Monday, December 28, 2009

2009 में बाजार हुआ गुलजार

भारतीय शेयर बाजार के 2009 ऐतिहासिक रहा। इस साल शेयर बाजार में कुछ निवेशकों ने जमकर पैसे डुबाए तो कुछ निवेशकों ने मोटी कमाई की। साल के शुरुआत में दुनियाभर में छाई मंदी का साफ असर भारतयी शेयर बाजार पर देखा गया। कंपनियों के मुनाफे लगातार कम होने लगे इससे घबरकार देशी और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने जबरदस्त बिकवाली की। जिसे बाजार धड़ाम से नीचे गिर पड़ा। मार्च 2009 में सेंसेक्स साल भर के अपने न्यूनतम स्तर यानी 8069 पर पहुंच गया। लेकिन देश में फिर से यूपीए की सरकार के गठन होने के बाद एक बार फिर से निवेशकों का विश्वास भारतीय बाजार में लौटा और देखते ही देखते सेंसेक्स दिसंबर तक 17 हजार के जादुई आंकड़े को पार कर गया। 17 दिसंबर को सेंसेक्स 19 महीनों के अपने उच्चतम स्तर यानी 17360 पर बंद हुआ। इस तेजी के सबसे बड़ी वजह हैं विदेशी संस्थागत निवेशक। जिन्होंने इस साल नवंबर तक भारतीय शेयर बाजार में 80500 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड निवेश किया। जिसकी वजह से भारतीय शेयर बाजार 1991 से अबतक एक साल में सबसे ज्यादा बढ़त बनाने का रिकॉर्ड कायम कर दिया। अगर दिसंबर 2008 से दिसंबर 2009 तक दुनियाभर के बाजारों से भारतीय बाजार की तुलना करें तो सबसे ज्यादा बढ़त बनाने वाले कुछ देशों में ये शुमार हो चुका है। दुनियाभर में सबसे ज्यादा बढ़त बनाने वाले बाजार में पहले नंबर पर रहा श्रीलंका का बाजार। जो 119 फीसदी बढ़ा। 118 फीसदी बढ़त के साथ दूसरे नंबर पर रहा रुस का बाजार। वहीं 82 फीसदी की बढ़त के साथ तीसरे नबंर पर रहा इंडोनिशाया का बाजार जबकि भारत और ब्राजील का बाजार करीब 80 फीसदी की बढ़त के साथ चौथे नंबर पर रहा। जानकारों का मानना है कि जिस तरह कंपनियों के नतीजों में सुधार हो रहा है। उसे देखकर यही लगता है कि आने वाले साल में बाजार एक बार फिर से 21000 के आंकड़े को छू लेगा।

टीटीडब्ल्यू: टेलीकॉम टैरिफ वॉर 2009

2009 में मोबाइल ग्राहकों की रही चांदी। टेलीकॉम कंपनियां भी हर महीने करीब 1 करोड़ नए मोबाइल ग्राहक जोड़ती रही। लेकिन कंपनियों की कमाई में इजाफा नहीं हो पाया। क्योंकि ग्राहक भले ही बढ़ते गए लेकिन सस्ते प्लान के वजह से कंपनियों को इसका फायदा नहीं मिल सका। जिससे टेलीकॉम कंपनियों का बिगड़ता रहा बैलेंस शीट। यानी कि टेलीकॉम इंडस्ट्री और मोबाइल ग्राहक दोनों के लिए वर्ष 2009 यादगार रहेगा। क्योंकि टैरिफ वॉर के चलते कंपनियों को जहां भारी नुकसान उठाना पड़ा वहीं ग्राहकों को एक से बढ़कर एक सस्ती सकीम्स मिली जिससे उनका मोबाइल बिल काफी कम हो गया।टेलीकॉम कम्पनियों के बीच करीब एक दशक से कॉल दरों में मिनट्स को लेकर जारी घमासान अब सेकेण्ड्स में पहुंच गया। मोबाइल ग्राहकों को दस साल पहले प्रति मिनट करीब 10 रुपए खर्च करने पड़ते थे। जो अब 20 पैसे प्रति मिनट पर सिमट चुकी है। जानकारों का मानना है कि भाले ही कंपनियों की बैलेंस शीट खराब हो रही हो लेकिन इससे मोबाइल ग्राहकों को आने वाले दिनों में भी फायदा मिलता रहेगा। क्योंकि जैसे जैसे टेलीकॉम सेक्टर में कंपनियों की संख्या बढ़ेगी कॉल रेट में करीब 15 फीसदी की और गिरावट आ सकती है। साल 2009 के शुरूआत में मोबाइल ग्राहकों की संख्या करीब 38 करोड़ 50 लाख थी साल के अंत तक बढ़कर करीब 50 करोड़ तक पहुंच गई है। भले ही हर महीने करीब 1 करोड़ नये मोबाइल ग्राहक जुड़ रहे हों लेकिन मोबाइल कंपनियों की कमाई लगातार कम होती जा रही है। और इसका असर टेलीकॉम कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिल रहा है। इस साल इनके शेयर करीब 27 फीसदी लुढ़क गए। जानकारों की माने तो टेलीकॉम इंडस्ट्री की इस साल सितंबर महीने की तिमाही में कुल कमाई रही 38755 करोड़ रुपए रही, जो कि पिछले साल की तुलना में काफी कम है। जबकि इस दौरान करीब 12 करोड़ 50 लाख नए मोबाइल ग्राहक जुड़ चुके हैं। दिसंबर 2008 की तिमाही में टेलीकॉम कंपनियों की कुल कमाई थी 39408 करोड़ रुपए। जून 2009 में टाटा टेलीसर्विसेज ने जापानी कंपनी डोकोमो के साथ मिलकर प्रति सेकेंड के हिसाब से बिलिंग स्कीम की शुरुआता की। जो कि किसी क्रांति से कम नहीं था। इसके बाद तो एक के बाद एक सभी टेलीकॉम कंपनियों ने इस तरह के सस्ते स्कीम्स की बरसात कर दी। अपने ग्राहकों को बचाए रखने के लिए इस टैरिफ वॉर में एयरटेल और वोडाफोन जैसे दिग्गज कंपनियों को भी कूदने पड़ा। एडीएजी समूह की रिलायंस कम्युनिकेशन ने 50 पैसे प्रति मिनट से शुरु कर 1 पैसे प्रति सेकेंड और एक रूपए में तीन मिनट के बाद 20 पैसे प्रति मिनट की योजना शुरू कर तेजी से ना केवल अपने ग्राहकों को बचाए रखा बल्कि दूसरे टेलीकॉम कंपनियों के ग्राहकों को भी कुछ हद तक अपनी ओर खींचने में कामयाब रहा। हालांकि इतनी सस्ती स्कीम्स की वजह से कंपनी की कमाई लगातार कम होती रही। जमे जमाए टेलीकॉम कंपनियों के लिए भी इस तरह के सस्ते स्कीम्स लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा। क्योंकि नई इंट्री लेने वाली कंपनियों ने कई लुभावने और सस्ते स्कीम्स की झड़ी लगा दी। टेलीकॉम क्षेत्र में कदम रखते ही एक नई कंपनी एमटीएस ने तो आधा पैसा प्रति सेकेंड की नई स्कीम जारी कर पहले से जमे जमाए कंपनियों के हजारों ग्राहकों को अपने साथ ले लिया। कुल मिलाकर अगर कहें तो 2009 मोबाइल ग्राहकों के लिए काफी बेहतर साबित हुआ।

Saturday, November 28, 2009

'दुबई वर्ल्ड' से दुनिया परेशान!

दुबई कर्ज संकट ने दुनियाभर के बाजारों को हिला कर रख दिया। दुबई की सरकारी कंपनी दुबई वर्ल्ड ने कर्ज वापस करने के मामले में हाथ खड़े कर दिए हैं। कंपनी ने कर्ज देने वाले फर्म से 6 महीने की मोहलत मांगी है। दुबई की इस कंपनी को 59 अरब डॉलर का कर्ज चुकता करना है। दुनियाभर में छाई आर्थिक मंदी का इस कंपनी पर बहुत बुरा असर पड़ा है। अब जहां पूरी दुनिया मंदी से उबरने में लगी थी। ठीक उसी समय दुबई वर्ल्ड में छाई आर्थिक संकट ने एकबार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। दुबई वर्ल्ड की आर्थिक स्थिति नाजुक होने की वजह से यूरोप, एशिया सहित दुनियाभर के बाजार लुढ़क गए। हालांकि भारत सरकार का मानना है कि दुबाई कर्ज संकट का भारत पर बहुत कम असर पड़ेगा। और इस संकट से घबराने की जरुरत नहीं है। भारत की कई कंपनियों के पैसे दुबई में लगे हैं। जिसमें प्रमुख हैं।नागार्जुना कंस्ट्रक्शन, लार्सन एंड टुब्रो, पुंज लॉयड, बैंक ऑफ बड़ोदा, वोल्टास, ऑमैक्स, अबन ऑफशोर, स्पाइसजेट और इंडियाबुल्स रियल एस्टेट। दुबई में भारतीय बैंकों और कंपनियों का एक्सपोजर करीब 7000 करोड़ रुपए का आंका जा रहा है। जिसमें सबसे ज्यादा 5000 से 6500 करोड़ रुपए बैंकों के हैं। ऐसा अनुमान है कि बैंक ऑफ बड़ौदा का 5000 करोड़ रुपए और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का 1500 करोड़ रुपए दुबई वर्ल्ड में लगे हैं। भारतीय कंपनियों में से एलएंडटी का 100 करोड़ रुपए और नागार्जुना कंस्ट्रक्श का 400 करोड़ रुपए का ऋण जोखिम आंका गया है। जब अमेरिका और यूरोप में मंदी की आंधी चल रही थी उस समय एशिया में इसका कम असर देखा जा रहा था। लेकिन अब जहां पूरी दुनिया मंदी से निकलने को तैयार हो रही थी तो एशिया में भूचाल आ गया। दुनिया की सबसे बड़ी निवेश कंपनियों में से एक दुबई वर्ल्ड के पास कर्ज चुकाने के पैसे नहीं हैं। अगर दुबई वर्ल्ड कोई प्राइवेट कंपनी होती तो शायद इतनी हाय तौबा नहीं मचती। लेकिन ये दुबई की सरकारी कंपनी है यानी कंपनी के पास पैसे नहीं होने का मतलब है दुबई सरकार के पास पैसे का नहीं होना। ऐसे में सबसे ज्यादा मुसीबत में फसेंगे यूरोप के बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट। जिनका दुबई वर्ल्ड में सबसे ज्यादा पैसे लगे हैं। दुबई में हॉलीवुड स्टार ब्रैड पिट और फुटबॉलर डेबिड बेखम ने भी सम्पत्तियों में भारी निवेश किया है। इन सम्पत्तियों के दाम तेजी से लुढ़क गए हैं। बॉलीवुड बादशाह शाहरुख खान के भी करोड़ों रुपए दुबई में लगे हैं। दुबई कर्ज संकट के असर से लंदन में सोना गुरूवार को अब तक की रिकॉर्ड ऊंचाई 1194.40 डॉलर प्रति औंस से 5 फीसदी गिरकर 1140 डॉलर पर पहुंच गया तो कच्चे तेल के भाव 74 डॉलर प्रति बैरल तक लुढ़क गए। जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग क्षेत्र का दुबई वर्ल्ड में करीब 12 अरब डॉलर का निवेश हो सकता है। हालांकि दुनियाभर के ज्यादातर बैंक,निवेशक या कंपनियां इसे कबूल करने से बच रही हैं। क्योंकि उनके हां करते ही उनके शेयर धड़ाम से गिर पड़ेंगे चाहे वो दुनिया के किसी भी एक्सचेंज में लिस्टेड हों। अब आप जरुर जानना चाहेंगे आखिर क्या है दुबई वर्ल्ड जिसने अपने नाम के अनुसार पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। दुबई वर्ल्ड एक इन्वेस्टमेंट कंपनी है। जो दुबई सरकार के प्रोजेक्ट्स और इंडस्ट्री को संभालती है। दुबई को पिछल एक दशक में ट्रेडिंग, कमर्स और टूरिज्म हब बनाने में इस कंपनी का अहम योगदान रहा है। पिछले 6 वर्षों की लगातार तेजी के बाद दुबई का रियल एस्टेट मार्केट सुस्त पड़ गया। जिसने इस कंपनी को संकट में फंसा दिया। अब दुबई में घर के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। क्योंकि यहां बने घर एंड यूजर्स तक नहीं पहुंच पाए। दुबई और दुनियाभर के ज्यादातर लोगों ने निवेश के नजरिए से इसे खरीदा था। जो अब उसे बेचकर निकलना चाह रहे हैं। लेकिन उन्हें आधी कीमत पर भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। अगर ये घर उन्हें बेचे जाते जो सचमुच वहां रहना चाह रहे हों तो आज ये नौबत ही नहीं आती।

Friday, October 30, 2009

मिल गए रिलायंस के कुल गैस के खरीदार

भले ही रिलायंस के केजी बेसिन से निकलने वाले गैस की कीमतों को लेकर अभी भी उहापोह की स्थिति बनी हुई हो लेकिन इस बेसिन से निकलने वाले अतिरिक्त गैस के बंटवारे पर मंत्रियों के समूह ने फैसला सुना दिया है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह ने सबसे ज्यादा गैस पावर सेक्टर को देने पर मुहर लगा दी है। पावर सेक्टर को रिलायंस के कुल अतिरक्त गैस का दो तिहाई हिस्सा दिया जाएगा। मंत्रियों के समूह ने 50 मिलियन यूनिट गैस के बंटवारे पर मुहर लगाई है। और इसे दो हिस्से में बांटा है। 20 मिलियन यूनिट गैस फर्म बेसिस पर दिया जाएगा। यानी जिस सेक्टर के नाम तय कर दिए गए हैं उसे गैस मिलना तय है। वहीं 30 मिलियन यूनिट गैस टेम्परोरी बेसिस पर देने का फैसला किया गया है। यानी उत्पादन होने पर उन्हें गैस दी जाएगी। फर्म बेसिस पर पावर सेक्टर को 13 मिलियन यूनिट गैस दी जाएगी। जबकि रिफाइनरी को 5.384 मिलियन यूनिट गैस मिलेगी। वहीं पेट्रोकेमिकल्स को 1.918 मिलियन यूनिट गैस आवंटित की गई है। फर्टिलाइजर सेक्टर के लिए 0.178 मिलियन यूनिट गैस देने की बात कही गई है। वहीं स्टील सेक्टर को 0.44 मिलियन यूनिट गैस दी जाएगी। टेम्परोरी बेसिस पर पावर सेक्टर को 12 मिलियन यूनटि गैस दी जाएगी। जबकि कैपटिव पावर प्लांट को 10 मिलियन यूनिट गैस दी जाएगी। वहीं सिटी गैस पावर प्लांट को टेम्परोरी बेसिस पर 2 मिलियन यूनिट गैस दी जाएगी। और रिफाइनरी को 6 मिलियन यूनिट गैस मिलेगी। आने वाले दिनों में रिलायंस के केजी बेसिन के डी 6 ब्लॉक से गैस के उत्पादन में जबरदस्त तेजी देखने को मिलेगी। औऱ इस तेजी के पीछ छोटे भाई अनिल अंबानी के आरोप का भी अहम योगदान है। अनिल अंबानी ने बड़े भाई मुकेश अंबानी की कंपनी पर जानबूझकर गैस कम उत्पादन करने का आरोप लगाया था। डी 6 ब्लॉक से हर दिन अधिकतम 90 मिलियन यूनिट गैस की उत्पादन हो सकती है। जिसके खरीदारों की लिस्ट तैयार कर दी गई है। 40 मिलियन यूनिट गैस पहले ही पावर और यूरिया सेक्टर को आवंटित किया जा चुका है। बाकी बचे 50 मिलियन यूनिट गैस के भी खरीदार तय हो गए हैं। फिलहाल रिलायंस 40 मिलियन यूनिट गैस का उत्पादन हर दिन कर रही है। और दिसंबर तक ये बढ़कर 60 मिलियन यूनिट तक पहुंच जाएगा। उसके बाद ये अपने अधिकतम स्तर 90 मिलियन यूनिट प्रति दिन तक पहुंच सकता है। अब केवल इंतजार है प्रोडक्शन बढ़ने और कीमत तय होने की।

रॉबिन रैना: ग्रोथ का रॉबिन हुड

फास्टेस्ट ग्रोथ वाली फॉर्च्यून 100 कंपनियों में एबिक्स नं.4 कंपनी की शुरुआत करना ही अपने आप में एक बड़ी बात होती है। फिर उसको सफल बनाने के लिए एड़ी चोटी का पसीना बहाना पड़ता है। और बड़ी मुश्किल औऱ मेहनत के बाद 1 फीसदी से भी कम कंपनियां सफलता का स्वाद चख पाती हैं। और अगर फॉर्च्युन की लिस्ट में जगह बनाने की बात करें तो दशकों तक चलने के बाद भी बड़ी मुश्किल से हजारों में से कोई एक कंपनी फॉर्च्युन की लिस्ट में अपनी जगह बना पाती है। और अगर कोई कंपनी फॉर्च्युन की लिस्ट में जगह बनाने में कामयाब होती है तो उसे दुनियाभर में एक बड़ी बात मानी जाती है। लेकिन एक अप्रवासी भारतीय रॉबिन रैना की कंपनी ने बिजनेस जगत में ऐसा कर दिखाया है। रॉबिन की सॉफ्टवेयर कंपनी ने ग्रोथ के मामले में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, नोकिया जैसी दुनिया की दिग्गज कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। एबिक्स दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली कंपनियों की लिस्ट में शुमार हो गई है। - सबसे तेज ग्रोथ वाली फॉर्च्युन 100 कंपनियों की लिस्ट में एबिक्स को चौथे स्थान पर रखा गया है। एबिक्स दुनियाभर में ऑन डिमांड सॉफ्टवेयर और ई कॉमर्स सॉल्युशन मुहैया कराती है। - जबिक पहले नंबर पर है कनाडा की कंपनी रिम, जो कि ब्लैकबेरी फोन बनाती है । - वहीं दूसरे नंबर पर है चिप बनाने वाली अमेरिकी कंपनी सिग्मा डिजाइन।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्लू रे की बढ़ती मांग का फायदा इस कंपनी को मिल रहा है। - तीसरे पायदान पर है एक चाइनीज कंपनी शोउ डॉट कॉम । इस कंपनी का अपना एक सर्च इंजन है साथ ही इसकी चांगयोऊ गेम साइट बहुत तेजी से बढ़ रही है। - आईफोन और आईपॉड बनाने वाली कंपनी एप्पल है 35वें स्थान पर। - जबकि दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन चलाने वाली कंपनी गूगल है 68वें पायदान पर। - फॉर्च्युन की सबसे तेज बढ़ने वाली 100 कंपनियों में केवल एक भारतीय कंपनी इंफोसिस को शामिल किया गया है। इंफोसिस आखिरी स्थान पर यानी 100वें नंबर पर है। एक अप्रवासी भारतीय की कंपनी एबिक्स ने ना केवल भारत की सभी कंपनियों को ग्रोथ के मामले में पीछे छोड़ा है बल्कि दुनिया की कई दिग्गज कंपनियों को भी पानी पिला दिया है। एबिक्स ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, नोकिया और एप्पल जैसी दुनिया की नामी गिरामी कंपनियों को ग्रोथ के मामले में काफी पीछे छोड़ दिया है। एबिक्स ने दुनियाभर में तेजी से बढ़ने वाले इंश्योरेंस सेक्टर को टार्गेट किया है। जिसका फायदा इस कंपनी को मिलने लगा है। शायद यही वजह है कि फॉर्च्युन ने दुनिया में निवेश के लिए सबसे बेहतर कंपनियों की लिस्ट में एबिक्स को दूसरे नंबर पर रखा है। एबिक्स इंश्योरेंस एक्सचेंज का भी काम करती है। एबिक्स को इस ऊंचाई तक पहुंचाने में कंपनी के सीईओ रॉबिन रैना का अहम योगदान रहा। अप्रवासी भारतीय रॉबिन रैना अमेरिका के अटलांटा से एबिक्स को चलाते हैं। एबिक्स दुनियाभर में ऑन डिमांड सॉफ्टवेयर की सप्लाई करती है। साथ ही दुनियाभर में इंश्योरेंस सेक्टर के लिए ई कॉमर्स सर्विस भी मुहैया कराती है। एबिक्स की भारत, सिंगापुर, अमेरिका,न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सिहत दुनियाभर में फिलहाल 23 ऑफिसेस हैं। आने वाले दिनों में भारत में जैसे जैसे इंश्योरेंस सेक्ट में तेजी एबिक्स की पकड़ इस इंडस्ट्री पर और मजबूत होगी।

Tuesday, October 27, 2009

क्रेडिट पॉलिसी का ऐलान

महंगाई और ग्रोथ के बीच तालमेल की कोशिश रिजर्व बैंक ने क्रेडिट पॉलिसी का ऐलान कर दिया है। क्रेडिट पॉलिसी की दूसरी तिमाही की समीक्षा करते हुए रिजर्व बैंक ने किसी भी अहम दरों के साथ छेड़ छाड़ नहीं किया है। - केवल एसएलआर में 1 फीसदी का इजाफा किया है । जिससे एसएलआर 24 फीसदी से बढ़कर 25 फीसदी पर पहुंच गया है। - एसएलआर में एक फीसदी की बढ़ोतरी की वजह से सिस्टम से 30000 करोड़ रुपए बाहर हो जाएंगे। - और इससे सरकार को महंगाई पर लगाम लगाने में मददद मिलेगी। - बैंक रेट, सीआरआर, रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। - सीआरआर 5 फीसदी, रेपो रेट 4.75 फीसदी, रिवर्स रेपो रेट 3.2 फीसदी और बैंक रेट 6 फीसदी पर बना रहेगा। - रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2010 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट 6 फीसदी रहने का अनुमान लगया है। - जबकि रिजर्व बैंक ने अगले साल मार्च तक महंगाई दर के 6.5 फीसदी पर पहुंचने की आशंका जताई है। हालांकि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी रिजर्व बैंक के जीडीपी विकास दर के अनुमान से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि रिजर्व बैंक ने विकास दर के जो अनुमान लगाए हैं वो कुछ ज्यादा ही कंजरवेटिव हैं। औद्योगिक चैंबर्स में क्रेडिट पॉलिसी को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया मिली है। महंगाई और ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए आरबीआई इस क्रेडिट पॉलिसी का ऐलान किया है। ग्रोथ में जान फूंकने के लिए ज्यादातर अहम दरों को नहीं टच किया गया है। क्योंकि मंदी के बाद मॉनसून में कमी और देश के कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति से कृषि क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की कमाई कम हो सकती है। और इसका असर ये होगा कि पहले से सुस्त पड़ा डिमांड और सुस्त हो जाएगी। ऐसे में अहम दरों को नहीं छूते हुए केवल एसएलआर बढ़ाकर आरबीआई ने महंगाई पर कुछ लगाम कसने की कोशिश की है। साथ ही ग्रोथ का रास्ता भी खुला रखा है।

Saturday, October 24, 2009

9 बजे से 5 बजे तक खरीदो शेयर!

मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने शेयर बाजार के कारोबार समय में ढील देते हुए इसे 9 बजे सुबह से 5 बजे शाम तक बढ़ाने की इजाजत दे दी है। काफी समय से बीएसई,एनएसई कारोबार के समय की सीमा में छूट की मांग कर रहे थे। समय सीमा बढ़ने से ज्यादातर निवेशकों को फायदा होगा। निवेशक यूरोपीय बाजार के खुलने के बाद ज्यादा समय तक भारतीय बाजार में कारोबार कर पाएंगे। साथ ही अपने काम निपटाकर आराम से बाजार में खरीद फरोख्त कर पाएंगे। फिलहाल भारतीय शेयर बाजार सुबह 9.55 में खुलते हैं और शाम को 3.30 बजे बंद हो जाते हैं। हालांकि बीएसई या एनएसई ने फिलहाल समय सीम बढ़ाने का ऐलान नहीं किया है। लेकिन सेबी की हरी झंडी मिल जाने के बाद ऐसा अनुमान लगाया जा रहा कि जल्द ही दोनों एक्सचेंज इसकी घोषणा करेंगे।

सरकार को 60 हजार करोड़ का चूना!

सरकारी पैसा चूसने वाला वाला राजा का मनी आर्ट स्टांस टेलिकॉम मिनिस्ट ए राजा ने जनवरी 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम और टेलीकॉम सर्विस शुरू करने का लाइसेंस कौड़ियों के भाव कंपनी को बांट दिए। इससे सरकार को करीब 60 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। राजा ने ऐसा क्यों किया और इससे राजा को क्या मिला साथ ही क्यों इतनी कम कीमत पर लाइसेंस बांटी गई इसकी जानकारी हासिल करने के लिए सीबीआई रात दिन एक कर छापे मार रही है। कल देशभर में करीब 19 जगहों पर सीबीआई ने छापे मारे हैं। वहीं परसो संचार भवन पर भी सीबीआई ने छापे मार कर कुछ अहम दस्तावेज हासिल किए हैं। वर्ष 2001 में फिक्स की गई कीमत पर राजा ने जनवरी 2008 में लाइसेंस और स्पेक्ट्रम को लुटा दिया। जबकि 7 सालों में टेलीकॉम क्षेत्र में आई क्रांती की वजह से और दुनियाभर की कंपनियों की भारत पर नजर होने से कीमतें कई गुणा ज्यादा होनी चाहिए थी। लेकिन राजा ने पुरानी कीमत पर ही लाइसेंस पहले आओ पहले पाओ के आधार पर बेच दिया। कीमतों में अनदेखी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि है जिन कंपनियों ने लाइसेंस और स्पेक्ट्रम खरीदे उसके कुछ दिनों बाद ही कई गुणा ज्यादा कीमत पर उसे बेच दिया। यानी बाजार में कई गुणा ज्यादा कीमत पर लाइसेंस और स्पेक्ट्रम खरीदने वाले मौजूद थे लेकिन टेलीकॉम मंत्री ए राजा ने उनकी सुध नहीं ली। स्वान ने 1537 करोड़ रुपए में देश के 13 सर्किल में टेलीकॉम सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस खरीदा। और एक महीने के अंदर इसका 45 फीसदी हिस्सा सउदी अरब की कंपनी अतिसलत को 4500 करोड़ रुपए में बेच दिया। ठीक इसीतरह रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक को 22 सर्किल में टेलीकॉम सर्विस शुरू करने के लिए केवल 1651 करोड़ रुपए में लाइसेंस बेच दिया गया। यूनिटेक ने इसका केवल 60 फीसदी हिस्सा नार्वे की कंपनी टेलीनॉर को 6120 करोड़ में बेच लिया। इन दो उदाहरणों को देखकर तो यही लगता है कि ए राजा ने कौड़ियों के भाव लाइसेंस बांटे हैं जिससे सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ए राजा डीएमके पार्टी से हैं जो कि केंद्र सरकार की सहयोगी पार्टी है। और सीबीआई भी केंद्र सरकार ही संभालती है। ऐसे में कुछ खास रिजल्ट की संभावना नहीं दिख रही है। यूपीए से डीएमके को बाहर करने के बाद ही इस महा घोटाने की जड़ तक पहुंचना केंद्र सरकार के लिए संभव हो पाएगा।

Thursday, October 22, 2009

लो आ गया विंडोज 7

माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज 7 लांच कर दिया है। विंडो 7 कई आधुनिक तकनीक से लैस है।माइक्रोसॉफ्ट के मालिक बिल गेट्स को अपने इस विंडो से काफी उम्मीदें हैं। उनका मानना है कि विंडो 7 एक बार फिर से कंप्यूटर की दुनिया में क्रांति ला देगा। तीन साल पहले आए विंडोज विस्टा के सुपर फ्लॉप शो के बाद विंडोज-7 के बारे में जो शुरुआती सिग्नल मिले हैं, वे बेहद उत्साहजनक हैं। जो करिश्मा आपने आई-फोन पर देखा है वो अब आपके लैपटॉप या पीसी की स्क्रीन पर दिखेगा। आइए हम आपको बताते हैं विंडोज 7 से सात सबसे अहम फीचर्स क्या हैं। - इसे बंद करने और स्टार्ट करने में लगेगा कम वक्त - इसमें है टच स्क्रीन की सुविधा यानी अपकी उंगली काम करेगी माउस का - विंडो सेवन में फाइल्स को पासवर्ड से प्रोटेक्ट कर होम ग्रुप के साथ शेयर करने की सुविधा है - किसी भी ड्राइव में सेव की गई फाइलों को आप एक क्लिक से एक्सेस कर पाएंगे - विंडो सेवन में है ज्यादा जरूरी आइकन जोड़ने की सुविधा है। साथ ही माउस टच से विंडो प्रिव्यू करने की सुविधा है - विंडो 7 में पसंदीदा प्रोग्राम की लिस्ट सीधे एक्सेस की जा सकती है। साथ ही एक्सप्लोरर-8 पर वेबसाइट्स की लिस्ट देख सकते हैं - यही नहीं विंडो सेवन में मोबाइल, कैमरा, प्रिंटर के साथ पीसी का आसान कनेक्शन की भी सुविधा है विंडो सेवन आपके कमप्यूटर एक्सपीरियंस को और अनोखा बना देगा। टचस्क्रीन वाले कंप्यूटरों पर नया यूजर एक्सपीरियंस मिलेगा और माउस और की-बोर्ड के अलावा स्क्रीन को छूकर भी आप काम कर सकेंगे। साथ ही पीसी को पहले से ज्यादा तेज, सेफ और स्मार्ट बनाने के लिए भी इसमें बहुत से फीचर्स हैं। विंडोज-7 आने वाले दिनों में कम्प्युटर्स की दुनिया में एक अलग खिड़की खोलेगा। जो कम्प्यूटर ऑपरेंटिंग सिस्टम को एक नई बुलंदी तक पहुंचाएगा। कंपनी को उम्मीद है कि विंडो विस्टा की असफलता से माइक्रोसॉफ्ट को जो नुकसान हुआ था उसकी भरपाई विंडोज 7 से हो पाएगी।

Monday, September 21, 2009

भारत में 6 करोड़ की कार

अल्टीमेट एरो:दुनिया की सबसे तेज कार दुनिया की सबसे तेज कार भारत में धूम मचाने को तैयार है। भारत में जैसे जैसे लोगों के पास पैसे बढ़ रहे हैं। रफ्तार के दीवानों की संख्या भी उसी रफ्तार में बढ़ रही हैं। और इसे भुनाने के लिए दुनियाभर की कार बनाने वाली कंपनियों ने भारत की ओर अपना स्टेयरिंग मोड़ दिया है। अब कार के लिए करोड़ों रुपए खर्च में लोग नहीं हिचक रहे हैं। इसे देखते हुए कार बनाने वाली अमेरिकी कंपनी एसएससी यानी शेल्बी सुपरकार ने दुनिया में सबसे तेज चलने वाली अपनी कार अल्टीमेट एरो को भारतीय बाजार में उतारने का मन बनाया है। इसे सबसे पहले मुंबई में लांच किया जाएगा। उसके बाद इसे दिल्ली में लांच किया जाएगा। भारतीय बाजार में इस कार की कीमत होगी 6 करोड़ रुपए। इस कार की रफ्तार होगी प्रति घंटे 413 किलोमीटर। जी हां, यही वजह है कि इस कार को दुनिया में सबसे तेज रफ्तार वाली कार का तमगा हासिल है। दुनिया में कोई भी कार इसका पीछा नहीं कर सकती। ये है सुपर कार। जिसकी सवारी करने का सपना दुनियाभर में लोग देखते हैं।  भारत में सुपरकार के दीवानों के लिए ये किसी आश्चर्य से कम नहीं  है कि शेल्बी सुपरकार अपनी अल्टीमेट एरो को भारत में लांच करने वाली है। क्योंकि अबतक अमेरिका के अलावे इसे केवल रुस में ही लांच किया गया है। यानी भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश होगा जहां दुनिया की सबसे तेज चलने वाली कार बिकेगी।   दुनिया की सबसे तेज चलने वाली 6 करोड़ की इस टू सीटर कार में लगा है 6.35 लीटर की ट्वीन टर्बो वी8 इंजन। पावर है 1183 बीएचपी का।  यही वजह है कि हवाई जहाज की आधी स्पीड से आप इस कार में धूम मचा सकते हैं। ये कार बना है लाइटवेट टाइटेनियम और कार्बन फाइबर से। महज सवा दो घंटे में ये कार आपको दिल्ली से पटना पहुंचा देगी। जीरो से 60 की स्पीड पकड़ने में इस कार को लगती है महज 2.7 सेकेंड का समय। कंपनी का मानना है कि वो कुछ दर्जन कार हर साल भारतीय बाजार में बेच लेगी।

Tuesday, September 15, 2009

2.5 करोड़ मोबाइल बन जाएगा खिलौना!

क्या आपके मोबाइल का IMEI नंबर है? अगर नहीं तो 30 नवंबर के बाद आपका मोबाइल सेट बच्चों को खेलने वाला खिलौना बन जाएगा। क्योंकि केंद्र सरकार ने सभी मोबाइल ऑपरेटरों को बिना आईएमईआई वाले मोबाइल फोन्स पर 30 नंबवर तक कॉल के आने जाने पर रोक लगाने के आदेश दिए है। किसी भी मोबाइल का IMEI नंबर जांचने का तरीका बेहद आसान है। आपको बस दबाना है स्टार, हैस, जीरो, सिक्स और हैस। इसे दबाते ही आपके मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएगा 15 डिजीट का एक नंबर। जिसे कहते हैं IMEI नंबर यानी इंटरनेशनल मोबाइल इक्वीप्मेंट आइडेंटिटी नंबर। तीन महीने पहले सरकार ने बिना IMEI नंबर वाले मोबाइल के इंपोर्ट पर रोक लगा दी थी। लेकिन देश में तब तक इसतरह के करोड़ों मोबाइल बिक चुके थे। एक अनुमान के मुताबिक इस समय देश में करीब ढ़ाई करोड़ मोबाइल ऐसे हैं जिसमें IMEI नंबर नहीं हैं। यानी कि 30 नवंबर तक करीब 2.5 करोड़ मोबाइल ठप्प पड़ जाएंगे। इनकी रिंग टोन नहीं सुनाई देगी। इससे आम लोगों के साथ ही टेलीकॉम ऑपरेटर्स को भारी नुकसान उठाना  पड़ेगा।  सरकार ने जब इसतरह के मोबाइल पर प्रतिबंध लगाया था तो टेलीकॉम ऑपरेटर्स में खलबली मच गई थी। ऑपरेटर्स के दबाव की वजह से ही उस समय तक भारतीय बाजार में आ चुके बिना IMEI नंबर वाले मोबाइल फोन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सका था। क्योंकि ऑपरेटर्स ने दलील दी थी कि इस तरह के जो मोबाइल बिक चुके हैं उसे बाद में IMEI नंबर दे दिए जाएंगे। लेकिन तीन महीनों के बाद टेलीकॉम डिपार्टमेंट को लगा कि इसतरह से नंबर दे देने के बाद भी लोग फोन का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। क्योंकि बाद में दिए जाने वाले IMEI नंबर के लिए जो सॉफ्टवेयर बनेगा वो पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होगा। ऐसे में बिना IMEI नंबर के मोबाइल को बंद करने के सरकार के फैसले से करोड़ों ऐसे ग्राहकों को नुकसान होगा जो इसतरह के मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि उन्होंने मोबाइल खरीदते समय इस नंबर का ख्याल नहीं रखा। साथ ही हर महीने जो करीब 1 करोड़ मोबाइल ग्राहक जुड़ रहे थे उनकी संख्यां में भारी कमी आएगी। और टेलीकॉम ऑपरेटर्स को भी भारी नुकसान उठाना पडेगा। लेकिन इनसबसे ऊपर है देश की सुरक्षा। जिसे ध्यान में रखकर सरकार ने 30 नवंबर तक बिना IMEI नंबर वाले मोबाइल पर किसी भी तरह के इनकमिंग या आउटगोइंग कॉल की सुविधा देने से सभी टेलीकॉम ऑपरेटर को मना कर दिया है।

Monday, September 7, 2009

ऑयल इंडिया का आईपीओ हिट

ऑयल इंडिया का आईपीओ धूम मचा रहा है। ऑयल इंडिय के आईपीओ का आज पहला दिन है। ऑयल एक्सप्लोरेशन क्षेत्र में देश की इस दूसरी सबसे बड़ी कंपनी का आईपीओ खुलने के एक घंटे के अंदर ही पूरी तरह से सब्सक्राइब हो गया। ऑयल इंडिया के प्रति शेयर का फेस वैल्यू 10 रुपए है। कंपनी के शेयरों का प्राइस बैंड 950 रुपए से 1050 रुपए के बीच रखा गया है। ये आईपीओ 10 सितंबर के तक खुला रहेगा। कंपनी लोअर प्राइस बैंड पर 2513 करोड़ और अपर प्राइस बैंड पर 2777 करोड़ रुपये जुटा पाएगी। कंपनी के पास ऑयल और गैसे के 40 ब्लॉक भारत में हैं। जबकि दुनिया के 7 देशों में इसके 17 ब्लॉक हैं। ऑयल इंडिया भारत सरकार की मिनी रत्न कंपनी है। ये कंपनी देश और विदेशों में तेल और गैस का ना केवल खोज करती है। बल्कि उसका प्रोडक्शन और ट्रांसपोटेशन का भी काम करती है। साथ ही ऑयल इंडिया प्राकृतिक गैस से एलपीजी की प्रोसेसिंग का भी काम करती है। जानकारों का मानना है कि लंबे समय के लिए इस आईपीओ में पैसा लगाना फायदे का सौदा हो सकता है।   

Thursday, September 3, 2009

लो कर लो बात

फोन पर बात करते समय अब ना तो आपका पल्स तेज होगा और ना ही बिलिंग मशीन का। क्योंकि मोबाइल पर बात करना अब और हो चुका है काफी सस्ता। मोबाइल पर बात करने के दौरान अब आपको घड़ी देखने की जरूरत नहीं होगी। क्योकिं सेकेंड या मिनट के अनुसार अब नहीं आएगा आपका मोबाइल बिल। बल्कि कितने बार आप फोन करते हैं उसके अनुसार आपका मोबाइल बिल आएगा। टाटा टेलीसर्विसेज ने अपने प्री-पेड सीडीएमए ग्राहकों के लिए इस सेवा की शुरूआत की है। इसके तहत टाटा इंडिकॉम के ग्राहक मात्र 1 रुपए कितनी भी लंबी लोकल कॉल कर सकते हैं। वहीं प्रति एसटीडी कॉल के लिए देने होंगे मात्र 3 रुपए। यानी 3 रुपए में देशभर में टाटा इंडीकॉम के ग्राहक कहीं भी कितने भी घंटे तक बात कर सकते हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि मोबाइल पर बात करने के लिए अब पल्स गिनने की नहीं होगी जरुरत। और देश में पहली बार टाटा टेलीसर्विसेज ने इसकी शुरूआत की है। अब से पहले टेलीकॉम ऑपरेटर्स केवल पल्स रेट में छूट और टॉक टाईम में छूट देते थे। लेकिन टाटा टेलीसर्विसेज ने इस नई स्कीम्स की शुरूआत कर टेलीकॉम क्षेत्र में एक नई क्रांती की शुरूआत कर दी है। जिसका जबरदस्त फायदा ग्राहकों को पहुंचेगा। साथ ही ऐसी उम्मीद की जा रही है कि टाटा इंडिकॉम के बाद कई दूसरे ऑपरेटर्स भी इस तरह के स्कीम्स शुरू कर सकते हैं। लेकिन फिलहाल  टाटा टेलीसर्विसेज ने अपने प्री पेड सीडीएमए ग्राहकों के टॉकटाईम को खत्म कर टेलिफोन से चिपकने का एक अच्छा अवसर दे दिया है।  

Saturday, August 29, 2009

नोकिया एन900 यानी एक कम्प्युटर फोन

मोबाइल फोन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी नोकिया एन सीरीज का लेटेस्ट फोन एन 900 को अक्टूबर में लांच करेगी। सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस ये फोन एन 97 का एडवांस वर्जन है। ये एक टचस्क्रीन फोन है। इस फोन की खासियत है इसका ऑपरेटिंग सिस्टम।   इस फोन में एन 97 जैसा ही क्वर्टी कीबोर्ड है। और ये भी एक स्लाइड फोन है। लेकिन इसमें लाइनक्स मेइमो 5 ऑपरेटिंग सिस्टम का यूज किया गया है। पहली बार नोकिया ने अपने किसी फोन में लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया है। यानी ये मोबाइल फोन पूरी तरह से कम्प्यूटर की तरह काम करेगा। इस फोन में कार्ल जेईस लेंस वाला 5 मेगापिक्सेल कैमरा लगा है। साथ ही इसमें कई एडवांस फीचर्स भी दिए गए हैं। फास्ट डाउनलोड के लिए इसमें है एचएसडीपीए सपोर्ट। साथ ही इसमें है फुल एडोबी फ्लैस 9.4 सपोर्ट, 48 जीबी का एस्पेंडेबल मैमरी है। ग्राफिक्स के लिए इसमें लगाया गया है ओपन जीएल ईएस 2.0 ग्राफिक्स एक्सेलरेशन सॉफ्टवेयर। इस फोन की कीमत होगी करीब 36000 रुपए। दुनियाभर में सैमसंग और रिम से नोकिया को जबरदस्त टक्कर मिल रही है। यही वजह है कि वर्ल्ड मोबाइल बाजार में अपनी पोजिशन को और मजबूत करने के लिए नोकिया एन 900 लांच करने वाली है। इस मोबाइल के जरिए नोकिया इंटरनेट और मोबाइल के ग्राहकों को एक साथ लुभाने की कोशिश करेगी।

Friday, August 28, 2009

हार्ले डेविडसन भारत में

भारत में एडवेंचर की होने वाली है शुरूआत। क्योंकि यहां लांच को तैयार है दुनियाभर में मशहूर कल्ट बाइक हार्ले डेविडसन। हार्ले डेविडसन एक अमेरिकी बाइक है। जिसके दीवाने दुनियाभर में हैं। हॉलीवुड के कलाकारों की पहली पसंद है ये बाइक। भारत में भी हार्ले डेविडसन का जादू चल चुका है। बॉलीवुड के कई कलाकार और भारतयी क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी है हार्ले डेविडसन के कायल हैं। हार्ले डिवडसन को 2 साल पहले भारत में अपना ऑपरेशन शुरू करने की इजाजत मिली थी। लेकिन अब जाकर कंपनी ने अपनी सरगर्मी भारतीय बाजार में तेज की है। वजह है भारत में तेजी से बढ़ता लग्जरी बाइक का बाजार। बाइक के दीवानों को अब कीमतों की परवाह उतनी नहीं है। जिसे ध्यान में रखकर हार्ले डेविडसन ने अपनी बाइक की कई रेंज अगले साल से भारत में बेचने का ऐलान किया है। इस बाइक की कीमत लाखों में है। हार्ले डेविडसन ने भारत में अपने पार्टनर और लोकल डीलर्स के खोज तेज कर दी है। यानी, दुनियाभर में पॉपुलर ये क्रूजर बाइक अब भारतीय सकड़ो पर धूम मचाने के लिए हो चुकी है पूरी तरह से तैयार।

बीएमडब्ल्यू की दो नई कार होगी लांच

बीएमडब्ल्यू रोडस्टर जेड 4 जर्मनी की कार बनाने वाली दिग्गज कंपनी बीएमडब्ल्यू इस साल एक साथ दो कार भारतीय बाजार में उतारने ऐलान किया है। अक्टूबर में कंपनी अपनी स्पोर्ट्स कार रोडस्टर जेड 4 उतारेगी। ये एक टू सीटर कार है। जिसकी कीमत होगी 50 से 60 लाख रुपए। इसमे लगा है 6 सिलेंडर वाला 3.5 लीटर का पेट्रोल इंजन। साथ ही इसमें है 7 स्पीड स्पोर्ट ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन। ये कार 242 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड से धूम मचा सकती है। इस कार जीरो से 100 की रफ्तार पड़कने में लगता है मजह 6.6 सेकेंड का समय। बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज सेडान रोडस्टर जेड 4 से एक महीने पहले यानी की अगले महीने बीएमडब्ल्यू लांच करेगी 7 सीरीज की अपनी लग्जरी सेडान कार। इस कार में लगा है आठ सिलेंडर वाला पावरफुल इंजन। इस कार की खासियत ये है कि अच्छी परफॉर्मेंस के वावजूद फ्यूअल एफिसिएंट है। साथ ही इसमें इमिशन कम होता है। इसका वी8 इंजन ट्विंन टर्वो टेक्नोलॉजी से लैस है। इस कार 250 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड से धूम मचाने में सक्षम है। और महज 5.9 सेकेंड में पकड़ लेती है 100 की रफ्तार। फिलहाल कंपनी ने इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया है। लेकिन बीएमडब्ल्यू के इस ऐलान से भारतीय लग्जरी कार बाजार में गर्म हो गया है।

Thursday, August 27, 2009

आईपीओ इंडेक्स की शुरुआत

अब बाजार में लिस्ट होने वाली नई कंपनियों पर आप आसानी से नजर रख सकेंगे। और सही मायने में जान पाएंगे कि दो साल पहले तक अपना आईपीओ लाने वाली कंपनी कितनी तरक्की कर रही है। या लुढ़ककर लिस्टिंग प्राइस से भी नीचे पहुंच चुकी है। क्योंकि बीएसई ने शुरू कर दिया है आईपीओ इंडेक्स। जिसमें वैसी कंपनियां शामिल होंगी जिसका लिस्टिंग के दिन मार्केट कैप होगी कम से कम 1 अरब रुपए। फिलहाल आईपीओ इंडेक्स में करीब 50 कंपनियों को शुमार किया गया है। जिसमें पहले नंबर पर है रिलायंस पावर। रिलायंस पावर का इस इंडेक्स में 18.40 फीसदी हिस्सेदारी है। आईपीओ इंडेक्स में दूसरे नंबर पर है पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन। जिसकी हिस्सेदारी 16.68 फीसदी है। तीसरे नंबर पर है मुंद्रा पोर्ट। मुंद्रा पोर्ट की इस इंडेक्स में 10.39 फीसदी हिस्सेदारी है। हाल ही लिस्ट हुई अदाणी पावर चौथे नंबर पर है। अदाणी पावर की आईपीओ इंडेक्स में 8.28 फीसदी की हिस्सेदारी है। 8.23 फीसदी हिस्सेदारी के साथ पांचवें नंबर पर है आरईसी यानी ग्रामीण विद्युतीकरण निगम। आईपीओ बाजार में 18 महीनों बाद कुछ रौनक लौटी है। और ऐसी उम्मदी की जा रही है कि आने वाले दिनों में कई सरकारी और निजी कंपनियां बाजार में लिस्ट होंगी। ऐसे में आईपीओ इंडेक्स निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

Monday, August 24, 2009

टोयोटा की नई स्पोर्ट्स कार 'फॉर्च्यूनर'

टोयोटा फॉर्च्यूनर के लांच के बाद भारतीय एसयूवी बाजार में मच गई है हलचल। क्योंकि टोयोटा ने कम कीमत पर अच्छे फीचर्स के साथ इस कार को लांच किया है। इस कार की दिल्ली में एक्सशोरूम कीमत है 18.45 लाख रुपए। इस कार में लगा है 3 लीटर का डीजल इंजन। जिसमें लगे टर्बोचार्जर देती है ज्यादा पावर। फॉर्च्यूनर में कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं। फॉर्च्यूनर के स्पेशल फीचर्स में शामिल  है ओवर हेड रियर सीट, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, एयरकंडिशनिंग वेंट्स, क्रूज कंट्रोल और नेविगेटर। टोयोटा  फॉर्च्यनर को तीन वैरिएंट्स और पांच कलर सुपर व्हाइट, सिल्वर माइका मैटेलिक, ग्रे माइका मैटेलिक, ब्लैक माइका और लाइट ब्लू मैटेलि में लांच किया गया है। कंपनी ने इस साल के अंत तक 2000 कार बेचने का लक्ष्य रखा है। टोयोटा फॉर्च्यूनर का डैशबोर्ड कई एडवांस फीचर्स से लैस है। इसमें एक इंफोर्मेशन डिस्प्ले कंसोल लगाया गया है। जिसमें आप टाईम अपडेट, ड्राइविंग का डायरेक्शन, बाहर का टेम्परेचर जैसी जानकरी देख सकते हैं। फॉर्च्यूनर फिलीपींस और मलेशिया सहित दुनिया  के कई देशों में पहले से ही मजूद है और भारत में बिक्री के लिए इसे आयातित किया जाएगा। टोयोटा ने फॉर्च्यूनर को वर्ल्ड मार्केट में 2005 में लांच किया था। और दुनिया के 60 देशों में अबतक 2.5 लाख फॉर्च्यूनर बिक चुकी हैं। भारतीय एसयूवी बाजार में टोयोटा फॉर्च्यून का सबसे ज्यादा टक्कर होग शेवरले कैप्टिवा, होंडा सीआर-वी और मित्सुबिशी पजेरो से।  शेवरले कैप्टिवा का भारतीय एसयूवी बाजार में पहले से दबदबा है। कैप्टिवा के इंजन में लगा है कॉमन रेल डायरेक्ट इंजेक्शन फ्यूल सिस्टम। ये कार ऑटोमैटिक और मैनुअल ट्रांसमिशन में मौजूद है। डीजल इंजन वाली ये कार प्रति लीटर शहर में 9 किलोमीटर और हाइवे पर 12 किलोमीटर का माइलेज देती है। इस कार की दिल्ली में एक्सशोरूम कीमत है 19 लाख 90 हजार रुपए। टोयोटा के फॉर्च्यूनर को सबसे ज्यादा टक्कर मिलेगी जापान की ही कंपनी होंडा की एसयूवी सीआर-वी से। होंडा सीआर-वी में लगा है 2 और 2.4 लीटर का आई-वीटेक इंजन। जो देती है 141 वीएचपी का पावर। होंडा सीआरवी की कीमत 17 लाख से 19 लाख रुपए के बीच है। एसयूवी के इस सेग्मेंट में एक और कार है मित्सुबिशी पजेरो। जिसमें लगा है 2.8 लीटर की टर्बोचार्ज इनलाइन फोर डीजल इंजन। जो देती है 117 बीएचपी का पावर। 5 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशल वाली पजेरो की शहर में माइलेज है 8 किलोमीटर जबकि हाइवे पर इसकी माइलेज है प्रति लीटर 11 किलोमीटर।  मित्सुबिशी पजेरो की कीमत है 19 लाख 80 हजार रुपए। टोयोटा ने तेजी से बढ़ते भारतीय एसयूवी बाजार में अपने पांव जमाने के लिए फॉर्च्यूनर को लांच कर दिया है। हालांकि पहले से मौजूद शेवरले कैप्टिवा, होंडा सीआर-वी और मित्सुबिसी पजेरो से इसे कड़ी टक्कर मिलने वाली है। 

Saturday, August 8, 2009

महंगाई की मार सरकार लाचार

दाल की कीमतें पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो चुकी हैं। वहीं चावल की कीमतों में तेजी की शुरूआत हो चुकी है। तेल की कीमतें भी पिछले साल के मुकाबले ऊपर ही चढ़ती जा रही हैं। पिछले साल अरहर दाल प्रति किलो मिल रही थी 48 रुपए में जो इस साल बढ़कर 86 रुपए पर पहुंच चुकी है। मूंग दाल 48 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 74 रुपए प्रति किलो पर जा पहुंची है। मूंग साबूत पिछले साल 50 रुपए प्रति किलो मिल रही थी। जो इस इस 70 रुपए प्रति किलो पर पहुंच चुकी है। काला मसूर भी एक साल में 48 रुपए से 70 रुपए पर पहुंच चुकी है। वहीं उड़द साबूत पिछले साल 48 रुपए प्रति किलो मिल रही थी। जो इस साल 68 रुपए प्रति किलो पर पहुंच चुकी है। परमल राइस की कीमत पिछले साल 17 रुपए प्रति किलो थी। जो इस साल बढ़कर 20 रुपए पर पहुंच चुकी है। चीनी 22 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 29 रुपए प्रति किलो पर जा पहुंची है। महंगाई से फिलहाल लोगों को निजात नहीं मिलने वाली है। ऐसा मानना है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। क्योंकि इसबार कम मॉनसून की वजह से खरीफ फसलों की बुआई कम हो पायी है। जिसका असर आने वाले दिनों में खाने पीने के सामानों की कीमतों पर देखी जा सकती है। मनमोहन सिंह महंगाई के मुद्दे पर राज्य के मुख्य सचिवों के साथ मीटिंग के बाद ये बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों को अपनी ओर से भी इस मुद्दे से निपटना चाहिए। कालाबाजारी और जमाखोरी को रोका जाना चाहिए। साथ ही प्रधानमंत्री ने मॉनसून की कमी को कुछ हद तक पूरा करने के लिए सूखा प्रभावित जिलों के किसानों  को केंद्र की ओर से डीजल पर 50 फीसदी सब्सिडी देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही मनमोहन सिंह ने कही कि सूखे से प्रभावित राज्यों को सेंट्रल पूल से बिजली दी जाएगी। इस तरह की सहायता के ऐलान के बावजूद प्रधानमंत्री के संकेतों से साफ है कि महंगाई की समस्या आने वाले दिनों में और विकराल रुप ले सकती है। अभी तो दाल, चीनी, सब्जियों की कीमतें ही रुला रही हैं। लेकिन आने वाले दिनों में इस लिस्ट में चावल-मक्का जैसे कई और खाने पीने के सामान जुड़ जाएंगे। क्योंकि इस बार खराब मॉनसून की वजह से खरीफ फसलों की जब बुआई ही कम हो पायी है तो फसल कैसे अच्छी हो सकती है। हालांकि प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के पास अन्न के पर्याप्त भंडार हैं और देश में किसी को भूख से मरने नहीं दिया जाएगा। लेकिन किसानों में सुसाइड करने की शुरूआत कर दी है!

मॉनसून की बिजली किसानों पर

पहले से ही दाल-सब्जी की ऊंची कीमतों की मार से आम लोग बेहाल हैं। लेकिन आने वाले दिनों में भी उन्हें राहत मिलने के कोई आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में दाल की बढ़ती कीमतों का साथ चावल, तेल और चीनी भी महंगी होगी। क्योंकि पिछले साल के मुकाबले खरीफ फसलों की बुआई में भारी कमी आई है। जबकि खपत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 31 जुलाई 2008 तक धान की बुआई 256.76 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। जबकि इस साल 31 जुलाई तक केवल 191.30 लाख हेक्टेयर में ही धान की बुआई हुई है। यानी कि आने वाले दिनों में थाली में चावल को शामिल करने के लिए आपको ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं। यही हाल तिलहन का भी है। पिछले साल  144.66 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुआई की गई थी। जो कि इस साल फिसलकर 141.79 लाख हेक्टेयर पर पहुंच चुकी है। चीनी का स्वाद कड़वा हो सकता है। क्योकि आने वाले दिनों में चीनी के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। गन्ने की बुआई पिछले साल के 43.79 हेक्टेयर से फिसलकर इस साल  42.50 हेक्टेयर पर पहुंच चुकी है। इन आंकड़ों का असर फिलहाल आम लोगों को भले ही नहीं दिख रहा हो। लेकिन इसने सरकार की नींदें ज़रुर उड़ा दी है। और सरकार ने आनन फानन में सूखे से प्रभावित जिलों के किसानों के लिए डीजल पर मिलने वाली सब्सिडी को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है। ताकि किसान पानी की कमी को बोरिंग के जरिए पूरी कर सके। सूखे की सबसे ज्यादा मार उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड पर पड़ी है। जो सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। क्योंकि इन राज्यों के ज्यादा से ज्यादा लोग कृषि पर निर्भर हैं।   उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने कई जिलों को सूखा प्रभावित घोषित भी कर चुकी हैं। साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार पूरे राज्य को सूखा ग्रसित घोषित करने वाले हैं। क्योंकि बिहार में केवल 17 फीसदी ही बुआई हो पायी है। सूखे का ऐसा की कुछ आलम उत्तर पूर्वी राज्य असान और मणिपुर का भी है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई महीने में देशभर में सामान्य से 18 फीसदी कम बारिश हुई है। जबकि इस साल जून में पिछले 83 सालों में सबसे कम बारिश हुई है। जिसका सीधा असर दाल, ज्वार, बाजार, मक्का और चावल जैसे खरीफ फसलों पर देखी जाएगी। क्योंकि खरीब फसलों की बुआई जून-जुलाई में ही की जाती है। यानी आने वाले दिनों में किचन का बजट लोगों को काफी परेशान कर सकता है।  

Wednesday, August 5, 2009

ब्लैकबेरी का चल गया जादू

ब्लैकबेरी का काला जादू ना केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में सर चढ़कर बोल रहा है। ये वही फोन है जिसका इस्तेमाल दुनिया के सबसे ताकतवर आदमी यानी अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भी करते हैं। और वही ब्रांड आप भी मात्र 14000 रुपए में खरीद सकते हैं। हालांकि ओबामा के मोबाइल को कंपनी ने स्पेशल तौर पे तैयार किया है। दुनियाभर में ब्लैकबेरी की बिक्री दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। ब्लैकबेरी ने मोबाइल बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी नोकिया के होश उड़ा दिए हैं। 2007 की चौथी तिमाही के मुकाबले 2008 की चौथी तिमाही में करीब 85 फसदी ज्यादा ब्लैकबेरी फोन बिके हैं। ब्लैकबेरी फोन कनाडा की एक कंपनी रिसर्च इन मोशन यानी रिम बनाती है। वहीं नोकिया की बिक्री में इस दौरान करीब 17 फीसदी की कमी आई है। दुनियाभर में मोबाइल की बिक्री चौथी तिमाही07 ब्लैकबेरी(रिम) 40,24,000 नोकिया 1,87,03000 चौथी तिमाही08 ब्लैकबेरी(रिम) 74,42,000 नोकिया 1,55,61000 फिनलैंड की कंपनी नोकिया मोबाइल बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। और दुनिया के कुल मोबाइल बाजार के 40 फीसदी से ज्यादा हिस्से पर अभी भी नोकिया का ही कब्जा है। और ब्लैकबेरी का मार्केट शेयर है करीब 10 फीसदी। हालांकि जिस गति से नोकिया की बिक्री कम हो रही है। और ब्लैकबेरी सहित दूसरे मोबाइल फोन्स की बिक्री बढ़ रही है। उसे देखकर लगता है कि आने वाले दिनों में नोकिया को अपनी बादशाहत कायम रखने के लिए काफी मेहनत करनी होगी।

लक्ष्मी मित्तल का घर किराए पर !

स्टील किंग और दुनिया के सबसे रईस लोगों में से एक लक्ष्मी मित्तल का लंदन स्थित घर 'समर पैलेस' किराए के लिए खाली है। लेकिन इसे रेंट पर हर कोई नहीं ले सकता। क्योंकि इस घर के लिए हर हफ्ते करीब 8 लाख रुपए किराए के तौर पर देना होगा। यानी महीने में 32 लाख रुपए। लक्ष्मी मित्तल का ये महलनुमा घर उत्तरी लंदन के हैंपस्टेड में है। समर पैलेस को लक्ष्मी मित्तल ने 1996 में खरीदा था। समर पैलेस पूरे एक एकड़ में फैला है। लंदन के पॉश इलाके में बने इस घर में 11 बेडरूम  और 12 बाथरूम है। इसके साथ ही ये घर जकूजी, स्टीम रूम जैसे कई सुविधाओं से लैश है। ग्लास लिफ्ट और स्विमिंग पूल इस घर की सुंदरता को और बढ़ा देता है।  13 साल पहले मित्तल ने इस लग्जरी समर पैलेस को लगभग 56 करोड़ रुपए में खरीदा था। लेकिन अब लक्ष्मी मित्तल अपने परिवार के साथ पश्चिमी लंदन के केनिंग्स्टन स्थित 15 बेडरूम के बंगले में शिफ्ट कर गए हैं। जो मित्तल ने फार्मूला वन के चैंपियन ड्राइवर बेर्ने एकलिस्टन से 400 करोड़ से कुछ अधिक की रिकॉर्ड कीमत में खरीदा था। पिछले साल की आर्थिक मंदी और जरूरत न होने के कारण अब मित्तल अपना पुराना घर यानी समर पैलेस को बेचना चाहते हैं। लेकिन मित्तल को खरीदार नहीं मिल रहा है। क्योंकि उनकी डिमांड है करीब सवा तीन सौ करोड़ रुपए। यही वजह है कि अब उन्होंने अपने महल जैसे इस समर पैलेस को किराए पर देने का फैसला किया है।

आईफोन से लग सकता है बिजली का झटका !

दुनियाभर में धूम मचाने वाली आईफोन और आईपॉड एकबार फिर से चर्चा में है। लेकिन इस बार अपनी अच्छी तकनीक और अच्छी क्वालिटी के लिए नहीं बल्कि बिजली के झटके के लिए। जी हां...आईफोन और आईपॉड से इयरफोन के जरिए गाने सुनने के दौरान लग सकता है आपको बिजली का झटका है। एप्पल ने अपनी वेबसाइट पर इस बात को स्वीकार किया है। एप्पल ने माना है कि ड्राई एयर वाले इलाके में आईफोन और आईपॉड से ईयरफोन के जरिए गाना सुनने पर आपको बिजली के हल्के झटके लग सकते हैं। ये झटके इयरफोन के इयर बड्स से लग सकते हैं। ये हल्के झटके इलेक्ट्रोस्टेटिक डिस्चार्ज की वजह से लगते हैं। कंपनी ने आईफोन और आईपॉड यूज करने वाले लोगों को हिदायत दी है कि ड्राई एयर वाले इलाके में वे इयरफोन लगाने के बदले स्पीकर ऑन कर गाने सुनें। साथ ही गाना सुनने के दौरान वैसे मेटल को ना छुएं जिसपर पेंट नहीं चढ़ा हो। इसके साथ ही एप्पल ने कहा है कि ऐसा नहीं है कि केवल एप्पल के प्रोडक्ट में ही ये झटके लगते हैं। किसी भी हार्डवेयर में इस तरह के इलेक्ट्रोस्टेटिक डिस्चार्ज की वजह से झटके लग सकते हैं। आईपॉड एप्पल का हाई एंड म्यूजिक प्लेयर है तो आईफोन कंपनी की हाई एंड फीचर्स वली टच स्क्रीन फोन है। इन दोनों गैजेट्स ने लांच के समय से ही दुनियाभर में तहलका मचा रखा है। दुनियाभर में लोग इसे खूब पसंद करते हैं। लेकिन झटके की खबर के बाद इसकी लोकप्रियता में कुछ कमी जरूर आ सकती है।

Wednesday, June 3, 2009

जनरल मोटर्स हुई दिवालिया

अमेरिका की शान समझी जाने वाली पिछले साल तक कार बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी जनरल मोटर्स का निकल गया दिवालिया। करीब 100 सालों तक अमेरिका का झंडा बुलंद करने वाली इस कंपनी ने कर्ज के तले दम तोड़ दिया। जीएम यानी जेनरल मोर्टस की दुनियाभर के कार बाजार में कभी तूती बोलती थी। इस कंपनी का एक स्वर्णिम इतिहास रहा है। आज से करीब 100 साल पहले 1908 में जनरल मोटर्स की नींव रखी गई। और केवल 23 साल में ही जनरल मोटर्स बन गई दुनियाभर में सबसे ज्यादा कार बेचने वाली कंपनी। और तब से लगातार 77 सालों तक इसने ग्लोबल कार बाजार पर अपनी बादशाहत बनाए रखी। लेकिन अमेरिकी मंदी ने जनरल मोटर्स की नींव हिला कर रख दी। मंदी की तूफान ने पहले सबसे ज्यादा कार बेचने का ताज जेनरल मोटर्स के सर से उड़ा दिया। 1931 से 2007 तक नंबर एक बने रहने के बाद 2008 में जेनरल मोटर्स के सर से दुनियाभर में सबसे ज्यादा कार बनाने का ताज जापानी कंपनी टोयोटा ने  छीन ली। और इसके ठीक एक साल बाद जनरल मोटर्स दिवालिया हो गई। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने जीएम की स्टेयरिंग अपने हाथ में ले ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जीएम को फिर से पटरी पर लाने के लिए 60 अरब डॉलर खर्च करने का ऐलान किया है। लेकिन अब अगर जीएम रफ्तार पकड़ भी लेती है तो जापान और कोरिया के दिग्गज ऑटो कंपनियों को ओवरटेक करने में उसे काफी साल लग जाएंगे। फिलहाल तो जीएम से जुड़ी तमाम घाटे वाली कंपनियों और गाड़ियों को बेचने की तैयार में लग चुकी है अमेरिकी सरकार। जनरल मोटर्स करीब 34 देशों में अपनी कार और ट्रक बनाती है। जिसे करीब 140 देशों में बेचती है। जनरल मोटर्स ने दुनियाभर में करीब 2.5 लाख लोगों को रोजगार दे रखा है। लेकिन आज जेनरल मोटर्स की कुल संपत्ति से ज्यादा उसपर कर्ज बकाया है। जेनरल मोटर्स के पास फिलहाल 82 अरब डॉलर की संपत्ति है लेकिन कंपनी पर 172 अरब डॉलर का कर्ज बकाया है। अमेरिकी इतिहास में किसी कंपनी के दिवालिया होने की ये चौथी बड़ी घटना है। जेनरल मोटर्स के दिवालिया होने से अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री के एक युग का अंत हो गया है। 

ए राजा...टेक IT सीरियसली

ग्लोबल मंदी के इस माहौल में आईटी सेक्टर में चुनौतियां ही चुनौतियां हैं। क्योंकि ये एक ऐसा सेक्टर है जिसका ज्यादातर बिजनेस दुनिया के दूसरे देशों से जुड़ा हुआ है। इसलिए  भारत में सबकुछ ठीक भी हो जाने पर और अर्थव्यवस्था को पटरी पर आ जाने के बाद भी इस मंत्रालय के सामने चुनौतियों की कमी नहीं होगी। सबसे पहली और अहम चुनौती होगी।  अमेरिका के साथ बीपीओ बिजनेस को पटरी पर लाना। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन कंपनियों को टैक्स में छूट देने से मना कर दिया है जो अपना काम भारतीय कंपनियों से करवाती हैं। ऐसे में भारतीय बीपीओ इंडस्ट्री को काफी बड़ा झटका लगा है। अब जरूरत है लो कॉस्ट बिजनेस डिलेवरी मॉडल की। तभी टैक्स छूट नहीं लेकर भी अमेरिकी कंपनियां भारत में अपना काम आउटसोर्स कर पाएंगी। भारत के कुल आउटसोर्सिंग कारोबार का करीब 60 फीसदी हिस्सा अमेरिका के साथ जुड़ा है। इसके साथ ही भारतीय आईटी इंडस्ट्री को दुनियाभर में अपनी कॉरपोरेट गवर्नेंस की छवि में सुधार करना होगा। क्योंकि सत्यम घोटाले के बाद भारतीय आईटी इंडस्ट्री के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर दुनियाभर में सवाल उठने लगे हैं। भारतीय आईट इंडस्ट्री को रुपए और डॉलर के खेल की वजह से बार बार झटका लगता है। डॉलर के मुकाबले रुपए के मजबूत होते ही आईटी इंडस्ट्री का बुरा हाल हो जाता है। कंपनियों के मार्जिन और प्रॉफिट में कमी हो जाती है। इसलिए कंपनियों को हेजिंग और अमेरिका पर से अपनी निर्भरता कुछ कम करनी होगी। साथ ही आईटी सेक्टर्स को ऐसे सॉल्यूशन तैयार करने होंगे जो कि इस समय के  दुनिया के कई अहम मुद्दों जैसे एनर्जी, सिक्योरिटी, क्लाइमेट चेंज में काम आ पाए। तभी आईटी इंडस्ट्री को अगले दौर में ले जाया जा सकेगा। देश में आईटी का विस्तार भी आईटी मंत्रालय के सामने एक चुनौती होगी। देश में गांव गांव तक आईटी के विस्तार के लिए आसान और सस्ती टेक्नोलॉजी पर काम करना होगा। नए आईटी मंत्री ए राजा को इन सभी बातों का ख्याल रखना होगा।  तभी भारतीय आईटी इंडस्ट्री की तूती दुनिया भर बोलती रहेगी। और अगर इसमें कहीं भी चूक होती है तो भारत को मिलने वाला कारोबार फिलिपिंस, नाइजीरिया और पूर्वी यूरोप देशों में शिफ्ट हो सकते हैं। लेकिन कौड़ियों के भाव टू जी स्पेक्ट्रम की निलामी कर सरकार को हजारों करोड़ का चूना लगाने वाले ए राज इन चुनौतियों का किस तरह से सामना करते हैं ये तो आने दिनों में ही पता चल पाएगा।

Tuesday, May 26, 2009

महामर्जर की तैयारी

भारत में 10 करोड़ से ज्यादा ग्राहक बना लेने के बाद भारती एयरटेल की नजर अब दुनिया के दूसरे बड़े बाजार पर टिकी है। वोडाफोन और चाइना मोबाइल के बाद अपनी जगह बनाने को बेताब है भारती एयरटेल। जी हां, टेकीकॉम सर्विस देने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी भारतीय एयरटेल और अफ्रीकी टेलीकॉम कंपनी एमटीएन के बीच विलय को लेकर एकबार फिर से बातचीत तेज हो गई है। और किसी भी क्षण इसके विलय का ऐलान हो सकता है। जानकारों के अनुसार 23 अरब डॉलर यानी करीब 1100 अरब रुपए इस मर्जर पर खर्च होंगे। ये डील ना केवल भारत में अबतक की सबसे बड़ी डील होगी बल्कि दुनियाभर में भारतीय कंपनियों ने अबतक जितने भी मर्जर एक्विजिशन किए हैं उनमें सबसे बड़ी होगी। दोनों कंपनियों कि तरफ से इस डील पर 23 अरब डॉलर खर्च किये जाएंगे। इससे पहले हुए टाटा-कोरस डील में 12.2 अरब डॉलर खर्च हुए थे। जबकि वोडाफोन-हच की डील 10 अरब डॉलर की थी। भारती एमटीएन के विलय के बाद एमटीन में 49 फीसदी हिस्सेदारी भारती एयरटेल की होगी और भारती एयरटेल में 36 फीसदी हिस्सेदारी एमटीएन और एमटीन के शेयर होल्डर्स की होगी। इसके साथ ही भारती एमटीएन ग्राहकों की संख्यां के हिसाब से वोडाफोन और चाइना मोबाइल के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन जाएगी। अफ्रीकी टेलीकॉम कंपनी एमटीएन करीब 24 देशों में अपनी सर्विस देती है। यानी कि इस मर्जर के बाद भारतीय एयरटेल की पहुंच दो दर्जन से ज्यादा देशों में हो जाएगी। साथ ही दुनियाभर में एमटीएन और भारती एयरटेल के 20 करोड़ से ज्यादा ग्राहक होंगे। इस डील के लिए भारती एयरटेल को करीब 4 अरब डॉलर कर्ज का बंदोवस्त करना होगा। क्योंकि कंपनी के पास पहले से ही 3.5 अरब डॉलर नगद मौजूद है। इस डील की खबर के बाद सोमवार को अफ्रीका में जहां एमटीएन के शेयर 8 फीसदी चढ़ गए वहीं भारतीय बाजार में भारती एय़रटेल के शेयरों में करीब 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि पिछले साल के मुकाबले काफी कम में जब ये डील हो जाएगी तो भारती एयरटेल के शेयरों में सुधार आने में देरी नहीं होगी। एक साल पहले भारती ने एमटीन के साथ विलय की कोशिश की थी। लेकिन तब बात नहीं बन पाई थी। साथ ही अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन ने भी एमटीएन के साथ मर्जर की काफी कोशिश की लेकिन डील के बीच मुकेश अंबानी के आ जाने की वजह से मामला कोर्ट तक पहुंच गया। और आरकॉम के साथ ये डील नहीं हो पाई। हालांकि उस समय आरकॉम या भारती के साथ एमटीएन का विलय ना हो पाना दोनों भारतीय कंपनियों के हित में ही रहा। क्योंकि तब मंदी का दौर शुरू नहीं हुआ था और ये डील जो कि अब 23 अरब डॉलर में सिमटने वाली है। एक साल पहले इसके लिए 45 से 60 अरब डॉलर खर्च करने होते। यानी कि भारती एयरटेल के लिए ये है एक सुनहरा मौका। और इससे पहले की बस फिर से छूट जाए सुनील भारती मित्तल इस मर्जर पर मुहर लगाने को बेताब दिख रहे हैं। 

Saturday, May 23, 2009

सरकार वही चुनौतियां नई

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दूसरी पाली आसान नहीं रहने वाली है। भले ही इस बार भी उनके मंत्रिमंडल में अर्थशास्त्री नेताओं की भरमार हो। लेकिन उनके पास चुनौतियों की भी कमी नहीं है। आर्थिक मोर्चे पर सबसे पहली चुनौती यूपीए सरकार के पास होगी दुनियाभर में छाई आर्थिक मंदी से भारत पर पड़ने वाले असर को कम करने की। इसके लिए हो सकता है सरकार को फिर से कोई स्टीमुलस या बेलआउट पैकेज का ऐलान करना पड़े। भारत में नौकरी के अवसर बढ़ने के बजाए पिछले कुछ महीनों से नौकरियां ज्यादा छूट रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा करना एक बड़ी चुनौती होगी। आर्थिक क्षेत्र में बहुत काम होना बाकी है। ऐसा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भी मानना है। इसीलिए लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक सुधार को और तेज करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। सरकार के सामने महंगाई का मुद्दा अभी भी बरकरार है। भले ही वो आसमान पर पहुंच चुकी महंगाई दर के आंकड़े पर काबू पाने में कामयाब रही हो। लेकिन सही मायने में महंगाई पर लगाम नहीं लगा पाई। इसलिए इस बार यूपीए सरकार के सामन खाने पीने  के सामानों के खुदरा मुल्य पर लगाम लगाने की एक बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए सरकार को डिमांड सप्लाई को सही तौर पर बनाए रखने के लिए और व्यापारियों की मिलीभगत और कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे। साथ ही डिमांड में तेजी लाने के लिए सरकार को कई ठोस कदम उठाने की जरूरत है। क्योंकि डिमांड में कमी की वजह से औद्योगिक विकास दरों में भारी कमी आई है। और इसका असर कई सेक्टर्स पर देखा जा रहा है। मांग में कमी की वजह से कंपनियों के नतीजे खराब हो रहे हैं। इसके साथ ही एफडीई और विनिवेश के क्षेत्र में कई बड़े काम करने की चुनौती होगी। ताकी बीमा, नागरिक उड्डयन, बैकिंग और रिटेल जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाई जा सके। इसके साथ ही सरकारी खजाने में पैसे की बढ़ोतरी करने की एक सबसे बड़ी चुनौती सरकार के पास होगी। क्योंकि किसानों के लिए 65000 करोड़ रुपए की कर्ज माफी और छठे वेतन आयोग के सिफारिशों को लागू करने से लेकर इनकम टैक्स की सीमा में छूट दिए जाने से सरकार के खजाने पर काफी बुरा असर पड़ा है। इसलिए  राजस्व घाटा यानी आमदनी और खर्चे के बीच का घाटा बढ़कर जीडीपी के 7 से 8 फीसदी के बीच पहुंच गया है। जबकि इसे 3 फीसदी के आस पास रहना चाहिए। यानी आसान जीत के साथ सरकार बना लेने के बाद अब यूपीए के सामने है कठिन और चुनौतीपूर्ण आर्थिक डगर।

Wednesday, May 20, 2009

प्रॉपर्टी में निवेश का है ये सही समय

घर का सपना सच करने का है ये सही समय। क्योंकि पिछले कई महीनों से लगातार फ्लैट्स और प्रॉपर्टी की कीमतों में आर रही गिरावट का दौर अब खत्म हो सकता है। पिछले 6 महीनों में देशभर में फ्लैट्स की कीमतों में 25 से 50 फीसदी तक की कमी आई है। और ये कमी की है देश की बड़ी-बड़ी रियल्टी कंपनियों ने। दिल्ली में कुछ महीने पहले डीएलएफ के किसी प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराने के लिए 8500 रुपए प्रति वर्गफुट की दर से रुपए खर्च करने होते थे। जो कि अब घटकर 5000 रुपए प्रति वगर्फुट पर पहुंच चुका है। यानी फ्लैट्स की कीमतों में 41.2 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं यूनिटेक के गुड़गांव के प्रोजेक्ट में फ्लैट्स की कीमतों में  करीब 30 फीसदी की कमी आई है। पहले यूनिटेक 4500 रुपए प्रति वर्गफुट के हिसाब से फ्लैट्स बेचता था। जो कि अब घटकर 3200 रुपए प्रति वर्गफुट पर आ चुका है। यूनिटेक ने मुंबई के दादर में अपने फ्लैट्स की कीमतों में करीब 36 फीसदी की कमी  की है। एचडीआईएल ने मुंबई के कुर्ला में अपने फ्लैट्स की कीमतें 7500 रुपए प्रति वर्गफुट से घटाकर 5500 रुपए प्रति वर्गफुट कर दी है। यानी कि कीमतों में करीब 27 फीसदी की कटौती। साथ ही एचडीआईएल के अंधेरी में फ्लैट्स की कीमतों में 37.5 फीसदी की कमी की है। दक्षिण भारत में भी प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी कमी देखी जा रही है। रियल एस्टेट डेवलपर पुर्वांकरा चेन्नई में 6 महीने पहले अपने फ्लैट्स 3500 रुपए प्रति वर्गफुट के हिसाब से बेच रहा था जो कि अब घटकर 1785 रुपए प्रति वर्गफुट पर पहुंच चुका है। यानी 49 फीसदी की गिरावट। सस्ते फ्लैट्स की वजह से रियल एस्टेट कंपनियों के कारोबार में धीरे धीरे सुधार होने लगा है। फ्लैट्स बुक कराने वालों की संख्यां में बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले कुछ दिनों में लांच हुए सस्ते फ्लैट्स को लोगों ने हाथों हाथ लिया है। घर बुक करने के लिए अब लोगों को कम सोचना पड़ रहा है क्योंकि पहले से ही काफी कम हो चुकी होम लोन दरों और भी गिरावट के संकेत मिल रहे हैं। यानी अपने घर का सपना सच करने का हो सकता है ये एक सही समय। और अगर आप प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहते हैं तो है ये आपके लिए बेहतर समय। क्योंकि शेयर बाजार की तरह कहीं ऐसा ना हो कि प्रॉपर्टी बाजार में भी आप निचले लेवल पर खरीदारी करने से चूक जाएं। क्योंकि होम लोन दरों में बहुत जल्द एक बार और कटौती होने वाली है। जिससे ज्यादा से ज्यादा कस्टमर घर को ओर भागेंगे। और ऐसे में कीमतें नीचे जाने के बदले ऊपर का रूख कर लेंगे। साथ ही यूपीए सरकार ने पहले ही जता दिया है कि बिना हाउसिंग सेक्टर्स में सुधार के इकॉनोमी में सुधार संभव नहीं है। क्योंकि इससे स्टील, सीमेंट सहित कई सेक्टर जुड़े हुए हैं।

Tuesday, May 12, 2009

बाजार में हरियाली के पीछे काला धन तो नहीं?

सावधान!इन पैसों के चक्कर में बुल भागेगा लेकिन इसपर चढ़ना नहीं। शेयर बाज़ार में पिछले साल के अक्टूबर महीने के मुकाबले आई रिकॉर्ड तेज़ी और सेंसेक्स के 12,000 के स्तर को पार करने के बाद अब जानकार इस बात की आशंका भी जता रहे हैं कि हो सकता है कि विदेशों के ज़रिए काला धन भारतीय शेयर बाज़ार में निवेश किया जा रहा हो। जिसके चलते बाज़ार में तेज़ी आ रही है। मंदी के बादल अभी छंटे नहीं हैं लेकिन लगता है शेयर बाजार का बुल उठ खड़ा हुआ है। 5 मई को अचानक बाजार में 700 अंकों से ज्यादा की तेजी आ गई। और सेंसेक्स 12000 के पार चल गया। हालांकि उसके एक दो दिन बाद बाजार में थोड़ा मुनाफा वसूली देखी गई। लेकिन आज फिर से सेंसेक्स ने करीब 475 अंक की छलांग लगा दी। जानकारों का मानना है इस तेजी के पीछे ब्लैक मनी का हाथ हो सकता है। अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स रातों रात नहीं बदल सकते। साथ ही कंपनियों के नतीजे भी काफी बेहतर नहीं आ रहे हैं। यही नहीं आम चुनाव के बाद कोई दल पूरी बहुमत के साथ सरकार बना पाएगी बाजार को इसका भी भरोसा नहीं है। ऐसे में अचानक आई तेजी की कोई ठोस वजह नहीं दिखाई दे रही है। सेबी को फिलहाल इस मौके पर चौकन्ना होने की जरूरत है। ब्लैक मनी देश में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। विरोधी दलों के साथ अब कांग्रेस की सरकार ने भी स्वीस बैंकों में जमा 70 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के काले धन को वापस लाने पर गंभीर होती दिख रही है। ऐसे में ब्लैक मनी के मालिकों के बीच खलबली मच चुकी है। और ऐसे में ये आशंका जताई जा रही है कि वे अपने अपने ब्लैक मनी को स्वीस बैंकों से निकालकर दूसरे देशों और पी नोट्स के जरिए भारतीय बाजार में लगा रहे हैं। और अगर सचमुच ऐसा हो रहा है तो इसका सबसे ज्यादा खामियाजा आम निवेशकों को उठाना पड़ सकता है। क्योंकि छोटे निवेशक तेजी में बाजार में घुस तो जाएंगे लेकिन फिर उन्हें बाजार से निकलने का मौका कम ही मिल पाएगा। ब्लैक मनी काफी सेंसिटिव होता है। पलक झपते ही दुनिया की कई सीमाएं लांघ जाता है। ऐसे में भारतीय बाजार में इसका लंबे समय तक बने रहना मुमकिन नहीं लग रहा है। दुनिया में जहां जहां नियमों में कुछ ढ़ील मिलती है वहां ये आराम से खिसक जाता है। ऐसे में बाजार की हरियाली में छोटे निवेशकों को फूंक फूंक कर कदम रखने की जरूरत है।

Saturday, May 9, 2009

नैनो की बुकिंग टांय टांय फिस्स

दुनिया की सबसे सस्ती लखटकिया कार की बुकिंग उत्साहजनक नहीं रही। इसे देखा करोड़ों लोगों ने लेकिन केवल दो लाख के करीब लोग ही इसकी बुकिंग की हिम्मत दिखा पाए। जी हां,17 दिनों की लंबी बुकिंग प्रक्रिया और देशभर में करीब 30000 आउटलेट खोलने के बावजूद सिर्फ 2 लाख 3 हजार नैनो की ही बुकिग हो पायी। इसके पीछे एक-दो नहीं बल्कि कई कारण हैं।  सबसे पहली और अहम वजह ये है कि नैनो को लॉटरी से दिया जाना।  यानी जिन लोगों ने खरीदारी का मन बना लिया उन्हें भी लॉटरी में अपने भाग्य का इंतजार करना होगा। ऐसे में ज्यादातर लोग नैनो की रेस से बाहर हो गए। 95000 से 1 लाख 40 हजार जैसे भारी भरमक बुकिंग अमाउंट ने भी लोगों को नैनो से दूर किया। यही वजह है 300 के फॉर्म कई लोगों ने खरीदे लेकिन उसे जमा किया बहुत कम लोगों ने। हर 6 में से केवल 2  लोग ही बुकिंग के लिए आगे आए। नैनो की कम बुकिंग की तीसरी वजह है टेस्ट ड्राईव के लिए इसका लोगों के हाथ नहीं आना। आमतौर पर कार खरीदने वाले ज्यादातर लोग कार खरीदने से पहले उसकी टेस्ट ड्राईव जरूर करना चाहते हैं। ताकि उन्हें फर्स्ट हैंड एक्सपीरियंस मिल सके। इसके अलावा ज्यादातर लोग ऑन रोड एक्सपीरियंस देखना चाहते हैं। नैनो की ज्यादा बुकिंग नहीं होने के पीछे एक और अहम वजह है ऑन रोड इसकी कीमत का ज्यादा होना। यही वजह है कि जिस दोपहिया चालकों को टार्गेट कर नैनो को लांच किया गया वही इसकी बुकिंग प्रक्रिया से दूर है। टाटा नैनो की बुकिंट ट्रेंड से ये साफ देखने को मिल रहा है। दो लाख से ज्यादा नैनो की बुकिंग हुई है और इसमें से 1 लाख से ज्यादा लग्जरी मॉडल यानी सीएक्स मॉडल लेना चाहते हैं। कंपनी को अब बस यही आस है कि जब नैनो सड़कों पर और गलियों में घूमेगी तो लोगों को ज्यादा से ज्यादा लुभा पाएंगे।

Friday, April 17, 2009

अरबों रुपए का आईपीएल

आईपीएल को हम इंडियन पैसा लीग कह सकते हैं क्योंकि इसमें लगे हैं अरबों रुपए। और आईपीएल टू को हम इंडियन प्रॉफिट लीग भी कह सकते हैं। क्योंकि इस साल आठ में से कुछ और टीम प्रॉफिट में आ सकती हैं। आईपीएल के हर पहलू से जुड़ चुका है पैसा। चाहे बॉलर हो या बैट्समैन। कुछ बॉलर के एक एक बॉल की कीमत है लाखों में। बैट्समैन करोड़ों में बिक रहे हैं। भले ही उन्हें मैच में क्रीज पर उतरने का मौका मिले या नहीं। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि आईपीएल टू में आठ टीमों में से ज्यादातर प्रॉफिट में आ जाएंगी। पिछले साल केवल दो टीम कोलकाता नाइट राइडर्स और राजस्थान रॉयल्स प्रॉफिट कमा पायी थी। इसके पीछे एक मुख्य वजह थी शाहरूख खान.. जो कि कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक हैं। वहीं राजस्थान रॉयल ने टीम बनाने में कम खर्च किए थे। कोलकाता नाइट राइडर्स को 8 करोड़ का प्रॉफिट हुआ था। जबकि पहले आईपीएल के विजेता राजस्थान रॉयल्स को 5 करोड़ रुपए का प्रॉफिट हुआ था। पिछले साल करीब दो महीने चली थी ट्वेंटी ट्वेंटी मैच जो कि इस साल एक महीने में ही सिमट जाएगी। और अगर ऐसे में ज्यादातर टीम मालिक प्रॉफिट में आ जाते हैं तो ये एक अनोखा उदाहरण होगा। क्योंकि दूसरे किसी भी बिजनेस में तीन महीने का काम और एक साल समय ब्रेक इवेन के लिए बहुत कम है। और इसके पीछे वजह है क्रिकेट के प्रति लोगों की दीवानगी। जिसके चलते स्पांसर दिल खोल कर रुपए खर्च करने को तैयार हैं।  वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप ने 9 साल के लिए करीब 10000 करोड़ रुपए में आईपील का ग्लोबल टेलीकास्ट राइट्स खरीदा है। और उनके इन रुपयों को ध्यान में रखकर बीसीसीआई ने ज्यादा से ज्याद विज्ञापन के लिए हर 10 ओवर के बाद 7.5 मिनट के ब्रेक का प्रावधान रखा गया है वहीं बीसीसीआई ने पिछले साल के मुकाबले कमाई का ज्यादा हिस्सा आठों टीमों को देने का ऐलान किया है। यानी सेट मैक्स से होने वाली 330 करोड़ रुपए की कमाई से हर टीम को करीब 25 करोड़ रुपए मिलेंगे। इसबार ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को स्टेडियम तक खींचने के लिए टिकट की कीमतें कम कर दी गई हैं। टिकटें मिल रही हैं 70 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक। हालाकि दक्षिण अफ्रीका के आठ शहरों में होने वाले आईपीएल टू के 90 फीसदी से ज्यादा टिकट बिक चुके हैं। ये मैच्स केप टाउन, जोहानिसबर्ग, डरबन, प्रिटोरिया, ईस्ट लंदन, पोर्ट एलिजाबेथ, ब्लोमफॉन्टेन और किंबर्ली में होंगे। इसबार स्टेडियम टिकट की बिक्री से 40-45 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद की जा रही है  जानकारों का मानना है कि इसबार टिकटों की बिक्री से होने वाली कमाई को आठों टीमों में बांट दिया जाएगा। आईपीएल में पैसा कमाने का पैमाना सिर्फ मैदान में खेल नहीं बल्कि मैदान के बाहर का खेल भी है। इसबार आईपीएल टू में सभी को फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है चाहे वो टीम मालिक हो या ब्रॉडकास्टर। खिलाड़ी तो पहले से ही चांदी काट रहे हैं।

Monday, April 13, 2009

बिक गई सत्यम

टेक महिंद्रा का टेकओवर सत्यम को मिल गया है नया है नया मालिक। टेक महिंद्रा ने सबसे ज्यादा बोली लगाकर सत्यम को अपनी झोली में डाल लिया है। टेक महिंद्रा ने 58 रुपए प्रति शेयर की सबसे ऊंची बोली लगाई है। जो कि सबसे ज्याद थी। वहीं सत्यम में 12 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी एल एंड टी ने प्रति शेयर 45 रुपए 95 पैसे की बोली लगाई। यानी आगले कुछ दिनों में  कंपनी लॉ बोर्ड की मंजूरी के बाद सत्यम की बागडोर अब टेक महिंद्रा के हाथों में सौंप दी जाएगी। सत्यम की 51 फीसदी शेयर खरीदने के लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा को करीब 2890 करोड़ रुपए खर्च करना होगा। हालांकि फिलहाल टेक महिंद्रा को सत्यम के 31 फीसदी शेयर जारी किए जाएंगे। जिसके बाद सत्यम की बागडोर टेक महिंद्रा के हाथों में सौंप दी जाएगी। हालांकि इसके लिए टेक महिंद्रा को 1756 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। जिसके बाद कंपनी को 20 फीसदी शेयर ओपेन ऑफर के जरिए निवेशकों से खरीदना होगा। जानकारों का मानना है कि टेक महिंद्रा के लिए ये एक फायदे का सौदा साबित हो सकता है। क्योंकि टेक महिंद्रा काफी समय से अपना बिजनेस बढ़ाने के बारे में विचार कर रही थी। और सत्यम को खरीदने से अच्छा मौका टेक महिंद्रा के लिए कोई दूसरा नहीं हो सकता था। टेक महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा भी सत्यम को जीतने के बाद निश्चिंत दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टेक महिंद्रा के लिए ये एक ऐतिहासिक दिन है। और काफी मेहनत के बाद वो सत्यम के इतने करीब पहुंच पाए हैं। सत्यम का साथ होना टेक महिंद्रा के लिए फायदे का सौदा होगा। क्योंकि पहले से ही यूरोप में अपने पैर जमा चुके टेक महिंद्रा के लिए अमेरिकी बाजार थाली में सजा हुआ मिल जाएगा। सत्यम के लिए बोली लगाने वालों में इंजीनियर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन और ट्रूब्रो और अमेरिकी अरबपति निवेशक विल्बर रॉस भी थे। लेकिन आनंद महिंद्रा की कंपनी टेक महिंद्रा ने सबको पछाड़ते हुए सत्यम पर पकड़ बना ली। यानी सत्यम की सवारी कर आने वाले दिनों में टेक महिंद्रा भारतीय आईटी सेक्टर में एक अलग पहचान कायम कर सकती है।

Saturday, April 11, 2009

नैनो लगाएगी टाटा की नैया पार

छोटी कार पर रूपयों की बरसात नैनो की बुकिंग हो गई है शुरु और टाटा के लिए है ये एक दुधारु गाय। मंदी और पैसे की कमी से परेशान टाटा मोटर्स नैनो की बुकिंग से ज्यादा से ज्यादा पैसा जमा करना चाहती है। नैनो का सपना पालनेवालों के पैसे के दम पर टाटा मोटर्स शायद अपनी परेशानियों पर पार पाना चाह रही है। देश में कारों की बिक्री में टाटा फिलहाल मारुति, ह्युंदे  जैसी कंपनियों से काफी पीछे है। ऐसे में नैनो ने टाटा को एक बड़ी राहत दे सकती है। लोगों को भले ही पहली खेप के नैनो से धूम मचाने को मौका मिले या नहीं उनके पैसों से टाटा मोटर्स जरूर धूम मचाने को तैयार हो रही है। मिसाल के तौर पर 300 रुपए के बुकिंग फॉर्म को ही ले लेते हैं। फिलहाल करीब 1 लाख फॉर्म बिक चुके हैं जिससे टाटा की करीब 3 करोड़ रुपए की कमाई हो चुकी है। 25 अप्रैल तक करीब 5 लाख फॉर्म बिकने की उम्मीद की जा रही है। जिससे टाटा को 15 करोड़ रुपए की कमाई होने का अनुमान हैं। फॉर्म के बाद अब बात करते हैं बुकिंग अमाउंट की। 25 तारीख तक नैनो की बुकिंग होगी। नैनो के तीनों मॉडल के लिए अलग अलग बुकिंग अमाउंट हैं। जो कि 95000 रुपए  से 1 लाख 40 हजार रुपए के बीच है। यानि प्रति नैनो की बुकिंग का एवरेज बुकिंग अमाउंट अगर 1 लाख भी मानें तो 5 लाख नैनो की बुकिंग से टाटा के पास 5000 करोड़ रुपए जमा हो जाएंगे। जो कि नैनो की लाटरी के नतीजे निकलने तक यानी करीब 3 महीने तक टाटा के पास रहेगी। इसके बाद जिन एक लाख लोगों के नाम ड्रॉ में निकलेंगे उन्हें ब्याज भी नहीं मिलेगा। भले ही नैनो उन्हें एक साल के अंदर मिले। यानी 1000 करोड़ रुपए एक साल तक टाटा के पास रहेंगे। पूरी रकम देकर नैनो की बुकिंग कराने वालों को नैनो नहीं मिलने पर 8.5 फीसदी ब्याज तभी मिलेगी जब नैनो की वेटिंग लिस्ट से वो अपना नाम वापस लेंगे। यही नहीं अगर आप 95000 रुपए बुकिंग अमाउंट जमा कराते हैं। और लॉटरी में आपका नाम नहीं निकलने पर अगर आप पैसे वापस चाहेंगे तो कंपनी 2999 रुपए एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज काटकर ही बाकी की रकम आपको लौटाएगी। नैनो से होने वाली कमाई को अगर छोड़ दें तो टाटा मोटर्स के पास करीब 500 करोड़ रुपए की ही नगदी बची थी। जिससे टाटा मोटर्स को देश और विदेश में अपने कारोबार को चलाने में काफी परेशानी का समना करना पड़ रहा है। पिछले साल ही  टाटा ने जगुआर और लैंड रोवर की भी खरीदारी की है। जिसका 10 हजार करोड़ रुपए कर्ज अभी भी टाटा के ऊपर बकाया है। जानकारों की मानें तो टाटा को अपने ऑटो कारोबार को चलाने के लिए फिलहाल कम से कम 7000 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। ऐसे में लगता है कि नैनो ने टाटा का काम कुछ आसान कर दिया है। यानी कि नैनो के सपने बेचकर टाटा अपनी झोली भर रही है। भले ही लोगों को नैनो पर धूम मचाने का मौका अभी नहीं तीन साल बाद ही मिले। लेकिन उनके पैसों से टाटा मोटर्स अपना बिजनेस चमकाती रहेगी।

Friday, April 3, 2009

बीजेपी ने जारी किया ड्रीम घोषणा पत्र

क्या बीजेपी उठा पाएगी टैक्स का ये बोझ?! बीजेपी आज अपना लोक लुभावना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। जिसमें वादों की झड़ी लगा दी गई है। वोट डालने लायक लगभग हर वर्ग के लोगों को इसमें शामिल कर लिया है। बीजेपी ने कहा है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो 3 लाख रुपए सलाना आमदनी पर इनकम टैक्स नहीं लगेगा। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को 3.5 लाख तक की आय पर टैक्स नहीं देना होगा। महिलाओं को भी 3.5 लाख तक की कमाई पर टैक्स नहीं लेने का वादा किया है। किसानों के लिए एग्रीकल्चर लोन मिलेगा अधिकतम 4 फीसदी ब्याज दर पर। सस्ते दरों पर होम लोन मिलेगा। पेंशन पर टैक्स नहीं लगेगा। ये सारे के सारे सपने बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में दिखाए हैं। बीजेपी की घोषणा पत्र में टैक्स पर छूट की जो सीमा रखी गई है। उससे करोड़ों लोगों को फायदा होगा। ज्यादातर मिडिल क्लास जो कि इस देश में एक बड़ा वोट बैंक है उन्हें बीजेपी का लॉलीपाप लुभा सकता है। क्योंकि फिलहाल आम लोगों को सलाना 1.5 लाख रुपए तक की कमाई पर ही टैक्स की छूट दी गई है। जो कि बीजेपी के सरकार में आते ही 3 लाख तक पहुंच जाएगी। वहीं महिलाओं को अभी 1 लाख 80 हजार रुपए तक की सलाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होता है। लेकिन बीजेपी कहा है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो महिलाओं को 3.5 लाख रुपए तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। सीनियर सिटिजन को भी बीजेपी ने राहत देते हुए अपने ऐजेंडे में शामिल किया है। सीनियर सिटिजन को भी महिलाओं की तरह 3.5 लाख रुपए तक की कमाई पर टैक्स में छूट देने की बात बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में की है। सीनियर सिटिजन को फिलहाल 2 लाख 25 हजार रुपए की सलाना कमाई पर टैक्स नहीं देना होता है। बीजेपी ने लगभग सभी वर्ग के वोटरों को रिझाने की कोशिश की है। बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में सीनियर सिटिजर को कुछ ज्यादा ही ख्याल रखा है। बीजेपी ने कहा कि जब उनकी सरकार बनेगी तो 65 की बजाय 60 साल की उम्र से ही बुजुर्गों को यात्रा में सीनियर सिटिजन तहत मिलने वाली छूट दी जाएगी। इतना ही नहीं सीनियर सिटीजन के पेंशन को टैक्स फ्री करने का बीजेपी ने वादा किया है। बीजेपी ने जवानों का खास ख्याल रखते हुए अपनी घोषणा पत्र में सैन्य बलों और अर्धसैनिक बलों को इनकम टैक्स से मुक्त करने की बात की है। इसके साथ ही फ्रिंज बेनिफिट टैक्स सहित कई तरह के वित्तीय छूट की बात बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में की है। लेकिन इस तरह की तमाम छूट और रियायत तभी हकीकत का रुप ले पाएगी जब बीजेपी सरकार में आएगी। हालांकि बीजेपी अपने लॉलीपॉप जैसे घोषणा पत्र के जरिए वोटरों को एकबार सोचने पर जरूर मजबूर कर दिया है।

Tuesday, March 31, 2009

ले लो नैनो

2,999 रुपए लाओ... नैनो की बुकिंग कराओ...लॉटरी में नाम आने पर नैनो पर धूम मचाओ। नैनो को खरीदने के लिए आपका लकी होना भले ही जरूरी हो। लेकिन नैने के लिए लोन लेने के लिए आपको ज्यादा मशक्कत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई ने नैनो के दीवानों को आसानी से लोन देने के लिए कमर कस ली है। शुरूआत में आपको जुटाना है केवल बुकिंग अमाउंट जो कि हर मॉडल के लिए अलग-अलग है। बेस मॉडल का बुकिंग अमाउंट है 2999 रुपए। इसपर एसबीआई 95 हजार रुपए फाइनेंस करेगा। नैनो की स्टैंडर्ड मॉडल को बुक करने के लिए खर्च करना होगा 3499 रुपए। और स्टैंडर्ड मॉडल के लिए बैंक 1 लाख 20 हजार रुपए फाइनेंस करेगा। वहीं प्रीमियम मॉडल की नैनो के लिए बुकिंग अमाउंट है 3999 रुपए। इसके लिए एसबीआई 1.40 हजार रुपए लोन देगा। हालांकि शुरूआत में सभी बुकिंग लोन पर्सनल फाइनेंस के तहत दिए जाएंगे। और लॉटरी में नैनो फंसने पर इसे ऑटो लोन में बदल दिया जाएगा। हालांकि इस दौरान कस्टमर को अलग से कोई ब्याज नहीं देना होगा।और अगर लॉटरी में कस्टमर को नैनो नहीं मिला तो ये पैसे बैंक को रिफंड कर दिए जाएंगे।  9 अप्रैल से नैनो की बुकिंग शुरू होगी। और जुलाई से लोगों को नैनो मिलना शुरू हो जाएगा। ये लोन उन सभी लोगों को मिलेगा जिनके हर महीने की कमाई होगी 6250 रुपए या सलाना 75000 रुपए।यानी एसबीआई ने आम लोगों का नैनो तक पहुंच को आसान बना दिया है। हालांकि नैनो किसे मिलेगी ये तो उसके भाग्य पर ही निर्भर करेगा। क्योंकि लॉटरी में नाम आने पर ही नैनो की सवारी हकीकत हो पाएगी।

जी 20-20 का है ये मैच

दुनिया से मंदी भगाने से पहले..आउटसोर्सिंग, सुरक्षात्म ट्रेड प्रैक्टिस जैसे मुद्दों पर आपस में निबटना जरूरी है! दुनिया की हर दिग्गज इकॉनोमी के पसीने छूट रहे हैं। मंदी की सबसे ज्यादा मार विकसित और यूरोपीय देशों पर ही पड़ रही है। भारत, चीन और ब्राजील जैसे कुछ दूसरे विकासशील देशों पर इसका कम असर हुआ है। हालांकि कुछ अफ्रीकी देश काफी ज्यादा प्रभावित हुए हैं। लेकिन अमेरिका, जर्मनी, जापान जैसी दुनिया की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाएं लहूलुहान हो चुकीं है। ऐसे में विकसित देशों की नजर अब जी 20 की बैठक पर टिकी हुई है। क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि जी 20 के देश अगर चाहेंगे  तो पूरी दुनिया को मंदी की तूफान से बचा सकते हैं। जी 20 देशों की अर्थव्यवस्था का हिस्सा दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था में 80 फीसदी है। और यही वजह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा बार-बार कह रहे हैं कि जी 20 देशों को साथ मिलकर कदम उठाने की जरूरत है। वैसे भी सबसे खराब स्थिति अमेरिका की है। अमेरिका की कई कंपनियां दम तोड़ चुकी है और कई दम तोड़ने की कगार पर हैं। कार बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी जनरल मोटर्स भी अमेरिका की ही है। जिसे दिवालिया होने से बचाने के लिए सरकार एड़ी-चोटी का पसीना बहा रही है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा लोगों के पैसे को कार कंपनियों पर खर्च करने के पक्ष में नहीं हैं। अमेरिका से बेहतर स्थिति जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और दूसरे यूरोपीय देशों की नहीं है। ऐसे में जी लंदन में 20 की बैठक पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। यूरोपीय देशों का मानना है कि बेलआउट या स्टिमुलस पैकेज से ज्यादा जरूरी है ज्यादा मजबूत वित्तीय कानून। इस बैठक में शामिल होने से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के दिग्गज उद्योगपतियों से मुकालात की। और जानने की कोशिश की, इस मंदी से इंडस्ट्री को किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही विकसित देशों की नीतियों कैसे उद्योग को प्रभावित कर रही है। इस सभी मुद्दों को प्रधानमंत्री जी 20 की बैठक में सामने रखेंगे। लंदन के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से फंड्स का बहाव विकासशील देशों की तरफ कम होने की बजाए बढ़ना चाहिए। 1933 में भी महामंदी से निपटने के लिए भी 66 देशों के प्रतिनिधि लंदन में जमा हुए थे। लेकिन उस समय कुछ बेहतर नतीजा नहीं निकल पाया था। क्योंकि अमेरिका की स्थिति उस समय स्पष्ट नहीं थी।  अगर जानकारों की मानें तो इस बार भी जी 20 की बैठक से कुछ खास नतीजा निकलने की उम्मीद कम ही है। क्योंकि अमेरिका जहां सभी देशों को जबरदस्त स्टीमुलस पैकेज देने पर जोर दे रहा है। वहीं यूरोपीय देश स्टीमुलस पैकेज के बदले वित्तीय नियम को सख्त करने के पक्ष में है। और विकासशील देश विकसित देशों की ट्रेड के प्रति सुरक्षात्मक रवैये से परेशान है। ऐसे में मंदी से पार पाने के लिए मिलकर रास्ता निकालने की राह मुश्किल ही लग रही है।

Friday, March 13, 2009

दुनियाभर के बाजारों में तेजी

बैंक ऑफ अमेरिका को हुए मुनाफे की खुशी से उठ खड़ा हुआ भारतीय बुल कई हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद अब दुनियाभर से आ रही अच्छी खबरों से एशिया, यूरोप सहित भारतीय शेयर बाजार में तेजी का आलम है। पिछले साल के जबरदस्त घाटे के बाद बैंक ऑफ अमेरिका को मुनाफा हुआ है। साथ ही सिटी बैंक ने कह दिया है कि अब उसे किसी सहायता या पैकेज की जरूरत नहीं है। इसके चलते अमेरिकी बाजार में तेजी रही। कल डओजोंस 239 अंकों की बढ़त बनाने में कामयाब रहा। इन खबरों की वजह से भारतीय शेयर बाजार के भी पर निकल आए। और पिछल दो दिनों में सेंसेक्स ने 600 से ज्यादा अंकों की छलांग लगा दी। भारतीय शेयर बाजार आज जबरदस्त तेजी के साथ बंद हुए। बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स करीब पांच फीसदी यानी  412 अंकों की उछाल  के साथ 8756 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 101 अंकों की अच्छी तेजी देखी गई। और ये 2719 पर बंद हुआ। बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी के साथ बंद होने में कामयाब रहा है। ऑटो सेक्टर की सवारी कर यानी कि ऑटो सेक्टर की अगुवाई में कल सेंसेक्स 183 अंको की बढ़त बनाने में कामयाब रहा था। और आज बाजार को ऊपर ले जाने में सबसे ज्यादा योगदान रहा रियल एस्टेट सेक्टर का। रियल स्टेट दिग्गज डीएलएफ करीब 11.5 फीसदी की तेजी के साथ 152 रुपए 55 पैसे पर बंद हुआ। एचडीआईएल 6 फीसदी से ज्यादा और यूनिटेक 5 फीसदी से ज्यादा बढ़त के साथ बंद हुए। रियल एस्टेट के अलावे बैंक, ऑटो और आईटी सहित लगभग सभी सेक्टर्स के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई। टाटा मोटर्स करीब 11 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक 8.5 फीसदी से ज्यादा की बढ़त बनाने में कामयाब रहा। केवल भारत ही नहीं जापान,चीन, ताइवान सहित एशिया के लगभग सभी बाजार आज तेजी के साथ बंद हुए। क्योंकि एशिया से एक साथ कई सकारात्म खबरें आईं। जापानी प्रधानमंत्री तारो असो ने कहा है कि सरकार अप्रैल तक तीसरे बेलआउट पैकेज ला सकती है। इसके साथ ही चीन के प्रधानमंत्री वन चियापाओ ने भरोसा दिलाया है कि अगले साल तक चीन की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। और अगर इसमें किसी तरह की परेशानी हुई तो वो बेलआउट पैकेज के साथ तैयार बैठे हैं। साथ ही बैंक ऑफ अमेरिका के मुनाफे में आ जाने के बाद ऐसा लगने लगा है कि जल्द ही दुनियापर मंडरा रहे मंदी के बादल छंट जाएंगे। और एकबार फिर से बाजारों में हरियाली छा जाएगी। 

Saturday, March 7, 2009

लग्जरी सेडान सेग्मेंट में टाटा

जेनेवा मोटर शो में पॉल पिनिनफरीना के साथ रतन टाटा टाटा की प्राइमा लग्जरी सेडान सेग्मेंट में अपनी अलग पहचान बनाने को बेताब है। इसे टाटा ने जेनेवा के मोटर शो में लांच किया है। जहां पूरी दुनिया इसकी तारीफ कर रही है। इस कार का लुक किसी को भी आकर्षित कर सकता है। इसके फीचर्स इस सेग्मेंट की दुनिया की किसी कार को टक्कर दे सकते है। टाटा की प्राइमा का व्हील बेस है 2.70 मीटर का। इसमें काफी ज्याद इंटेरियर स्पेस है। सी पिलर स्टाइलिंग वाली इस कार को डिजाइन किया है इटली की कंपनी पिनिनफरीना ने। पिनिनफरीना दुनिया की नामी कंपनी है। जो फेरारी को भी डिजाइन करती है। टाटा के प्राइमा को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। स्टाइल, लग्जरी और कंफर्ट के मामले में टाटा की प्राइम एकदम फिट है। प्राइमा के लांच के साथ ही ऐसा लगता है कि टाटा एक साथ ऑटो जगत में हर सेगमेंट में छाने को तैयार हैं। कंपनी ने एक तरफ तो छोटी कार सेग्मेंट में नैनो को लाकर दुनिया की बडी बड़ी ऑटो कंपनियों का होश उड़ा दिया है। वहीं दूसरी तरफ लैंड रोवर, जगुआर सहित प्राइमा जैसी कार के बल पर टाटा की पूरी दुनिया पर छाने की तैयारी है। अब हर किसी को इस बात का इंतजार रहेगा कि टाटा प्राइमा को कमर्शियली कब लांच करती है और इसकी कीमत क्या होगी।

Friday, March 6, 2009

सत्यम1,सत्यम2,सत्यम3..और सत्यम हो गई....

सत्यम के  लिए बोली लगाने की प्रकिया को सेबी ने हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही सत्यम में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने सत्यम में 51 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की इजाजत दे दी है। इसके लिए विदेशी कंपनियां भी बोली लगा पाएंगी। सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली कंपनी को  सत्यम के 31 फीसदी शेयर जारी किए जाएंगे। उसके बाद  कंपनी को  20 फीसदी शेयर ओपेन ऑफर के जरिए निवेशकों से खरीदना होगा।  ओपन ऑफर में सत्यम के हर शेयर की कीमत बोली वाली कीमत जितनी ही होगी। और अगर सत्यम को खरीदने वाली कंपनी ओपन ऑफर के जरिए पूरे 20 फीसदी शेयर खरीदने में नाकाम होगी तो उसे सत्यम के नए शेयर जारी किए जाएंगे। यानी कि सत्यम को खरीदने वाली कंपनी को 51 फीसदी हिस्सेदारी तक पहुंचने में ज्यादा कठिनाई का सामना नहीं करना होगा। हालांकि खरीदार कंपनी को सत्यम के शेयर 3 साल तक बेचने की इजाजत नहीं होगी। लेकिन अगर खऱीदार कंपनी चाहेगी तो सत्यम में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से और ज्यादा बढ़ा सकती है। सत्यम में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बोली की प्रक्रिया ग्लोबल होगी। हालांकि इस बोली में वही कंपनियां भाग ले पाएंगे जिसके पास 15 करोड़ डॉलर की संपत्ति होगी। सत्यम को खरीदने के लिए एल एंड टी, टेक महिंद्रा, स्पाइस ग्रुप, आईबीएम सहित कई देशी और विदेशी कंपनियां  लाइन में खड़ी हैं। और अब..जबकि मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने  सत्यम के लिए ग्लोबल कंपनियों को बोली लगाने की इजाजत दे दी है। साथ ही इसके लिए नियमों में कुछ बदलाव भी की है। ऐसे में लगता है कि सत्यम को जरूर सही कीमत मिल जाएगी। क्योंकि इसका असर आज शेयर बाजार में दिख गया। जहां सत्यम के शेयर पर अपर सर्किट लग गया। यानी अगर ठीक ठाक बोली लगती है और सत्यम किसी बड़ी कंपनी के हाथों में बिकती है। तो एक बार फिर से सत्यम दुनिया की आईटी कंपनियों को टक्कर देती नजर आएगी।

Wednesday, March 4, 2009

कर्ज का चंदन होगा और सस्ता

होम लोन, कार लोन सहित हर तरह के लोन अब और सस्ते होंगे। मंदी के असर को कम करने और ग्रोथ रेट को पटरी पर लाने के लिए आरबीआई ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में आधा फीसदी की कटौती कर दी है। रेपो रेट अब 5.5 फीसदी से घटकर 5 फीसदी पर पहुंच गया है। जबकि रिवर्स रेपो रेट 4 फीसदी के घटकर 3.5 फीसदी पर पहुंच गया है। ये नई दरें आज से ही लागू होंगी। रेपो रेट वो दर है जिसपर देश के सरकारी और निजी बैंक रिजर्व बैंक से पैसे उधार लेती है। यानी कि अगर बैंकों को सस्ते में पैसे मिलेंगे तो वो भी कम ब्याज दर पर ग्राहकों को लोन देंगे। और जब ग्राहकों के पास पैसे पहुंचेंगे तो बाजार में सामान बिकेगा, माकान बिकेंगे यानी दिसंबर की तिमाही में 5 के करीब पहुंच चुके विकास दर में एक बार फिर से पंख लग पाएगा। एक तरफ तो सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए एक के बाद एक बेलआउट पैकेज का ऐलान कर रही है। वहीं दूसरी ओर रिजर्व बैंक भी मॉनेटरी पैकेज देने में कोई कमी नहीं कर रही है।  आरबीआई  बाजार में मांग को बरकरार रखने के लिए कई बार रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कटौती कर चुका है। पिछले चार महीनों में ही रेपो रेट 9 फीसदी से लुढ़ककर 5 फीसदी पर पहुंच गया है। और रिवर्स रेपो रेट 6 फीसदी से लुढ़ककर 3.5 फीसदी पर पहुंच गया है। दिसंबर महीने में ऐसे ही ऑटो सेल्स में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में आरबीआई के इस तोहफे से कार सेल्स में और तेजी के साथ ही रियल स्टेट, कंज्यूमर गुड्स सहित कई सेक्टर्स में सुधार देखने को मिल सकता है।  

Monday, March 2, 2009

अजीत ने जीत लिया गुरू का दिल

दुनिया के सबसे अमीर आदमी बनने की दौड़ में मित्तल और अंबानी से आगे अजीत जैन निकल सकते हैं?! दुनिया के सबसे अमीर आदमी का उत्तराधिकारी बनेगा एक भारतीय। वारेन बफेट जो कि इस समय दुनिया में सबसे अमीर हैं। उनकी संपत्ति 62 अरब डॉलर के करीब है। साथ ही उनकी कंपनी बर्कशायर हैथवे का मार्केट कैप 121765 मिलियन डॉलर। जो कि गूगल,एप्पल, पेप्सिको, कोका कोला और जेनरल इलेक्ट्रिक से ज्यादा है। मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से बर्कशायर हैथवे अमेरिका की नौवीं सबसे बड़ी कंपनी है। और इस कंपनी की बागडोर आने वाली है एक भारतीय के हाथ। जिसका नाम है अजीत जैन।   अजीत जैन वारेन बफेट के सबसे करीबी लोगों में शामिल हैं। यही नहीं दुनिया के सबसे बड़े निवेश गुरू यानी वारेन बफेट को भी जब सलाह की जरूरत होती है तो सबसे पहले उनकी जुबान पर अजीत जैन का ही नाम आता है। वारेन बफेट ने अपने शेयरधारकों को चिट्ठी लिख ये बता दिया है कि अजीन उनके उत्तराधिकारी हो सकते हैं। यानी आने वाले दिनों में अजीत जैन बर्कशायर हैथवे की बागडोर संभाल सकते हैं।    आइए डालते हैं एक नजर आखिर ये अजीत जैन हैं कौन: - 1972 में आईआईटी खड़गपुर से अजीत जैन ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली - 1973 में भारत में ही आईबीएम में नौकरी शुरू की - 3 साल तक आईबीएम में काम किया उसके बाद अमेरिका चले गए - 1978 में अमेरिका के हावर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया - कुछ साल ग्लोबल मैनेजमेंट फर्म मैकेंजी में भी काम किया - 80 के दशक में फिर भारत लौट गए - 1986 में दुनिया के सबसे अमीर आदमी वारेन बफेट की कंपनी बर्कशायर से जुड़े - बर्कशायर हाथवे के रीइंश्योरेंस डिवीजन का जिम्मा संभालते हैं - बर्कशायर हाथवे के मालिक बफेट के सबसे करीबी बन गए - बफेट किसी भी अहम फैसले के लिए अजीत जैन की राय जरूर लेते हैं - बफेट अजीत जैन को असाधारण मैनेजर मानते हैं - अजीत जैन कठिन से कठिन परिस्थिति में बेहतर फैसले लेने में माहिर हैं - अजीत जैन के वारेन बफेट की कंपनी को काफी मुनाफा कराया है हालांकि इंजीनियरिंग करने के दौरान अजीत ज्यादा मेधावी नहीं थे। पढ़ाई से ज्यादा वक्त दर्शन शास्त्र, इंटरनेशनल पॉलिटिक्स, वियतनाम समस्या जैसे मुद्दों पर घंटों बहस में बिताते थे। हालांकि उनमें एक अलग तरह की प्रतिभा थी। सटीक फैसला लेने की, निवेश के लिए सही वक्त का अंदाजा लगा लेने की। शायद यही वजह है कि आज वो दुनिया के सबसे बड़े निवेश गुरू की कंपनी ही नहीं उनके दिल पर भी राज करने को तैयार हैं।

Monday, February 2, 2009

सत्यम की कीमत

70 का कांटा डालने पर तो मछलियां आ रही हैं..यानी कांटे का वजन कुछ बढ़ाना चाहिए सत्यम की सही कीमत पर अटकलें तेज हो गई हैं। आखिर क्या होना चाहिए सत्यम के प्रति शेयर की कीमत। सत्यम को खरीदने के लिए लाइन में खड़ी कंपनियों ने सेबी से सत्यम के मामले में विशेष छूट देने की मांग की हैं। और एक तरह से सेबी ने इसे मान भी लिया है। सेबी ने कहा है कि राजू की चिट्ठी से पहले सत्यम के शेयरों की कीमतों के बारे में अब कुछ सोचने का सवाल ही नहीं है। यानी कि 7 जनवरी से पहले सत्यम के शेयर कितने में मिल रहे थे इसपर सेबी की नजर नहीं है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं की 7 जनवरी के बाद के 10 दिनों के एवरेज या दो हफ्ते के एवरेज पर सत्यम की 20 फीसदी हिस्सेदारी सेबी किसी को सौंप देगी। सेबी इसके लिए बीच का रास्ता अपनाने पर विचार कर रही है। अब तक ये नियम था कि कोई भी इंस्टीट्यूट या आदमी या कोई कंपनी किसी कंपनी का 15 फीसदी शेयर खरीदती है। तो उसे उस कंपनी के 20 फीसदी शेयर और खरीदना होगा। इसके लिए उस आदमी या इंस्टीट्यूट या कंपनी को 20 फीसदी शेयर खरीदने के लिए ओपेन ऑफर लाना होगा। और ओपेन ऑफर में कंपनी के शेयरों की कीमत होगी पिछले 6 महीनों के एवरेज कीमत के बराबर। लेकिन सत्यम के मामले में ऐसा नहीं होगा। क्योंकि सत्यम के प्रति शेयर की कीमत पिछले 6 महीनों के एवरेज निकालने से आता है 275 रुपए के करीब। लेकिन इस कीमत पर कोई इसे खरीदने को तैयार नहीं है। ऐसे में अब सेबी की तरफ लोगों की निगाहें टिकी हैं। लेकिन सेबी जिसकी पहली प्राथमिकता है निवेशकों के हितों का ध्यान रखना। ऐसे में सत्यम के लिए कतार में खड़ी कंपनियों को ये उम्मीद छोड़ देनी चाहिए कि उसे कौड़ियों के भाव सत्यम के शेयर मिल जाएंगे। भले ही सेबी ने ये कहा है कि 7 जनवरी से पहले की सत्यम की कीमत अब मायने नहीं रखती। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि फिलहाल बाजार में शेयर की जो कीमत(करीब 60 रु) है उससे नीचे सेबी इसकी कीमत तय करेगी। हां, सेबी कंपनियों को अलग अलग तरह का चारा देगी। और उसमें अगर कोई हिंदुजा, महिंद्रा, एल एंड टी या आई गेट फंसते हैं तो ठीक है। नहीं तो सरकार को अभी इतनी भी जल्दबादी नहीं है सत्यम को बेचने की।

Friday, January 23, 2009

सत्यम के पैसे मेटास की झोली में

पापा आपने ही SATYAM का उल्टा नाम MAYTAS रखा था मेरी कंपनी का...और ये देखो, मैंने आज आपको उल्टा कर दिया रामालिंगा राजू के बेटे ने सत्यम से उलट नाम की तरह ही सत्यम से उलट काम भी करना शुरू कर दिया। और सत्यम के सारे पैसे आंखें बंद कर अपनी कंपनी की झोली में पलटने लगा। यानी सत्यम का खून चूस चूसकर उसे बर्बादी की कगार पर ला दिया। लेकिन सरकार की सहयोग से अब लगता है कि सत्यम की नैया पार हो जाएगी। और हो भी क्यों नहीं। सही माएने में सत्यम काफी मजबूत कंपनी है। अगर नहीं होती तो सरकार इसमें सटती ही नहीं। सत्यम के दुनियाभर में ऐसे ऐसे दिग्गज क्लाइंट हैं जिसके लिए आज भी विप्रो, महिंद्रा टेक, इंफोसिस जैसी कंपनियां तरसती हैं। जी हां,फॉरच्युन फाइव हंड्रेड कंपनियों में से एक और दो नहीं करीब 28 कंपनियां सत्यम की क्लाइंट हैं। और उनमें से कई कंपनियों के साथ सत्यम के रिश्ते काफी मजबूत हैं, अभी भी। और ये यूं ही नहीं हो पाया है। सत्यम इनमें से कई कंपनियों को करीब 10 से 15 सालों से सेवा दे रही है। सत्यम के बैलेंस शीट में भले धांधली हुई हो लेकिन सत्यम के काम पर कभी किसी ने उंगली नहीं उठाई। सत्यम को किश्ती तो वहां डूबी जहां पानी कम था। यानी अपने ही घर में। अपने ही बेटे की मोह में। जब रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी ने सबसे पहले दस्तक दी। तो बड़ी बड़ी कंपनियों के आंखों के सामने तारे दिखाई देने लगे। और अभी तक दिखाई दे रहे हैं। चाहे वो देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ हो या यूनिटेक या पार्श्वनाथ। रियल एस्टेट की बड़ी बड़ी मछलियां तो इस तूफान को झेल रही हैं। लेकिन छोटी कंपनियों के लिए ये बस की बात नहीं थी। और वो भी मेटास जैसी कंपनी के लिए। जिसने केवल आंध्र प्रदेश ही नहीं पूरे देश में अपने पांव पसार लिए थे। मेटास को शुरूआत में बैंक से आसानी से कर्ज मिल जाया करता था। लेकिन बाद में स्थिति बदल गई। और तब प्रोजेक्ट को जारी रखने से लेकर कर्ज चुकाने तक के लिए राजू को अपने बेटे की मदद करनी पड़ी। लेकिन राजू ने मदद का जो रास्ता चुना वो सही नहीं था। राजू की इस गलती को जिसने भी पकड़ा वो भी मालामाल होता चला गया। और बेटा बाप का यानी मेटास सत्यम का खून चूसता रहा। लेकिन सरकार को लगता है कि वो सत्यम से चूसे गए खून के एक-एक कतरे का हिसाब ले लेगी। शायद यही वजह से कि सत्यम के पुराने अधिकारियों पर भी सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है। अगर सरकार सत्यम के मामले में आखिर तक न्याय के साथ खड़ी रहती है तो इसमें कोई शक नहीं कि आने वाले दिनों में सत्यम के शेयर धारकों को मेटास इफ्रा से शेयर भी मिल जाएं। हालांकि फिलहाल तो यही कहने का मन होता है..कि..फिल्म अभी बाकी है।

Thursday, January 22, 2009

सत्यम का बिकना लगभग तय

टूट के बिखर चुकी इस कंपनी को पहले बोरे में तो समेट लूं..उसके बाद ही किसी मजबूत हाथों में इसे दूंगा। सत्यम को खरीदने वालों की लाइन लग चुकी है। इससे निवेशकों को राहत मिल सकती है। एल एंड टी, एस्सार ग्रुप, पट्टनी कम्पयुटर्स सहित कई संस्थागत निवेशकों ने सत्यम में अपना विश्वास दिखाया है। एल एंड टी ने कहा है कि सत्यम के बोर्ड में रहने की बजाए वो सत्यम को खरीदना पसंद करेगी। उधर अनिल अंबानी भी सत्यम पर नजर गड़ाए हुए हैं। सत्यम को आने वाले दिनों में राहत मिल सकती है। क्योंकि देश की एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी एल एंड टी ने सत्यम में अपना विश्वास जताया है। एल एंड टी ने एक महीने पहले ही सत्यम के करीब 4 फीसदी से ज्यादा शेयर खरीदे थे। लेकिन धांधली की खबर आने के बाद एल एंड टी ने कोई शेयर नहीं लिया है। हालांकि कंपनी ने उनके शेयर बेचे भी नहीं है। कंपनी ने कहा कि अगर सत्यम के सारे नुकसान का एक बार पता चल जाए। तो उसके खरीदने में एल एंड टी को कोई परेशानी नहीं होगी।  एलएंडटी के इस इस बयान के बाद सत्यम के शेयरों में कुछ सुधार दखने को मिला। पिछले दो दिनों से सत्यम के शेयरों में तेजी देखी जा रही है। उधर एस्सार ग्रुप ने सत्यम के बीपीओ बिजनेस को खरीदना चाहती है। यही नहीं पटनी कम्पयुटर्स सहित कई विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सत्यम में मालिकाना हक के सरकार से बात की है। जिससे निवेशकों के सेंटिमेंट्स में इजाफा हुआ है। यही नहीं सत्यम से आंध्र प्रदेश सरकार के भी सेंटिमेंट्स जुड़े हुए हैं। इसलिए राज्य सरकार भी सत्यम को खरीदने के लिए लाइन में खड़ी है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में आध्र प्रदेश  को पहचान दिलाने वाली कंपनियों में सत्यम पहले नंबर पर आती है। हैदराबाद से सटे साइबराबाद को दुनिया के नामी आईटी सिटी में गिना जाता है। और इसके पीछे सत्यम का बड़ा हाथ है। लेकिन फिलहाल सत्यम दलदल में फंस चुकी है। और जबतक सत्यम में हुई पूरी धांधली और कंपनी को हुए असली नफे-नुकसान की बात सामने नहीं आ जाती। तबतक निवेशकों को इसके शेयर से दूर रहने की बात ज्यादातर लोग कर रहे हैं। लेकिन जिस तरह से सरकार ने सत्यम को संभालने की शुरूआत की है। और इसके बोर्ड में देश के दिग्गज लोगों को शामिल किया है। उससे तो यही लगता है कि आने वाले दिनों में सत्यम की नींव को फिर से दुरूस्त कर दी जाएगी। और हो सकता उसके बाद सरकार इसे किसी मजबूत हाथों में बेच दे। लेकिन फिलहाल तो सत्यम के सच और सत्यम के झूठ के बीच जंग जारी है और इसके बीच पिस रहे हैं बेचारे निवेशक। बस इस बात की उम्मीद लिए कि इसे कोई दिग्गज कंपनी जरूर खरीद लेगी।