बुधवार, 5 नवंबर 2008

व्हाइट + ब्लैक = रेड

व्हाइट हाउस में ब्लैक के घुसने की खबर से बाजार हुआ लाल भले ही ओबामा की जीत का जश्न अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में मनाया जा रहा हो। लेकिन एशिया के ज्यादातर बाजार और यूरोपीय बाजार इस जश्न में शामिल नहीं हुए। यूरोपीय बाजार आज भारी गिरावट के साथ खुले। खुलते ही फुट्सी करीब 100अंक लुढ़क गया। ऐसा ही कुछ हाल भारतीय शेयर बाजार में भी देखा गया। बाजार की शुरूआत आज तेजी के साथ हुई और पहले ही घंटे के कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों से ज्यादा और निफ्टी करीब 100 अंक बढ़त बनाने में कामयाब रहा। लेकिन ओबामा के जीत के साथ ही बाजार में गिरावट शुरू हो गई। और दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 800 अंक नीचे फिसल गया। बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स में 511 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई। और ये 10120 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी करीब 150 अंक लुढ़ककर तीन हजार से नीचे यानी 2994 पर बंद हुआ।  हालांकि जानकारों का मानना है कि ओबामा के जीत से इस गिरावट का कुछ लेना-देना नहीं है। लेकिन बाजार के बारे में ओबामा की नीतियां सेंटिमेंट्स बढ़ाने में कतई मददगार नहीं हैं। ओबामा अमरीकी बाजार के बेलआउट के पक्ष में नहीं है। उनका मानना है कि अगर बेलआउट की जरूरत है भी तो वो वॉलस्ट्रीट में नहीं बल्कि अमेरिका के आम रास्तों पर है। जहां कि रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

मंगलवार, 7 अक्टूबर 2008

नैनो का नया ठिकाना

नैनो ने गुजरात से लगाए नैना...पश्चिम बंगाल को कहा 'नो' आखिरकार नैनो ने गुजरात को अपना नया घर बना लिया। गुजरात में नैनो प्लांट लगाने का ऐलान करते हुए टाटा गुजराती रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने गुजरात की खुलकर तारीफ की और गुजराती बोलते नजर आए। पश्चिम बंगाल से काफी परेशानी के साथ विदा हुई टाटा की कार नैनो को आखिरकार अपना नया ठिकाना मिल ही गया। अब ये कार गुजरात के साणंद से निकलेगी। टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा और गुजरात सरकार के बीच इस पर समझौता हो गया है। इसका ऐलान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जीत की तरह किया है।   गुजरात सरकार ने  टाटा को अहमदाबाद से सटे साणंद में 1100 एकड़ जमीन दी है। जिसपर बनने वाले प्लांट से अलगे साल मार्च में पहली नैनो निकलेगी। पहले चरण में हर साल 2.5 लाख नैनो का प्रोडक्शन होगा। जिसे बढ़ाकर दूसरे चरण में 5 लाख कर दिया जाएगा। टाटा के इस नैनो प्लांट से गुजरात में ऑटो इंडस्ट्री से जुड़ी 60 दूसरी कंपनिया भी आएंगी। जिसमें कुल 10 हजार लोगों को रोजगार मिल पाएगा।  नैनो के रास्ते में आने वाली सभी अड़चने खत्म होने की खुशी टाटा के चेहरे पर साफ झलकती दिखाई दी। तो गुजरात में प्लांट लगने की खुशी को वहां के लोगों ने जश्न की तरह सेलीब्रेट किया।    

मंगलवार, 30 सितंबर 2008

बेलआउट सीनेट में हुआ ऑलआउट

भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह आया तूफान कुछ घंटों के अंदर ही शांत हो गया। और बाजार यू टर्न लेते हुए लाल से हरे निशान में पहुंच गया। ऐसा वित्त मंत्री पी चिदंबरम और सेबी चेयरमैन सी बी भावे के बाजार और अर्थव्यवस्था में सबकुछ ठीक है के आश्वासन के बाद हुआ। उधर अमेरिकी फाइनेंशियल सेक्टर में आया तूफान फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि सीनेट ने 700 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज को खारिज कर दिया है। और इसका असर दुनियाभर के बाजारों पर देखा गया। अमेरिकी बाजार में 777 अंकों की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। यूरोप और एशिया के ज्यादातर बाजार धाराशायी हो गए। और इससे भारतीय बाजार भी अछूता नहीं रहा। बाजार खुलते ही सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा और निफ्टी 100 अंकों से ज्यादा लुढ़क गए। इसके बाद अफर-तफरी में सेबी के चेयरमैन सी बी भावे को लोगों को ये आश्वासन देना पड़ा कि बाजार में सबकुछ ठीक चल रहा है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इसके कुछ ही देर बाद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया। और कहा कि भारतीय शेयर बाजार मजबूत है। और यहां की रेग्युलेटरी व्यवस्था किसी भी तरह की परेशानी को झेलने में सक्षम है। वित्त मंत्री ने देश के सबसे बड़ी प्राइवेट बैंक के वित्तीय संकट के दौर से गुजरने की अफवाह को पूरी तरह से खारिज कर दिया। पी चिदंबरम के साथ ही रिजर्व बैंक ने भी कहा कि आईसीआईसीआई बैंक की वित्तीय स्थिति पूरी तरह से चुस्त दुरूस्त है।   वित्तमंत्री के इस बयान के बाद आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया। साथ ही बाजार में भी खरीदारी तेजी से लौटी । जिससे सेंसक्स 264 अंकों की बढ़त के साथ 12860 पर बंद हुआ। और निफ्टी भी 71 अंकों तेजी के साथ 3921 पर बंद होने में कामयाब रहा। उधर फ्रांस में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अमरीकी वित्तीय संकट के असर से पार पाने के लिए भारत और चीन को मिल कर काम करना चाहिए।

सोमवार, 29 सितंबर 2008

बेलआउट से पहले निवेशकों का बाउलआउट

अमेरिकी कंपनियों को बेलआउट से फायदा होगा या नहीं?... लेकिन इस बेचारे निवेशक का बाउलआउट जरूर हो गया है! अमेरीकी क्रांग्रेस ने वित्तीय संस्थानों के लिए 700 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की रुपरेखा पर रजामंदी दे दी है। इसके बावजूद एशिया, यूरोप, सहित भारतीय शेयर बाजारों पर इस खबर का असर नहीं दिखा। अमेरिकी फाइनेंशियल सेक्टर में मची तूफान का असर भारतीय शेयर बाजार में देखा जा रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में आज भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी ने इस साल के सबसे निचले स्तर को छू लिया।  दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 700 अंक नीचे लुढ़क गया जबकि निफ्टी भी इंट्राडे कारोबार में 200 अंकों से ज्यादा फिसल गया। रियल स्टेट के कुछ शेयर तो करीब 13 फीसदी तक नीचे लुढक गए। बैंक,आईटी, कैपिटल गुड्स, पावर और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी भारी बिकवाली देखी गई। हालांकि आखिरी कारोबारी घंटे में निचले स्तर पर कुछ खरीदारी लौटी। जिससे बाजार निचले स्तर से कुछ ऊपर उठ सका। बाजार बंद होते समय सेंसेक्स 506 अंको की गिरावट के साथ 12595 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी में 135 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और ये 3869 पर बंद हुआ। ऐसा नहीं है कि केवल भारतीय बाजारों में ही गिरावट देखी गई हो।  अमेरिकी फाइनेंशियल सेक्टर में छाई मंदी की मार यूरोप और एशिया सहित पूरी दुनिया की बाजारों पर देखा जा रहा है। जापान के निक्केई में करीब 150 अंकों की गिरावट देखी गई। जबकि यूरोप की फुट्सी भी 238 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। अमरीकी फाइनेंशियल क्राइसिस से दुनियाभर में निवेशकों के पसीने छूट रहे हैं। कई निवेशक कंगाल हो गए हैं। भारत में तो कुछ ब्रोकरों ने नुकसान के दबाव में अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर दी। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस ने बैंक और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियों को दिवालिया होने से बचाने के लिए  700 अरब डॉलर की बेलआउट पैकेज की आउटलाइन पर अपनी मुहर लगा दी है। ये बेल बेलआउट पैकेज तीन चरणों में लागू किया जाएगा। 700 अरब डॉलर के बेलआउट की संभावना के बावजूद दुनियाभर के बाजारों का सेंटीमेंट्स नहीं बदला है। चारो तरफ बिकवाली हावी है। जानकारों का मानना है दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के धाराशायी होने की शुरूआत हो चुकी है। और इसे बचाने के लिए जो बेलआउट पैकेज का ऐलान किया जाने वाला है वो नाकाफी है। और सबसे बड़ी बात ये है कि इस बेलआउट पर अभी प्रतिनिधि सभा में वोटिंग होना बाकी है। अगर ये प्रतिनिधि सभा में पास होगी तभी 700 अरब डॉलर अमरीकी वित्तीय संस्थानों को मिल पाएगा।

बुधवार, 24 सितंबर 2008

अमेरिका में बन चुका है फाइनेंस का बुलबुला

करेंसी हटी दुर्घटना घटी?! मकान के लिए सस्ता लोन बांटने के चलते अमेरिका की चौथी सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट बैंक लीमन ब्रदर्स दिवालियापन की चौखट पर खड़ी है। क्योंकि इस बैंक को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। पिछली एक तिमाही में ही लीमन ब्रदर्स को 17500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इससे निवेशकों में अफरा तफरी मच गई है। अमेरिका सहित दुनियाभर के बाजारों में इसका असर देखा जा रहा है। भारी नुकसान को देखते हुए लीमन  ब्रदर्स ने अपने दिवालियापन की अर्जी अमेरिकी बैंकरप्सी कोर्ट में दी है। क्योंकि लेहमैन ब्रदर्स को दिवालिएपन से बचाने की सभी कोशिशें नाकाम रही। बार्कलेज बैंक और बैंक ऑफ अमेरिका ने लीमन ब्रदर्स को खरीदने की कोशिश जरूर की लेकिन अमेरिकी सरकार की ओर से सहायता के आश्वासन न मिलने की वजह से बात नहीं बन पाई।  दूसरी ओर दुनिया की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म मेरिल लींच की तकदीर कुछ अच्छी थी। क्योंकि पिछली तिमाही में 4.5 अरब डॉलर से भी ज्यादा नुकसान के बावजूद बैंक ऑफ अमेरिका ने मेरिल लींच को खरीदकर उसे डूबने से बचा लिया। इसके बावजूद इन बैंकों में काम करने वाले लोगों के भविष्य पर अभी भी सवालिया निशान लगा हुआ है। मेरिल लींच और लीमन ब्रदर्स में काफी संख्यां में भारत के प्रोफेशनल्स काम करते हैं। यही नहीं अमेरिकी बैंक लीमन ब्रदर्स और दुनिया की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म मेरिल लींच की फाइनेंशियल हालत पतली होने से भारत में कम से कम 25000 नौकरियों पर असर पड़ने का अनुमान है।   अमेरिकी के फाइनेंशियल जगत में हुई हलचल का असर अमेरिका सहित पूरी दुनिया में देखा गया। अमेरिकी बाजार 4 फीसदी लुढ़क गया जिससे पेंशन फंड, रिटायरमेंट प्लान्स और पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट कंपनियों को 32 लाख करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। एआईजी के शेयर होल्डरों को 20 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। यही नहीं एआईजी के बेलआउट में यानी इसको दिवालियापन से बचाने के लिए अमरीकी सेंट्रल बैंक को अरबों रुपए खर्च करने पड़े। यूरोपीयन बैंक को स्थिति संभालने के लिए सिस्टम में 70 अरब यूरो डालने को मजबूर होना पड़ा। अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने भी  स्थिति को संभालने के लिए दो दिनों में 120 अरब डॉलर सिस्टम में डाल दिया। इस वजह से अगले ही दिन अमरीकी बाजार हल्की बढ़त बनाने में कामयाब रहा। हालांकि जानकार अमरीकी बाजार में बड़ी गिरावट की आशंका जता रहे हैं। अमेरिकी फाइनेंशियल अनिश्चितता से उठे तूफान को कम करने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड को 20 अरब पाउंड बाजार में उतारना पड़ा। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जापान ने अपने बाजार को संभालने के लिए 14 अरब डॉलर सिस्टम में डाल दिए। ऑस्ट्रेलिया और भारत को करीब 3 अरब डॉलर सिस्टम में उतारने पर मजबूर होना पड़ा। वहीं चीन ने 2002 के बाद पहली बार इंटरेस्ट रेट कट किया और इंडोनेशिया ने भी आनन फानन में रेपो रेट में कटौती का ऐलान कर डाला। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तक फाइनेंशियल जगत में एक देश दूसरे से जुड़े हैं। ऐसे में अमेरिका में अगर फिर से कोई बैंक डूबता है या वहां के फाइनेंशियल सेक्टर में कोई उठा पटक होती है तो वो सुनामी बनकर पूरी दुनिया के फाइनेंशियल जगत को हिला कर रख देगा। यानी पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिकी बेलआउट पर टिकी है। यानी किस तरह से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सबप्राइम क्राइसिस से बने फाइनेंशियल बुलबुले को पैसे बहाकर बचाने में कामयाब होती है। या बचा भी पाती है या नहीं ? 

शुक्रवार, 12 सितंबर 2008

रुपए पर भारी पड़ा डॉलर

अगर आप आप विदेश घूमने जाने वाले हैं या किसी विदेशी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने वाले हैं  तो अब आपको ज्यादा खर्च करने होंगे। क्योंकि दो-तीन महीने पहले आपको एक डॉलर के लिए 40 रुपए के करीब देने होते थे लेकिन अब वही डॉलर आपके मिलेगा 45 रुपए से ज्यादा में। रूपये पर बढ़ते दवाब के बीच विदेशी बाजारों में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। जिससे रुपया हर दिन कमजोर होता जा रहा है। और यही वजह है कि डॉलर के मुकबले रुपया साढे पैंतालीस रुपए के नीचे पहुंच गया है। जो कि करीब दो साल का निचला स्तर है। विदेशी बाजारों में अमेरिकी डॉलर की तूती एक बार फिर बोलने लगी है। अभी दो महीने पहले तक यूरो हर दिन डॉलर के मुकाबले मजबूत हो रहा था। और दुनिया की दूसरी करेंसी भी डॉलर पर दबाव बनाए हुए था। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और डॉलर यूरोपीय मुद्रा यूरो के मुकाबले एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमत फिसलकर प्रति बैरल 100 डॉलर के करीब पहुंचने की वजह से तेल कंपनियों में डॉलर की डिमांड बढ़ गई है। और उस अनुपात में सिस्टम में डॉलर के नहीं आने की वजह से डॉलर का भाव चढ़ गया है। रुपए के कमजोर होने की वजह से भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ा है। ऐसा नहीं है कि रुपए में आई  कमजोरी से सभी सेक्टरों पर बुरा असर पड़ रहा है। आईटी एक ऐसा सेक्टर है जिसको इसका खूब फायदा हो रहा है। दो-तीन महीने पहले तक  आईटी सेक्टर को सॉफ्टवेयर या सर्विस देने के बदले डॉलर में जो कमाई होती थी। उसे रुपए में बदलने पर उन्हें नुकसान हो रहा था। क्योंकि एक डॉलर के बदले उन्हें मिल रहे थे करीब 40 रुपए। लेकिन अब उनकी चांदी हो रही है क्योंकि एक डॉलर की कीमत साढ़े पैंतालीस रुपए से ऊपर पहुंच चुकी है।  

टाटा की नैनो से पहले एप्पल की नेनो

एप्पल की रेंज एप्पल ने एकबार फिर अपना नेनो आईपॉड और टच आईपॉड लांच कर तहलका मचा दिया है। सैनफ्रांसिसको में एप्पल के सीईओ स्टीव जॉन्स ने एक थियेटर में अपने इन दो अनोखे प्रोडक्ट को लांच किया है।  एप्पल का नेनो आईपॉड अबतक की सबसे पतली आईपॉड है। ये आईपॉड एक इंच के चौथे हिस्से से भी ज्यादा पतली है। नैनो आईपॉड को 8 जीबी और 16 जीबी की मैमोरी के साथ लांच किया गया है। 8 जीबी वाले आइपॉड में 2000 गाने स्टोर किए जा सकते हैं औऱ इसकी कीमत है 149 डॉलर। जबकि 16 गिगाबाइट वाले आईपॉड में 4000 गाने स्टोर्ड किए जा सकते हैं। और इसके लिए आपको खर्च करने होंगे 199 डॉलर। इसके साथ ही एप्पल ने आईपडॉ टच के तीन नए रेंज लांच किए हैं। आईपॉड टच का के फीचर्स आईफोन से मिलते जुलते हैं। लेकिन आईपॉड टच से कहीं कॉल करना संभव नहीं है।आईपॉड टच को 8 जीबी 16 जीबी और 32 जीबी स्टोरेज मैमोरी के साथ लांच किया गया है। 8 जीबी वाले आईपॉड टच की कीमत है 229 डॉलर जककि 16 जीबी वाले की कीमत है 299 डॉलर और 32 जीबी वाले आईपॉड टच के लिए आपको खर्च करने पड़ेंगे 399 डॉलर। 32 जीबी वाला आईपॉड उन लोगों लिए काफी पायदेमंद है जो ज्याद से ज्यादा गेम्स और प्रोग्राम लोड करना चाहते हैं लेकिन आईफोन में 16 जीबी की मैक्सिमम मैमोरी होने की वजह से ऐसा नहीं कर पाते हैं।  केवल दो महीने पहले से एप्पल ने एप्लिकेशन बेचने शुरू किए हैं। और अबतक 10 करोड़ एप्लिकेशन आईफोन और आईपॉड यूज करने वाले डाउनलोड कर चुके हैं। यानी कि एप्पल के लिए एप्लिकेशन और अलग से प्रोग्राम्स बेचना एक फायदे का सौदा बनता जा रहा है। आईफोन के साथ ही  अपने दूसरे प्रोडक्ट्स के बाजार को बचाए रखने के लिए एप्पल लगातार नए कोशिश में जुटी है। और इसी का नतीजा है ये नोनो आईपॉड और आईपॉड टच।