सोमवार, 30 जनवरी 2012

ओबामा को दादा ने दिया करारा जवाब

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका में आउटसोर्सिंग बंद होने से अमेरिका और भारत दोनों को घाटा होगा। साथ ही वित्त मंत्री ने साफ कर दिया कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंध के बावजूद भारत ईरान से तेल खरीदता रहेगा।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आटसोर्सिंग और ईरान मुद्दे पर भारत की नीति को दो टूक सब्दों में अमेरिका के सामने रखा है। वित्त मंत्री ने कहा कि अगर अमेरिकी कंपनियों को आउटसोर्सिंग करने से रोका जाएगा तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। प्रणब मुखर्जी ने अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों को लेकर चिंता जताई है।

अमेरिका के दो दिनों के दौरे के आखिरी दिन मुखर्जी ने कहा कि सभी देश इस बात के लिए आज़ाद हैं कि वे अपनी जरूरतों के हिसाब से नीतियां बनाएं। लेकिन वो नीतियां संरक्षणवाद को बढ़ावा देने वाली नहीं होनी चाहिए। मुखर्जी ने इस बात पर भी जोर दिया कि विश्व व्यापार संगठन इस कोशिश में लगा हुआ है कि पूरी दुनिया में आसानी से एक जगह से दूसरी जगह वस्तुओं और सेवाओं को उपलब्ध कराया जाए।

वहीं दूसरी ओर तमाम दबावों के बावजूद ईरान के मुद्दे पर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने साफ किया है कि भारत ईरान से तेल खरीदता रहेगा। अमेरिका और यूरोपीय संघ की पाबंदियों के बावजूद ईरान से कच्चे तेल के व्यापार पर रोक नहीं लगाया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के लिए ईरान से होने वाले तेल आयात में कटौती का निर्णय लेना संभव नहीं है। भारत में तेजी से बढ़ रही ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए ईरान की अहम भागीदारी है। भारत करीब 80 फीसदी तेल आयात करता है। जिसमें से 12 फीसदी तेल ईरान से आयात होता है।

ऐसे में वित्त मंत्री का अमेरिका का ये दौरा काफी सकारात्म नज़र आ रहा है। क्योंकि प्रणब मुखर्जी ने ईरान और आउटसोर्सिंग पर भारतीय चिंताओं को खुलकर अमेरिका के सामने रख दिया है।

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

CRR में 0.5 फीसदी की कटौती

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान सीआरआर यानी कैश रिजर्व रेशियो में आधा फीसदी की कटौती का ऐलान किया है। आरबीआई के इस कदम से वित्तीय व्यवस्था में 32 हजार करोड़ रुपए आएंगे। नई दरें 28 जनवरी से लागू होंगी। हालांकि ईएमआई से फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

मार्च 2010 से लगातार सख्त मौद्रिक नीति अपनाने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इस साल की गई पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में कारोबारियों को कुछ खुश करने की कोशिश की है। आरबीआई ने सीआरआर यानी कैश रिजर्व रेशियो में आधा फीसदी की कटौती कर दी है। जिससे सीआरआर 6 फीसदी से घटकर 5.5 फीसदी रह गया है।

सीआरआर में कटौती से बैंकों को राहत मिली है। क्योंकि बैंकों को अपने कारोबार करने के लिए रिजर्व बैंक में अब कम पैसे रखने पड़ेंगे। इससे बैंकों के पास करीब 32 हजार करोड़ रुपए बच पाएंगे। जानकारों का मानना है कि सीआआर में कमी से वित्त व्यवस्था में तरलता तो आएगी लेकिन कर्ज दरों में फिलहाल कुछ राहत नहीं मिलेगी। यानी की ईएमआई के बोझ से फिलहाल आम लोगों को निजात मिलने की कम उम्मीद है। क्योंकि रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की है। साथ ही रिवर्स रेपो रेट को भी जस का तस बनाए रखा है।

रिजर्व बैंक की इस मौद्रिक नीति समीक्षा में महंगाई दर की एक बार फिर से बढ़ने का डर और दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल का खौफ साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में अब मार्च में होने वाली वार्षिक मौद्रिक नीति के ऐलान पर लोगों की नज़रें टिक गई हैं।

शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

वोडाफोन को 11 हज़ार करोड़ की राहत

सुप्रीम कोर्ट ने बांबे हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर वोडाफोन केस में आयकर विभाग को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन के पक्ष में फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विदेशी सब्सिडियरी कंपनी के जरिए हुए डील में टैक्स नहीं बनता। इसलिए और टैक्स देने के बजाए वोडाफोन ने अबतक जो टैक्स जमा किए हैं आयकर विभाग सूद सहित उसे वापिस करे।

वोडाफोन को भारत के आयकर विभाग के साथ कानूनी लड़ाई में बड़ी सफलता मिली है। टैक्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन के पक्ष में फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि वोडाफोन को टैक्स देने की ज़रुरत नहीं है। आयकर विभाग ने वोडाफोन से करीब 11000 करोड़ रुपये के टैक्स की मांग की थी। दरअसर वोडाफोन ने 2007 में हचिसन-एस्सार में हच का 67 फीसदी हिस्सा 11.2 अरब डॉलर में खरीदा था। वोडाफोन और हच के सौदे पर आयकर विभाग ने टैक्स की मांग की थी। वोडाफोन ने दलील दी थी कि विदेशी सब्सिडियरी कंपनी के जरिए सौदे होने की वजह से टैक्स नहीं बनता। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मान ली है। हालांकि बांबे हाई कोर्ट ने आयकर विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए.. आयकर विभाग को वोडाफोन के जमा 2500 करोड़ रुपए 4 फीसदी ब्याज के साथ वापस करने के आदेश दिए हैं। और इसके लिए 2 महीने का समय दिया है।

रिलायंस की मेगा बायबैक

रिलायंस इंडस्ट्रीज के बोर्ड ऑफ डयरेक्टर्स ने शेयरों के बायबैक को मज़ूरी दे दी है। कंपनी 870 रुपए प्रति शेयर के भाव पर 12 करोड़ शेयरों का बायबैक करेगी। फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर के भाव 792 रुपए हैं।

देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ अपने शेयरों का बायबैक करेगी। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने शुक्रवार को इसकी मंज़ूरी दे दी है। बायबैक के लिए प्रति शेयर का भाव 870 रुपए तय किया गया है। कंपनी इस भाव पर 12 करोड़ शेयरों का बायबैक करेगी। कंपनी ने तीसरी तिमाही के परिणाम के दौरान बायबैक का ऐलान किया है।इस बायबैक के लिए रिलायंस इडस्ट्रीज 10440 करोड़ रुपये खर्च करेगी। कंपनी ने शेयरों के बायबैक का जो भाव तय किया है वो बाजार भाव से 10 फीसदी अधिक है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के शेयर 792.65 रुपये पर बंद हुए।

पिछले करीब दो वर्षों से रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के शेयर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से इस कंपनी में निवेश करने वालों को निराशा हुई है। जिसे दूर करने के लिए शेयरों के बायबैक का फैसला किया गया है। कंपनी इससे पहले भी तीन बार शेयरों का बायबैक कर चुकी है।

मंगलवार, 17 जनवरी 2012

विदेशी एयरलाइंस कंपनियों के लिए FDI

घरेलू एविएशन सेक्टर में विदेशी एयरलाइंस कंपनियों की हिस्सेदारी का रास्ता साफ हो गया है। जल्द ही सरकार 49 फीसदी एफडीआई पर कैबिनेट नोट जारी करेगी। देश की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील सेक्टर को आनन-फानन में विदेशी एयरलाइंस कंपनियों के लिए आखिर क्यों खोला जा रहा है। इसपर सवाल उठना लाजिमी है।

घाटे और कर्ज से लहूलुहान हो चुके भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए उम्मीद की किरण दिखाई दी है। मंगलवार मंत्री समूहों की बैठक में घरेलू एयरलाइंस की हिस्सेदारी बेचने पर फैसला किया गया। यानी अब विदेशी एयरलाइंस कंपनियां घरेलू एयरलाइंस कंपनियों में 49 फीसदी तक हिस्सेदारी खरीद सकती हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि जल्द ही इस बारे में कैबिनेट नोट जारी किया जाएगा।
देश की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील सेक्टर में फिलहाल किसी विदेशी एयरलाइंस कंपनियों को हिस्सादारी खरीदने की इजाज़त नहीं है। हालांकि इस क्षेत्र में पहले से ही 49 फीसदी एफडीआई की इजाज़त है। यानी की विदेशी एयरलाइंस कंपनियों को छोड़कर बाकी कोई भी विदेशी कंपनी भारतीय एविएशन सेक्टर में हिस्सेदारी खरीद सकती है।

लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय का पोर्टफोलियो अजित सिंह के हवाले होते ही इसपर आनन-फानन में फैसला लिया जा रहा है। पहले जहां सरकार विदेशी एयरलाइंस कंपनियों को 26 फीसदी हिस्सेदारी देने के लिए भी आनाकानी कर रही थी। और 24 फीसदी हिस्सेदारी ऊपर नहीं बढ़ रही थी। वहीं अचानक 49 फीसीद हिस्सेदारी पर फैसला होना..दाल में कुछ काला होने का संदेह पैदा करता है।

सोमवार, 16 जनवरी 2012

2012 में बिज़नेस जगत

अर्थव्यवस्था और बिजनेस के क्षेत्र में साल 2012 में कई अहम चीजें सामने आएंगी, जो देश के करोड़ों लोगों को प्रभावित करेंगी। आइए, नजर डालते हैं अर्थजगत में होने वाली ऐसी ही 12 हलचलों पर...
1.जीडीपी में बढ़ोतरी
भारत की जीडीपी विकास दर में अगले वित्त वर्ष यानी साल 2012-2013 में भी तेजी देखी जाएगी। हालांकि इसकी रफ्तार ज्यादा तेज नहीं होगी, लेकिन दुनियाभर के अहम देशों के मुकाबले भारत दूसरे नंबर पर होगा। अगर पूरी दुनिया के जीडीपी विकास दर की बात करें, तो यह करीब 3.5 फीसदी रहेगी, जबकि भारत की जीडीपी विकास दर करीब 7.5 फीसदी होगी। भारत से ऊपर होगा चीन। जिसकी विकास दर करीब 8.5 फीसदी रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष के दौरान कई राज्यों में राजकोषीय स्थिति मजबूत होगी। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने यह बात कही है। फिच के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर महज 7 फीसदी तक रहेगी।
2.ब्याज दरों और ईएमआई में कमी
साल 2012 में ब्याज दरों में कमी आएगी, क्योंकि एक बार फिर से रिजर्व बैंक अहम दरों में कटौती की शुरुआत करेगा। महंगाई पर लगाम लगाने के लिए आरबीआई ने साल 2011 में कुल सात बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की थी, लेकिन दिसंबर में खाद्य महंगाई दर 1.81 फीसदी पर पहुंचने के बाद। कर्ज दरों में कटौती की संभावना बढ़ गई है। रेपो रेट में कटौती का मतलब होगा ईएमआई से राहत। सस्ते ब्याज दरों पर कर्ज मिलने से लोगों के घर और कार का सपना पूरा हो पाएगा। साथ ही जो लोग होम लोन, कार लोन ले चुके हैं, उनके ईएमआई का बोझ कम होगा और उनके घर का बजट एक बार फिर से पटरी पर आ जाएगा। इस समय रेपो रेट 8.5 फीसदी है। रेपो रेट वह दर है जिस पर देशभर के बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं। यानी की इसके कम होने से बैंकों को सस्ती दरों पर कर्ज मिल पाएगा। फिर बैंक सस्ती दरों पर आम लोगों को कर्ज दे पाएंगे।
3 मोबाइल रोमिंग चार्ज से मुक्ति
साल 2012 में मोबाइल ग्राहकों को रोमिंग चार्ज से मिलेगी मुक्ति। साथ ही शहर बदलने पर नया कनेक्शन लेने की नहीं होगी जरूरत। इससे देश के करोड़ों टेलिफोन ग्राहकों को फायदा होगा। नई टेलिकॉम पॉलिसी को नए साल में लागू किया जाएगा। इस नई पॉलिसी में आम लोगों के हितों का खयाल रखा जाएगा। साथ ही, देश के सबसे बड़े टेलिकॉम घोटाले के बाद पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। इस पॉलिसी के तहत किसी भी टेलिकॉम कंपनी के ग्राहक अपने मोबाइल नंबर का इस्तेमाल पूरे देश में कहीं भी कर पाएंगे। उसके लिए उन्हें कोई फीस नहीं देनी होगी। साथ ही, मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी को भी अब एक सर्किल से बढ़ाकर देशव्यापी कर दिया जाएगा। नई टेलिकॉम नीति में सुदूर क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र पर काफी ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही इंटरनेट को काफी बढ़ावा दिया जाएगा।
4.नौकरियों की होगी बरसात
ग्लोबल एचआर फर्म मैनपावर और नौकरी डॉट कॉम के अनुसार, नए साल में भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में नौकरी के बेहतरीन और लाखों अवसर पैदा होंगे। मैनपावर ने दुनिया के करीब 41 देशों का सर्वे किया है, जिसमें नौकरी देने के मामले में सबसे सकारात्मक और अव्वल भारत का स्थान रहा। माइनिंग और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में सबसे ज्यादा नौकरी के अवसर पैदा होंगे। नैसकॉम के मुताबिक, अगले तीन महीनों में आईटी और बीपीओ सेक्टर में 2.5 लाख रोजगार के अवसर बनेंगे। मैनपावर के अनुसार, बैंक, बड़े मल्टीनेशनल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां पहली तिमाही में बड़े पैमाने पर नौकरी देने का मन बना रही हैं। हेल्थकेयर सेक्टर में फोर्टिस, अपोलो, मैक्स और मनिपाल में नौकरी के अवसर पैदा होने वाले हैं। साथ ही, फार्मा सेक्टर में डॉक्टर रेड्डीज, सिप्ला, ग्लेनमार्क और सन फार्मा अगली तिमाही में कई लेवल पर रोजगार मुहैया कराएगी। फ्यूचर ग्रुप और आदित्या बिड़ला रिटेल में नए साल में नौकरियों के हजारों अवसर पैदा होंगे।
5.58 नई कारें होंगी लॉन्च
अगर आप कार खरीदने की सोच रहे हैं। तो आपके पास आॅप्शन की कमी नहीं होगी। नए साल में कारों की मचेगी धूम। एक साल में कुल 58 कारें होंगी लॉन्च। घरेलू और विदेशी कंपनियों की ये कारें हर सेग्मेंट की होंगी। इसमें से कुछ कारें साल की शुरु आत में लॉन्च होंगी। इन कारों में प्रमुख हैं रेनॉ प्लस, टाटा सफारी मर्लिन, वॉक्सवैगन न्यू टॉरेज, ह्युंदई न्यू सोनाटा, मारु ति सुजुकी न्यू स्विफ्ट डिजायर, टोयोटा न्यू फॉर्च्यूनर और शेवरले न्यू एमपीवी। वहीं साल के मध्य में ह्युंदई की न्यू इलेन्ट्रा और इऑन एलपीजी के अलावा, मित्सुबिशी न्यू लैंसर, पोर्शे न्यू 911, स्कोडा येति एटी, शेवरले शेल हच जैसी कई कारें लॉन्च होंगी, जबकि साल के आखिर में होंडा सीआरवी 2012, फोर्ड फिएस्टा एसयूवी, निशान एनवी200 और फिएट पांडा जैसी कारें लॉन्च होंगी। अनुसंधान फर्म डेलायट के अनुसार, मुद्रास्फीति तथा ब्याज दरों में कमी के चलते 2012 में देश में कारों की ब्रिकी एक बार फिर जोर पकड़ सकती है। डेलायट ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि विभिन्न कारणों के चलते पिछले कुछ महीनों में यात्री कारों की ब्रिकी घटी है। इन कारणों में खर्च योग्य आय में कमी, ब्याज दर व र्इंधन कीमतों में वृद्धि शामिल है। इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2011-12 में कारों की ब्रिकी में वृद्धि सिर्फ 2-3 प्रतिशत होगी, जबकि 2010 में यह 30 प्रतिशित रही थी। इसके अनुसार, पेट्रोल मूल्य नियंत्रणमुक्त किए जाने के बाद र्इंधन कीमतें 34 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। मुद्रास्फीति दबाव के चलते बैंकों ने उधारी दरों में लगातार वृद्धि की है और नए कार ऋण के लिए ब्याज दरें 13-14 प्रतिशत हैं।
6. 12वीं पंचवर्षीय योजना की होगी शुरुआत
अप्रैल 2012 से शुरू होगी 12वीं पंचवर्षीय योजना। इस पंचवर्षीय योजना में भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए बेहतर प्रशासन और योजनाओं के क्रि यान्वयन में पारदर्शिता पर जोर दिया गया है। वर्ष 2012 से 2017 के लिए तैयार पंचवर्षीय योजना के प्रारूप में 9 फीसदी औसत सालाना आर्थिक विकास दर, कृषि उत्पादन में 4 फीसदी विकास दर, महंगाई पर काबू पाने और गरीबी कम करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विकास गतिविधियों के क्रि यान्वयन में तेजी लाने की बात की गई है। महंगाई, भ्रष्टाचार और कालेधन को लेकर यूपीए सरकार सतर्क है, क्योंकि इन मुद्दों के लेकर सरकार की काफी छीछालेदर हुई है। इसीलिए इसपर लगाम लगाने के उद्देश्य से सरकार ने इस योजना में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया है।
7. 12 फीसदी तक बढ़ेगी सैलरी
अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बावजूद कर्मचारियों के लिए खुशखबरी लेकर आएगा नया साल। नए साल में कर्मचारियों की सैलरी में 12 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। ग्लोबल मैनेजमेंट कंसल्टेंसी हे ग्रुप के सर्वे में यह बात सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, सैलरी में यह बढ़ोतरी जूनियर लेवल, मिडिल लेवल और सीनियर मैनेजमेंट लेवल पर होगी। कंसल्टेंसी ग्रुप का मानना है कि दुनिया की दूसरी कंपनियों के मुकाबले भारतीय कंपनी इस ग्लोबल मंदी के दौर में ज्यादा टिकाऊ हैं। इस सर्वे में भारत की 300 कंपनियों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही 3 लाख 20 हजार से ज्यादा कर्मचारियों के सैलरी डेटा का विश्लेषण किया गया है। यानी की नया साल खुशियों की सौगात लेकर आएगा।
8. लॉन्च होंगे कई हाईटेक मोबाइल फोन
एचटीसी टाइटन मोबाइल अगले साल भारत में लॉन्च होगा। टाइटन की कीमत 30 से 33 हजार रु पये के बीच होगी। इस फोन में 8 मेगापिक्सेल का कैमरा होगा। साथ ही 1.5 गीगाहर्ट्ज के प्रोसेसर और 4.7 इंच का टचस्क्र ीन होगा। सैमसंग का ग्लैक्सी एस3 नए साल में लॉन्च होगी। 12 मेगापिक्सेल कैमरे से लैस इस फोन में 3डी स्क्र ीन होगा। एलजी का प्राडा के2 भी 2012 में लॉन्च होगा। डुअल कोर प्रोसेसर वाले इस फोन में 4.3 इंच की नोवा स्क्रीन होगी। वहीं नोकिया विंडोज ओएस प्लेटफॉर्म वाले 12 मोबाइल फोन नए साल में भारतीय बाजार में उतारेगा, लेकिन सबसे ज्यादा जिस फोन का इंतजार भारत और दुनियाभर में है उसका नाम है आईफोन 5। एप्पल अपने इस छठे जेनरेशन वाले फोन को नए साल में लॉन्च करने की तैयारी में है।
9. महंगाई से मिलेगी निजात
महंगाई की मार से नए साल में लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इसकी झलक 22 दिसंबर को खत्म हफ्ते में आई खाद्य महंगाई दर के आंकड़े से मिलनी शुरू हो चुकी है। इस हफ्ते खाद्य महंगाई दर के आंकड़े चार साल के अपने निचले स्तर यानी 1.81 फीसदी पर पहुंच गई। सीआईआई और फिक्की जैसे औद्योगिक संगठनों का मानना है कि नए साल में महंगाई से लोगों को बहुत हद तक निजात मिल जाएगी। होलसेल महंगाई दर में भी गिरावट की शुरुआत हो जाएगी, जिससे टीवी, फ्रीज, कार सहित खाने-पीने के सामानों की कीमतों में कमी आएगी। लोगों का बजट एक बार फिर से पटरी पर आ जाएगा। लोग नए साल में जमकर खरीदारी करेंगे, क्योंकि महंगाई कम होने पर उनके बटुए में पैसे ज्यादा बचेंगे।
10.रियल एस्टेट सेक्टर में लौटेगी रौनक
रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी के सिलसिले पर ब्रेक लगा दी। नए साल में ब्याज दरों में कटौती होगी, जिसका असर प्रॉपर्टी की मांग पर दिखेगा। फ्लैट्स और प्रॉपर्टी के खरीदारों की संख्या में इजाफा होगा। इससे रियल एस्टेट कंपनियों की माली हालत सुधरेगी। इसका असर यह होगा कि देश के छोटे-बड़े शहरों में ज्यादा से ज्यादा प्रोजेक्ट लॉन्च होंगे। यानी घर का सपना देखने वाले लोगों का सपना पूरा होगा, क्योंकि उनके पास अलग-अलग बजट के फ्लैट्स के आॅप्शन बढ़ जाएंगे। साथ ही, सरकार रियल एस्टेट रेग्युलेशन कानून बनाने पर विचार कर रही है। इस कानून के बन जाने से इस सेक्टर में पारदर्शिता आएगी। इस कानून में सस्ते घरों को प्राथमिकता दी गई है यानी कम बजट में भी लोगों के लिए घर का सपना साकार करना आसान हो जाएगा।
11. 4जी सर्विस की होगी शुरुआत
ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली कंपनी इंफोटेल ब्रॉडबैंड अप्रैल से जून के बीच 4जी सर्विस की भारत में शुरुआत करेगी। इस कंपनी में रिलायंस इंडस्ट्रीज की 95 फीसदी हिस्सेदारी है। कंपनी के पास देश के कुल 22 सर्किल के लाइसेंस हैं यानी कि देशभर में 4जी सेवा की शुरुआत हो पाएगी। इसका फायदा मोबाइल ग्राहकों को होगा। इंटरनेट की स्पीड भी बढ़ जाएगी। साथ ही, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग काफी आसान हो जाएगा। दूरसंचार के क्षेत्र में 4जी का मतलब है चौथी पीढ़ी की सेवाएं। 2जी में जहां मोबाइल पर सामान्य बातचीत ही संभव हो सकती है। वहीं 3जी में इंटरनेट की तेज रफ्तार और लाइव चैटिंग जैसी नई सेवाएं होती हैं। इसी तरह 4जी में स्मार्टफोन और अन्य मोबाइल उपकरणों पर मोबाइल ब्रॉडबैंड सेवाएं ज्यादा उन्नत होंगी। यह एक अल्ट्रा फास्ट टेक्नोलॉजी है। इसकी मदद से 100 मेगाबाइट्स प्रति सेकेंड की दर से डाटा ट्रांसफर किया जा सकता है।
12. रतन टाटा का स्थान लेंगे साइरस मिस्त्री
टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा सेवानिवृत होने के बाद उनका स्थान साइरस मिस्त्री लेंगे। साइरस पालोनजी मिस्त्री के सबसे छोटे बेटे हैं। पालोनजी मिस्त्री के पास टाटा संस के सबसे ज्यादा शेयर हैं। रतन टाटा ने कहा है कि साइरस मिस्त्री इस पद के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। मिस्त्री टाटा संस के बोर्ड में अगस्त 2006 से हैं। रतन टाटा ने कहा कि मिस्त्री के काम ने उन्हें बहुत प्रभावित किया है। सेलेक्शन कमेटी ने एकमत से साइरस मिस्त्री के नाम पर हामी भरी है। साइरस मिस्त्री के परिवार की टाटा संस में करीब 16.5 फीसदी की हिस्सेदारी है। रतन टाटा ने टाटा ग्रुप को एक अलग मुकाम तक पहुंचाया है। देश और दुनिया में टाटा के झंडे बुलंद किए हैं। लैंडरोवर, जगुआर, कोरस सहित एक के बाद एक कई विदेशी कंपनियों को खरीद लिया। दुनिया की सबसे सस्ती कार नैनो को हकीकत बनाकर दुनिया को रतन टाटा ने हतप्रभ कर दिया। जब साइरस मिस्त्री पूरी तरह से टाटा ग्रुप का कारोबार संभालेंगे उसके बाद उनकी असली काबिलियत का पता चलेगा।

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

2011 में बिज़नेस जगत

मारुति में हड़ताल
कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति के लिए साल 2011 काफी बुरा रहा। कंपनी की मनमानी की वजह से इस साल मारुति में कर्मचारियों ने चार बार हड़ताल किए। जिससे कंपनी को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। मारुति सुजुकी इंडिया इस साल हड़ताल के लिए सुर्खियों में रहा। कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी इस कंपनी में एक या दो बार नहीं बल्कि चार बार कर्मचारियों ने हड़ताल किए। कंपनी की मनमानी के विरोध में किए गए ये हड़ताल महीनों तक खिंची। 4 जून को हुई कर्माचारियों की हड़ताल 13 दिनों तक खिंची...जबकि 29 अगस्त हो हुई हड़ताल 33 दिनों तक चली..कंपनी के तानाशाही रवैए की वजह के 15 सितंबर को एक बार फिर से कर्मचारी हड़ताल पर चले गए..ये हड़ताल 2 दिनों तक चली..लेकिन आश्वासन के बावजूद कर्मचारियों की मांग नहीं माने जाने पर 1 अक्टूबर को फिर से हड़ताल हुई जो कि 14 दिनों तक चली। गुड़गांव के मानेसर प्लांट में हुए इन कुल चार हड़तालों की वजह से कंपनी को करीब 2000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। साथ ही कंपनी के मार्केट शेयर लुढ़क गए। जिसका फायदा देश की दूसरी कार बनाने वाली कंपनियों को हुआ।

स्टीव जॉब्स का निधन
स्टीव जॉब्स के निधन के रुप में इस साल उद्योग जगत को सबसे बड़ी क्षति हुई । लंबे समय से कैंसर से पीड़ित एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव का अक्टूबर में निधन हो गया। स्टीव ने कंम्प्यूटर के एक अलग लेवल तक पहुंचाया। स्टीव के आविष्कारों के दुनिया हमेशा उन्हें याद रखेगी।

कर्ज़ में डूबी एयर इंडिया
सरकारी एयरलाइंस कंपनी एयर इंडिया के लिए भी ये साल बुरा साबित हुआ। हजारों करोड़ रुपए के घाटे ने महाराजा की कमर तोड़ कर रख दी। एयर इंडिया के पास अपने कर्मचारियों को पायलटों की सैलरी देते तक के पैसे खत्म हो गए।

सोना बना 29 हज़ारी
सोने के साल 2011 काफी सुहाना रहा। इस साल सोने की चमक लागातार बढ़ती रही। और सोने की कीमत अपने रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंची। सोना कितना सोना है...इसका सही अंदाजा साल 2011 में ही हो पाया। क्योंकि प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत 29 हजार रुपए को पार कर गई। जनवरी में प्रति 10 ग्राम सोना मिल रहा था 19874 रुपए में...जो कि फरवरी में बढ़कर जा पहुंचा 20925 रुपए प्रति 10 ग्राम पर...मई की गर्मी में भी सोना नहीं पिघला और इसकी कीमत प्रति 10 पहुंच गई 22476 रुपए पर...जुलाई में सोने की प्रति 10 की कीमत थी 23130 रुपए..जोकि अगस्त में 27200 रुपए पर पहुंच गई और नवंबर में सोने की कीमत अपने रिकॉर्ड स्तर पर यानी 29111 पर बंद हुई। यूरोप के कई देशों के कर्ज संकट में फंसने और अमेरिका की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से सोने की कीमतों में पूरे साल तेजी बनी रही। क्योंकि दुनियाभर के शेयर बाजारों की स्थिति ज्यादा ठीक नहीं थी और ऐसे में निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने में जमकर खरीदारी की। इस वजह से सोने चमक लगातार बढ़ती रही।

महंगाई ने पूरे साल रुलाया
महंगाई दर ने इस साल आम लोगों को खूब रुलाया। साथ ही सरकार की नींद उड़ा दी। बढ़ती महंगाई के चलते देशभर में प्रदर्शन हुए। लेकिन साल के अंत तक महंगाई दर काबू में आ गई। इस साल जनवरी से महंगाई की मार शुरू हुई और नवंबर तक लोगों को परेशान करती रही। खाने-पीने के सामानों की लगातार बढ़ती कीमतों की गूंज संसद तक सुनई दी। देशभर में लोग लगातार बढ़ती महंगाई के विरोध में सड़कों पे उतर आए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और आरबीआई के गवर्नर डी सुब्बाराव को तिमाही दर तिमाही लोगो को आश्वासन देना पड़ा...कि महंगाई जल्द ही काबू में आ जाएगी। 16 जनवरी को खत्म हुए हफ्ते में महंगाई दर 8.96 फीसदी थी। जो कि 10 सितंबर को खत्म हफ्ते में 10.05 फीसदी के पार पहुंच गई। ऐसा लगा की महंगाई रोकने के लिए उठाए गए सरकार की सारी कदम विफल साबित हो रही हो। क्योंकि 3 नवंबर को खत्म हफ्ते में खाद्य महंगाई दर 12.21 फीसदी पर जा पहुंची।लेकिन कर्ज दरों में बढ़तोरी और सप्लाई व्यास्था तंदुरुस्त होने का असर दिसंबर में दिखा। 22 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते में खाद्य महंगाई दर घटकर 1.81 फीसदी पर लुढ़क गई। इस आंकड़े ने सरकार के साथ ही आम लोगों को राहत दी। क्योंकि महंगाई की वजह से ईएमआई में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। साथ ही महंगे खाने-पीने के सामानों ने आम लोगों का पूरे साल बज़ट बिगाड़ कर रखा। लेकिन आने वाले साल में इससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

दिवालिएपन की कगार पर किंगफिशर
किंग ऑफ गुड टाईम्स के नाम से मशहूर विजमाल्या के लिए साल 2011 ठीक नहीं रहा। क्योंकि इनकी कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस कर्ज के बोझ तले दबकर दिवालिएपन की कगार पर पहुंच गई। पैसे की कमी की वजह से किंगफिशर एयरलाइंस ने सैकड़ों फ्लाइट कैंसिल किए।

58 से 70 रुपए प्रति लीटर पहुंचा पेट्रोल
साल 2011 में पेट्रोल की कीमतों ने लोगों को खूब रुलाया। कच्चे तेल के महंगे होने की वजह से पेट्रोल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती रही। नवंबर तक पेट्रोल करीब 70 रुपए प्रति लीटर पर जा पहुंचा।
साल 2011 की शुरुआत होते ही पेट्रोल की कीमतों में आग लगनी शुरू हो गई। पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला महीने दर महीने बढ़ता ही गया। जनवरी 2011 को तेल मार्केटिंग कंपनियों ने प्रति लीटर पेट्रोल की कीमतों में 2 रुपए 52 पैसे की बढ़ोतरी कर दी। जिससे प्रति लीटर पेट्रोल पहुंच गया 58 रुपए 37 पैसे पर। इसके बाद सबसे बड़ी प्रति लीटर 5 रुपए की बढोतरी देखी गई मई महीने में। जिसने लोगों की कमर तोड़कर रख दी। मई में प्रति लीटर पेट्रोल पहुंच गया 63 रुपए 37 पैसे पर। सितंबर में एकबार फिर से पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया गया। 3 रुपए 14 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत बढ़कर हो गई 66 रुपए 84 पैसे। पेट्रोल की कीमतें इसके बाद भी स्थिर नहीं हुईं। नवंबर में एक बार फिर से पेट्रोल में 1 रुपए 82 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। जिसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर अपने उच्चतम स्तर यानी 68 रुपए 64 पैसे प्रति लीटर पर पहुंच गई। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की वजह से लाखों लोगों के कार की सवारी का सपना इस साल अधूरा रह गया। इसका असर कारों की बिक्री पर देखने को मिला। कारों की बिक्री में लगातार गिरावट होने लगी। साथ ही लोगों को चार पहिया के बदले दो पहिए से ही संतोष करना पड़ा। तेल मार्केटिंग कंपनियां अपनी नुकसान की दुहाई दे देकर कीमतें बढ़ाती रहीं और लोग इस बढ़ती पेट्रोल की कीमतों की मार को सहने के लिए मज़बूर होना पड़ा।

ईएमआई ने लोगों को खूब रुलाया
ईएमआई के फंदे ने इस साल लोगों को खूब परेशान किया। आरबीआई के सख्त तेबर ने कार और होम लोन लेने वालों के पसीने छुड़ा दिए। रिजर्व बैंक ने इस साल कुल सात बार कर्ज दरों में इजाफा किया।
घर और कार का सपना साकार करना इस साल लोगों के लिए महंगा साबित हुआ। क्योंकि ईएमआई महीने दर महीने सुरसा की भांति बढ़ती रही। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। रिजर्ब बैंक ने इस साल कुल 7 बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की। जनवरी में रेपो रेट 6.5 फीसदी थी...जो कि मार्च में बढ़कर 6.7 फीसदी हो गई...मई में आरबीआई ने एक बार फिर से रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी..जिससे रेपो रेट बढ़कर 7.25 फीसदी पर जा पहुंची...जून में रेपो रेट बढ़कर 7.5 फीसदी पर पहुंच गई...जुलाई में आरबीआई ने फिर से 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी जिससे रेपो रेट 8 फीसदी पर पहुंच गई...सितंबर में रेपो रेट 8.25 फीसदी और अक्टूबर में अपने उच्चतम स्तर पर यानी 8.5 फीसदी पर जा पहुंची। हालांकि कर्ज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला साल के आखिर में जाकर थम गया। आरबीआई ने दिसंबर में हुए मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान कर्ज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की। दरअसल लगातार बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए आरबीआई ने ये कदम उठाए थे। लेकिन अब महंगाई दर में कुछ कमी आई है। खाद्य महंगाई दर चार सालों के अपने निचले स्तर पर जा पहुंची है। ऐसे में एक बार फिर से कर्ज सस्ता होने के आसार बनने लगे हैं।

ग्राहक ढ़ूंढती रही रियल एस्टेट कंपनियां
रियल एस्टेट कंपनियों को साल 2011 में पसीने छूट गए। रियल एस्टेट कंपनियां पूरे साल ग्राहक ढ़ूढती नज़र आई। साथ ही इन कंपनियों ने जो कर्ज ले रखा था उसका व्याज सातवें आसमान पर पहुंच गया।

नई पहचान मिलने के बावजूद रुपए में रिकॉर्ड कमज़ोरी
साल 2011 रुपए के प्रतीक चिन्ह के रुप में भा याद किया जाएगा। क्योंकि इसी साल रुपया अपनी नई प्रतीक चिन्ह के साथ बाजार में लांच हुआ। जो कि भारत की आर्थिक शक्ति को रेखांकित करता है। वहीं दूसरी ओर डॉलर की बढ़ती मांग की वजह इस साल रुपए अपने रिकॉर्ड स्तर पर लुढ़क गया।
दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाले देशों में भारत दूसरे पायदान पर है। और भारत को एक आर्थिक शक्ति के रूप में पहचान दिलाने में रुपए की एक अहम भूमिका है। ऐसे में रुपए को अपना प्रतीक चिन्ह मिल जाना भारत के लिए गर्व की बात है। इसी साल अगस्त में रिजर्व बैंक ने रुपए के प्रतीक चिन्ह के साथ एक, दो, पांच और दस रुपए के सिक्के बाजार में लांच किए। फिलहाल दुनियाभर अमेरिका, ब्रिटेन सहित कुछ गिने-चुने देश ही हैं जिनकी करेंसी का अपना प्रतीक चिन्ह है। और इस लीग में अब भारत भी शामिल हो चुका है। जल्द ही रिजर्व बैंक रुपए के प्रतीक चिन्ह वाले कागज़ के 10 रुपए और 1000 रुपए के नोट बाजार में लांच करेगा। इसके साथ ही सरकार ने आईटी कंपनियों के संगठन नैसकॉम से कहा गया है कि वे सॉफ्टवेयर विकसित करने वाली कंपनियों के साथ मिलकर कर रुपए की प्रतीक चिन्ह को लोकप्रिय बनाए। जब तक की-बोर्ड पर इसे चिन्हित नहीं किया जाता है... तब तक कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर में ये व्यवस्था करें कि इसे कंप्यूटर पर लिखा जा सके। अभी यूरो के प्रतीक चिन्ह के साथ भी ऐसा ही होता है। वहीं दूसरी ओर रुपए को इस साल एतिहासिक गिरावट का सामना करना पड़ा। दुनियाभर के देशों में डॉलर की बढ़ती मांग की वजह से रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा पहुंचा...और एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 54 रुपए के करीब जा पहुंची...ऐसे में आरबीआई को रुपए के बाचाव में उतरना पड़ा..जिससे साल के आखिर में रुपए में थोड़ी मज़बूती लौटी।

रतन टाटा को मिला उत्तराधिकारी
साल 2011 टाटा ग्रुप के लिए खास रहा। क्योंकि ग्रुप को रतन टाटा का उत्तराधिकारी मिल गया। शपूरजी पालोनजी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर साइरस मिस्त्री अगले साल से टाटा के एम्पायर को संभालेंगे।