अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले रुपए की कीमत अबतक के अपने सबसे निचले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। दिनभर के कारोबार के दौरान आज एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 52 रुए 73 पैसे तक जा पहुंची। रुपए की कमज़ोरी की वजह से कंज्युमर्स ड्यूरेबल्स और आयातित खाने के तेल महंगे हो चुके हैं।
रुपये के लगातार कमज़ोर होने से तेल का आयात और महंगा होता जा रहा है। साथ ही इससे महंगाई और वित्तीय घाटे के और अधिक बढ़ने का अंदेशा पैदा हो गया है। पिछले चार महीने में रुपए में 16 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। जबकि इसी साल जनवरी में एक अमेरिकी डॉलर मिल रहा था 45 रुपए से भी कम के भाव में। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय अनिश्चितता के चलते रुपये में कमज़ोरी आई है और भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से कोई खास अंतर नहीं हो नहीं देखने को मिलेगा।
रुपए के कमज़ोर होने का असर दिखने लगा है कई कंपनियों ने कंज्युमर ड्यूरेबल्स के दाम बढ़ा दिए। आयातित खाने के तेल भी महंगे हो चुके हैं। साथ ही आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों पर भी इसका असर देखने मिल सकता है। क्योंकि डॉलर के मुक़ाबले 1 रुपए तक की कमज़ोरी से तेल मार्केटिंग कंपनियों को करीब 8000 करोड़ रुपए ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। लेकिन सरकार खुद-ब-खुद रुपए में सुधार की उम्मीद लगाए बैठी है।
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