औद्योगिक विकास दर 2 साल के अपने निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। मान्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ में आई भारी गिरावट के चलते सितंबर महीने में भारत की औद्योगिक विकास दर 2 फीसदी से भी नीचे लुढ़क गई। सरकार ने गिरती औद्योगिक विकास दर पर चिंता जताई है।
सरकार के तमाम दावों के बावजूद देश की आर्थिक स्थिति दिन ब दिन खस्ता होती जा रही है। जीडीपी का आईना समझे जाने वाले औद्योगिक विकास का पहिया सुस्त पड़ता जा रहा है। जिसने सरकार की नींद उड़ा दी है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के चलते सितंबर में औद्योगिक विकास दर घटकर 1.9 फीसदी पर आ गई। पिछले साल सितंबर में औद्योगिक विकास दर 6.1 फीसदी थी। इस वित्त वर्ष में अप्रैल-सितंबर के तिमाही के दौरान आईआईपी की विकास दर 5 फीसदी रही जो कि पिछले साल इसी दौरान 8.2 फीसदी थी। वहीं इस साल अगस्त में औद्योगिक विकास दर 4.1 फीसदी थी।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में विकास दर रही केवल 2.1 फीसदी जो कि पिछले साल सितंबर में 6.9 प्रतिशत थी। औद्योगिक विकास दर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का 75 फीसदी से अधिक का योगदान रहता है। यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुस्ती आते ही औद्योगिक विकास दर के आंकड़े तेजी से लुढ़क जाते हैं। सितंबर में माइनिंग सेक्टर में 5.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस सेक्टर में पिछले साल 4.3 फीसदी की तेजी देखी गई थी। ठीक ऐसे ही मशीनरी उत्पादन यानि कैपिटल गुड्स सेक्टर में सितंबर में 6.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जिसमें पिछले साल सितंबर में 7.2 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई थी।
सरकार ने लगातार गिरते औद्योगिक विकास दर पर चिंत जताई है। जानकारों का मानना है कि औद्योगिक विकास दर में जान फूंकने के लिए आने वाले दिनों में रिजर्व बैंक कदम उठा सकता है। पिछले साल मार्च से अबतक रजर्व बैंक ने 13 बार अहम दरों में इजाफा किया है। इससे कर्ज काफी महंगे हो गए हैं। जिसका असर औद्योगिक विकास दर पर दिखने लगा है। ऐसे में इस बार आरबीआई कर्ज को कुछ सस्ता कर सकता है। यानी कि अहम दरों में इजाफा करने के बदले उसमें कटौती की शुरूआत कर सकता है। क्योंकि आरबीआई के लिए महंगाई कम करना एक अहम मुद्दा था। और अब खाद्य महंगाई दरों में गिरावट की शुरूआत हो चुकी है। 29 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में खाद्य महंगाई दर घटकर 11.81 फीसदी पर पहुंच चुकी है। जो कि इससे पहले हफ्ते में 12.21 फीसदी थी। यानी कि आरबीआई के लिए कर्ज सस्ते करने का रास्ता साफ हो चुका है।
शुक्रवार, 11 नवंबर 2011
गुरुवार, 10 नवंबर 2011
किंगफिशर एयरलाइंस को डीजीसीए का नोटिस
देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइंस कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उड़ाने रद्द करने के मामने में डीजीसीए ने एयरलाइंस को नोटिस भेजा है। क्योंकि डीजीसीए की इजाज़त के बगैर कंपनी ने उड़ाने रद्द कर दीं। जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
उड़ाने रद्द करने के मामले को लेकर डीजीसीए यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने किंगफिशर एयरलाइंस को नोटिस भेजा है। किंगफिशर एयरलाइंस ने पिछले कुछ दिनों में 80 उड़ाने रद्द की हैं। कंपनी ने दलील दी है कि वह कुछ विमानों में बिजनेस क्लास की सीटें जोड़ने के लिए उन्हें उड़ान से हटा रही है।
डीजीसीए ने किंगफिशर एयरलाइंस के बिना इजाजत लिए उड़ानें रद्द करने पर आपत्ति जताई है। कोई भी एयरलाइंस डीजीसीए की मंजूरी के बिना उड़ानों के शिड्यूल में बदलाव नहीं कर सकती हैं। डीजीसीए किंगफिशर एयरलाइंस को विमान नियम के नियम 140 ए के तहत नोटिस दिया है। नोटिस में किंगफिशर एयरलाइंस से पूछा गया है कि उसने अपने उड़ानों को रद्द करने के पहले इस नियम के तहत नियामक की मंजूरी क्यों नहीं ली। इस नियम के तहत एयरलाइन को कोई नया रूट शुरू करने या किसी उड़ान को बंद करने से कम से कम एक हफ्ते पहले डीजीसीए की मंजूरी लेनी होती है। डीजीसीए ने विजय माल्या के एयरलाइंस कंपनी से यह भी पूछा है कि उसने अभी तक उड़ानें रद्द होने की वजह से यात्रियों को टिकट के पैसे लौटाने या उनके लिए वैकल्पिक उड़ान का प्रबंध करने के बारे में क्या कदम उठाए हैं।
किंगफिशर एयरलाइंस की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। कंपनी पर 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज बकाया है। किंगफिशर एयरलाइन्स को एचपीसीएल को 500 करोड़ रुपये और बीपीसीएल 250 करोड़ रुपये चुकाने हैं। इससे पहले अक्टूबर महीने में भी बकाया ना चुकाए जाने को लेकर तेल कंपनियों ने 1 दिन के लिए किंगफिशर एयरलाइन्स को एटीएफ देने से मना कर दिया था। जिसके चलते उड़ानों के परिचालन पर असर पड़ा था। किंगफिशर एयरलाइंस के शेयर जनवरी से अबतक 71 फीसदी लुढ़क चुके हैं।
उड़ाने रद्द करने के मामले को लेकर डीजीसीए यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने किंगफिशर एयरलाइंस को नोटिस भेजा है। किंगफिशर एयरलाइंस ने पिछले कुछ दिनों में 80 उड़ाने रद्द की हैं। कंपनी ने दलील दी है कि वह कुछ विमानों में बिजनेस क्लास की सीटें जोड़ने के लिए उन्हें उड़ान से हटा रही है।
डीजीसीए ने किंगफिशर एयरलाइंस के बिना इजाजत लिए उड़ानें रद्द करने पर आपत्ति जताई है। कोई भी एयरलाइंस डीजीसीए की मंजूरी के बिना उड़ानों के शिड्यूल में बदलाव नहीं कर सकती हैं। डीजीसीए किंगफिशर एयरलाइंस को विमान नियम के नियम 140 ए के तहत नोटिस दिया है। नोटिस में किंगफिशर एयरलाइंस से पूछा गया है कि उसने अपने उड़ानों को रद्द करने के पहले इस नियम के तहत नियामक की मंजूरी क्यों नहीं ली। इस नियम के तहत एयरलाइन को कोई नया रूट शुरू करने या किसी उड़ान को बंद करने से कम से कम एक हफ्ते पहले डीजीसीए की मंजूरी लेनी होती है। डीजीसीए ने विजय माल्या के एयरलाइंस कंपनी से यह भी पूछा है कि उसने अभी तक उड़ानें रद्द होने की वजह से यात्रियों को टिकट के पैसे लौटाने या उनके लिए वैकल्पिक उड़ान का प्रबंध करने के बारे में क्या कदम उठाए हैं।
किंगफिशर एयरलाइंस की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। कंपनी पर 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज बकाया है। किंगफिशर एयरलाइन्स को एचपीसीएल को 500 करोड़ रुपये और बीपीसीएल 250 करोड़ रुपये चुकाने हैं। इससे पहले अक्टूबर महीने में भी बकाया ना चुकाए जाने को लेकर तेल कंपनियों ने 1 दिन के लिए किंगफिशर एयरलाइन्स को एटीएफ देने से मना कर दिया था। जिसके चलते उड़ानों के परिचालन पर असर पड़ा था। किंगफिशर एयरलाइंस के शेयर जनवरी से अबतक 71 फीसदी लुढ़क चुके हैं।
बुधवार, 9 नवंबर 2011
सोना 29 हजारी, चांदी 58 हजारी
सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। प्रति किलो चांदी का भाव 58 हजार रुपए के पार पहुंच चुका है। जबकि प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत 29 हजार रुपए से ज्यादा हो चुका है। यूरोपीय कर्ज संकट और भारत में विवाह के सीजन की शुरूआत की वजह से सोने-चांदी की मांग लगातार इजाफा हो रहा है।
शादी विवाह का सीजन शुरू होने की वजह से सोने और चांदी की मांग सातवें आसमान पर पहुंच चुकी है। इससे सोने और चांदी की कीमतें लगातार चढ़ती जा रही हैं। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 400 रुपये से ज्यादा बढ़कर 29004 रुपये प्रति दस ग्राम हो गई। जबकि चांदी की कीमतों में 650 रुपये की तेजी दर्ज की गई है। इससे चांदी की कीमत प्रति किलो 58 हजार रुपये के पार पहुंच चुकी है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे संकट और यूरोपीय कर्ज संकट का असर सोने और चांदी की कीमतों पर देखी जा रही है। विदेशी बाजारों में सोने के दामों में मजबूती देखी जा रही है। लंदन में कारोबार के दौरान सोने के दाम 41 डॉलर ब़ढ़कर 1795 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच चुके हैं। जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने के दाम 1830 डॉलर प्रति औंस तक जा सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है। जानकारों का ये भी कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था जबतक पटरी पर नहीं आती सोने और चांदी की कीमतों में तेजी बनी रहेगी। हालांकि बीच-बीच में इसमें मुनाफावसूली देखी जा सकती है।
शादी विवाह का सीजन शुरू होने की वजह से सोने और चांदी की मांग सातवें आसमान पर पहुंच चुकी है। इससे सोने और चांदी की कीमतें लगातार चढ़ती जा रही हैं। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 400 रुपये से ज्यादा बढ़कर 29004 रुपये प्रति दस ग्राम हो गई। जबकि चांदी की कीमतों में 650 रुपये की तेजी दर्ज की गई है। इससे चांदी की कीमत प्रति किलो 58 हजार रुपये के पार पहुंच चुकी है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे संकट और यूरोपीय कर्ज संकट का असर सोने और चांदी की कीमतों पर देखी जा रही है। विदेशी बाजारों में सोने के दामों में मजबूती देखी जा रही है। लंदन में कारोबार के दौरान सोने के दाम 41 डॉलर ब़ढ़कर 1795 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच चुके हैं। जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने के दाम 1830 डॉलर प्रति औंस तक जा सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है। जानकारों का ये भी कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था जबतक पटरी पर नहीं आती सोने और चांदी की कीमतों में तेजी बनी रहेगी। हालांकि बीच-बीच में इसमें मुनाफावसूली देखी जा सकती है।
10 साल में सबसे कम बिके कार
महंगाई और लगातार महंगे होते जा रहे ऑटो लोन का असर कारों की बिक्री पर दिखने लगा है। अक्टूबर महीने में कारों की बिक्री में करीब 24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
महंगाई, गाड़ियों की बढ़ती कीमतों और ऊंची ब्याज दरों की मार कारों की बिक्री पर पड़नी शुरू हो गई है। पिछले साल के मुकाबले अक्टूबर में कारों की बिक्री 24 फीसदी घटकर महज़ 1,38,000 यूनिट पर पहुंच गई हैं। दिसंबर 2000 के बाद ये सबसे बड़ी महीने-दर-महीने की गिरावट है। ये लगातार चौथा महीना है जब कारों की बिक्री में गिरावट देखने को मिली है। अक्टूबर 2010 में 1,81,704 कारों की बिक्री हुई थी।
हालांकि अक्टूबर में मोटरसाइकिल की बिक्री 2 फीसदी की तेजी देखी गई है। अक्टूबर में बाइक की बिक्री 1.5 लाख के करीब पहुंच गई । इसके साथ ही कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में 18 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
महंगाई, गाड़ियों की बढ़ती कीमतों और ऊंची ब्याज दरों की मार कारों की बिक्री पर पड़नी शुरू हो गई है। पिछले साल के मुकाबले अक्टूबर में कारों की बिक्री 24 फीसदी घटकर महज़ 1,38,000 यूनिट पर पहुंच गई हैं। दिसंबर 2000 के बाद ये सबसे बड़ी महीने-दर-महीने की गिरावट है। ये लगातार चौथा महीना है जब कारों की बिक्री में गिरावट देखने को मिली है। अक्टूबर 2010 में 1,81,704 कारों की बिक्री हुई थी।
हालांकि अक्टूबर में मोटरसाइकिल की बिक्री 2 फीसदी की तेजी देखी गई है। अक्टूबर में बाइक की बिक्री 1.5 लाख के करीब पहुंच गई । इसके साथ ही कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में 18 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
मंगलवार, 8 नवंबर 2011
निर्यात में कमी, बढ़ा व्यापार घाटा
व्यापार घाटा भारतीय सरकार के लिए एक चिंता का विषय बन गया है। निर्यात में हो रही कमी की वजह से व्यापार घाटा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अक्टूबर महीने में ये घाटा बढ़कर करीब 20 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। क्योंकि भारत से होने वाला निर्यात दो साल के अपने निचले स्तर पर पहुंच चुका है।
भारत से होने वाले निर्यात में भारी कमी दर्ज की जा रही है। ऐसे में आयात और निर्यात के बीच की खाई लगातार बढ़ती जा रही है। जिससे व्यापार घाटे में जबरदस्त उछाल आया है। अक्टूबर महीने में भारत से होने वाले निर्यात में महज़ 10.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जो कि पिछले दो वर्षों का निचला स्तर है।
अक्टूबर महीने में केवल 19.9 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है। जबकि इसी महीने भारत के आयात में 21.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यानी केवल एक महीने में 39.5 अरब डॉलर का आयात किया गया है। इस वजह से अक्टूबर महीने में भारत को 19.6 अरब डॉलर का व्यापार घाटा सहना पड़ा है। यूरोपीय देशों के कर्ज संकट में फंसने की वजह से भारतीय निर्यात में कमी आई है।
ऐसे में सरकार को केवल चिंता करने के बदले एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए कुछ अहम कदम उठाने की ज़रूरत है। नहीं तो महंगाई की तरह व्यापार घाटा भी एक दिन सरकार के गले की फांस बन जाएगा।
राजीव रंजन, न्यूज़ एक्स्प्रेस, दिल्ली
भारत से होने वाले निर्यात में भारी कमी दर्ज की जा रही है। ऐसे में आयात और निर्यात के बीच की खाई लगातार बढ़ती जा रही है। जिससे व्यापार घाटे में जबरदस्त उछाल आया है। अक्टूबर महीने में भारत से होने वाले निर्यात में महज़ 10.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जो कि पिछले दो वर्षों का निचला स्तर है।
अक्टूबर महीने में केवल 19.9 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है। जबकि इसी महीने भारत के आयात में 21.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यानी केवल एक महीने में 39.5 अरब डॉलर का आयात किया गया है। इस वजह से अक्टूबर महीने में भारत को 19.6 अरब डॉलर का व्यापार घाटा सहना पड़ा है। यूरोपीय देशों के कर्ज संकट में फंसने की वजह से भारतीय निर्यात में कमी आई है।
ऐसे में सरकार को केवल चिंता करने के बदले एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए कुछ अहम कदम उठाने की ज़रूरत है। नहीं तो महंगाई की तरह व्यापार घाटा भी एक दिन सरकार के गले की फांस बन जाएगा।
राजीव रंजन, न्यूज़ एक्स्प्रेस, दिल्ली
लेबल:
आयात,
निर्यात,
व्यापार घाटा,
EXPORT,
import,
trade deficit
शनिवार, 5 नवंबर 2011
लगातार 5 दिनों तक बंद रहेंगे SBI
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंख एसबीआई यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अगले पांच दिनों तक कामकाज ठप्प रहेगा। क्योंकि बैंक के अधिकारी अगले हफ्ते दो दिनों की हड़ताल पर जा रहे हैं। साथ ही अगले हफ्ते दो दिनों की सरकारी छुट्टी है।
एसबीआई के ग्राहकों को अगले 5 दिनों तक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई में अगले 5 दिनों तक कामकाज नहीं होगा। यानि ग्राहक किसी भी तरह का बैंकिंग ट्रांजेक्शन नहीं कर पाएंगे। क्योंकि वेतन, हफ्ते में पांच दिन काम और अन्य मुद्दों को लेकर बैंक के अधिकारियों ने 2 दिन की हड़ताल का ऐलान कर दिया है। ये हड़ताल मंगलवार और बुधवार को यानी 8 और 9 नवंबर को होगी। रविवार की छुट्टियों के बाद सोमवार को ईद और गुरुवार को गुरू नानक जयंती की सरकारी छुट्टियां है। यानि लगातार 5 दिन बैंक सेवाएं ठप रहेंगी।
अपने ग्राहकों को ज्यादा परेशानी ना हो इसको ध्यान में रखते हुए बैंक ने देश के ज्यादातर अखबारों में एक इस्तेहार दिया है। जिसमें ग्राहकों से आज ही सारे जरूरी ट्रांजेक्शन करने की अपील की है। इन हड़ताल और छुट्टियों की वजह से एसबीआई की एटीएम सर्विस भी प्रभावित होगी। हालांकि दूसरे बैंक के एटीएम से एसबीआई के ग्राहक पैसे निकाल पाएंगे।
एसबीआई के ग्राहकों को अगले 5 दिनों तक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई में अगले 5 दिनों तक कामकाज नहीं होगा। यानि ग्राहक किसी भी तरह का बैंकिंग ट्रांजेक्शन नहीं कर पाएंगे। क्योंकि वेतन, हफ्ते में पांच दिन काम और अन्य मुद्दों को लेकर बैंक के अधिकारियों ने 2 दिन की हड़ताल का ऐलान कर दिया है। ये हड़ताल मंगलवार और बुधवार को यानी 8 और 9 नवंबर को होगी। रविवार की छुट्टियों के बाद सोमवार को ईद और गुरुवार को गुरू नानक जयंती की सरकारी छुट्टियां है। यानि लगातार 5 दिन बैंक सेवाएं ठप रहेंगी।
अपने ग्राहकों को ज्यादा परेशानी ना हो इसको ध्यान में रखते हुए बैंक ने देश के ज्यादातर अखबारों में एक इस्तेहार दिया है। जिसमें ग्राहकों से आज ही सारे जरूरी ट्रांजेक्शन करने की अपील की है। इन हड़ताल और छुट्टियों की वजह से एसबीआई की एटीएम सर्विस भी प्रभावित होगी। हालांकि दूसरे बैंक के एटीएम से एसबीआई के ग्राहक पैसे निकाल पाएंगे।
लेबल:
एसबीआई,
छुटिट्यां,
भारतीय स्टेट बैंक,
हड़ताल,
bank strike,
SBI,
state bank of india
शुक्रवार, 4 नवंबर 2011
राजू हुए रिहा
करीब 10 हज़ार करोड़ रुपए का घोटाला करने वाले रामालिंगा राजू को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई। आईटी कंपनी सत्यम के संस्थापक राजू के खिलाफ सीबीआई पर्याप्त सबूत नहीं जुटा पाई। जिससे राजू सहित दो और आरोपी ज़मानत पर रिहा हो गए।
सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के सत्यम घोटाले में कंपनी के फाउंडर और पूर्व चेयरमैन बी. रामालिंगा राजू, उनके भाई बी राम राजू और कंपनी के पूर्व सीएफओ वी. श्रीनिवास को जमानत दे दी। जस्टिस दलवीर भंडारी और जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने तीनों को दो लाख रुपये के निजी मुचलके के ज़मानत दे दी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें ट्रायल कोर्ट में पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। इस मामले में कुल 10 आरोपी है। जिसमें से पांच लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 12 अक्टूबर को जमानत दे दी है।
साल 2009 के जनवरी में सत्यूम कंप्यू टर्स के अध्य।क्ष रामालिंगा राजू ने अपनी ही कंपनी में हजारों करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा किया था। सत्यम घोटाले ने आईटी सेक्टर सहित पूरे शेयर बाजार को हिला कर रख दिया था।
घोटाले के आरोप में रामालिंगा राजू पिछले दो साल से ज्यादा समय जेल में थे। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने ही राजू की जमानत अर्जी को खरीज कर दिया था। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी सीबीआई पर्याप्त सबूत इक्ट्ठा नहीं कर पाई है। जिससे रामालिंगा राजू को दोषी साबित नहीं किया जा सका है। हालांकि सीबीआई ने ये दलील दी थी कि अगर राजू छूट जाएंगे तो अपने प्रभाव से सबूतों के साथ छेड़-छाड़ कर सकते हैं और गवाहों पर दबाव बना सकते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए रामालिंगा को ज़मानत दे दी।
सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के सत्यम घोटाले में कंपनी के फाउंडर और पूर्व चेयरमैन बी. रामालिंगा राजू, उनके भाई बी राम राजू और कंपनी के पूर्व सीएफओ वी. श्रीनिवास को जमानत दे दी। जस्टिस दलवीर भंडारी और जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने तीनों को दो लाख रुपये के निजी मुचलके के ज़मानत दे दी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें ट्रायल कोर्ट में पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। इस मामले में कुल 10 आरोपी है। जिसमें से पांच लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 12 अक्टूबर को जमानत दे दी है।
साल 2009 के जनवरी में सत्यूम कंप्यू टर्स के अध्य।क्ष रामालिंगा राजू ने अपनी ही कंपनी में हजारों करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा किया था। सत्यम घोटाले ने आईटी सेक्टर सहित पूरे शेयर बाजार को हिला कर रख दिया था।
घोटाले के आरोप में रामालिंगा राजू पिछले दो साल से ज्यादा समय जेल में थे। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने ही राजू की जमानत अर्जी को खरीज कर दिया था। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी सीबीआई पर्याप्त सबूत इक्ट्ठा नहीं कर पाई है। जिससे रामालिंगा राजू को दोषी साबित नहीं किया जा सका है। हालांकि सीबीआई ने ये दलील दी थी कि अगर राजू छूट जाएंगे तो अपने प्रभाव से सबूतों के साथ छेड़-छाड़ कर सकते हैं और गवाहों पर दबाव बना सकते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए रामालिंगा को ज़मानत दे दी।
लेबल:
घोटाला,
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