अगर आपर घर या कार खरीदने की सोच रहे हैं। तो अब आपको ज्यादा ब्याज देने पड़ेगे। क्योंकि आरबीआई यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान रेपो रेट में फिर से 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है।
रिजर्व बैंक एक बार फिर से कर्ज महंगे कर दिए हैं। यानी कि जीने के लिए अगर आप कर्ज का सहारा लेने की सोच रहे हैं। तो भूल जाइए। क्योंकि अब कर्ज और महंगे हो जाएंगे। आपकी ईएमआई और बढ़ जाएगी।
महंगाई को कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान रेपो रेट को सवा 8 फीसदी से बढ़ाकर साढ़े 8 फीसदी कर दिया है...जबकि रिवर्स रेपो सवा 7 फीसदी से बढ़ाकर साढ़े 7 फीसदी कर दिया है...पिछले 19 महीनों में आरबीआई ने तरहवीं बार अहम दरों में इज़ाफा किया है। रेपो रेट के बढ़ने से होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन सहित हर तरह के कर्ज महंगे हो जाएंगे।
हालांकि रिजर्व बैंक ने महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ये कमद उठाए हैं। लेकिन महंगाई है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। फिलहाला खाद्य महंगाई दर साढ़े दस फीसदी से ज्यादा है। जबकि होलसेल महंगाई दर दस फीसदी के करीब है...बार बार रेपो रेट बढ़ाने के परिणाम अभीतक ठाक की तीन पात ही रहे हैं। या कहें इसका उल्टा असर ज्यादा देखने को मिला है। क्योंकि आरबीआई के इस कदम से महंगाई तो कम नहीं हो सकी लेकिन देश की विकास में ज़रूर कमी होने लगी।
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मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011
गुरुवार, 29 सितंबर 2011
खाद्य महंगाई दर 9 के पार
खाने-पीने के सामान महंगे होते जा रहे हैं। एक बार फिर से खाद्य महंगाई दर 9 फीसदी को पार कर गई है। 17 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में महंगाई दर बढ़कर 9.13 फीसदी पर पहुंच चुकी है। जो इससे पहले हफ्ते में 8.84 फीसदी थी।
खाद्य महंगाई दर बढ़ने के पीछे ईंधन का महंगा होना एक बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके साथ ही दाल,आलू और पॉल्ट्री उत्पादों की बढ़ती कीमतों का दबाव खाद्य महंगाई दर पर पड़ी है।. खाने-पीने के सामानों की बेकाबू होती कीमतों ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। सरकार की लगातार कोशिशों के बावजूद महंगाई पर लगाम नहीं लागाई जा सकी है। ऐसे में कर्ज और महंगे होने की आशंका बढ़ गई है।
ऐसा माना जा रहा है रिजर्व बैंक अपने अगले क्रेडिट पॉलिसी की समीक्षा में एक बार फिर से अहम दरों में करीब 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री के आर्थिक मामलों की सलाहकार समिति के अध्यक्ष सी रंगराजन ने बढ़ती खाद्य महंगाई दर पर चिंता जताई है।
खाद्य महंगाई दर बढ़ने के पीछे ईंधन का महंगा होना एक बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके साथ ही दाल,आलू और पॉल्ट्री उत्पादों की बढ़ती कीमतों का दबाव खाद्य महंगाई दर पर पड़ी है।. खाने-पीने के सामानों की बेकाबू होती कीमतों ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। सरकार की लगातार कोशिशों के बावजूद महंगाई पर लगाम नहीं लागाई जा सकी है। ऐसे में कर्ज और महंगे होने की आशंका बढ़ गई है।
ऐसा माना जा रहा है रिजर्व बैंक अपने अगले क्रेडिट पॉलिसी की समीक्षा में एक बार फिर से अहम दरों में करीब 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री के आर्थिक मामलों की सलाहकार समिति के अध्यक्ष सी रंगराजन ने बढ़ती खाद्य महंगाई दर पर चिंता जताई है।
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शुक्रवार, 16 सितंबर 2011
रेपो और रिवर्स रेपो रेट 0.25% बढ़ा
आम लोगों का हाल बेहाल हो चुका है। पहले महंगाई ने मारा, फिर पेट्रोल की कीमतों ने और अब महंगे कर्ज की आ गई बारी। रिजर्व बैंक ने कर्ज महंगा कर दिया है। यानी की आने वाले दिनों अगर आप घर या कार खरीदने की सोच रहे थे। तो हो सकता है अब आपकी सोच ना पूरी हो पाए। क्योंकि हर तरह के कर्ज महंगे हो जाएंगे।
देश में आम लोगों का हाल दिन ब दिन बद से बदतर होती जा रही है। पहले से ही लोग महंगाई की मार झेल रहे हैं। इसके बाद सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में इजाफा कर दिया। और अब रिजर्व बैंक ने कर्ज महंगे कर दिए। यानी की जीने के लिए अगर आप कर्ज का सहारा लेने की सोच रहे हैं। तो भूल जाइए। क्योंकि आने वाले दिनों में कर्ज और महंगे हो जाएंगे। आपकी ईएमआई बढ़ जाएगी।
रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी है। रेपो रेट 8 फीसदी से बढ़कर सवा 8 फीसदी पर पहुंच चुका है। वहीं रिवर्स रेपो रेट 7 फीसदी से बढ़कर सवा 7 फीसदी पर पहुंच गया है।
रेपो रेट के बढ़ने से होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन सहित हर तरह के कर्ज महंगे हो जाएंगे। हालांकि रिजर्व बैंक ने महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ये कमद उठाए हैं। लेकिन महंगाई है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। फिलहाला खाद्य महंगाई दर और होलसेल महंगाई दर 10 फीसदी के करीब है। महंगाई पर लगाम लगाने के लिए पिछले 18 महीनों में रिजर्व बैंक ने 12 बार अहम दरों में इजाफा किया है। जिसका असर महंगाई पर कम देश की ग्रोथ पर ज्यादा दिख रहा है। औद्योगिक विकास दर दो साल के निचले स्तर पर पहुंच चुका है। जीडीपी विकास दर पिछले साल की पहली तिमाही के 8.8 फीसदी से स्तर से घटकर इस साल की पहली तिमाही में 7.7 फीसदी पर पहुंच चुकी है। अगर इसी तरह महंगाई बढ़ती रही और विकास दर घटती रही तो देश के सामने आने वाले दिनों में गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
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गुरुवार, 11 अगस्त 2011
SBI ने फिर महंगा किया कर्ज
देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कर्ज महंगा कर दिया है। एसबीआई ने बेस रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी है। यानी अब बेस रेट साढ़े नौ फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी पर पहुंच गया है। नई दरें 13 अगस्त से लागू होंगी।
ऐसे में होम लोन, कार लोन, कॉरपोरेट लोन सहित हर तरह के कर्ज महंगे हो जाएंगे। बैंक के इस कदम से जहां नए ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा हो जाएगा। वहीं फ्लोटिंग रेट पर कर्ज लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई बढ़ जाएगी। होम लोन दरों में 50 बेसिस प्वाइंट यानी आधा फीसदी की बढ़ोतरी होने पर 20 साल के लिए लिए गए 30 लाख रुपए के होम लोन पर हर महीने ईएमआई में 1000 रुपए से ज्यादा का इजाफा हो जाएगा।
इस वित्त वर्ष में देश के सबसे बडे़ बैंक एसबीआई ने कर्ज की ब्याज दरों में चौथी बार इजाफा किया है। एसबीआई से पहले करीब दो दर्जन बैंक अपने कर्ज महंगे कर चुके हैं। रिजर्व बैंक ने पिछले डेढ़ साल में 11 बार अहम दरों में बढ़ोतरी की है।
शुक्रवार, 8 जुलाई 2011
एसबीआई ने महंगा किया कर्ज
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से लोन लेने वालों ग्राहकों को अब 0.25 फीसदी महंगा कर्ज मिलेगा। हालांकि तीन महीने और उससे ऊपर के फिक्स्ड डिपॉजिट पर ग्राहकों को राहत देते हुए बैंक ने 100 बेसिस प्वाइंट तक ब्याज बढ़ा दी है। साथ ही समय से पहले पैसे निकालने पर लगने वाली पेनाल्टी को भी कम किया है।
देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कर्ज महंगा कर दिया है। एसबीआई ने बेस रेट और बीपीएलआर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी है। ऐसे में होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन सहित हर तरह का कर्ज महंगा हो गया है। बैंक के इस कदम से जहां नए ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा हो जाएगा। वहीं फ्लोटिंग रेट पर कर्ज लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई बढ़ जाएगी। इस वित्त वर्ष में देश के सबसे बडे़ बैंक एसबीआई ने कर्ज की ब्याज दरों में तीसरी बार इजाफा किया है। एसबीआई की नई बेस रेट 11 जुलाई से प्रभाव में आएगी।
इसके साथ ही एसबीआई ने जमा राशि पर ब्याज दरों में भी 100 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी की है। इसके तहत 90 दिनों तक की जमा राशि के लिए बैंक 6.75 की बजाए 7 फीसदी ब्याज देगा। वहीं 91 से 189 दिनों के लिए बचत की जमा दर 7.25 फीसदी होगी। एक साल से ज्यादा अवधि की जमा पर ग्राहकों को 9.25 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा। एसबीआई ने 90 दिनों के डिपॉजिट पर समय से पहले रकम निकालने पर लगने वाली पेनाल्टी खत्म कर दी है। और 90 दिनों से ज्यादा की जमा पर पेनाल्टी 50 बेसिस प्वाइंट यानी आधा फीसदी घटाकर 0.5 फीसदी कर दी है।
यानी पैसे जमा करने वालों को थोड़ी राहत मिली है लेकिन नए कर्ज लेने वालों और फ्लोटिंग रेट पर पहले से कर्ज ले चुके ग्राहकों पर इसकी मार पड़ेगी। और उनके कार या घर का ईएमआई बढ़ जाएगा। ये बढ़ोतरी रिजर्व बैंक की सख्त मौद्रिक नीतियों का नतीजा है।
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