Thursday, August 23, 2012

सोने का भाव 31 हज़ार के पार

सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंची है। दस ग्राम सोने का भाव 31 हजार रुपए को पार कर गया है। शादी के सीजन की शुरूआत होने की वजह से सोने की मांग में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है।

शादियों का सीजन शुरू होते ही सोने की चमक बढ़ने लगी है। साथ ही दुनियाभर में सोने की मांग बढ़ी है जिसका असर भारतीय बाजार में भी देखा जा रहा है।

दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने का भाव 290 रुपए चढ़कर 31035 रुपए प्रति दस ग्राम के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है। सोने की कीमतों ने इससे पहले 19 जून को रिकॉर्ड बनाया था। तब प्रति 10 ग्राम सोने का भाव 30750 रुपए पर पहुंच गया था। वहीं गुरुवार को एमसीएक्स में भी सोने का भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वायदा कारोबार में दिसंबर महीने के लिए 10 ग्राम सोने का भाव में 352 रुपए की तेजी दर्ज की गई। जिससे सोने का भाव 31 हजार 29 रुपए जा पहुंचा।

दिनभर के कारोबार के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना 16 हफ्ते के उच्चतम स्तर पहुंच गया। दुनियाभर के दूसरी मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के कमज़ोर होने की वजह से सोने की मांग में तेजी आई है।

Tuesday, August 21, 2012

600 सुरक्षाकर्मियों के साथ 300 कर्मचारी काम पर लौटे


तगड़ी सुरक्षा के बीच मारुति के मानेसर प्लांट में कामकाज आज से शुरू हो गया। मैनेजमेंट ने पांच सौ कर्मचारियों बर्खास्तगी पर कामय है। साथ ही अस्थआई कर्मचारियों की को स्थाई नहीं बनाना चाह रही है। लेकिन मारुति के मानेसर और गुड़गांव प्लांट के कर्मचारी यूनियन इससे खुश नहीं हैं।

मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में एक महीने बाद कामकाज फिर से शुरू हो गया है। 18 जुलाई की हिंसा के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच मारुति सुजुकी का मानेसर प्लांट मंगलवार से खुल गया है। प्लांट में फिलहाल 300 कर्मचारियों ने उत्पादन शुरू किया है। इन कर्मचारियों और प्लांट को 500 पुलिसकर्मियों की तरफ से सुरक्षा दी जा रही है। 300 पुलिसकर्मियों को प्लांट के बाहर और 200 कर्मचारियों को प्लांट के अंदर तैनात किया गया है। इसके साथ ही कंपनी ने एक स्पेशन फोर्स तैयार किया है जिसमें 100 सुरक्षाकर्मी हैं।

पिछले महीने मानेसर प्लांट में हुई हिंसा के बाद कंपनी ने 500 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। मारुति के गुड़गांव प्लांट के कर्मचारी यूनियन की तरफ से भी कर्मचारियों को बहाल कराने का मैनेजमेंट पर दबाव है। हालांकि मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने कहा है कि गुड़गांव प्लांट के यूनियन की तरफ से काम ठप करने की कोई धमकी नहीं मिली है।

साथ ही मारुति सुजुकी के कर्मचारी यूनियन की मांग है कि अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई बनाई जाए। लेकिन कंपनी इसके लिए तैयार नहीं है। मैनेजमेंट ने दलील दी है कि अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किए जाने से मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। साथ ही अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने के फैसले का असर मारुति सुजुकी के अलावा मानेसर की दूसरी कंपनियों पर भी देखने को मिलेगा।   

बैंकों में दो दिनों की हड़ताल

देशभर में सरकारी बैंकों में अगले दो दिनों तक कामकाज ठप रहेगा। ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉय एसोसिएशन ने दो दिनों के हड़ताल का ऐलान किया है। सरकारी बैंक के लाखों कर्मचारी और अधिकारी इस हड़ताल में शामिल होंगे।

सरकारी बैंकों में बुधवार और गरुवार को कामकाज नहीं होगा। क्योंकि ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉय एसोसिएशन ने दो दिनों की हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल में 10 लाख से ज्यादा कर्मचारी और अधिकारी शामिल होंगे।

इन कर्मचारियों की कई मांगे हैं। जिसमें अहम है सरकारी क्षेत्र के बैंकों का विलय रोकना, स्थाई बैंकिंग नौकरियों का निजी बैंकों से आउटसोर्सिग रोकना, खाली पदों को भरना, मुआवजे के आधार पर पारिवार के सदस्य को नौकरी,  इसके अलावा घर, कार और दूसरे तरह के लोन के लिए दिशा-निर्देश तय करना।

दरअसल बुधवार को संसद में बैंकिंग कानून सुधार बिल पास होना है। बैंक यूनियन का कहना है कि इस बिल के जरिए सरकार सरकारी बैंकों का निजीकरण करना चाह रही है। इस हड़ताल में 27 सरकारी बैंक, 12 पुराने निजी बैंक और 8 विदेशी बैंक शरीक होंगे। इस हड़ताल की वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

Monday, August 20, 2012

यूपीए और एनडीए सरकार के दौरान महंगाई

यूपीए के कार्यकाल में महंगाई ने आम लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि यूपीए टू के इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा इस बढ़ती महंगाई से खुश नज़र आ रहे हैं। यूपीए सरकार और एनडीए सरकार के दौरान महंगाई की क्या स्थिति थी दिखाते हैं इस खास रिपोर्ट में।


लगातार बढ़ रही महंगाई ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं। आमलोगों की बजट में महंगाई सेंध लगा रही है। लोगों की कमाई पूरी तरह से महंगाई की भेंट चढ़ चुकी है। इस बढ़ती महंगाई को रोकने में यूपीए सरकार पूरी तरह विफल रही है।

एनडीए सरकार में चीनी 16 रुपए प्रति किलो मिलती थी जो कि अब 42 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है। वहीं आटा प्रति किलो 10 रुपए में मिलता था जो कि अब 22 रुपए प्रति किलो पर जा पहुंचा है। सरसों तेल 60 रुपए से बढ़कर 130 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है। जबकि चावल 19 रुपए से बढ़कर 40 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। अरहर दाल 60 रुपए से बढ़कर 80 रुपए प्रति किलो हो गई है। दूध का भाव 17 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 42 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है। प्याज 10 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 30 रुपए प्रति किलो पर जा पहुंचा है। वहीं आलू 5 रुपए से बढ़कर 20 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। वहीं डीजल 21 रुपए से बढ़कर 42 रुपए और पेट्रोल 33 रुपए से बढ़कर 69 रुपए प्रति लीटर पर जा पहुंचा है।


यूपीए सरकार के दौरान खूब बढ़ी महंगाई

              एनडीए सरकार       यूपीए सरकार
चीनी            16 रु/किलो              42 रु/किलो
आटा            10 रु/किलो              22 रु/किलो
सरसों तेल        60 रु/लीटर             130 रु/लीटर
चावल            19 रु/किलो             40 रु/किलो
अरहर दाल        60 रु/किलो             80 रु/किलो
दूध              17 रु/लीटर             42 रु/लीटर
प्याज            10 रु/किलो             30 रु/किलो   
आलू             5 रु/किलो              20 रु/किलो
डीज़ल           21 रु/लीटर              42 रु/लीटर
पेट्रोल            33 रु/लीटर             69 रु/लीटर

साल दर साल बढ़ रही महंगाई का जवाब यूपीए सरकार के पास नहीं है। इसलिए सरकार अजीबोगरीब बयान देकर इससे बचना चाह रही है। महंगाई के मुद्दे पर पहले तो सरकार कान में तेल डालकर सोई हुई थी। और जब जगी तो इसके लिए दुनियाभर की आर्थिक परिस्थित को जिम्मेदार बता दिया। उसके बाद यूपीए टू की सरकार कम मॉनसून का रोना रोने लगी। और आखिर में तो हद ही हो गया.. जब सरकार के एक केंद्रीय मंत्री ने ये कह दिया कि महंगाई से वो खुश हैं। 

देश की करोड़ों जनता जहां महंगाई की मार से परेशान है वहीं यूपीए सरकार इससे खुश है। इससे सरकार की मंशा जाहिर हो जाती है कि वो सत्ता के मद में पूरी तरह अंधी हो चुकी है और आम लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से मुहं मोड़ चुकी है।

Friday, August 17, 2012

विकास दर से ज्यादा रह सकती है महंगाई दर


इस वित्त वर्ष में देश की जीडीपी विकास दर से ज्यादा महंगाई बढ़ेगी। प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन जीडीपी विकास दर का अनुमान 8 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है।

देश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हैं। आखिरकार सरकार ने भी इस बात को मान लिया है। प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद ने वित्त वर्ष 2012- 2013 में जीडीपी विकास दर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। जबकि इससे पहले प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन ने इस वित्त वर्ष में 7.5 से 8 फीसदी विकास दर रहने का अनुमान लगाया था।

इसके साथ ही सरकार ने माना है कि इस साल  महंगाई दर से लोगों को निजात नहीं मिल पाएगी। क्योंकि इस वित्त वर्ष में महंगाई दर 6.5-7 फीसदी रह सकती है। राजकोषीय घाटा कम करने के लिए सी रंगराजन ने डीज़ल पर दी जाने वाली सब्सिडी को हटाने की वकालत की है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी माना है कि खराब मॉनसून और दुनियाभर की आर्थिक परिस्थितियों का असर भारत की आर्थिक विकास पर दिखाई देगा।

मूडीज, स्टैडर्ड एंड पुअर्स जैसे कई अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने पहले ही भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान घटा दिया है। जिसको मानने के लिए सरकार तैयार नहीं हो रही थी लेकिन अब सरकार को भी आखिरकार अनुमान घटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

Thursday, August 16, 2012

21 अगस्त से मारुति के मानेसर प्लांट में काम शुरू होगा


कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में एक बार फिर से काम शुरू होगा। मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर सी भार्गव ने कहा कि 21 अगस्त से काम शुरू हो जाएगा। कंपनी ने काम शुरू करने से पहले 500 नियमित कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है।

एक महीने की तालाबंदी के बाद 21 अगस्त से मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में प्रोडक्शन शुरू होगा। सुरक्षा के लिए हरियाणा सरकार कंपनी प्रबंधन को आश्वस्त किया है। प्लांट को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया जाएगा। करीब 500 से 600 पुलिसकर्मी प्लांट में तैनात किए जाएंगे। लेकिन ये देखने वाली बात होगी कि प्लांट में सुचारू रूप से काम हो पाएगा या नहीं। क्योंकि मैनेजमेंट ने 500 नियमित कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है।

मानेसर प्लांट से हर साल करीब 5.5 लाख गाड़ियां बनकर निकलती है। जिसमें स्विफ्ट, स्विफ्ट डिजायर, एसएक्स 4 और ए-स्टार शामिल हैं। लेकिन पिछले महीने प्लांट में मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच झगड़े में जीएम एचआर की मौत हो जाने के बाद प्लांट में तालाबंदी कर दी गई थी। मारुति के मानेसर प्लांट में कुल 3000 कर्मचारी है। जिसमें से 1600 नियमित कर्मचारी हैं। इसके अलावा 700 मैनेजर लेवल के अधिकारी हैं।

लेकिन जिस तरह से कर्मचारियों को तमाम मज़दूर संघ का समर्थन मिल रहा है। उसे देखने से ऐसा लग रहा है कि प्रोडक्शन की शुरूआत करने में मारुति सुजुकी को परेशानी हो सकती है।

Wednesday, August 15, 2012

पीएम जी मर्ज़ तो गिना दिए दवा कहां है?

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश को संबोधित करते हुए उन आर्थिक मुद्दों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया जो सरकार के लिए बड़ी चुनौतियां बन गए हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने इन चुनौतियों से निबटने के कोई ऊपाय नहीं बताए।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिहं लिए स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक चुनौतियों के एक एक कर गिना दिया। लेकिन इन चुनौतियों के लिए सरकार क्या कर रही है या क्या करेगी.. इसपर चुप्पी साधे रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक सर्वसम्मति न बन पाने की वजह से आर्थिक विकास की गति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। लेकिन सर्वसम्मति के लिए सरकार क्या कर रही है या करेगी..इसपर कुछ नहीं कहा।

पीएम ने चेतावनी दी कि अगर आर्थिक विकास की गति नहीं बढ़ी साथ ही निवेश को बढ़ावा नहीं दिया गया और सरकारी राजकोष का ठीक से प्रबंधन नहीं किया गया तो इसका राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी बुरा असर पड़ेगा। लेकिन ये नहीं बता पाए की आर्थिक विकास, निवेश और राजकोष के लिए सरकार क्या कर रही है या करेगी।

महंगाई के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि मॉनसून में हुई गड़बड़ी की वजह से महंगाई पर काबू पाना मुश्किल साबित हो रहा है। यानी मॉनसून को जिम्मेदार बताकर उन्होंने बढ़ती महंगाई से पूरी तरह अपना पल्ला झाड़ लिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सामने जो कठिन समस्याएं हैं उनका समाधान लोगों की सहभागिता से ही निकल सकता है। लेकिन महंगाई और भ्रष्टाचार की चक्की में पिस रही जनता से किसतरह की सहभागिता सरकार चाह रही है इसपर प्रधानमंत्री कुछ नहीं बोल पाए।

Saturday, August 11, 2012

रेटिंग एजेंसियों का भारत पर हमला


मूडीज ने क्यों घटाया जीडीपी विकास दर का अनुमान


भारत की गिरती अर्थव्यवस्था पर एक और मुहर लग चुका है। और इस बार ये मुहर लगाई है अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने। 

देश की गिरती अर्थव्यवस्था की ताबूत पर पर मूडीज़ ने एक और कील ठोक दी है। मूडीज ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी उम्मीद से अधिक तेजी से आ रही है और इसका असर अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों पर गहरा रहा है। सुस्त रफ्तार के बावजूद सरकार और रिजर्व बैंक ने कोई बड़े कदम नहीं उठाए हैं। संस्था ने कहा है कि उम्मीद से कमज़ोर मॉनसून अर्थव्यवस्था पर और दबाव डालेगा। मूडीज ने इस वित्त वर्ष के लिए भारतीय जीडीपी का विकास दर 5.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। 

मूडीज ने 2013 के लिए भी जीडीपी का अनुमान 6.2 प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत कर दिया है।


कई रेटिंग एजेंसियों ने घटाई भारत की रेटिंग


मूडीज से पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और संस्थाओं ने भारत की गिरती हुई अर्थव्यवस्था पर अपनी मुहर लागा चुकी है। जिसमें स्टैंडर्ड एंड पुअर्स और आईएमएफ प्रमुख हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था की लगातार खस्ता हालत पर कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने मुहर लगा दी है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने भी भारत की जीडीपी विकास दर के अनुमान को 1 फीसदी घटाकर 5.5 कर चुकी है। सिटी ग्रुप ने तो भारत की विकास दर को 5.4 फीसदी पर रखा है। जबकि सीएलएसए के अनुसान इस वित्त में भारतीय जीडीपी विकास दर 5.5 फीसदी रहेगा। वहीं आईएमएफ ने अपने रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि भारत की आर्थिक विकास दर साल 2012-2013 में महज 6.5 फीसदी रह सकती है। जो कि वेहद निराशाजनक है। जबकि स्डैंडर्ड एंड पुअर्स ने भारत की साख पर ही बट्टा लगाते हुए भारत की रेटिंग घटाकर बीबीबी माइनस कर दिया है।

स्टैंडर्ड एंड पुअर्स के साख घटाने के बाद भारती शेयर बाजार पर भी इसका असर देखने को मिला था। शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई थी। एस एंड पी की मानें तो भारत का रेटिंग फिलहाल जंक रेटिंग वाले देशों से ऊपर है। जंक रेटिंग वाले देशों में निवेश करना रिस्की होता है।

क्यों घटाई जा रही है भारत की रेटिंग?


आखिर एक के बाद एक अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी क्यों भारत के पीछे पड़ी है। इसकी एक बड़ी वजह है। अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कई संकेत भारत में साफ दिख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों की रेटिंग का बहुत ही बड़ा महत्व होता है। क्योंकि इनकी रेटिंग के आधार पर ही दुनियाभर की कंपनियां या संस्थाएं निवेश करती हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था में पिछले एक साल से ऐसा कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं हो पा रहा है जिसको देखते हुए रेटिंग में कुछ सुधार हो पाती।

होलसेल महंगाई दर 7 फीसदी के पार बनी हुई है। जबकि खाद्य महंगाई दर 10 फीसदी के पार है। महीने दर महीने कारों की बिक्री में गिरावट दर्ज की जा रही है। जुलाई महीने में कारों की बिक्री 9 महीनों के अपने निचले स्तर पर जा पहुंची। कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे खराब आ रहे हैं। इंफोसिस और अनुमान के कम मुनाफआ हुआ है जबकि आईओसी को रिकॉर्ड घाटा झेलना पड़ा है। औद्योगिक विकास दर पिछले साल के जून के 9.5 फीसदी के मुकाबले इस साल जून में 1.8 फीसदी पर जा पहुंचा है।

कुल मिलाकर भारत की आर्थिक परिस्थियां बिगड़ती जा रही हैं। और सरकार है कि फैसले लेने के बच रही है। आने वाला बजट भी चुनाओं को ध्यान में रखते हुए पेश किए जाएंगे। ऐसे में भारत की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए रिफॉर्म प्रक्रिया जल्द तेज किए जाने की ज़रूरत है।

Thursday, August 9, 2012

गर्त में औद्योगिक विकास दर

वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर अर्थव्यवस्था में जान फूंकने का दबाव बढ़ गया है। क्योंकि भारत के औद्योगिक विकास दर में जून महीने में भारी गिरावट दर्ज की गई है। और ये माइनस में जा पहुंची है। 

पिछले चार महीनों में तीसरी बार औद्योगिक विकास दर में गिरावट देखने को मिली है। जून महीने में औद्योगिक विकास दर माइनस में जा पहुंची है। इससे साफ हो जाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था कुंद पड़ चुकी है। औद्योगिक विकास दर को जीडीपी का आईना माना जाता है। ऐसे में वित्त मंत्री पी चिदंबरम के लिए अर्थव्यवस्था में तेजी लाना लोहे के चने चबाने जैसा है। 

जून में औद्योगिक विकास दर माइऩस 1.8 फीसदी पर जा पहुंची है। जो कि पिछले साल इसी महीन 9.5 फीसदी थी। वहीं इस साल मई में औद्योगिक विकास दर 2.5 फीसदी थी। सबसे ज्यादा गिरावट कैपिट गुड्स सेक्टर के ग्रोथ पर देखी जा रही है। पिछले साल के 38.7 फीसदी के मुकाबले इस साल के जून में कैपिटल गुड्स सेक्टर की विकास दर माइनस 27.9 फीसदी पर जा पहुंची है।

ब्याज दरों में कमी नहीं होने का असर औद्योगिक विकास दर पर देखी जा रही है। कंज्यूमर का विश्वास डगमगा गया है। मिडिल क्लास सैलरी का एक बड़ा हिस्सा ईएमआई पर खर्च करने को मज़बूर है। ऐसे में नए प्रोडक्ट बाजार में धूल फांक रहे हैं। और जब सामान बिक ही नहीं रहे ऐसे में फैक्ट्री में उत्पादन सुस्त पड़ना लाजिमी है।

Wednesday, August 8, 2012

दिल्ली से आगरा का सफर 2 घंटे से कम में


दिल्ली से आगरा का सफर अब दो घंटे से भी कम समय में पूर हो पाएगा। गुरूवार को यमुना एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन होने वाला है। हालांकि ये सफर थोड़ा महंगा होगा।

यूपी के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दिल्ली- आगरा एक्सप्रेस-वे का गुरुवार को उद्धाटन करेंगे। हालांकि इस एक्सप्रेस-वे से सफर करना महंगा होगा। क्योंकि इसे बनाने वाली कंपनी जेपी एसोसिएट्स प्रति किलोमीटर के हिसाब से टोल टैक्स वसूलेगी।

जीप और कार के लिए प्रति किलोमीटर 2.10 रुपए टोल टैक्स तय किया गया है। जबकि मिनी बस के लिए 3.25 रुपए प्रति किलोमीटर का टोल टैक्स तय किया गया है। वहीं बस और ट्रक के लिए प्रति किलोमीटर के हिसाब से 6.60 रुपए खर्च करने होंगे। भारी वाहनों के लिए प्रति किलोमीटर 10.10 रुपए खर्च करने होंगे। 

24 घंटे के अंदर वापस लौटने वाली वाहनों को टोल टैक्स में 20 फीसदी की छूट दी जाएगी। ये टैक्स इस साल के लिए है। कंपनी अगले 36 सालों तक टैक्स की वसूली करेगी। यमुना एक्सप्रेस की लंबाई  165.5 किलोमीटर है। यानी अब आप दो घंटे से भी कम समय में दिल्ली से आगरा की सफर पूरा कर पाएंगे। 

Monday, August 6, 2012

ईएमआई में राहत के संकेत


वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने और ग्रोथ  में तेजी लाने के लिए नए रोडमैप का ऐलान किया है। साथ ही चिदंबरम ने कहा है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए वो आरबीआई यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर काम करेंगे।

आसमान पर पहुंच चुकी ब्याज दरों से लोगों को राहत दिलाने के लिए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आरबीआई गवर्नर डी सुब्बाराव के साथ मुलाकात की। बढ़ते राजकोषीय घाटे और कम होती विकास दर पर चिंता व्यक्त करते हुए वित्त मंत्री ने माना है कि फिलहाल देश में ब्याज दरें काफी ज्यादा हैं। और इससे कंज्यूमर का विश्वास डगमगा रहा है। जिसे संभालने के लिए थोड़ा रिस्क लिया जा सकता है। यानी आने वाले दिनों में ब्याज दरों में कमी की जा सकती है।

वित्त मंत्री ने कहा जहां तक महंगाई का सवाल है.. इसपर मीडियम टर्म तक काबू कर लिया जाएगा। और इसके लिए वो आरबीआई के साथ मिलकर काम करेंगे। दरअसल महंगाई दर के बढ़ने की वजह से आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाती हैं ताकी महंगाई पर लगाम लगाम लगाई जा सके। लेकिन इसका साइड इफैक्ट ये होता है कि महंगी ईएमआई की वजह से खरीदार बाजार से दूर होने लगते हैं और कंपनियों का प्रोडक्शन कम होने लगते हैं। इसका असर देश की ग्रोथ और लोगों के रोजगार पर पड़ता है। इसे दूर करने के लिए वित्त मंत्री ने ब्याज दरों में कटौती के संकेत दिए हैं। साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट में सुधार और गार को लेकर जो उलझनें हैं उसे जल्द से जल्द सुलझा लिया जाएगा। 

Saturday, August 4, 2012

पंजाब में खुलेगा देश का तीसरा कसिनो


पंजाब सरकार ने पर्यटकों को लुभाने के लिए कसिनो खोलने का ऐलान किया है। इसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पंजाब भारत का तीसरा राज्य होगा जहां लोग कसिनो का मजा ले पाएंगे।

अमेरिका के लास बेगास के कसिनो में घूमने का सपना अब भारत में ही पूरा हो जाएगा। क्योंकि पंजाब में इस तरह के कसिनो जल्द ही खुलने वाले हैं। बदलते भारत के साथ कसिनो कल्चर भी तेजी से भारत में अपना पैर पसारता जा रहा है। गोवा और सिक्किम के बाद अब पंजाब में कसिनो खोलने की तैयारी जोरों पर है। और वो भी लास बेगास स्टाइल का कसिनो।

पंजाब में आने वाले पर्यटकों की तादाद लगातार कम होती जा रही है। जिसे बढ़ाने के लिए पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल ने लुधियाना के नज़दीक मट्टेवारा में कसिनो खोलने का ऐलान किया है। ये गांव सतलज नदी किनारे स्थित है। पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड यानी पीआईडीपी ने इसपर काम भी शुरू कर दिया है। पीआईडीपी के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसिंग लिमिटेड यानी आईएलएफएस इस परियोजना को देख रही है। इसके लिए इन दोनों संस्थाओं की पांच सदस्यीय टीम पिछले हफ्ते ही गोवा का दौरा कर चुकी है। और कसिनो में गेम्बलिंग की मशीनें इंस्टॉल करने की जानकारी ले चुकी है।

लुधियाना में बनने वाला कसिनो 24 घंटे खुला रहेगा। इस कसिनो में 30 से 40 गेम्बलिंग मशीनें होंगी। 500 से 1000 रुपए कसिनो की इंट्री फी होगी। दिल्ली वालों के लिए वीकेंड में समय बिताने का एक नया स्पॉट ये कसिनो बन सकता है। 

Wednesday, August 1, 2012

चिदंबरम की चुनौतियां


पी चिदंबरम ने तीसरी बार वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया है। लेकिन वित्त मंत्री के लिए आगे का साल काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। क्योंकि आर्थिक मोर्चे पर यूपीए टू की सरकार फिलहाल पूरी तरह विफल दिख रही है।

टू जी घोटाले में घिरे पी चिदंबरम को फिर से वित्त मंत्रालय मिल गया है। वित्त मंत्रालय चिदंबरम के लिए नया नहीं है। इससे पहले भी ये दो बार 1996 और 2004 में वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल चुके हैं। लेकिन इसबार की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाली है।

चिदंबरम के सामने सबसे पहली चुनौती होगी...सुस्त पड़ चुकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ाना। दूसरी चुनौती होगी...इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई बढ़ाना। तीसरी चुनौती होगी...पेंशन क्षेत्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लाना। चौथी चुनौती होगी..मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई लाना। पांचवीं चुनौती होगी...एफडीआई के जरिए एविएशन सेक्टर में विदेशी एयरलाइंस की हिस्सेदारी पर सहमति देना। छठी चुनौती होगी...डीज़ल, यूरिया और एलपीजी की कीमतों पर से सरकार की नियंत्रण खत्म करना। सातवीं चुनौती होगी..गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी को देशभर में लागू कराना। इसके अलावा सबसे अहम आठवीं चुनौती होगी..2014 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए लोक लुभावना ड्रीम बजट पेश करना। 

अगर चिदंबरम डीज़ल और एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को कम करने में कामयाब होते हैं ते राजकोषीय घाटा खुद ब खुद कम हो जाएगा। लेकिन इतनी चुनौतियों का सामना करना लोहे के चने चबाने जैसा होगा। क्योंकि लोकलुभावना बजट बनाने के दबाव के आगे शायद ही चिदंबरम कोई कठोर फैसले कर पाएंगे।