मारुति के मानेसर प्लांट में हड़ताल का आज सातवां दिन है... लेकिन दूर दूर तक हड़ताल खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं....मारुति सुजूकी मैनेजमेंट ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है.... और कर्मचारियों की कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं है... इससे हड़ताल की लपटें कंपनी के एक प्लांट से दूसरे प्लांट में बढ़ती जा रही है..
कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजूकी का दांव उल्टा पड़ता जा रहा है... कंपनी मैनेजमेंट ने मानेसर प्लांट के कर्मचारियों के साथ जो सख्ती दिखाई उसका असर सुजूकी के दूसरे प्लांट्स पर भी देखने को मिल रहा है....कंपनी का मानना था कि हरियाणा सरकार की मदद से मानेसर के कर्मचारियों के साथ सख्ती दिखाकर उन्हें अपनी शर्तों पर काम पर ले आएंगे...लेकिन, ऐसा हो नहीं सका....मारुति सुजूकी की इंज़न बनाने वाली कंपनी सुजूकी पावरट्रेन इंडिया में भी हड़ताल की लौ पहुंच चुकी है... वहां भी काम ठप्प हो गया है... वजह साफ है वहां के कर्मचारियों में भी ये डर है कि आज मारुति सुजूकी के मानेसर प्लांट के कर्मचारियों के साथ अगर कंपनी मनमानी कर रही है तो कल उनकी भी बारी हो सकती है...
कंपनी की मनमानी के विरोध में एक-एक कर कई कंपनियों के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं... जिसमें सुजूकी कास्टिंग और सुजूकी मोटरसाइकिल भी शामिल है...हालात यही रहे तो आने वाले दिनों में कुछ और कंपनियों के कर्मचारी भी हड़ताल की राह चल पड़ेंगे...
मैनेजमेंट की ताकत, पैसे और पहुंच के दम पर हड़ताल को रौंदने का प्लान एक बार फेल हो चुका है... ऐसे में कंपनी को ज्यादा दिनों तक कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करना अब संभव नहीं है...
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गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011
मारुति कर्मचारियों के हितों की अनदेखी
मारुति सुजूकी कंपनी हरियाणा में मज़दूरों को दबाने की पूरी कोशिश में लगी है... और इस काम में हरियाणा सरकार भी खुलकर कंपनी का साथ दे रही है... सख्त कानून और बात-बात पर कर्मचारियों को कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा देने से कर्मचारी खफा हैं...इन्हें हड़ताल पर जाने को मजबूर किया जा रहा है...
मारुति के मानेसर प्लांट के कर्मचारियों पर कंपनी का जुल्म दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है....प्रबंधन के जुल्म से मुक्ति के लिए कंपनी के कर्मचारियों ने यूनियन बनाने की बात की तो उन्हें ऐसा करने से रोका गया...अपने हक के लिए कर्मचारियों ने जून में 13 दिन की हड़ताल की...हरियाणा सरकार ने कोरे वादे कर हड़ताल तुड़वा दी... इसके बाद कंपनी ने कर्मचारियों की क्षमता और योग्यता पर ही सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया... और इसकी आड़ में एक-एक करके कई कर्मचारियों को बर्खास्त और सस्पेंड कर दिया गया... गुस्साए कर्मचारियों ने फिर हड़ताल कर दी... 33 दिनों की इस हड़ताल के बाद हरियाणा सरकार और कंपनी मैनेजमेंट ने फिर सभी कर्मचारियों को काम पर रखने का भरोसा दिलाया। लेकिन काम शुरू होते ही इस वादे से मुकर गई।
हड़ताल खत्म होने पर जब कर्मचारी काम पर गए तो उन्हें उनके काम के बजाए दूसरा कामों में लगा दिया गया...ताकि उनसे ग़लती हो और उन्हें बर्खास्त करने का आधार बन जाए...यही नहीं, उन्हें मिलने वाली सुविधाएं भी कम कर दी गईं...उऩकी बस सर्विस रोक दी गई...गुड कंडक्ट बांड भरवाया गया... जिसके तहत बाथरूम जाने पर भी उसपर धीमी गति से काम करने का आरोप मढ़ दिया जाता है.... और इसी आधार पर उनकी सैलरी काट ली जाती है..
ऐसे दबाव से तंग कर्मचारी एक बार फिर हड़ताल पर चले गए...रात-दिन कर्मचारी प्लांट के बाहर तंबू लगाकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.... लेकिन मैनेजमेंट बाउंसरों और ठेकेदारों के जरिए उन्हें परेशान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है...
मारुति से दशकों से जुड़े कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं...राज्य सरकार भी कंपनी के साथ ही दिख रही है...कर्मचारियों को बिना शर्त काम पर वापस आने की बातें कही जा रही है...राज्य के लेबर मिनिस्टर ने भी कामगारों का साथ छोड़ दिया... और हड़ताल के लिए उन्हें दोषी भी ठहरा रहे हैं... मंत्री महोदय 33 दिन काम नहीं करने पर 66 दिनों के वेतन कटौती के कंपनी के नियम को सही बता रहे हैं... कर्मचारियों ने जहां 99 फीसदी मांगे मान ली है वहीं मैनेजमेंट महज एक फीसदी मांग मानने को तैयार नहीं दिख रहा है...
मारुति के मानेसर प्लांट के कर्मचारियों पर कंपनी का जुल्म दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है....प्रबंधन के जुल्म से मुक्ति के लिए कंपनी के कर्मचारियों ने यूनियन बनाने की बात की तो उन्हें ऐसा करने से रोका गया...अपने हक के लिए कर्मचारियों ने जून में 13 दिन की हड़ताल की...हरियाणा सरकार ने कोरे वादे कर हड़ताल तुड़वा दी... इसके बाद कंपनी ने कर्मचारियों की क्षमता और योग्यता पर ही सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया... और इसकी आड़ में एक-एक करके कई कर्मचारियों को बर्खास्त और सस्पेंड कर दिया गया... गुस्साए कर्मचारियों ने फिर हड़ताल कर दी... 33 दिनों की इस हड़ताल के बाद हरियाणा सरकार और कंपनी मैनेजमेंट ने फिर सभी कर्मचारियों को काम पर रखने का भरोसा दिलाया। लेकिन काम शुरू होते ही इस वादे से मुकर गई।
हड़ताल खत्म होने पर जब कर्मचारी काम पर गए तो उन्हें उनके काम के बजाए दूसरा कामों में लगा दिया गया...ताकि उनसे ग़लती हो और उन्हें बर्खास्त करने का आधार बन जाए...यही नहीं, उन्हें मिलने वाली सुविधाएं भी कम कर दी गईं...उऩकी बस सर्विस रोक दी गई...गुड कंडक्ट बांड भरवाया गया... जिसके तहत बाथरूम जाने पर भी उसपर धीमी गति से काम करने का आरोप मढ़ दिया जाता है.... और इसी आधार पर उनकी सैलरी काट ली जाती है..
ऐसे दबाव से तंग कर्मचारी एक बार फिर हड़ताल पर चले गए...रात-दिन कर्मचारी प्लांट के बाहर तंबू लगाकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.... लेकिन मैनेजमेंट बाउंसरों और ठेकेदारों के जरिए उन्हें परेशान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है...
मारुति से दशकों से जुड़े कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं...राज्य सरकार भी कंपनी के साथ ही दिख रही है...कर्मचारियों को बिना शर्त काम पर वापस आने की बातें कही जा रही है...राज्य के लेबर मिनिस्टर ने भी कामगारों का साथ छोड़ दिया... और हड़ताल के लिए उन्हें दोषी भी ठहरा रहे हैं... मंत्री महोदय 33 दिन काम नहीं करने पर 66 दिनों के वेतन कटौती के कंपनी के नियम को सही बता रहे हैं... कर्मचारियों ने जहां 99 फीसदी मांगे मान ली है वहीं मैनेजमेंट महज एक फीसदी मांग मानने को तैयार नहीं दिख रहा है...
मारुति कर सकती है गुजरात का रुख
मारुति सुजूकी का मैनेजमेंट कर्मचारियों के प्रति सख्त रुख अपनाए हुए है। कर्मचारियों की मांगों को अनसुना करते हुए मारुति सुजूकी अपनी मनमानी करने पर आमदा है। ऐसा लग रहा है जैसे प्लांट को शिफ्ट करने की तैयारी चल रही हो। मारुति के गुजरात प्लांट के बारे में इसी महीने फैसला लिया जा सकता है।
हरियाणा में अपने प्लांट में कर्मचारियों के माथे पर ठीकरा फोड़ते हुए मारुति सुजूकी अब गुजरात में अपना प्लांट लगाने की तैयारी में है... इसके लिए कंपनी तरह तरह के बहाने बना रही है... कंपनी की इस मंशा को देखते हुए हरियाणा सरकार का पूरा महकमा कंपनी के सामने नतमस्तक खड़ी है... पिछले पांच महीने में कंपनी के मानेसर प्लांट में कर्मचारियों की ये तीसरी हड़ताल है...जानबूझकर कर्मचारियों के लिए कड़े कानून बनाए जा रहे हैं....ताकि कर्मचारियों से बंधुआ मज़दूर की तरह काम लिया जाए...
गुजरात में प्लांट खोलने के सिलसिले में सुजूकी के चेयरमैन ओसामु सुजुकी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी कर चुके हैं... कंपनी इसी महीने गुजरात में अपना प्लांट लगाने के लिए जगह तय करेगी... जानकारों का मानना है कि मारुति अहमदाबाद के पास हंसलपुर को नए प्लांट के लिए चुन सकती है क्योंकि हंसलपुर मुंदड़ा, कांडला और पीपावाव पोर्ट से जुड़ा है... मारुति सुजूकी इंडिया के चेयरमैन आर सी भार्गव ने कहा कि गुजरात में जमीन के बारे में और जानकारी जुटाने के बाद कंपनी का बोर्ड नए प्लांट को लगाने का फैसला करेगा। कंपनी के चेयरमैन आर सी भार्गव का कहना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कंपनी की बातचीत बेहद सकारात्मक रही है। शायद यही वजह है कि कंपनी मैनेजमेंट कर्मचारियों की किसी भी बात को सुनने को तैयार नहीं है। और हरियाणा सरकार कंपनी के हां में हां मिला रही है।
हरियाणा में अपने प्लांट में कर्मचारियों के माथे पर ठीकरा फोड़ते हुए मारुति सुजूकी अब गुजरात में अपना प्लांट लगाने की तैयारी में है... इसके लिए कंपनी तरह तरह के बहाने बना रही है... कंपनी की इस मंशा को देखते हुए हरियाणा सरकार का पूरा महकमा कंपनी के सामने नतमस्तक खड़ी है... पिछले पांच महीने में कंपनी के मानेसर प्लांट में कर्मचारियों की ये तीसरी हड़ताल है...जानबूझकर कर्मचारियों के लिए कड़े कानून बनाए जा रहे हैं....ताकि कर्मचारियों से बंधुआ मज़दूर की तरह काम लिया जाए...
गुजरात में प्लांट खोलने के सिलसिले में सुजूकी के चेयरमैन ओसामु सुजुकी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी कर चुके हैं... कंपनी इसी महीने गुजरात में अपना प्लांट लगाने के लिए जगह तय करेगी... जानकारों का मानना है कि मारुति अहमदाबाद के पास हंसलपुर को नए प्लांट के लिए चुन सकती है क्योंकि हंसलपुर मुंदड़ा, कांडला और पीपावाव पोर्ट से जुड़ा है... मारुति सुजूकी इंडिया के चेयरमैन आर सी भार्गव ने कहा कि गुजरात में जमीन के बारे में और जानकारी जुटाने के बाद कंपनी का बोर्ड नए प्लांट को लगाने का फैसला करेगा। कंपनी के चेयरमैन आर सी भार्गव का कहना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कंपनी की बातचीत बेहद सकारात्मक रही है। शायद यही वजह है कि कंपनी मैनेजमेंट कर्मचारियों की किसी भी बात को सुनने को तैयार नहीं है। और हरियाणा सरकार कंपनी के हां में हां मिला रही है।
मंगलवार, 6 सितंबर 2011
नई स्विफ्ट की बुकिंग पर ब्रेक
कार बनाने वाली देश की सबसे कंपनी मारुति सुजुकी के एक मॉडल पर हड़ताल की सबसे ज्यादा मार पड़ रही है। ये माडल है मारुति स्विफ्ट का नया अवतार। जिसके प्रोडक्शन में भारी कमी आई है। ये गाड़ी मारुति के मानेसर प्लांट से निकलती है। लेकिन प्लांट में एक हफ्ते से ज्यादा समय से कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है।
अगर आप स्विफ्ट के नए अवतार की सवारी करना चाहते हैं तो आपको लंबा इतज़ार करना होगा। क्योंकि मारुति के डीलरों ने इसकी बुकिंग रोक दी है। मारुति स्विफ्ट के प्रोडक्शन में भारी कमी आने की वजह से डीलरों को ये कदम उठाना पड़ा है। स्विफ्ट, मारुति सुजुकी की सबसे ज्यादा बिकने वाली प्रीमियम कॉम्पैक्ट कार है। गुड़गांव से सटे मारुति के मानेसर प्लांट में एक हफ्ते से ज्यादा समय से कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है। जिसके चलते प्रोडक्शन में भारी कमी आई है। पिछले एक हफ्ते में मानेसर प्लांट से केवल 500 कारें ही निकल पाई हैं। जबकि आम दिनों में इस प्लांट से एक हफ्ते में 8 हजार से ज्यादा गाड़ियां तैयार होती हैं।
यही वजह है कि डीलरों को नई स्विफ्ट की बुकिंग रोकने पर मजबूर होना पड़ा है। इससे कंपनी को भारी नुकसान होने की आशंका है। क्योंकि लांच होने के पंद्रह दिनों के अंदर ही मारुति को 90 हजार नई स्विफ्ट के ऑर्डर मिल चुके हैं। नई स्विफ्ट को लेकर ग्राहक काफी उत्साहित हैं । उम्मीद से ज्यादा बुकिंग इसका सबूत है। लेकिन मानेसर प्लांट में कर्मचारियों की हड़ताल ने कंपनी के रंग में भंग डाल दिया है। इससे जहां नई बुकिंग बंद हो चुकी है। वहीं पुरानी बुकिंग की डिलीवरी भी अगले साल अप्रैल या उससे भी आगे जा सकती है।
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