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बुधवार, 14 सितंबर 2011

रिलायंस लाइफ-निप्पोन लाइफ डील को हरी झंडी

अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस कैपिटल को बीमा नियामक विकास प्राधिकरण यानी इरडा की ओर से रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की 26 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की अनुमति मिल गई है। रिलायंस कैपिटल जापान की निप्पोन लाइफ के साथ शेयर का सौदा पहले ही कर चुकी है। रिजर्व बैंक की सहमति के बाद ये सौदा पक्का जाएगा। निप्पोन लाइफ ने रिलायंस लाइफ इश्योरेंस की 26 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 3,062 करोड़ रुपये दिए हैं। इस सौदे में रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस की कुल हैसियत 11,500 करोड़ रुपये की आंकी गई । निप्पोन 122 साल पुरानी बीमा कंपनी है। फॉर्च्युन100 सूची में शामिल ये कंपनी एशिया में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी और दुनिया की सातवीं नंबर की कंपनी है।

सोमवार, 12 सितंबर 2011

इरडा का बीमा कंपनियों के निवेश पर प्रस्ताव

बीमा कंपनियों के रेग्युलेटर बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीए ने निवेश से संबंधित एक प्रस्ताव सरकार को भेजा है। अगर का प्रस्ताव मान लिया गया तो कारोबारी घरानों की बीमा कंपनियां समूह की दूसरी इकाइयों में 5 फीसदी से ज्यादा निवेश नहीं कर पाएंगी। निवेश नियमों के दिशा निर्देश मसौदे में इरडा ने प्रस्ताव दिया है कि निजी बीमा कंपनियों की उसके प्रवर्तक समूह की इकाइयों में निवेश की सीमा मौजूदा 25 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर देनी चाहिए। यह कदम बीमा कंपनियों के जरिये समूह की कंपनियों में बढ़ते निवेश पर लगाम कसने के लिए उठाया गया है। अगर इन दिशा निर्देशों के इस मसौदे को मंजूरी मिल जाती है तो इसका असर टाटा,बिड़ला और रिलायंस जैसे दिग्गज कारोबारी समूहों की बीमा कंपनियों पर असर पड़ेगा। और ये कंपनियां अपने समूह की दूसरी कंपनियों में आम लोगों से लिए गए पैसे का ज्यादा निवेश नहीं कर पाएंगी।

मंगलवार, 19 जुलाई 2011

इंश्योरेंस कंपनियों पर सेबी सख्त इरडा नरम

हेल्थ इंश्योरेंसकंपनियां अब लोगों से प्रीमियम लेने के साथ ही शेयर बाजार से फंड का भी बंदोबस्त कर सकती हैं। इसके लिए इन कंपनियों को लगातार तीन साल तक प्रॉफिट में रहने के सेबी के सख्त नियम का पालन नहीं करना होगा। इस महीने के अंत तक इन कंपनियों के आईपीओ पर फाइनल गाइडलाइन तय हो जाएगा। जिसके बाद कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती हैं। औद्योगिक संगठन फिक्की के एक समारोह के दौरान इंश्योरेंस रेग्युलेटर आईआरडीए के चेयरमैन जे हरि नारायण ने कहा है कि इस महीने के आखरि तक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के आईपीओ पर फाइनल गाइडलाइन बनकर तैयार हो जाएगा। नए गाइडलाइंस में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां को कुछ छूट दी गई है। इन कंपनियों को लगातार तीन साल तक प्रॉफिट नहीं दिखाने पर भी शेयर बाजार में जगह दी जाएगी। हालांकि शेयर बाजार रेग्युलेटर सेबी कंपनियों के लिए कड़े नियम बना रखे हैं ताकि इन कंपनियों में पैसे लगाने वाले आम लोगों को नुकसान ना हो। शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली कंपनियों यानी आईपीओ लाने वाली कंपनियों को लगातार तीन साल तक प्रॉफिट में रहना होगा। तभी वो कंपनियां शेयर बाजार से फंड जुटा पाएंगी। लेकिन इंश्योरेंस रेग्युलेटर ने इसमें ढ़ील देने का मन बना चुकी। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को फायदा ही फायदा है। एक तरफ तो वो मनचाहे प्रीमियम से कमाई कर ही रही हैं। आने वाले दिनों में शेयर बाजार से भी कमाई करेंगी। लेकिन इन कंपनियों के फाइनेंशियल हेल्थ पर खरोच भी लगी तो दर्द पॉलिसी लेने वालों से लेकर इन कंपनियों में निवेश करने वाले लोगों को होगा।