होलसेल महंगाई दर 7 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। लेकिन सरकार के पास दूसरा कोई चारा नहीं दिख रहा है। क्योंकि सरकार की कमाई कम होती जा रही है लेकिन खर्चे बढ़ते जा रहे हैं।

एचएसबीसी पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप




अमेरिका में एचएसबीसी पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा है। इस मामले में फंसे एचएसबीसी बैंक के चीफ डेविड बागले को इस्तीफा देना पड़ा। कई भारतीय अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं। 


एचएसबीसी ने अपने अमेरिकी बैंक का इस्तेमाल विश्व के कई देशों से ड्रग माफियाओं और टेरोरिज्म के लिए जमा किए गए ब्लैक मनी को अमेरिका में व्हाइट किया है। यानी दुनिया के कई दूसरी करेंसी में जमा ब्लैक मनी को अमेरिकी में अमेरिकी डॉलर में बदला है। ऐसा करते हुए उसने बैकिंग नियमों के साथ खिलवाड़ किया है।

इस  मामले में फंसे एचएसबीसी बैंक के चीफ डेविड बागले ने संसद सुनवाई के दौरान इस्तीफा देना पड़ा । अमेरिकी संसद की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है। अमेरिकी संसद के मुताबिक एचएसबीसी ने अमेरिका और भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में ड्रग माफिया और आंतकवादियों के लेन-देन में मदद की है। इस मामले में एचएसबीसी के कई भारतीय अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं।  

सोमवार, 16 जुलाई 2012

IMF ने विकास दर का अनुमान घटाया


इंटरनेशनल मोनिटरी फंड यानी आईएमएफ ने भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटा दिया है। आईएमएफ के अनुसार वित्त वर्ष 2012-2013 में भारत की विकास दर 7 फीसदी से नीचे रहेगी।

पहले टाईम मैगजीन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आलोचना फिर एफडीआई पर ओबामा के बयान और अब आईएमएफ की रिपोर्ट हर किसी में एक बात कॉमन है वो है भारत कि सिकुड़ती अर्थव्यवस्था। आईएमएफ ने अपने रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि भारत की आर्थिक विकास दर साल 2012-2013 में महज 6.5 फीसदी रह सकती है। जो कि वेहद निराशाजनक है।

क्योंकि इसी साल अप्रैल में आईएमएफ ने भारत की विकासद दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। जिसे अब करीब पौने एक फीसदी घटा दिया है। पिछले वित्त वर्ष में भी भारत की विकास दर 6.5 फीसदी थी। जबकि मार्च के तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर लुढ़ककर 5.3 फीसदी पर जा पहुंची है जो कि पिछले 9 सालों में सबसे कम है। ऐसे में अब यूपीए टू सरकार पर विकास की प्रक्रिया तेज़ करने का दबाव बढ़ गया है। क्योंकि सरकार ओबामा या टाईम को तभी झूठा साबित कर पाएगी जब विकास के आंकड़े सही होंगे।

ओबामा की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया


एफडीआई पर अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा की टिप्पणी पर देशभर में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। सरकार के साथ ही विपक्षी दलों और औद्योगिक संगठनों ने ओबामा की राय की सिरे से खारिज कर दिया है। और इस तरह के बयान को अंतरराष्ट्रीय लॉबी की साजिश करार दिया है।


केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने ओबामा के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारत सरकार आर्थिक सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले वर्षों में विदेशी निवेश आकर्षित करने के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल रहेगा। 

वहीं कंपनी मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि ओबामा की राय अधूरी जानकारी के आधार पर बनी है। और भारत के खिलाफ इस तरह की नकारात्मक सूचनाएं फैलाने में अंतर्राष्ट्रीय लाबी सक्रिय है। मोइली ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वोडाफोन जैसी कंपनियां इस तरह की भ्रामक जानकारियां फैला रही हैं।

प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने ओबामा के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अगर वह भारत के खुदरा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश चाहते हैं और भारत इसके पक्ष में नहीं है तो ये सिर्फ अमेरिका के चाहने से नहीं हो सकता।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पोलित ब्यूरो ने भी भारतीय बाजार को वालमार्ट और अन्य अमेरिकी कंपनियों के लिए खोले जाने संबंधी बयान पर कहा है कि ये बयान संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर दबाव बनाने जैसा है और मनमोहन सरकार को इस दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए। 

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि भारत में निवेश अब भी काफी कठिन है। कई सेक्टरों जैसे रिटेल में विदेशी निवेश पर या तो पाबंदी लगी है या अधिकतम सीमा तय कर दी गई है। जिसके जवाब में औद्योगिक संगठन फिक्की ने कहा है कि भारत में तेज आर्थिक विकास की प्रबल संभावना है। देश में अब भी ऐसी अनेक ढांचागत खूबियां हैं जिसकी बदौलत भारत निवेश को आकर्षित करता रहेगा और यहां विकास की तेज रफ्तार भी बनी रहेगी। सीआईआई ने कहा है कि भारत में आर्थिक मजबूती साफ दिख रही है। ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता के बावजूद भारत अब भी 6 फीसदी की दर से विकास कर रहा है। 

शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

बढ़ने वाला है मोबाइल बिल


मोबाइल पर बात करना हो सकता है महंगा। टेलीकॉम रेग्युलेटर ने इसकी तैयारी कर ली है। यानी की महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए आने वाला दिन और कठिन होने वाला है। क्योंकि खाने-पीने के सामानों की बढ़ी कीमतों के साथ मोबाइल का बिल भी बढ़ने वाला है।

टेलीकॉम रेग्युलेटर ट्राई ने कॉल रेट पर मंत्री समूह की बैठक में अपना प्रेजेंटेशन दिया है। जिसके तहत स्पेक्ट्रम की प्रस्तावित कीमत से देशभर के कई सर्किल में कॉल 6 पैसे से 25 पैसे प्रति मिनट तक महंगे हो जाएंगे। जबकि दिल्ली में कॉल दरों में पंद्रह पैसे प्रति मिनट की बढ़ोतरी होने वाली है। स्पेक्ट्रम पर बनी मंत्री समूह की बैठक में टेलीकॉम कंपनियों को स्पेक्ट्रम गिरवी रखने की इजाजत दे दी गई है। इसके तहत अगर कोई कंपनी कर्ज नहीं चुका पाएगी तो बैंक गिरवी स्पेक्ट्रम की नीलामी करके रिकवरी कर सकते हैं। 

हालांकि स्पेक्ट्रम की रिजर्व प्राइस, एक मुश्त फीस, स्पेक्ट्रम की फीस और सर्विस शुरू करने के नियम जैसे अहम मुद्दों पर फिलहाल फैसला नहीं हो सका है। इसके लिए टेलीकॉम स्पेक्ट्रम की निलामी पर बनी मंत्री समूह की अगली बैठक सोमवार को होगी लेकिन टूजी स्पेक्ट्रम की नीलामी में कुछ देरी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 122 लाइसेंस रद्द करने के बाद इस खाली स्पेक्ट्रम को 4 महीने में नीलाम कराने की समय सीमा दी थी। लेकन स्पेक्ट्रम की कीमतें तय नहीं हो पाने की वजह से 31 अगस्त तक समय सीमा में नीलामी प्रक्रिया पूरी होने की संभावना कम ही दिख रही है। से में दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बलने समय सीमा बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दे सकते हैं।

गुरुवार, 12 जुलाई 2012

वॉलमार्ट पर नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप


दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल चेन कंपनी वॉलमार्ट पर भारत में नियम तोड़ने का आरोप लगा है। एक जनहित याचिका के बाद दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारती वॉलमार्ट से इसका जवाब मांगा है।

दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट पर कैश एंड कैरी की आड़ में मल्टी ब्रांड कारोबार करने का संगीन आरोप लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में भारती वॉलमार्ट और भारती रिटेल के खिलाफ नोटिस जारी किया है। दरअसल जनहित याचिका में वॉलमार्ट पर एफडीआई कानूनों का उल्लंघन करते हुए अपने उत्पादों को ईजी डे के स्टोर के जरिए सीधे उपभोक्ताओं को बेचने का आरोप लगा है।

दुनियाभर में विवादों में रही वॉलमार्ट.. भारत में मल्टी रिटेल सेक्टर में पूरी तरह कदम रखने से पहले विवादों में फंस गई है। भारती वॉलमार्ट को कैश एंड कैरी स्टोर के जरिए होलसेल में व्यापार करने की मंजूरी मिली है। लेकिन आरोपों के अनुसार वॉलमार्ट थोक की आड़ में खुदरा कारोबार कर रहा है। और इस कारोबार में भारती रिटेल उसकी मदद कर रही है। क्योंकि कैश एंड कैरी और होलसेल कारोबार के लिए 2007 में वॉलमार्ट ने भारती एंटरप्राइज के साथ करार किया था। 

19 जुलाई के बाद 5 रुपए महंगा हो सकता है डीज़ल


डीजल की कीमतों में 5 रुपए का इजाफा हो सकता है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसकी तैयार कर ली है। राष्ट्रपति चुनाव के बाद इसका ऐलान हो सकता है। दरअसर भारत सरकार पर अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग कंपनी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स का भारी दबाव है। एस एंड पी ने कहा है कि अगर भारत की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी तो वो भारत को जंक श्रेणी में डाल देगा।

देश में आर्थिक रिफॉर्म प्रक्रिया तेज करने के लिए प्रधानमंत्री कई फैसले लेने की तैयारी कर चुके हैं। इसी के तहत डीजल की कीमतों में 5 रुपए प्रति लीटर का इजाफा संभव है। हालांकि इसके लिए सरकार राष्ट्रपति चुनाव का इंतजार कर रही है। सुत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पार्टी को इसकी जानकारी दे दी है। दरअसल आर्थिक रिफॉर्म को तेज करने लिए लिए प्रधानमंत्री पर विपक्षी दलों, औदोगिक संस्थाओं के साथ ही कई विदेशी संस्थाओं का दबाव है।

इनमें दुनिया की नामी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एसएंडपी यानी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स का दबाव सबसे अहम है। दरअसर एसएंडपी ने भारत सरकार को स्थिति सुधारने के लिए तीन महीने का समय दिया है। जिसमें से एक महीना बीत चुका है। यानी कि अगले 60 दिनों में भारत की आर्थिक स्थिति पटरी पर नहीं आई तो एसएंडपी भारत को जंक कटैगरी में डाल सकता है। जंक का मतलब होता है एसी आर्थिक परिस्थिति जहां निवेश करने में खतरा होता है। इस परिस्थित में विदेशी कंपनियां और संस्थाएं भारत के कन्नी काटने लगेंगी। इस जंक की मुहर से भारत को बचाने के लिए प्रधानमंत्री को कई कड़े फैसले लेने होंगे। जिसमें पेंशन रिफॉर्म, मल्टी रिटेल में एफडीआई की इजाजत के साथ डीजल की कीमतों में इजाफा करना भी शामिल है।

बुधवार, 11 जुलाई 2012

एमसीएक्स में होगी शेयरों की खरीदारी


भारत में अब केंद्रीय स्तर पर बीएसई और एनएसई के बाद एक और एक्सचेंज में इक्विटी की ट्रेडिंग हो पाएगी। सेबी ने एमसीएक्स-एसएक्स  को स्टॉक एक्सचेंज खोलने की मंजूरी दे दी है। यानी निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए एक और प्लेटफॉर्म मिल जाएगा।

अब निवेशकों को कमोडिटी और इक्विटी फ्यूचर्स की सुविधा एमसीएक्स के अंदर ही मिल जाएगी। पिछले कई सालों से एमसीएक्स स्टॉक ट्रेडिंग की इजाजत सेबी से लेना चाह रहा था। लेकिन सेबी एमसीएक्स-एसएक्स की अर्जी कई बार ठुकरा चुका था। जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंच गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में एमसीएक्स-एसएक्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सेबी से इस मामले पर 3 महीने के अंदर फैसला लेने का आदेश दिया था।

वहीं अब सेबी से मंजूरी मिलने के बाद एमसीएक्स-एसएक्स इक्विटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस के साथ ही डेट सेगमेंट में कारोबार की सुविधा दे पाएगा। हालांकि सेबी ने साफ किया है कि 3 साल के अंदर प्रोमोटरों को एमसीएक्स-एसएक्स में अपनी होल्डिंग घटाकर 5 फीसदी या उससे कम करनी होगी। एमसीएक्स में इक्वीटी की ट्रेडिंग करने के सेबी के फैसले से कमोडिटी और इक्विटी में निवेश करने वाले निवेशकों को राहत मिलेगी।

शनिवार, 7 जुलाई 2012

मंदी में जॉब्स साइट की बूम


सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर जल्द ही आप नौकरी खोज पाएंगे। लिंक्डइन से मिल रही लगातार टक्कर के बाद फेसबुक भी नौकरी की जानकारी अपने साइट पर देने की तैयारी में जुट गई है। क्योंकि दुनियाभर में छाई मंदी के चलते रोजगार के लिए हर दिन करोड़ों की संख्या में लोग ऑनलाइन जॉब साइट का सहारा ले रहे हैं।

फेसबुक करने का अब आपको एक बहाना मिल सकता है क्योंकि इस साइट पर नौकरियों की होने वाली है बरसात। दरअसल ऑनलाइन नौकरी की जानकारी देने का दुनियाभर में 4 अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार है। जिसको फेसबुक कैश करने में जुट गई है। दरअसर लिंक्डइन जैसी नेटवर्किंग साइट्स से फेसबुक को कड़ी टक्कर मिल रही है। इसलिए फेसबुक ने भी नौकरी की सुविधा अपने साइट पर देने की तैयार में लगी है। इसके लिए फेसबुक ने अमेरिका के तीन कंपनियों के साथ करार किया है।

अमेरिका के साथ ही दुनियाभर के कई देशों में नौकरियों के अवसर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। यानी मंदी के इस माहौल में अगर किसी चीज की सबसे ज्यादा मांग है..तो वो है नौकरी। और दुनिया की सबसे बड़ी नेटवर्क साइट इस अवसर को भुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। हो आप भी हो जाइए तैयार फेसबुक पर अपने दोस्तों के साथ चैट करने के साथ ही नौकरी हंट के लिए।

शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

अर्थव्यवस्था पर दो सिंह की म्याउं


भारत की अर्थव्यवस्था में सुस्ती आ चुकी है। और ये सुस्ती अगले 5 सालों तक बनी रहेगी। ऐसा कहना है योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया का। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी लोगों के सोने में निवेश नहीं करने की सलाह दी है।

आखिरकार सरकार ने भी अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के नाम पर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। पिछले साल तक 9 फीसदी की बात करने वाली योजना आयोग ने अब साफ कर दिया है कि 9 फीसदी विकास दर हासिल करना संभव नहीं है। और वो भी एक-दो नहीं बल्कि पूरे पांच सालों तक। मोंटेक के अनुसाल अगले पांच सालों तक 8 से 8.5 फीसदी विकास दर हासिल की जा सकती है। और इसके लिए भी काफी मेहनत की ज़रूरत है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की गंभीर स्थिति पर प्रधानमंत्री की चिंता भी साफ दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री मनमहोन सिंह ने जो कि अब वित्त मंत्रालय का काम भी देख रहे हैं..कहा है कि लोग सोने में निवेश ना करें। भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पीएम मनमोहन सिंह ने आम आदमी से ये अपील की है।दरअसल सरकार के साथ ही बैंकों के पास भी फिलहाल लिक्विडिटी यानी पैसे की कमी साफ झलक रही है। ऐसे में अगर लोगों के पैसे सोने के बदले बैंकों में जमा होंगे तो उसका उपयोग देश में विकास कार्यों पर हो पाएगा। इससे अर्थव्यवस्था में तेजी के साथ ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

असल में देश की अर्थव्यवस्था यूपीए टू सरकार से संभाले नहीं संभल रही है। ये सरकार घोटाले और दलाली की लीपापोती और सहयोगी दलों के मान मनौव्वल में ज्यादा समय, पैसे और एनर्जी बर्बाद कर रही है। अर्थव्यवस्था से जुड़े कोई ठोस फैसले नहीं कर पा रही है। और ये दौर आगे भी कम से कम 2014 के लोकसभा चुनाव तक जारी रहेगी। ऐसे में अगले प्रेस वार्ता में अगर मोंटेक ये कहते हैं कि 8.5 या 8 फीसदी भी विकास दर संभव नहीं है तो इसके लिए भी देशवासियों को तैयार रहना चाहिए।

गुरुवार, 5 जुलाई 2012

केएफए को 15 दिनों का अल्टीमेटम


कर्ज में गले तक डूब चुकी किंगफिशर एयरलाइंस की मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रही है। किंगफिशर एयरलाइंस को कर्ज देने वाले बैंकों और संस्थाओं ने ब्याज भुगतान और सर्विस को दुरुस्त करने के लिए कंपनी को 15 दिनों का समय दिया है।

किंगफिशर एयरलाइंस को कर्ज देने वाले बैंकों और संस्थाओं का धैर्य अब टूट चुका है। इसलिए बैंकों ने कर्ज वसूली और एयरलाइंस की सर्विस को फिर से दुरुस्त करने के लिए  कंपनी को 15 दिनों का अल्टीमेटल दिया है। शुरूआत से ही घाटे में चल रही किंगफिशर एयरलाइंस का मार्केट शेयर दूसरे नंबर से लुढ़ककर आखिरी नंबर पर जा पहुंचा है। इस साल मार्च महीने तक एसबीआई सहित कई बैंकों और संस्थाओं का किंगफिशर एयरलाइंस पर 1.4 अरब डॉलर का कर्ज बकाया हो चुका है। 

एसबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी की मुंबई और गोवा स्थिति संपत्ति बेचकर 2.5 करोड़ डॉलर की वसूली की जा सकती है। किंग ऑफ गुड टाइम्स के नाम से मशहूर विजय माल्या को एयरलाइंस बिजनेस में शुरूआत से ही नुकसान झेलाना पड़ा जो कि महीने दर महीने बढ़ता चला गया। और इसका परिणाम ये हुआ कि कंपनी को अपने पायलटों को सैलरी देने तक के लिए पैसे तक खत्म हो गए। कंपनी के कई विमान हवा में उड़ने की वजाय ज़मीन पर धूल फांकने लगी।

जिससे किंगफिशर के शेयर 44 रुपए से लुढ़ककर 10 रुपए की करीब जा पहुंचा। लेकिन अब कर्ज दाताओं के लगाम कसने से एक बार फिर से किंगफिशर एयरलाइंस में हलचल बढ़ी है। ऐसे में लगता है कि अगले 15 दिनों में किंगफिशर की दशा और दिशा तय हो जाएगी और कंपनी के रुख से साफ हो जाएगा कि कंपनी ज़मीन पर रहना चाहती है या हवा में फिर से अपनी धाक जमाना चाहती है। 

बुधवार, 4 जुलाई 2012

आरआईएल को फायदा दिलाना चाहती है पीएमओ!


मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज गैस की कीमतें बढ़ाने के लिए माहौल तैयार करने में जुटी है। प्रधानमंत्री कार्यालय भी मुकेश अंबानी के हित में खड़ी दिखाई दे रही है। अगर रिलायंस इंडस्ट्रीज को गैस की कीमतें बढ़ाने की इजाज़त मिलती है तो इसकी मार किसानों और आम लोगों पर देखने को मिलेगी। क्योंकि बिजली से लेकर कपड़े और उर्वरक के भाव इससे बढ़ जाएंगे।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी समय से पहले केजी बेसिन डी6 से निकलने वाली गैस की कीमतें बढ़ाने की जुगत में लगे हैं। साल 2007 में मंत्री समूहों की बैठक में ये फैसला लिया गया था कि गैस निकलने के बाद 5 साल तक रिलायंस इंडस्ट्रीज गैस की कीमतों में इजाफा नहीं करेगी।

साल 2009 से गैस का उत्पादन शुरू हुआ यानी कि साल 2014 तक कीमतें नहीं बढ़नी चाहिए। लेकिन मुकेश अंबानी समय से पहले गैस की कीमतें बढ़ाना चाह रहे हैं। फिलहाल रिलायंस 4.2 डॉलर की दर पर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट गैस बेचती है। जिसे बढ़ाकर 14.2 डॉलर करना चाह रही है। अगर ऐसा होता है तो इससे सरकार को महज 0.43 अरब डॉलर का फायदा होगा जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज को 8 अरब डॉलर का फायदा होगा। और इसकी सबसे ज्यादा मार पड़ेगी आम लोगों पर क्योंकि फर्टिलाइज, बिजली और टेक्सटाइल की कीमतें इससे बढ़ जाएंगी।

गैस की कीमतों में प्रति डॉलर की बढ़ोतरी से गैस से पैदा होने वाली बिजली प्रति यूनिट करीब 50 पैसे महंगी हो जाएगी। ऐसे में ये देखने वाली बात होगी कि यूपीए टू सरकार पहले से महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों के हितों का ख्याल रखती है या बड़े कॉरपोरेट घराने की।

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

2जी घोटाला के बाद 3जी लूट


टेलीकॉम मामलों के ट्रिब्यूनल टीडीसैट ने थ्री जी रोमिंग पर किसी एक पक्ष के हित में फैसला नहीं सुनाया है। दो सदस्यीय टीम में एक ने सरकार के पक्ष में और दूसरे ने टेलीकॉम ऑपरेटर के पक्ष में फैसला सुनाया है। ऐसे में थ्री जी रोमिंग का मामला एक बार फिर से उलझ गया है। ऐसे में टेलीकॉम ऑपरेटर्स थ्रीजी रोमिंग के जरिए सरकार को चूना लगाते रहेंगे।


  1. रोमिंग के जरिए हो रही है लूट
  2. टेलीकॉम ऑपरेटर्स सरकार और थ्री जी ग्राहकों को लगा रहे हैं चूना
  3. सवालों के घेरे में 3थ्री जी की नीलामी
  4. 22 सर्किल तक जानबूझकर नहीं पहुंची कंपनियां
  5. कुछ सर्किल की कीमत पर देशभर में कर रही हैं कमाई

टेलीकॉम मामलों को निपटाने वाले ट्रिब्यूनल टीडीसैट के फैसले से टेलीकॉम ऑपरेटर्स और सरकार को झटका लगा है। क्योंकि थ्रीजी रोमिंग मामले पर डीडीसैट के दो सदस्यों में से एक ने टेलीकॉम ऑपरेटर के पक्ष में फैसला सुनाया है। यानी कि थ्रीजी रोमिंग को जायज ठहराया है। वहीं दूसरे सदस्य ने थ्रीजी रोमिंग को अवैध बताया है।

2010 में थ्रीजी बैंडविथ की नीलामी हुई थी। जिसमें किसी टेलीकॉम ऑपरेटर को देश के कुल 22 सर्किल में थ्रीजी वैंडविथ नहीं मिल पाई। इस नीलामी से सरकार को 12 अरब डॉलर की कमाई हुई। एयरटेल ने 2.2 अरब डॉलर में सबसे ज्यादा 13 सर्किल में थ्रीजी लाइसेंस जीत लिया। वहीं वोडाफोन को 2.1 अरब डॉलर में 9 सर्किल में थ्रीजी लाइसेंस मिला। जबकि 1 अरब डॉलर खर्च कर आइडिया ने 12 सर्किल में थ्रीजी सेवा का लाइसेंस जीता।

पिछले साल थ्रीजी सर्विस शुरू होने के बाद टेलीकॉम मंत्रालय ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स को दूसरे ऑपरेटर्स के सर्किल में थ्रीजी सेवा देने को अवैध ठहराया था। इसके विरोध में कुछ टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने टीडीसैट का दरवाजा खटखटाया था। जानकारों का मानना है कि टीडीसैट के इस फैसले के बाद फिलहाल रोमिंग में रुकावट नहीं आएगी। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि 1 या 2 या 10 सर्किल की लाइसेंस जीतकर अगर कोई टेलीकॉम ऑपरेटर पूरे देश में सेवा दे रही है। तो इससे सरकार को अरबों रुपए का नुकसान हो रहा है। साथ ही थ्री जी ऑक्शन की पूरी प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान लग चुका है। क्योंकि अगर रोमिंग के जरिए कंपनी थ्रीजी सेवा दे सकती हैं तो बाइस टेलीकॉम ऑपरेटर्स एक-एक सर्किल का लाइसेंस लेकर देशभर में अपनी सेवाएं दे सकते हैं।