सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

होम लोन ब्याज पर 3 लाख तक कर छूट

होम लोने के ब्याज पर आयकर छूट की सीमा तीन लाख रुपए हो सकती है। हाउसिंग सेक्टर को दुरुस्त करने के लिए सरकार आगामी बजट में इसका ऐलान कर सकती है। इससे घर खरीदने वाले लोगों को कुछ राहत ज़रुर मिलेगी।

सरकार बजट 2012 में होम लोन पर कर कटौती की सीमा बढ़ाकर ग्राहकों को राहत दे सकती है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी इसका ऐलान बजट पेश करते समय यानी 16 मार्च को कर सकते हैं। सरकार के इस कदम से रियल एस्टेट सेक्टर को खस्ता हालत से उबरने का कुछ मौका मिलेगा।

सरकार होम लोन के लिए दिए गए ब्याज पर आयकर छूट की सीमा को 1.5 लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर सकती है। इसके अलावा लोन लेकर घर खरीदने वाले ग्राहकों को मूलधन के भुगतान पर भी एक लाख की सीमा तक कर छूट मिलती है। हालांकि ये एक लाख रुपये की सालाना कर बचत पर मिलने वाली छूट का ही हिस्सा है।

साल दर साल घर का सपना महंगा होता जा रहा है। मकान की कीमतें बढ़ती जा रही है साथ ही ब्याज दरें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में इस साल लाखों लोगों के घर का सपना सपना ही बना रहा। वो ऊंची बिल्डिंगों को बस दूर से ही देखते रहे। इसका असर रियल एस्टेट सेक्टर पर साफ दिखा। ज्यादातर रियल एस्टेट कंपनियों कर्ज तले दब गईं। ऐसे में होम लोन पर कर छूट की सीमा को तीन लाख रुपए तक बढ़ाने से ना केवल ग्रहकों को फायदा होगा बल्कि घरों की मांग बढ़ने से रियल एस्टेट सेक्टर को भी राहत मिलेगी।

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

बजट 2012-13: चार चुनौतियां

सरकार ने 16 मार्च को बजट पेश करने का ऐलान किया है। हालांकि सरकार के सामने इस बार चुनौतियां ज्यादा हैं। मंदी की चंगुल में फंसता जा रहा है देश। अमेरिका और यूरोपीय देशों के आर्थिक संकट में फंसने का साफ असर भारत पर दिखने लगा है। आर्थिक ग्रोथ रेट का अनुमान कम हो चुका है। साथ ही स्टैडर्ड एंड पुअर्स ने एक बार फिर से भारत की रेटिंग कम करने की चेतावनी दी है।

ऐसे में वित्त मंत्री जब 16 मार्च को बजट पेश करेंगे तो उनके सामने कई चुनौतियां होगीं। सबसे बड़ी चुनौती होगी सरकारी खर्चे को कम करने की। आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया की नीतियों पर काम करने की वजह से आज भारत के हर नागरिक पर 30000 रुपए से ज्यादा का कर्ज चढ़ चुका है। और इस खर्चे में साल दर साल बढ़ोतरी होती ही जाएगी। क्योंकि सरकारी खर्चे हर साल करीब 3 लाख करोड़ रुपया बढ़ रहा है। जिसके लिए सरकार को विदेशी संस्थाओं और बैंकों से कर्ज लेना पड़ता है।

अगर खर्चे में कटौती नहीं हुई तो इसका खामयाजा देश को भुगतना होगा। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने भारत सरकार को आगाह किया है कि अगर सरकार खर्चे पर लगाम नहीं लगाती तो भारत की इन्वेस्टमेंट रेटिंग निगेटिव की जा सकती है। फिलहाल भारत की रेटिंग बीबीबी माइनस है जो कि स्टेबल यानी स्थिर श्रेणी में आता है।
इसके अलावा सरकार के सामने जीडीपी ग्रोथ को बढ़ाने का एक बड़ा दबाव होगा। क्योंकि सीएसओ यानी सेंट्रल स्टैटिस्टिकल ऑर्गेनाइजेशन ने कहा है कि भारत की आर्थिक विकास दर साल 2011-2012 में 6.9 फीसदी तक रह सकती है। जो कि पिछले तीन सालों में सबसे कम है। विकास दर में गिरावट की मुख्य वजह है मैन्युफैक्चरिंग, एग्रिकल्चर और माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ में गिरावट की वजह से आर्थिक विकास दर में गिरावट आई है। सरकार ने पिछले बजट में 9 फीसदी आर्थिक विकास दर का लक्ष्य रखा था।

बजटीय घाटे को कम करना सरकार के लिए एक और सबसे बड़ी चुनौती है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार किसी भी देश के लिए 4 फीसदी से ज्यादा बजटीय घाटा सही नहीं माना जाता है। जबकि भारत का बजटीय घाट 6 फीसदी से ज्यादा है। यही नहीं अगर राज्यों के बजटीय घाटे से इसे जोड़ दिया जाए तो ये घाटा 10 फीसदी को पार कर जाएगा।

आर्थिक विकास दर में सुस्ती

सरकार ने 16 मार्च को बजट पेश करने का ऐलान किया है। हालांकि सरकार के सामने इस बार चुनौतियां ज्यादा हैं। मंदी की चंगुल में फंसता जा रहा है देश। अमेरिका और यूरोपीय देशों के आर्थिक संकट में फंसने का साफ असर भारत पर दिखने लगा है। आर्थिक ग्रोथ रेट का अनुमान कम हो चुका है। साथ ही स्टैडर्ड एंड पुअर्स ने एक बार फिर से भारत की रेटिंग कम करने की चेतावनी दी है।

रेटिंग ऐजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने भारत सरकार को आगाह किया है कि अगर सरकार खर्चे पर लगाम नहीं लगाती। तो भारत की इन्वेस्टमेंट रेटिंग निगेटिव की जा सकती है। फिलहाल भारत की रेटिंग बीबीबी माइनस है जो कि स्टेबल यानी स्थिर श्रेणी में आता है। भारत का व्यापार घाटा, राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और बजटीय घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसी तमाम परेशानियों से सरकार कैसे निबटेगी इसका फैसला बजट 2012-2013 में होगा।

कई राज्यों में हो रहे चुनावों की वजह से वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी इसबार 16 मार्चे को आम बजट पेश करेंगे।भारत की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती दिख रही है। आर्थिक विकास दर में भारी गिरावट की संभावना जताई जा रही है। भारत की आर्थिक विकास दर साल 2011-2012 में 6.9 फीसदी तक रह सकती है। जो कि पिछले तीन सालों में सबसे कम है। सरकारी आंकड़ों में ये बात सामने आई है। सेंट्रल स्टैटिस्टिकल ऑर्गेनाइजेशन यानी सीएसओ के आंकड़ों में ये बात कही गई है। विकास दर में गिरावट की मुख्य वजह है मैन्युफैक्चरिंग, एग्रिकल्चर और माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ में गिरावट की वजह से आर्थिक विकास दर में गिरावट आई है।

पिछले वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 8.4 फीसदी थी। कृषि क्षेत्र में विकास दर 2011-12 में घटकर 2.5 फीसदी रहने का अनुमान है। जबकि 2010-11 में ये 7 फीसदी थी। विनिर्माण क्षेत्र में विकास दर घटकर 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जो कि पिछले वित्त 7.6 प्रतिशत थी। सीएसओ का जीडीपी विकास दर का अनुमान रिजर्व बैंक के अनुमान से कम है। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में आर्थिक विकास दर 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। वहीं सरकार ने पिछले वर्ष फरवरी में बजट से पूर्व समीक्षा में आर्थिक विकास दर 9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। कुंद हो रही देश की आर्थिक दशा को अगर समय रहते नहीं संभाला गया तो देश एकबार फिर बुरी तरह मंदासुर की जाल में फंस सकता है। जिससे निकले में इसे वर्षों लग जाएंगे।

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

एसबीआई के डिफाउल्टर होंगे बेनक़ाब

देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक स्टेट बैंक इंडिया अब अपने डिफाउल्टरों के फोटो अखबार में छापवाने पर विचार कर रहा है। ताकि लोन ना चुकाने वालों पर उसे वापस करने का दबाव बनाया जा सके। एसबीआई से लोन लेकर उसे नहीं चुकाने वालों में कई बिजनेसमैन शामिल हैं। बैंक के बैड लोन में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी कॉरपोरेट लोन की ही है। हालांकि फोटो छापने से पहले बैंक लोन ना चुका पाने वालों को नोटिस भेजेगा। ग्यारह सितंबर 2011 तक बैंक का कुल बैड लोन 33946 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। जो कि एक साल पहले तक 23205 करोड़ रुपए था। ऐसे में बड़ी-बड़ी कारों में चलने वाले और आलीशान बंगलो में रहने वालों के फोटो और नाम आने वाले दिनों अखबारों में डिफाउल्टर की मुहर के साथ दिखना आम हो जाएगा। और अगर इस बदनामी की बड़े लोगों या बिजनेसमैन को चिंता होगी तो वो समय पर ज़रुर अपना लोन देंगे या जानबूझकर डिफाउल्टरों में शुमार होने से बचेंगे। एसबीआई फिलहाल ऐसा ही सोच रही है। लेकिन ये देखने वाली बात होगी कि आज के बिजनेसमैन में बदनामी को लेकर किस तरह की भावना है।

पिरामल खरीदेगी वोडाफ़ोन में 5.5% हिस्सेदारी

पिरामल ग्रुप वोडाफोन इंडिया में 5.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी। पिरामल हेल्थकेयर के अनुसार इस हिस्सेदारी के लिए उसे 3007 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। कंपनी ये हिस्सेदारी एस्सार से खरीदेगी। इसके बाद वोडाफोन में एस्सार की हिस्सेदारी खत्म हो जाएगी। जबकि पिरामल की हिस्सेदार बढ़कर 11 फीसदी तक पहुंच जाएगी। पिरामल ग्रुप ने पिछले साल वोडाफोन-एस्सार ज्वाइंट वेंचर में से एस्सार की 5.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। जबकि वोडाफोन ने एस्सार की 22 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। पिरामल के पास फिलहाल 100 अरब डॉलर से ज्यादा की कैश रकम है। जो कि कंपनी को अपनी दबाई बिजनेस अमेरिकी कंपनी एबोट को बेचने से मिली है।

सोने और चांदी की चमक फ़ीकी

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं की चमक फीकी पड़ती जा रही है। जबरदस्त बिकवाली के दबाव में दिल्ली में सोना 600 रुपए लुढ़क गया। जिससे दिनभर के कारोबार के दौरान प्रति 10 ग्राम सोने का भाव 28040 रुपए पर जा पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में गिरावट का असर भारतीय सर्राफा बाजार में देखने को मिल रहा है। चांदी की कीमतों पर भी बिकवाली की मार साफ दिखाई दे रही है। स्टॉकिस्टों ने चांदी में आज जमकर मुनफावसूली की। जिससे दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी 1590 रुपए लुढ़क गया। बिकवाली के दबाव में प्रति किलो चांद का भाव 55650 रुपए पर जा पहुंचा।

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

1 फैसले ने छीन ली 9 कंपनियों की 122 लाइसेंस!

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से टेलीकॉम कंपनियों को जरूर झटका लगा है। लेकिन टेलीकॉम रेग्युलेटर ट्राई का कहना है कि इसका असर ग्राहकों पर कम ही देखने को मिलेगा। क्योंकि जिन कंपनियों के 122 टूजी लाइसेंस रद्द हुए हैं उनके पास केवल 5 फीसदी ग्राहक हैं।

टेलीकॉम रेग्युलेटर ट्राई का कहा है कि देशभर के टेलीकॉम ग्राहकों को ज्यादा घबराने की ज़रूरत नहीं है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के 122 टूजी लाइसेंस रद्द करने के फैसले से ज्यादातर ग्राहकों पर असर नहीं पड़ेगा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने जो लाइसेंस रद्द किए हैं वो 9 टेलीकॉम कंपनियों के हैं। जिनके पास केवल 5 फीसदी ग्राहक हैं। और बाकी के 95 फीसदी ग्राहक उन टेलीकॉम ऑपरेटर्स के हैं जिन्होंने 2008 से पहले 2जी लाइसेंस लिए हैं।

जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द हुए हैं उनके नाम हैं यूनिटेक वायरलेस (22 लाइसेंस),लूप टेलीकॉम(21 लाइसेंस),एस श्याम(21 लाइसेंस), टाटा टेली(3 लाइसेंस), एतिस्लत डीबी(15 लाइसेंस), एस टेली(6 लाइसेंस), वीडियोकॉन(21 लाइसेंस), आइडिया(9 लाइसेंस), और स्पाइस(4 लाइसेंस)। पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इन कंपनियों को ये लाइसेंस का बंदरबांट किया गया था।

ट्राई ने कहा है कि जिस सर्किल में इन कंपनियों के पांच फीसदी ग्राहक हैं उन्हें एमएनपी का ऑप्शन होगा। यानी कि वे ग्राहक मोबाइल नंबर पोर्टेब्लिटी के जरिए एयरटेल, वोडाफोन या दूसरे ऑपरेटर में शिफ्ट करते हैं। और इसके लिए ग्राहकों को विज्ञापनों के जरिए जानकारी दी जाएगी।