मंगलवार, 29 नवंबर 2011

पेट्रलो हो सकता है 2 रुपए तक सस्ता

पेट्रोल की ऊंची कीमतों से एकबार फिर लोगों को राहत मिलने वाली है। गुरुवार से पेट्रोल एक बार फिर सस्ता हो सकता है। पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 2 रुपए तक कटौती हो सकती है।

पेट्रोल की कीमतों में दो हफ्ते में लगातार दूसरी बार ऐसी कटौती होगी। क्योंकि पिछले पखवाड़े की समीक्षा के बाद सिंगापुर में कच्चे तेल के भाव में गिरावट आई है। इससे पेट्रोल के दाम घटाए जा सकते हैं। भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियां सिंगापुर में कच्चे तेल के भाव के आधार पर ही कीमत तय करते हैं। मौजूदा भाव पर सरकारी तेल कंपनियों को तेल पर औसतन 8 डॉलर प्रति बैरल का मार्जिन मिल रहा है। जो कि मध्य नवंबर में यह 5.74 डॉलर प्रति बैरल था। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल का भाव मामूली बढ़त के साथ 109.87 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था।

घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव पर निर्भर करती है। हालांकि रुपए में गिरावट की वजह से पेट्रोल की कीमतों में कमी का पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं मिल पा रहा है। अगर रुपए में मज़बूती आ जाए तो पेट्रोल की कीमतें और सस्ती हो सकती हैं। लगातार महंगे होते जा रहे पेट्रोल पर विपक्षी दलों ने विरोध जताया था। यूपीए के सहयोगी दलों ने भी पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के रोलबैक के लिए दबाव बनाया था। पेट्रोल को नियंत्रण-मुक्त किए जाने के बाद पहली बार 16 नवंबर को इसके दाम में 2.22 रुपए प्रति लीटर की कमी की गई थी। कई राज्यों में होने वाले चुनावों का ही असर है कि सरकार बार-बार पेट्रोल की कीमतों में कमी की सोच रही है। नहीं तो कोई भी बहाना बना कर इसे टाल देती।

शनिवार, 26 नवंबर 2011

भारत में खुलेंगे दुनिया के नामी स्टोर

सिंगल ब्रांड रिटेल में एफडीआई की सीमा 51 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने के बाद दुनियाभर की कंपनियों में भारत में अपने स्टोर खोलने की होड़ लग चुकी है। आइए देखते हैं आने वाले दिनों में कौन-कौन से अमेरिकी ब्रांड भारतीय बाजारों में सबसे पहले नज़र आ सकते हैं।
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बाजार में अपना कारोबार करने के लिए कई अमेरिकी कंपनियां गिद्द की तरह अपनी नज़र गड़ाए हुईं थी। सिंगल ब्रांड में 100 फीसदी एफडीआई के बाद अब इन अमेरिकी कंपनियां का भारत में घुसना आसान हो जाएगा। आइए देखते हैं ऐसी पांच अमेरिकी कंपनियां जिनका शोरूम जल्द ही आपको देश के कोने-कोने में नज़र आ सकती हैं।
इन्हीं दिग्गज कंपनियों में एक है बर्गर किंग...ये एक अमेरिकन कंपनी है जिसे लोग बीके के नाम से भी जानते हैं...फ्लोरिडा स्थित इस फास्टफूड कंपनी का ग्लोबल चेन है..यानी कि दुनिया के कई देशों में इस कंपनी का कारोबार है..फ्लोरिडा की एक रेस्टोरेंट चेन ने इस कंपनी की शुरूआत 1953 में की थी।
अमेरिका की ही एक कंपनी है टिफ्फेनीज...जो अपना स्टोर भारत में खोलने को बेचैन है...टिफ्फेनीज एक ज्वैलरी और सिल्वरवेयर कंपनी है..इसकी स्थापना 1837 में न्यूयॉर्क में चार्ल्स ल्युइस टिफ्फेनी ने की थी।
तीसरी अमेरिकी कंपनी है विक्टोरियाज सीक्रेट जो कि भारत में अपना स्टोर खोलने को तैयार है....इस कंपनी वुमेन वीयर, लिंजरीज और व्यूटी प्रोडक्ट बनाती है..2006 में इस कंपनी ने 5 अरब डॉलर की बिक्री की थी साथ ही इस कंपनी का ऑपरेटिंग इनकम थी 1 अरब डॉलर।
अमेरिकन एपरल चौथी अमेरिकी कंपनी है जो भारत में अपना स्टोर खोलने के लिए बेताब है...ये कंपनी कपड़े का कारोबार करती है..जिसमें होलसेल, रिटले, डिजाइन, मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग शामिल है।
पांचवी अमेरिकी कंपनी है..ओल्ड नेवी...कैलफोर्निया की ये कंपी भी कपड़े का कारोबार करती है।
यूरोप और अमेरिका के कर्ज संकट में फंसने के बाद इन कंपनियों की कमाई पर असर पड़ा है। ऐसे में इनके लिए भारती बाजार का खुलना राहत की खबर है। वहीं भारती कंपनियों को इन कंपनियों के सामने टिकने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बाजार यानि कि भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए इटली की कई कंपनियां बेताब हैं। आइए देखते हैं ऐसी ही कुछ बड़ी इटैलियन कंपनियों को जो आने वाले दिनों में भारत के मेगामॉल और बड़े शहरों में दिखाई दे सकते हैं। इटली की कई कंपनियां दुनियाभर में अपने जलवे बिखेर रही हैं। इन्हीं में से कुछ इटली के दिग्गज ब्रांड अब भारत में दस्तक देने को तैयार है।
रोक्कोबारोक्को एक फैशन स्टोर चेन है। इस ब्रांड के तहत फैशनेवल कपड़े, हाईएंड एसेसरीज और परफ्यूम का कारोबार होता है। महिलाओं, बच्चों और पुरुषों के लिए रोक्कोबारोक्को के परफ्यूम काफी पॉपुलर हैं।
इटली के वारेसे स्थित फैशन ब्रांड मिशोनी भारत में अपना स्टोर चेन खोलने को तैयार बैठा है। मिशोनी को नाइटवेयर में महारत हासिल है। अलग-अलग फेबरिक्स और अपने कलरफुल पैटर्न की वजह से मिशोनी का दुनियाभर में नाम है।
इटली का ही एक फैशन हाउस है ब्लुफिन एसपीए। जो अपना स्टोर भारत में खोलने को लेकर काफी बेचैन दिख रहा है। ये कंपनी ब्लूमरीन ब्रांड के नाम से अपना कारोबार करती है। ब्लू मरीन वैसी महिलाओं के लिए अपना फैशन प्रोडक्ट बनाती है जो किसी कपड़े छोटा नहीं मानती और किसी डायमंड को बड़ा नहीं समझती। यानी कि इलीट क्लास के फैशन एसेसरीज का बिजनसे है इस कंपनी का।

भारतीय बाजार में सिंगल ब्रांड के लिए अब किसी तरह की कोई रोक-टोक नहीं रह गई है। क्योंकि कैबिनेट ने सिंगल ब्रांड में एफडीआई की सीमा 51 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी कर दी है। ऐसे में इटली की कई दिग्गज कंपनियां भारत बाजार को भुनाने की कोशिश में लग चुकी हैं।

भारत के विशाल बाजार देखकर कई सालों से दुनियाभर की कंपनियों का मन ललचा रहा था। लेकिन केवल 51 फीसदी एफडीआई के चलते वो भारत का रुख नहीं कर रहीं थी। लेकिन अब 100 फीसदी एफडीआई पर मुहर लगने के बाद दुनियाभर के कई दिग्गज ब्रांड भारत में अपने स्टोर खोलने की तैयारी में अपनी कमर कस चुके हैं।

अमेरिका और यूरोप की कई कंपनियों को एफडीआई पर भारतीय कैबिनेट के फैसले से राहत मिली है। क्योंकि इन कंपनियों की नज़र भारतीय बाजार पर कई वर्षों से टिकी थी। अपने-अपने ब्रांड के प्रति जुनून की हद तक जाने को तैयार इन कंपनियों को अब भारत में आने के लिए किसी दूसरे ब्रांड से गठज़ोर नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि सिंगल ब्रांड में 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में फ्रांस, स्वीडन, स्पेन सहित दुनियाभर के कई ब्रांड भारत का रुख करने वाली हैं। और इन ब्रांड में शामिल हैं दुनिया के कई दिग्गज़ फैशन डिज़ायनर के स्टोर्स।
इमैन्युअल अंगारो फ्रांस का एक ऐसा फैशन ब्रांड है जो कि दुनियाभर में छाया हुआ है। फैशन डिज़ायनर इमैन्युअल अंगारो के नाम पर ही इस ब्रांड का नाम रखा गया है। और ये ब्रांड जल्द ही भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को बेचैन है।
भारत में अपना पैर जमाने के लिए लाइन में खड़ी है स्वीडन की एक कंपनी आईकिया...ये दुनिया की सबसे बड़ी फर्निचर रिटेलर कंपनी है...ये कंपनी कोई भी फर्निचर ऑन डिमांड असेंबल कर के ग्राहकों को मुहैया करा देती है...इस कंपनी की नींव 1947 में 17 साल के इंगवर कंप्राड ने रखी थी।
स्पेन की क्लोथिंग और एसेसरीज ब्रांड है ज़ारा..जो कि अपना स्टोर भारत में खोलने वाली है...स्पने की के इस नामी ब्रांड के जलवे दुनियाभर में हैं...1975 में इस ब्रांड की नींव डाली थी एमेन्सियो ऑर्टेगा ने...फिलहाल इस ब्रांड की उपस्थिति दुनिया के करीब 74 देशों में है।

2006 में भारत सरकार ने सिंगल ब्रांड में जब 51 फीसदी की एफडीआई सीमा तय की तो दुनिया के कुछ ब्रांड तो भारत जरूर आए। लेकिन ज्यादातर ब्रांड भारत से बचते रहे। क्योंकि उन्हें अपने काम में कोई भागीदार बनाना गवारा नहीं था। आईकिया और ज़ारा भी इसी इंतज़ार में बैठी रही। और अब इन कंपनियों में भारत का रुख करने की हलचल तेज हो गई है।

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

मल्टीब्रांड रिटेल में 51% एफडीआई पर कैबिनेट की मुहर

सहयोगी दलों के तमाम विरोध के बावजूद कैबिनेट ने मल्टीब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई की मंज़ूरी दे दी है। साथ ही सिंगल ब्रांड में एफडीआई की सीमा 51 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी कर दी है।

2 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद यूपीए सरकार ने रिटेल क्षेत्र सुधार लाने की मक़सद से एफडीआई की इज़ाजत दी है। कैबिनेट ने गुरुवार को एक लंबे दौर की बैठक के बाद रिटेल सेक्टर में एफडीआई पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही सिंगल ब्रांड में एफडीआई की सीम 51 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी कर दी है। यानी कि अब टैगह्युअर, एडीडैस, नाईकी जैसी कंपनियों को भारत में अपने स्टोर खोलने के लिए किसी के सहयोग की ज़रूरत नहीं होगी। साथ ही मल्टीब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई की मंज़ूरी के बाद वॉलमार्ट और टेस्को जैसे दुनिया की दिग्गज कंपनियां भारत में अपना रिटेल स्टोर खोल पाएंगे।

कैश एंड कैरी कारोबार में 100 फीसदी एफडीआई निवेश की अनुमति देश में पहले से ही है। यानी की सामानों को लाने ले जाने से लेकर उसके स्टोरेज और बिक्री तक के कारोबार पर विदेशी कंपनियों का प्रभुत्व होगा। और देखते ही देखते आने वाले कुछ सालों में भारतीय रिटेल बाजार पर पूरी तरह से विदेशी कंपनियां छा जाएंगी। इसकी मार पड़ेगी गली नुक्कड़ के रिटले स्टोर्स पर। जो इन दिग्गज कंपनियों के सामने ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाएंगी। और करोड़ों लोग धीरे-धीरे बेरोजग़ार हो जाएंगे।

बुधवार, 23 नवंबर 2011

मल्टीब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई पर बैठक

कल होने वाली कैबिनेट की बैठक में मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई को मंजूरी मिल सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि मल्टीब्रांड रिटेल में 51 फीसदी और सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई को मंज़ूरी मिल सकती है।

यूपीए सरकार ने काफी सालों बाद भारत के रिटेल क्षेत्र सुधार लाने के लिए कमर कस ली है। कल होने वाली कैबिनेट की बैठक में रिटेल क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी एफडीआई की सीमा से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है।
ऐसा अनुमान है कि कैबिनेट सिंगल ब्रांड में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दे सकती है। फिलहाल सिंगल ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई की इज़ाजत है। वहीं मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई निवेश की मंजूरी मिलने की संभावना है। देश में वैसे तो होलसेल कैश एंड कैरी कारोबार में 100 फीसदी एफडीआई निवेश की अनुमति है। रिटले में एफडीआई की मंज़ूरी मिलने के बाद वॉलमार्ट और टेस्को जैसे दुनिया की दिग्गज कंपनियां भारत में अपना रिटेल स्टोर खोल पाएंगे।

मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई पर वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंदर आने वाले औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग यानी डीआईपीपी ने इस संबध में अपना अंतिम सुझाव पिछले सप्ताह ही कैबिनेट के पास भेज दिया था। अलग-अलग मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद विभाग ने अपना सुझाव तैयार किया था। विपक्षी दलों के विरोध के कारण मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई पर फैसला पिछले 2 साल से अटका हुआ है।

टाटा ग्रुप को चलाएंगे मिस्त्री

टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा और उनका उत्तराधिकारी साइरस मिस्त्री

वर्षों की मशक्कत के बाद आखिरकार रतन टाटा का उत्तराधिकारी मिल ही गया। साइरस मिस्त्री संभालेंगे टाटा के एम्पायर को। मिस्त्री ने लंदन बिजनेस स्कूल से पढ़ाई की है और फिलहाल शपूरजी पालोनजी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।

टाटा सन्स ने रतन टाटा के उत्तराधिकारी को ढ़ूंढ निकाला है। साइरस मिस्त्री अब टाटा ग्रुप के कारोबार को संभालेंगे। फिलहाल मिस्त्री को टाटा सन्स का डिप्टी चेयरमैन नियुक्त किया गया है। लेकिन साल 2012 के दिसंबर में जब टाटा सन्स के चेयरमैन रतन टाटा सेवानिवृत होंगे उसके बाद उनका स्थान साइरस मिस्त्री लेंगे। साइरस पालोनजी मिस्त्री के सबसे छोटे बेटे हैं। पालोनजी मिस्त्री के पास टाटा सन्स के सबसे ज़्यादा शेयर हैं। रतन टाटा ने कहा है कि साइरस मिस्त्री इस पद के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। मिस्त्री टाटा सन्स के बोर्ड में अगस्त 2006 से हैं।

रतन टाटा ने कहा कि मिस्त्री के काम ने उन्हें बहुत प्रभावित किया है। सेलेक्शन कमेटी ने एकमत से साइरस मिस्त्री के नाम पर हामी भरी है। साइरस मिस्त्री के परिवार का टाटा सन्स में करीब 16.5 फीसदी की हिस्सेदारी है। रतन टाटा ने टाटा ग्रुप को एक अलग मुकाम तक पहुंचाया है। देश और दुनिया में टाटा के झंडे बुलंद किए हैं। लैंगरोवर, जगुआर, कोरस सहित एक के बाद एक कई विदेशी कंपनियों को खरीद लिया। दुनिया की सबसे सस्ती कार नैनो को हक़ीकत बनाकर दुनिया को रतन टाटा ने हतप्रभ कर दिया। एक साल के बाद जब साइरस मिस्त्री पूरी तरह से टाटा ग्रुप का कारोबार संभालेंगे उसके बाद उनकी असली काबिलियत का पता चलेगा। रतन टाटा की देश ही नहीं दुनिया में एक अलग पहचान है।

सेंसेक्स साढ़े पंद्रह हज़ार से नीचे

शेयर बाजार में आज मच गया हाहाकार। चौतरफा बिकवाली से बाजार 2 साल के अपने निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि आखिरी कारोबार में बाजार में थोड़ा सुधार देखने को मिला।

शेयर बाजार में कारोबार शुरू होते ही बिकवाली हावी हो गई। जैसे जैसे कारोबार आगे बढ़ा बिकवाली भी बढ़ती गई। दिनभर के कारोबार के दौरान निफ्टी 4650 के नीचे पहुंच गया। वहीं सेंसेक्स भी 15500 के नीचे लुढ़क गया। हालांकि आखिरी कारोबार में निचले स्तर पर कुछ खरीदारी हुई। जिससे सेंसेक्स 365 अंक गिरकर 15699 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 105 अंक लुढ़ककर 4706 पर बंद हुआ। बैंक, रियल्टी और ऑयल एंड गैस शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। वहीं जेपी एसोसिएट्स के शेयर करीब 5 फीसदी लुढ़क गए।

यूरोप में कर्ज संकट का हल नहीं निकलने और रुपये में लगातार उतार-चढ़ाव की वजह से बाजार में बिकवाली देखी गई। ऐसे माहौल में फिलहाल छोटे निवेशकों को बाजार से दूर ही रहना चाहिए।

मंगलवार, 22 नवंबर 2011

रिकॉर्ड निचले स्तर पर लुढ़का रुपया

अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले रुपए की कीमत अबतक के अपने सबसे निचले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। दिनभर के कारोबार के दौरान आज एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 52 रुए 73 पैसे तक जा पहुंची। रुपए की कमज़ोरी की वजह से कंज्युमर्स ड्यूरेबल्स और आयातित खाने के तेल महंगे हो चुके हैं।

रुपये के लगातार कमज़ोर होने से तेल का आयात और महंगा होता जा रहा है। साथ ही इससे महंगाई और वित्तीय घाटे के और अधिक बढ़ने का अंदेशा पैदा हो गया है। पिछले चार महीने में रुपए में 16 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। जबकि इसी साल जनवरी में एक अमेरिकी डॉलर मिल रहा था 45 रुपए से भी कम के भाव में। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय अनिश्चितता के चलते रुपये में कमज़ोरी आई है और भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से कोई खास अंतर नहीं हो नहीं देखने को मिलेगा।

रुपए के कमज़ोर होने का असर दिखने लगा है कई कंपनियों ने कंज्युमर ड्यूरेबल्स के दाम बढ़ा दिए। आयातित खाने के तेल भी महंगे हो चुके हैं। साथ ही आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों पर भी इसका असर देखने मिल सकता है। क्योंकि डॉलर के मुक़ाबले 1 रुपए तक की कमज़ोरी से तेल मार्केटिंग कंपनियों को करीब 8000 करोड़ रुपए ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। लेकिन सरकार खुद-ब-खुद रुपए में सुधार की उम्मीद लगाए बैठी है।