Wednesday, December 17, 2008

मंदी की मार दूल्हा लाचार

एक तो आईटी प्रोफेशन ऊपर से एनआरआई..तुम्हारे साथ तो मैं मंदी की इस दरिया में ही डूब जाऊंगी..बट,सॉरी, मैं डूबना नहीं चाहती इसलिए तुम्हें धक्का दे रही हूं.. ग्लोबल मंदी की मार शादी के बाजार पर भी हावी हो चुका है। मंदी से जहां दुल्हन की हाथ पीली नहीं हो पा रही है। वहीं दूल्हे का चेहरा लाल हो रहा है। खासकर आईटी और एनआरआई दूल्हे का। क्योंकि अब ना तो  दुल्हन उन्हें पसंद कर रही हैं और ना ही कोई मां-बाप अपनी बेटी का हाथ आईट से जुड़े दूल्हे के हाथों में देना चाह रहे हैं। वजह साफ है..दुल्हन की भविष्य और आर्थिक सुरक्षा। लड़की और उनके मां-बाप का मानना है कि इस आर्थिक मंदी में आईटी प्रोफेशनल्स की नौकरी दांव पर लगी है। और ऐसे में उनसे शादी करना यानी दुल्हन के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।   छे महीने पहले तक ऐसा नहीं था। आईटी दूल्हे की तूती बोलती थी। दुल्हन की पहली पसंद हुआ करता था आईटी दूल्हा। लेकिन अब तो आईटी दूल्हे को कोई नहीं पूछ रहा है। इसलिए डाउरी बाजार में आईटी दुल्हे के भाव नीचे लुढ़क गए हैं। मंदी के इस दौर में आईएएस और आईपीएस दूल्हे की मांग सबसे ज्यादा बढ़ चुकी है। और उनके के लिए दुल्हन के मां बाप एक से पांच रुपए खर्च करने को तैयार हैं। जबकि डॉक्टर दूल्हे के भाव 50 लाख से 1 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। वहीं टीचिंग और रिसर्च से जुड़े दूल्हे  5 लाख से 50 लाख रुपए मिल रहे हैं। लेकिन आईटी सेक्टर से जुड़े दूल्हे के भाव देश के कुछ राज्यों में तो जीरो पर पहुंच चुका है। यानी दुल्हन आईटी दुल्हे को डाउरी नहीं देने के शर्त पर शादी करने के लिए हां कर रही हैं।   यही नहीं मंदी की इस मार में शादी  के लिए लड़कियां फूंक-फूंक कर कदम आगे बढ़ा रही हैं। और कोई भी रिश्ता पक्का करने से पहले दूल्हे के प्रोफेशन और इस मंदी से उसके प्रोफेशन पर पड़ने वाले असर को जरुर जान लेना चाहती हैं।

Saturday, December 13, 2008

भारत में थ्री जी की शुरूआत

अब मोबाइल पर लाइव मिला करेंगे लोग थ्री जी सेवा शुरू होते ही मोबाइल बन गया है इंटरटेंनमेंट और इंफोर्मेशन का समंदर। अब लोग ना केवल हाइ स्पीड इंटरनेट का मजा ले पाएंगे बल्कि फोन पर बात करने के साथ ही जिससे बात कर रहे हैं उसे देख भी पाएंगे। जी हां यहीं है थ्री जी का जादू। पहली बार भारत में थर्ड जेनरेशन मोबाइल सर्विस शुरू हो चुकी है। और इसे शुरू किया सरकारी टेलीकॉम कंपनी एमटीएनएल ने। थ्री जी स्पेक्ट्रम की निलामी होने के बाद दूसरी प्राइवेट और सरकारी कंपनियां भी इसे शुरू करेंगी। फिलहाल इस सेवा की सबसे पहले शुरूआत दिल्ली में की गई है। और अच्छी ख़बर ये है कि एमटीएनएल कुछ हाइएंड ग्राहकों को शुरूआती दो महीने तक थ्री जी सेवा मुफ्त मिलेगी। एमटीएनएल के थ्री जी नेटवर्क का सेटअप मोटोरोला ने किया है। एमटीएनएल दो महीने बाद मुंबई में भी थ्री जी सर्विस की शुरूआत करेगी। फिलहाल इस सेवा को ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है। जनवरी से इसे कमर्शियली लांच कर दिया जाएगा। देश में आई मोबाइल क्रांति की वजह से ही थ्री जी देश में संभव हो पाया है। हालांकि भले ही भारत के लिए 3 जी नई हो लेकिन दुनिया के लिए भी ये सर्विस ज्यादा पुरानी नहीं है। 7 साल पहले यानी 2001 में दुनियाभर में सबसे पहले जापान में थ्री जी सर्विस की शुरूआत की गई थी। उसके एक साल बाद इसे दक्षिण कोरिया में लांच किया गया। और केवल 5 साल पहले यानी कि 2003 में अमेरिका में इसकी सफल शुरूआत की गई। फिलहाल केवल 40 से ज्यादा देशों में ही थ्री जी सर्विस मौजूद है। भारत में थ्री जी की शुरूआत के साथ ही मोबाइल की दुनिया धीरे धीरे पूरी तरह बदल जाएगी। यानी न सिर्फ मोबाइल केवल आपकी बातचीत का एक साधन रहेगा बल्कि 3 जी आने के बाद पूरी दुनिया आपके मोबाइल में सिमट जाएगी। थ्री जी सर्विस की शुरूआत के साथ ही आपका मोबाइल बन जाएगा आपकी सबसे प्यारी चीज। क्योंकि मोबाइल से तब आप ना सिर्फ बात कर पाएंगे बल्कि उसमें टीवी का भी मजा ले पाएंगे। यही नहीं ब्राडबैंड की स्पीड से आप अपने मोबाइल पर इंटरनेट का मजा भी ले सकेंगे। यानी किसी भी गाने, वीडियो या फाइल को डाउनलोड करने या कहीं और भेजने के लिए आपको लगेंगे महज कुछ सेकेंड्स।   3जी से मोबाइल पर ब्रॉडबैंड इंटरनेट एक्सेस,विडियो कॉनफ्रैंसिंग और मोबाइल टीवी जैसी सर्विसेज़ का मज़ा लिया जा सकता है । 3जी सर्विसेज़ से मोबाइल यूज़र्स इंटरैक्टिव गेमिंग,मूवी,विडियो क्लिप और म्यूज़िक को  डाउनलोड कर सकते हैं । और वो भी तेजी से।  मिसाल के तौर पर 3जी फोन में 3 मिनट के एक गाने को डाउनलोड करने में महज़ 15 सेकंड लगेंगे । इससे मोबाइल यूजर्स को तो फायदा होगा ही साथ ही सर्विस प्रोवाइडर्स की कमाई में भी इज़ाफा होगा । भले ही एमटीएनएल शुरूआती दो महीने तक ये सर्विस फ्री में दे रही है। लेकिन उसके बाद 3-जी सेवाओं के इस्तेमाल से उपभोक्ताओ के बिल में लगभग 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है । अगर आपने पहले से ही थ्री जी मोबाइल ले लिया है तो अब तैयार हो जाइए थर्ड जेनरेशन नेटवर्क के रोमांच के लिए। जो आपके इंफोर्मेशन,बिजनेस और इंटरटेंनमेंट की दुनिया को बदल कर रख देगा।     

काम को मिला ईनाम

विकास करो...चुनाव जीतो ना आतंकवाद ना महंगाई ना मंदी..कोई भी मुद्दा नहीं चला पांच राज्यों के चुनाव में। इन राज्यों में केवल काम को मिला ईनाम। जिन राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल में सचमुच में आम जनता के लिए काम किया वो जीत कर आ गई। और जिसने काम नहीं किया केवल बयानों से काम चलाई वो हार गई। ये देश युवाओं का देश है जो कि पढ़े-लिखे हैं। उन्हें बातों में बहलाना थोड़ा मुश्किल है। कोरे बयानों को वो सुन जरूर लेते हैं। लेकिन अपना फैसला काफी  सोच समझकर लेते हैं। इन युवायों को काम हक़ीकत में देखना पसंद है। और ये उसी को जिताना पसंद करते है जो सचमुच काम करता है। ये सारी बातें दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के चुनावों में देखने को मिल गया है। इन राज्यों में वही  जीत पाया है जिसने सचमुच में काम किया है। और बैलेंस्ड काम किया है। विकास के दम पर जीत शीला ने दिल्ली में किए काम - मैट्रो रेल की शुरूआत - हजारों फ्लाइओवर बनाए - गाड़ियों में सीएनजी ---------------------------- शिवराज ने मध्य प्रदेश में किए काम - बिजली का उत्पादन बढ़ाया - सड़कों का जाल बिछाई - पानी की उपलब्धता बढाई ----------------------------- रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में किए काम - माओवादियों पर लगाम - करप्शन में कमी - औद्योगिकरण को बढ़ावा अगर दिल्ली की बात करें हम शीला दीक्षित के काम को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगे। शीला ने पिछले पांच सालों में दिल्ली के नक्शे को बदल कर रख दिया है। शीला दीक्षित के कार्यकाल में ही दिल्ली में मैट्रो की शुरूआत हुई। जिससे लाखों लोगों का सफर आसान हुआ। साथ ही शील ने दिल्ली में इतने फ्लाईओवर बनाए कि हाजारों रेड लाइट का नामो निशान मिट गया। अब कई किलोमीट के सफर के बाद कहीं कोई रेड लाईट दिखाई देती है। दिल्ली को पॉल्युशन फ्री करने के लिए शीला ने गाड़ियों में सीएनजी कम्पलसरी कर दिया। शीला ने इस बार भी अपने काम को आधार बनाकर ही लोगों से वोट की मांग की थी। और उनकी ये स्ट्रैटजी कामयाब रही।  और यही बात मध्यप्रदेश में भी लागू हुई । मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में बीजेपी सरकार के कई काम किए। पिछले पांच सालों में शिवराज की सरकार ने बिजली, सड़क और पानी की उपलब्धता में भारी इजाफा किया है। जो उनकी जीत की वजह बनी। ठीक ऐसा ही हाल रहा छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार का। विकास के दम पर ही छत्तीसगढ़ की बीजेपी  सरकार ने जीत हासिल की है। रमन सिंह अपने पांच साल के कार्यकाल में राज्य में माओवादी गतिविधियों पर लगाम कसी है। साथ ही राज्य में करप्शन को कम किया है। औद्योगिकीकरण को बढ़ावा दिया है। और राजस्थान में वसुंधरा राजे सिंधिया सरकार ने कुछ काम तो किया लेकिन वो कुछ खास क्षेत्र या वर्ग तक ही सीमित था। इसलिए उन्हें जाना पड़ा। यानी ये बात अब साफ हो चुकी है। कि अब जीत के लिए विकास का रास्ता पकड़ना ही होगा। चाहे वो कोई भी पार्टी हो। 

Sunday, November 30, 2008

आखिर वित्त मंत्री को मिल ही गया गृह

विकास दर 8 के बाद 9 फिर 7...सेंसेक्स 5000 के बाद 21000 फिर 8000 देश के आर्थिक रिफॉर्म में अपना अहम योगदान देने वाले और दुनियाभर में भारत को एक आर्थिक ताकत का दर्जा दिलाने वाले वित्त मंत्री पी चिदंबरम यानी पालानिप्पन चिदंबरम अब हमारे नए गृह मंत्री होंगे। कांग्रेस की बहुमत वाली यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलाइंस की सरकार में चिदंबरम ने वित्त मंत्री का कार्यभार मई 2004 को संभाला। इससे पहले भी जून 1996 से मार्च 1998 तक चिदंबरम वित्त मंत्री रह चुके हैं। देश ही नहीं इंटरनेशनल बिजनेस कम्युनिटी में इनकी अच्छी पहचान है। इन्हें चैंपियन ऑफ इकॉनोमिक रिफॉर्म  भी कहा जाता है। चिदंबरम का ये मानना है कि जो देश दुनिया के बाजारों से कंपीटीशन को तैयार होगा। वो आसानी से गरीबी से निजात पा लेगा। और भारत को कंपीटीटिव बनाने के लिए चिदंबरम ने कई अहम काम किए। ये जानकर आश्चर्य होगा कि चिदंबरम ने अपनी बैचलर डिग्री चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज से साइंस में ली है। इसके बाद मद्रास यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज से इन्होंने लॉ की डिग्री भी हासिल की। इसके बाद हावार्ड के बिजनेस स्कूल से लगातार जुड़े रहे और वहां से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। हालांकि पेशे से चिदंबरम वकील है। और यही वजह है कि इन्हें देश के सीनियर प्रमुख काउंसलर के रूप में भी जाना जाता है। क्योंकि संवैद्यानिक और कॉरपोरेट लॉ में इनका अहम योगदार रहा है। 1969 में मद्रास हाइकोर्ट से इन्होंने अपनी करियर की शुरूआत एक वकील के तौर पर की । इसके बाद सुप्रीम कोर्ट और कई राज्यों के हाइकोर्ट में इन्होंने प्रैक्टिस किया। चिदंबरम ने अपनी राजनीतिक करियर की शुरूआत 60 के दशक के आखिर में यूथ कांग्रेस के जरिए शुरू की। और 1984 में पहली बार तमिलनाडु के शिवगंगा से लोकसभा के लिए चुने गए। और 1999 से 2004 को छोड़कर अबतक शिवगंगा चुनाव क्षेत्र से ही प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। और अबतक 6 बार संसद में अपनी जगह बना चुके हैं। चिंदबरम को सितंबर 1985 में पहली बार वाणिज्य मंत्रालय में डिप्टी मिनिस्टर के पद के लिए चुना गया। 1986 के सिविल सर्विस रिफॉर्म में चिदंबरम में अपना अहम योगदान दिए।अक्टूबर 1986 में इन्हें राज्य मंत्री बनाकर गृह मंत्राल में इंटरनल सिक्टोरिटी का जिम्मा सौंपा गया। जहां उनकी जिम्मेदारी थी घुसपैठ और आतंकवाद से निबटने की। 1991 से 92 और 1995 से 96 तक स्वतंत्र प्रभार के साथ इन्हें वाणिज्य राज्य मंत्री बनाया गया। ये वही समय था जब देश में इकॉनोमिक रिफॉर्म की शुरूआत हुई थी। प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव की इकॉनोमिक रिफॉर्म टीम में चिदंबरम का महत्वपूर्ण स्थान था। चिदंबरम का एजुकेशन - चेन्नई के प्रेसिडेंसी कॉलेज से साइंस में डिग्री - मद्रास यूनिवर्सिटी से लॉ किया - हावर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए किया कई मंत्रालय में चिदंबरम - 1985 में वाणिज्य मंत्रालय में डिप्टी मिनिस्टर बने - 1986 में राज्य मंत्री बने - गृह मंत्रालय में इंटरनल सिक्योरिटी का जिम्मा सौंपा गया - 1991 से 1992 और 1995 से 1996 तक स्वतंत्र प्रभार के साथ वाणिज्य राज्य मंत्री बनाया गया वित्त मंत्री के तौर पर चिदंबरम - पहली बार 1996 में वित्त मंत्री बने - ड्रीम बजट पेश किया - 2004 में दूसरी बार वित्त मंत्री बने - मैक्रो इकॉनोमिक मैनेजमेंट को मजबूत किया - विकास दर को 9 फीसदी के पार पहुंचाया 1 जून 1996 को पी चिदंबरम पहली बार वित्त मंत्री बने। और तब इनका कार्यकाल दो साल का यानी 18 मार्च 1998 तक का रहा। इस दौरान इन्होंने ड्रीम बजट पेश किया। जिसकी देशभर में तारीफ की गई। अपने उस ड्रीम बजट में चिदंबरम ने पर्सनल और कॉरपोरेट टैक्स की दरों में भारी कमी कर सबको चौंका दिया। मई 2004 में चिदंबरम एकबार फिर वित्त मंत्री बने। तब इन्होंने मैक्रो इकोनोमिक मैनेजमेंट को मजबूत किया। जिसके बूते लगातार तीन साल तक जीडीपी विकास दर 8 फीसदी पर रहा। और चौथे साल ये 9 फीसदी को पार कर गया। इसके साथ ही सेविंग और इन्वेस्टमेंट दरों में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला। साथ ही स्टॉक मार्केट और विदेशी निवेश में एक बूम आ गया। इस दौरान चिदंबरम ने वैट को लागू किया साथ ही फाइनेंशियल सेक्टर में एक बड़े रिफॉर्म के लिए मजबूत आधार तैयार किया। चिदंबरम को एक अच्छा स्पीकर और अंतरराष्टरीय आर्थिक कूटनीति का एक माहिर खिलाड़ी माना जाता है। विश्व व्यापार संगठन समझौते में चिदंबर में वाणिज्य मंत्री के तौर पर अपना अहम योगदान दिया। साथ ही एशियन डेवलपमेंट बैंक, जी-20, जी 8देशों में भारत की अलग पहचान दिलाई। इतने काम के बावजूद चिदंबरम दुनियाभर के इंस्टीट्यूशन औऱ यूनिवर्सिटीज में समय-समय पर अपने प्रभावी लेक्चर देते हैं। जिसकी काफी तारीफ होती है। चिदंबरम राजीव गांधी फाउंडेशन के ट्रस्टी भी हैं। चिदंबरम की पत्नी का नाम नलिनी है जिससे उनका एक बेटा भी है। चिदंबरम को तमिल लिट्रेचर काफी पसंद है। साथ ही टेनिस, बैंडमिंटन और चेस खेलना उन्हें अच्छा लगता है। चिंदबरम को गृह मंत्रालय के रूप में जो नई जिम्मेदारी दी गई है। वो काफी कठिन है क्योंकि गृह मंत्रालय के कामकाज पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में इसपर खरा उतरना एक बड़ी चुनौती है। और इसके लिए  उनके पास समय भी बहुत कम है। क्योंकि अगले साल ही लोकसभा चुनाव होने हैं।

Saturday, November 29, 2008

कम हुई कैश फिर भी मुकेश की ऐश

भारत के सबसे अमीर आदमी ग्लबोल मंदी के इस दौर में भारत के अरबपतियों की संपत्ति में सेंध लग चुकी है। पिछले साल के मुकाबले उनकी संपत्ति में करीब 60 फीसदी की कमी आई है। और इस गिरावट में सबसे ज्यादा 32 अरब 50 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है छोटे अंबानी यानी अनिल अंबानी को। लेकिन इस माहौल में भी संपत्ति के मामले में अपबपतियों में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी है। जिनके शेयर ज्यादा गिरे वो नीचे हो गया और जिनके कम गिरे वो ऊपर हो गया। और बाजार के इसी उतार-चढ़ाव ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को पहली बार भारत का सबसे अमीर आदमी बना दिया है। जी हां अमेरिकी मैगजीन फोर्ब्स ने भारत के अरबपतियों की जो नई लिस्ट जारी की है। उसमें पहले नंबर पर मुकेश अंबानी को जगह दी गई है। मुकेश ने संपत्ति के मामले में स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल को पीछे छोड़ दिया है। -मुकेश अंबानी के पास कुल संपत्ति 20 अरब 80 करोड़ डॉलर की संपत्ति है। जो कि पिछले साल तक 49 अरब डॉलर की थी। लेकिन पिछले साल के मुकाबले इनकी संपत्ति में 28 अरब 20 करोड़ डॉलर की गिरावट आई है। लेकिन इस गिरावट में भी मुकेश बन गए हैं विजेता। यानी कि भारत का सबसे अमीर आदमी। - पिछले कई सालों से पहले नंबर पर आसीन लक्ष्मी मित्तल भारत के सबसे अमीर आदमियों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। लक्ष्मी मित्तल की संपत्ति है 20 अरब 50 करोड़ डॉलर की रह गई। लक्ष्मी मित्तल की संपत्ति में एक साल में 30 अरब 50 करोड़ डॉलर की कमी आई है। पिछले साल उनकी संपत्ति 51 अरब डॉलर की थी। - तीसरे स्थान पर हैं मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी। अनिल अंबानी की कुल संपत्ति फिसलकर पहुंच चुकी है 12 अरब 50 करोड़ डॉलर पर। मंदी के माहौल में शेयर बाजार में आई भारी गिरावट की वजह से अनिल अंबानी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। एक साल पहले अनिल के पास 45 अरब डॉलर की संपत्ति थी। यानी कि केवल 12 महीनों में 32 अरब 50 करोड़ डॉलर की सेंध अनिल अंबानी की संपत्ति में लग चुकी है। - चौथे नंबर पर हैं भारती एयरटेल के मालिक सुनील मित्तल। सुनील मित्तल की कुल संपत्ति 7 अरब 90 करोड़ डॉलर की। जो कि पिछले साल तक 19 अरब डॉलर की थी। यानी कि केवल एक साल में सुनील भारती मित्तल की संपत्ति में 11.1 अरब डॉलर की गिरावट आई है। - भारत के सबसे अमीर आदमियों में पांचवें स्थान पर हैं डीएलएफ के के पी सिंह का। के पी सिंह के पास फिलहाल 7 अरब 80 करोड़ डॉलर की संपत्ति बची है। जो कि पिछले साल थी 35 अरब डॉलर की। यानी कि एक साल में इनकी संपत्ति में 27.2अरब डॉलर की सेंध लग चुकी है। यही नहीं पिछले साल जहां एक अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति रखने वालों की संख्यां भारत में 54 थी। वो अब घटकर 27 पर पहुंच चुकी है।  

Wednesday, November 5, 2008

व्हाइट + ब्लैक = रेड

व्हाइट हाउस में ब्लैक के घुसने की खबर से बाजार हुआ लाल भले ही ओबामा की जीत का जश्न अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में मनाया जा रहा हो। लेकिन एशिया के ज्यादातर बाजार और यूरोपीय बाजार इस जश्न में शामिल नहीं हुए। यूरोपीय बाजार आज भारी गिरावट के साथ खुले। खुलते ही फुट्सी करीब 100अंक लुढ़क गया। ऐसा ही कुछ हाल भारतीय शेयर बाजार में भी देखा गया। बाजार की शुरूआत आज तेजी के साथ हुई और पहले ही घंटे के कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों से ज्यादा और निफ्टी करीब 100 अंक बढ़त बनाने में कामयाब रहा। लेकिन ओबामा के जीत के साथ ही बाजार में गिरावट शुरू हो गई। और दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 800 अंक नीचे फिसल गया। बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स में 511 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई। और ये 10120 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी करीब 150 अंक लुढ़ककर तीन हजार से नीचे यानी 2994 पर बंद हुआ।  हालांकि जानकारों का मानना है कि ओबामा के जीत से इस गिरावट का कुछ लेना-देना नहीं है। लेकिन बाजार के बारे में ओबामा की नीतियां सेंटिमेंट्स बढ़ाने में कतई मददगार नहीं हैं। ओबामा अमरीकी बाजार के बेलआउट के पक्ष में नहीं है। उनका मानना है कि अगर बेलआउट की जरूरत है भी तो वो वॉलस्ट्रीट में नहीं बल्कि अमेरिका के आम रास्तों पर है। जहां कि रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

Tuesday, October 7, 2008

नैनो का नया ठिकाना

नैनो ने गुजरात से लगाए नैना...पश्चिम बंगाल को कहा 'नो' आखिरकार नैनो ने गुजरात को अपना नया घर बना लिया। गुजरात में नैनो प्लांट लगाने का ऐलान करते हुए टाटा गुजराती रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने गुजरात की खुलकर तारीफ की और गुजराती बोलते नजर आए। पश्चिम बंगाल से काफी परेशानी के साथ विदा हुई टाटा की कार नैनो को आखिरकार अपना नया ठिकाना मिल ही गया। अब ये कार गुजरात के साणंद से निकलेगी। टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा और गुजरात सरकार के बीच इस पर समझौता हो गया है। इसका ऐलान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जीत की तरह किया है।   गुजरात सरकार ने  टाटा को अहमदाबाद से सटे साणंद में 1100 एकड़ जमीन दी है। जिसपर बनने वाले प्लांट से अलगे साल मार्च में पहली नैनो निकलेगी। पहले चरण में हर साल 2.5 लाख नैनो का प्रोडक्शन होगा। जिसे बढ़ाकर दूसरे चरण में 5 लाख कर दिया जाएगा। टाटा के इस नैनो प्लांट से गुजरात में ऑटो इंडस्ट्री से जुड़ी 60 दूसरी कंपनिया भी आएंगी। जिसमें कुल 10 हजार लोगों को रोजगार मिल पाएगा।  नैनो के रास्ते में आने वाली सभी अड़चने खत्म होने की खुशी टाटा के चेहरे पर साफ झलकती दिखाई दी। तो गुजरात में प्लांट लगने की खुशी को वहां के लोगों ने जश्न की तरह सेलीब्रेट किया।    

Tuesday, September 30, 2008

बेलआउट सीनेट में हुआ ऑलआउट

भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह आया तूफान कुछ घंटों के अंदर ही शांत हो गया। और बाजार यू टर्न लेते हुए लाल से हरे निशान में पहुंच गया। ऐसा वित्त मंत्री पी चिदंबरम और सेबी चेयरमैन सी बी भावे के बाजार और अर्थव्यवस्था में सबकुछ ठीक है के आश्वासन के बाद हुआ। उधर अमेरिकी फाइनेंशियल सेक्टर में आया तूफान फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि सीनेट ने 700 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज को खारिज कर दिया है। और इसका असर दुनियाभर के बाजारों पर देखा गया। अमेरिकी बाजार में 777 अंकों की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। यूरोप और एशिया के ज्यादातर बाजार धाराशायी हो गए। और इससे भारतीय बाजार भी अछूता नहीं रहा। बाजार खुलते ही सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा और निफ्टी 100 अंकों से ज्यादा लुढ़क गए। इसके बाद अफर-तफरी में सेबी के चेयरमैन सी बी भावे को लोगों को ये आश्वासन देना पड़ा कि बाजार में सबकुछ ठीक चल रहा है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इसके कुछ ही देर बाद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया। और कहा कि भारतीय शेयर बाजार मजबूत है। और यहां की रेग्युलेटरी व्यवस्था किसी भी तरह की परेशानी को झेलने में सक्षम है। वित्त मंत्री ने देश के सबसे बड़ी प्राइवेट बैंक के वित्तीय संकट के दौर से गुजरने की अफवाह को पूरी तरह से खारिज कर दिया। पी चिदंबरम के साथ ही रिजर्व बैंक ने भी कहा कि आईसीआईसीआई बैंक की वित्तीय स्थिति पूरी तरह से चुस्त दुरूस्त है।   वित्तमंत्री के इस बयान के बाद आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया। साथ ही बाजार में भी खरीदारी तेजी से लौटी । जिससे सेंसक्स 264 अंकों की बढ़त के साथ 12860 पर बंद हुआ। और निफ्टी भी 71 अंकों तेजी के साथ 3921 पर बंद होने में कामयाब रहा। उधर फ्रांस में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अमरीकी वित्तीय संकट के असर से पार पाने के लिए भारत और चीन को मिल कर काम करना चाहिए।

Monday, September 29, 2008

बेलआउट से पहले निवेशकों का बाउलआउट

अमेरिकी कंपनियों को बेलआउट से फायदा होगा या नहीं?... लेकिन इस बेचारे निवेशक का बाउलआउट जरूर हो गया है! अमेरीकी क्रांग्रेस ने वित्तीय संस्थानों के लिए 700 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की रुपरेखा पर रजामंदी दे दी है। इसके बावजूद एशिया, यूरोप, सहित भारतीय शेयर बाजारों पर इस खबर का असर नहीं दिखा। अमेरिकी फाइनेंशियल सेक्टर में मची तूफान का असर भारतीय शेयर बाजार में देखा जा रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में आज भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी ने इस साल के सबसे निचले स्तर को छू लिया।  दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 700 अंक नीचे लुढ़क गया जबकि निफ्टी भी इंट्राडे कारोबार में 200 अंकों से ज्यादा फिसल गया। रियल स्टेट के कुछ शेयर तो करीब 13 फीसदी तक नीचे लुढक गए। बैंक,आईटी, कैपिटल गुड्स, पावर और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी भारी बिकवाली देखी गई। हालांकि आखिरी कारोबारी घंटे में निचले स्तर पर कुछ खरीदारी लौटी। जिससे बाजार निचले स्तर से कुछ ऊपर उठ सका। बाजार बंद होते समय सेंसेक्स 506 अंको की गिरावट के साथ 12595 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी में 135 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और ये 3869 पर बंद हुआ। ऐसा नहीं है कि केवल भारतीय बाजारों में ही गिरावट देखी गई हो।  अमेरिकी फाइनेंशियल सेक्टर में छाई मंदी की मार यूरोप और एशिया सहित पूरी दुनिया की बाजारों पर देखा जा रहा है। जापान के निक्केई में करीब 150 अंकों की गिरावट देखी गई। जबकि यूरोप की फुट्सी भी 238 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। अमरीकी फाइनेंशियल क्राइसिस से दुनियाभर में निवेशकों के पसीने छूट रहे हैं। कई निवेशक कंगाल हो गए हैं। भारत में तो कुछ ब्रोकरों ने नुकसान के दबाव में अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर दी। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस ने बैंक और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियों को दिवालिया होने से बचाने के लिए  700 अरब डॉलर की बेलआउट पैकेज की आउटलाइन पर अपनी मुहर लगा दी है। ये बेल बेलआउट पैकेज तीन चरणों में लागू किया जाएगा। 700 अरब डॉलर के बेलआउट की संभावना के बावजूद दुनियाभर के बाजारों का सेंटीमेंट्स नहीं बदला है। चारो तरफ बिकवाली हावी है। जानकारों का मानना है दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के धाराशायी होने की शुरूआत हो चुकी है। और इसे बचाने के लिए जो बेलआउट पैकेज का ऐलान किया जाने वाला है वो नाकाफी है। और सबसे बड़ी बात ये है कि इस बेलआउट पर अभी प्रतिनिधि सभा में वोटिंग होना बाकी है। अगर ये प्रतिनिधि सभा में पास होगी तभी 700 अरब डॉलर अमरीकी वित्तीय संस्थानों को मिल पाएगा।

Wednesday, September 24, 2008

अमेरिका में बन चुका है फाइनेंस का बुलबुला

करेंसी हटी दुर्घटना घटी?! मकान के लिए सस्ता लोन बांटने के चलते अमेरिका की चौथी सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट बैंक लीमन ब्रदर्स दिवालियापन की चौखट पर खड़ी है। क्योंकि इस बैंक को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। पिछली एक तिमाही में ही लीमन ब्रदर्स को 17500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इससे निवेशकों में अफरा तफरी मच गई है। अमेरिका सहित दुनियाभर के बाजारों में इसका असर देखा जा रहा है। भारी नुकसान को देखते हुए लीमन  ब्रदर्स ने अपने दिवालियापन की अर्जी अमेरिकी बैंकरप्सी कोर्ट में दी है। क्योंकि लेहमैन ब्रदर्स को दिवालिएपन से बचाने की सभी कोशिशें नाकाम रही। बार्कलेज बैंक और बैंक ऑफ अमेरिका ने लीमन ब्रदर्स को खरीदने की कोशिश जरूर की लेकिन अमेरिकी सरकार की ओर से सहायता के आश्वासन न मिलने की वजह से बात नहीं बन पाई।  दूसरी ओर दुनिया की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म मेरिल लींच की तकदीर कुछ अच्छी थी। क्योंकि पिछली तिमाही में 4.5 अरब डॉलर से भी ज्यादा नुकसान के बावजूद बैंक ऑफ अमेरिका ने मेरिल लींच को खरीदकर उसे डूबने से बचा लिया। इसके बावजूद इन बैंकों में काम करने वाले लोगों के भविष्य पर अभी भी सवालिया निशान लगा हुआ है। मेरिल लींच और लीमन ब्रदर्स में काफी संख्यां में भारत के प्रोफेशनल्स काम करते हैं। यही नहीं अमेरिकी बैंक लीमन ब्रदर्स और दुनिया की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म मेरिल लींच की फाइनेंशियल हालत पतली होने से भारत में कम से कम 25000 नौकरियों पर असर पड़ने का अनुमान है।   अमेरिकी के फाइनेंशियल जगत में हुई हलचल का असर अमेरिका सहित पूरी दुनिया में देखा गया। अमेरिकी बाजार 4 फीसदी लुढ़क गया जिससे पेंशन फंड, रिटायरमेंट प्लान्स और पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट कंपनियों को 32 लाख करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। एआईजी के शेयर होल्डरों को 20 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। यही नहीं एआईजी के बेलआउट में यानी इसको दिवालियापन से बचाने के लिए अमरीकी सेंट्रल बैंक को अरबों रुपए खर्च करने पड़े। यूरोपीयन बैंक को स्थिति संभालने के लिए सिस्टम में 70 अरब यूरो डालने को मजबूर होना पड़ा। अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने भी  स्थिति को संभालने के लिए दो दिनों में 120 अरब डॉलर सिस्टम में डाल दिया। इस वजह से अगले ही दिन अमरीकी बाजार हल्की बढ़त बनाने में कामयाब रहा। हालांकि जानकार अमरीकी बाजार में बड़ी गिरावट की आशंका जता रहे हैं। अमेरिकी फाइनेंशियल अनिश्चितता से उठे तूफान को कम करने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड को 20 अरब पाउंड बाजार में उतारना पड़ा। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जापान ने अपने बाजार को संभालने के लिए 14 अरब डॉलर सिस्टम में डाल दिए। ऑस्ट्रेलिया और भारत को करीब 3 अरब डॉलर सिस्टम में उतारने पर मजबूर होना पड़ा। वहीं चीन ने 2002 के बाद पहली बार इंटरेस्ट रेट कट किया और इंडोनेशिया ने भी आनन फानन में रेपो रेट में कटौती का ऐलान कर डाला। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तक फाइनेंशियल जगत में एक देश दूसरे से जुड़े हैं। ऐसे में अमेरिका में अगर फिर से कोई बैंक डूबता है या वहां के फाइनेंशियल सेक्टर में कोई उठा पटक होती है तो वो सुनामी बनकर पूरी दुनिया के फाइनेंशियल जगत को हिला कर रख देगा। यानी पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिकी बेलआउट पर टिकी है। यानी किस तरह से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सबप्राइम क्राइसिस से बने फाइनेंशियल बुलबुले को पैसे बहाकर बचाने में कामयाब होती है। या बचा भी पाती है या नहीं ? 

Friday, September 12, 2008

रुपए पर भारी पड़ा डॉलर

अगर आप आप विदेश घूमने जाने वाले हैं या किसी विदेशी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने वाले हैं  तो अब आपको ज्यादा खर्च करने होंगे। क्योंकि दो-तीन महीने पहले आपको एक डॉलर के लिए 40 रुपए के करीब देने होते थे लेकिन अब वही डॉलर आपके मिलेगा 45 रुपए से ज्यादा में। रूपये पर बढ़ते दवाब के बीच विदेशी बाजारों में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। जिससे रुपया हर दिन कमजोर होता जा रहा है। और यही वजह है कि डॉलर के मुकबले रुपया साढे पैंतालीस रुपए के नीचे पहुंच गया है। जो कि करीब दो साल का निचला स्तर है। विदेशी बाजारों में अमेरिकी डॉलर की तूती एक बार फिर बोलने लगी है। अभी दो महीने पहले तक यूरो हर दिन डॉलर के मुकाबले मजबूत हो रहा था। और दुनिया की दूसरी करेंसी भी डॉलर पर दबाव बनाए हुए था। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और डॉलर यूरोपीय मुद्रा यूरो के मुकाबले एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमत फिसलकर प्रति बैरल 100 डॉलर के करीब पहुंचने की वजह से तेल कंपनियों में डॉलर की डिमांड बढ़ गई है। और उस अनुपात में सिस्टम में डॉलर के नहीं आने की वजह से डॉलर का भाव चढ़ गया है। रुपए के कमजोर होने की वजह से भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ा है। ऐसा नहीं है कि रुपए में आई  कमजोरी से सभी सेक्टरों पर बुरा असर पड़ रहा है। आईटी एक ऐसा सेक्टर है जिसको इसका खूब फायदा हो रहा है। दो-तीन महीने पहले तक  आईटी सेक्टर को सॉफ्टवेयर या सर्विस देने के बदले डॉलर में जो कमाई होती थी। उसे रुपए में बदलने पर उन्हें नुकसान हो रहा था। क्योंकि एक डॉलर के बदले उन्हें मिल रहे थे करीब 40 रुपए। लेकिन अब उनकी चांदी हो रही है क्योंकि एक डॉलर की कीमत साढ़े पैंतालीस रुपए से ऊपर पहुंच चुकी है।  

टाटा की नैनो से पहले एप्पल की नेनो

एप्पल की रेंज एप्पल ने एकबार फिर अपना नेनो आईपॉड और टच आईपॉड लांच कर तहलका मचा दिया है। सैनफ्रांसिसको में एप्पल के सीईओ स्टीव जॉन्स ने एक थियेटर में अपने इन दो अनोखे प्रोडक्ट को लांच किया है।  एप्पल का नेनो आईपॉड अबतक की सबसे पतली आईपॉड है। ये आईपॉड एक इंच के चौथे हिस्से से भी ज्यादा पतली है। नैनो आईपॉड को 8 जीबी और 16 जीबी की मैमोरी के साथ लांच किया गया है। 8 जीबी वाले आइपॉड में 2000 गाने स्टोर किए जा सकते हैं औऱ इसकी कीमत है 149 डॉलर। जबकि 16 गिगाबाइट वाले आईपॉड में 4000 गाने स्टोर्ड किए जा सकते हैं। और इसके लिए आपको खर्च करने होंगे 199 डॉलर। इसके साथ ही एप्पल ने आईपडॉ टच के तीन नए रेंज लांच किए हैं। आईपॉड टच का के फीचर्स आईफोन से मिलते जुलते हैं। लेकिन आईपॉड टच से कहीं कॉल करना संभव नहीं है।आईपॉड टच को 8 जीबी 16 जीबी और 32 जीबी स्टोरेज मैमोरी के साथ लांच किया गया है। 8 जीबी वाले आईपॉड टच की कीमत है 229 डॉलर जककि 16 जीबी वाले की कीमत है 299 डॉलर और 32 जीबी वाले आईपॉड टच के लिए आपको खर्च करने पड़ेंगे 399 डॉलर। 32 जीबी वाला आईपॉड उन लोगों लिए काफी पायदेमंद है जो ज्याद से ज्यादा गेम्स और प्रोग्राम लोड करना चाहते हैं लेकिन आईफोन में 16 जीबी की मैक्सिमम मैमोरी होने की वजह से ऐसा नहीं कर पाते हैं।  केवल दो महीने पहले से एप्पल ने एप्लिकेशन बेचने शुरू किए हैं। और अबतक 10 करोड़ एप्लिकेशन आईफोन और आईपॉड यूज करने वाले डाउनलोड कर चुके हैं। यानी कि एप्पल के लिए एप्लिकेशन और अलग से प्रोग्राम्स बेचना एक फायदे का सौदा बनता जा रहा है। आईफोन के साथ ही  अपने दूसरे प्रोडक्ट्स के बाजार को बचाए रखने के लिए एप्पल लगातार नए कोशिश में जुटी है। और इसी का नतीजा है ये नोनो आईपॉड और आईपॉड टच।

दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग

दुबई की छत से ईरान का नजारा दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग में अभी भी काम जारी है। दुबई में बन रही  इस बिल्डिंग की ऊंचाई है 2257 फीट यानी 688 मीटर। और अभी इस बिल्डिंग का काम भी पूरा नहीं हुआ है। इस गगनचुंबी इमारत की फाइनल ऊंचाई 700 मीटर तक होगी। इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। दुनियी की सबसे ऊंची इस बिल्डिंग का नाम  बुर्ज दुबई रख गाय है। जिसका मतलब होता है दुबई टॉवर। इस बिल्डिंग पर चढ़कर पूरी दुबई का नजारा लिया जा सकता है। और अगर मौसम ठीक रहा तो आप  इसकी छत से ईरान भी देख सकते हैं। इस बिल्डिंग में फिलहाल 160 फ्लोर हैं। और हर हफ्ते इसमें एक फ्लोर और जुड़ता जा रहा है। ये बिल्डिंग अगले साल पूरी तरह से तैयार हो जाएगी। तब इसमें 35000 लोगों के लिए जगह होगी। साथ ही होगी होटल्स और ऑफिसेस। इसके 76 वीं मंजील पर होगी स्विमिंग पूल। इस बिल्डिंग को पूरा करने के लिए 5000 मजदूर दिन रात काम कर रहे हैं।

दुनिया की सम्मानित कंपनियों में RIL

रिलायंस इंडस्ट्रीज को मिला सम्मान निजी क्षेत्र की भारत की नंबर वन कंपनी रिलायंस इडस्ट्रीज ने अब दुनिया की सबसे ज्यादा सम्मानित कंपनियों की लिस्ट में अपनी जगह बना ली है। दुनिया की 100 सबसे ज्यादा सम्मानित कंपनियों में केवल एक भारतीय कंपनी रिलायंस इडस्ट्रीज को शामिल किया गया है। अमेरिकी बिजनेस डेली वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दुनिया की 100 सबसे सम्मानित कंपनियों की लिस्ट जारी की है। जिसमें पहले नंबर पर है जॉनसन एंड जॉनसन, दूसरे नंबर पर है प्रॉक्टर एंड गेम्बल और तीसरे नंबर पर है टोयोटा मोटर्स।  इस लिस्ट में रिलायंस को 83 वें नंबर पर रखा गया है। दुनिया की सबसे सम्मानित कंपनियां जॉनसन एंड जॉनसन- 1 प्रॉक्टर एंड गेम्बल -2 टोयोटा मोटर्स- 3 रिलायंस इंडस्ट्रीज- 83 रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और आरआईएल के लिए काम करने वाले हजारों कर्मचारियों सहित देश के लिए ये एक गौरव की बात है। दुनिया की 100 सबसे ज्यादा सम्मानित कंपनियों की लिस्ट में ब्रिक देशों यानी ब्राजील, रूस, भारत और चीन की हिस्सेदारी 10 फीसदी से भी कम है। इस लिस्ट में भारत की एक कंपनी और रूस की चार कंपनियों के साथ चीन और ब्राजील की केवल दो-दो कंपनियां शामिल हैं। जबकि 100 सम्मानित कंपनियों की लिस्ट में अमेरिका की 38कंपनियां और ब्रिटेन की 11 कंपनियां शामिल हैं। 100 सम्मानित कंपनियों में भागीदारी भारत - 1 रूस- 4 ब्राजील- 2 चीन- 2 अमेरिका- 38 ब्रिटेन- 11 यानी भारत में भले ही अरबपतियों की संख्यां में लगातार इजाफा हो रहा है लेकिन कंपनियों के ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अभी भी लंबी दूरी तय करने की जरूरत है।  

Tuesday, September 9, 2008

भारत नौकरी देने में अव्वल

सबसे ज्यादा नौकरी भारत में नौकरी के लिए अब आपको विदेश जाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि फिलहाल सबसे ज्यादा नौकरी भारत में ही उपलब्ध है। ये  बात दुनिया की नामी रिक्रुटमेंट फर्म मैनपॉवर की एक सर्वे में सामने आई है। भारत में नौकरी के हजारों अवसर पैदा होने वाले हैं। नौकरी देने के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे है। ग्लोबल फर्म मैनपावर के सर्वे में ये बात समाने आई है। हालांकि पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें दो फीसदी की कमी आई है। लेकिन अगर पिछले साल की चौथी तिमाही से इसकी तुलना करें तो आने वाले तीन महीनों में रोजगार के अवसर 1 फीसदी बढ़ेंगे।   लगातार दूसरी बार भारत नौकरी देने के मामले में अव्वल रहा है। हालांकि दुनिया की दूसरी कई बड़ी अर्थव्यवस्था पर इस समय मंदी की तलवार लटकर रही है। साथ ही भारत की विकास दर का 8 फीसदी के नीचे रहने का अनुमान है। ऐसे माहौल में भी भारत में नौकरी के ज्यादा से ज्यादा अवस पैदा हो रहे हैं। इस रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि  देश के पूर्वी हिस्से में इस तिमाही में सबसे ज्यादा नौकरी के अवसर पैदा होंगे। दुनिया के तैतींस देशों और भूभागों का जायजा लेने के बाद मैनपावर ने माना की सबसे ज्यादा नौकरी तो भारत में है।   ऐसा नहीं है कि सभी सेक्टरों में रोजगार बढ़ते ही जा रहे हैं। तीसरी तिमाही के मुकाबले कुछ सेक्टरों जैसे सर्विसेज, फाइनेंस, इंश्योरेंस और रियल एस्टेट में रोजगार के अवसर कुछ कम हुए हैं। जिसकी वजह है  दुनिया की कई अर्थव्यवस्था में आई हल्की सुस्ती। लेकिन इसकी कमी  माइनिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर ने पूरी कर दी है। जहां लगातार पांच तिमाही से रोजगार के अवसर बढ़ते ही जा रहे हैं। यानी आप रोजगार की तलाश में विदेश जाने की सोच रहे हैं तो टिकट कैंसिल करना ही आपके लिए उचित होगा। क्योंकि दुनिया में सबसे ज्याद नौकरी फिलहाल भारत में है। आइए नजर डालते हैं इस सर्वे के कुछ अहम प्वाइंट्स पर - अगले तीन महीनों में सबसे ज्यादा नौकरी भारत में - दुनिया में सबसे ज्यादा नौकरी भारत में - विदेशों से ज्यादा नौकरी के अवसर भारत में - पिछले साल की चौथी तिमाही से 1 फीसदी ज्यादा नौकरी - तीसरी तिमाही के मुकाबले नौकरी में 2 फीसदी की कमी - ग्लोबल मंदी का भारत पर मामूली असर - मैनपावर ने भारत में 5000 रोजगार देने वाली कंपनियों से बात की - दुनियाभर की अर्थव्यवस्था में आई हल्की सुस्ती का असर कुछ सेक्टर्स पर - सर्विसेज, फाइनेंस, इंश्योरेंस और रियल स्टेट में रोजगार में हल्की कमी - माइनिंग और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में रोजगार के अवसर में जबरदस्त तेजी - माइनिंग और कंस्ट्रक्शन में लगातार 5 तिमाही से बढ़ रहे हैं रोजगार - पब्लिक-प्राइवेट पार्टिसिपेशन की वजह से बढ़े हैं रोजगार के अवसर - मैनपावर भारत में 7 सेक्टर्स में रोजगार देने वालों से बात की - सर्वे में फाइनेंस, रियल एस्टेट, इंश्योरेंस, मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड एजुकेशन शामिल - सर्विसेज, ट्रांसपोर्टेशन एंड यूटिलिटिज, होलसेल एंड रिटेल सेक्टर्स में रोजगार देने वालों से भी मैनपावर ने बात की - इस सर्वे में एशिया पैसेफिक के 8 देश शामिल - मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और होलसेल सेक्टरों लगातार बढ़ रहे हैं रोजगार के अवसर - पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और एजुकेशन सेक्टर में पिछली तिमाही से 7 फीसदी ज्यादा रोजगार - ट्रांसपोर्टेशन और यूटिलिटी क्षेत्र में अगले तीम महीनों में 5 फीसदी ज्यादा रोजगार। - भारत के पूर्वी क्षेत्र में सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होंगे - रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा अवसर दक्षिणी भारत में पैदा होंगे

Saturday, September 6, 2008

अरबपति बेटियां

बिलियन डॉलर बेबीज दुनिया की सबसे अमीर यानी बिलियन डॉलर बेबीज भारत की रहने वाली हैं। जी हैं दुनिया की तीन सबसे अमीर खानदानी लड़कियां भारत की हैं। इन लकड़ियों को पास जो सम्पत्ति है वो इनके मम्मी-पापा से मिले हैं। अपनी खानदान से मिली संपत्ति के आधार पर दुनिया की 10 सबसे अमीर लड़कियों की लिस्ट अमेरिकी मैगजीन फोर्ब्स् ने जारी की है। इस लिस्ट में सबसे अव्वल हैं वनिशा मित्तल जो कि दुनिया के चौथे सबसे अमरी आदमी लक्ष्मी मित्तल की बेटी हैं। इनकी शादी हो चुकी है। 2004 में इनकी शादी पर छह करोड़ डॉलर खर्च किए गए थे। वनीशा अपने पिता की 103 बिलियन अमेरिकी डॉलर की स्टील कंपनी आर्सेलर मित्तल के निदेशक मंडल की सदस्य हैं। उनका एक भाई है, जिससे पिता की संपत्ति का अच्छा खासा अंश उन्हें विरासत में मिलने जा रहा है।   दूसरे नंबर पर आती है भारतीय उद्योग जगत की दिग्गज मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी। जिनकी उम्र है केवल 16 साल। ईशा विरासात में मिली संपत्ति के आधार पर बनायी गई फोर्ब्स की अरबपतियों की सूची में भले ही दूसरे नंबर पर हैं पर वो सबसे युवा  हैं।   वहीं तीसरे स्थान पर हैं अरबति के पी सिंह की बेटी पिया सिंह। पिया सिंह डीएलएफ एंटरटेंनमेंट वेंचर की हेड हैं। साथ ही वो डीएलएफ की रिटेल बिजनेस की मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं।   एक ओर ये बिलियन डॉलर बेबीज विरासत में मिली संपत्ति से अरबपति हो रही है । वहीं दूसरी ओर  दुनिया के दो सबसे अमरी व्यक्तियों बिल गेट्स और वारेन बफेट ने अनपी सम्पत्ति अपने बाल-बच्चों के बदले चैरिटी में देने की घोषणा कर चुके हैं।

Monday, September 1, 2008

मोबाइल कस्टमर्स को ट्राई की सौगात

मोबाइल पर बात करना और हुआ सस्ता दो हजार बारह तक हर दो में से एक आदमी के हाथों में मोबाइल होगा। टेलीकॉम क्षेत्र में आई क्रांती की वजह से ये संभव हो पा रहा है। एक वो भी समय था जब लोग एक ही सांस में अपनी बातें मोबाइल पर पूरी कर लेते थे। क्योंकि प्रति मिनट कॉल चार्ज ज्यादा था। अब तो एक रूपए में देश में कहीं भी फोन घुमाया जा सकता है। इसके बावजूद सरकार लगातार मोबाइल टैरिफ कम करने सहित मोबाइल कस्टमर्स को कई तरह की राहत देने की कोशिश में लगी है। इसी के तहत आज ट्राई ने कस्टमर्स को एक बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। मोबाइल ग्राहकों के लिए एक अच्छी खबर। मोबाइल पर बात करना अब और सस्ता हो गया है। अब टॉपअप रिचार्ज पर फुल टॉक टाइम मिलेगा। टेलीकॉम रेग्युलरिटी ऑथोरिटी ऑफ इंडिया यानी ट्राई ने टैरिफ ऑफर्स में पारदर्शिता लाने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इससे कंज्यूमर्स को काफी राहत मिलेगी। नई सुविधाओं के तहत अब हर टॉप अप रिचार्ज पर कंज्यूमर को फुल टॉक-टाइम मिलेगा। टेलीकॉम ऑपरेटर्स अगर कोई टैरिफ में कमी करता है तो उसका सीधा फायदा कंज्यूमर्स को मिलेगा। इसके लिए ग्राहकों को कोई फोन या एमएमएस करने की जरुरत नहीं होगी। अगर कोई ग्राहक किसी ऑपरेटर के एक लाइफटाइम प्लान से दूसरे  लाइफटाइम प्लान में शिफ्ट करता है तो इसके लिए उसे बहुत कम इंट्री फी देनी होगी। साथ ही लाइफटाइम कस्टमर्स को 6 महीने में एक एक बार ही री-चार्ज कराना होगा। प्री-पेड से पोस्ट-पेड या पोस्ट-पेड से प्री-पेड प्लान में शिफ्ट करने पर अब मोबाइल नंबर नहीं बदलेगा। ट्राई की ये गाइडलाइन 15 सितंबर से लागू होंगी।  यानी ट्राई के इस फैसले से मोबाइल ग्राहकों को न केवल ज्यादा टॉकटाइम मिलेगा बल्कि परेशानी भी कम होगी।  

Saturday, August 30, 2008

स्वर्ग का बिजनेस गर्त की ओर

टूरिस्ट से एप्पल का मिलन कराएं! अमरनाथ श्राइन बोर्ड से जमीन वापस लेने पर जम्मू करीब दो महीनों से जल रहा है। और अब तो इसकी आग कश्मीर तक पहुंच चुकी है। इससे जानमाल के साथ ही फ्रूट इंडस्ट्री को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस विवाद की वजह से जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग महीनों तक बंद रहा। जिससे श्रीनगर की उद्योग व्यवस्था चरमरा गई है। सबसे ज्यादा नुकसान सेब व्यापारी को हुआ है। उन्हें हर दिन करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही जम्मू- श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने की वजह से श्रीनगर में दवाईयां और पेट्रोल-डीजल की किल्लत शुरू होने लगी है। साथ ही खाने-पीने के जरूरी सामानों में भी कमी होने लगी है। जम्मू की आग अब श्रीनगर तक पहुंच चुकी है। जिससे अब श्रीनगर में भी कर्फ्यू लगाना पड़ रहा है। जिससे आम लोगों की मुसीबतें और बढ़ गई हैं। साथ ही सेब व्यापारियों को अपने सामने अपने करोड़ो रुपए के सेब को सड़ते हुए देखने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अमरनाथ श्राइन जमीन विवाद की वजह से जम्मू-कश्मीर की टूरिज्म इंडस्ट्री का बुरा हाल है। टूरिज्म के जरिए अपना जीवन यापन करने वाले लोगों का हाल बुरा है। साथ राज्य सरकार को कोरोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की ओर आजकल सैलानियों के पैर नहीं बढ़ रहे हैं। और इसकी वजह है अमरनाथ श्राइन जमीन विवाद मामले पर महीनों से चल रहा विरोध प्रदर्शन। इस विरोध प्रदर्शन के चलते जम्मू और कश्मीर में कर्फ्यू लगा दिया जाता है। जिससे देशी और विदेशी सैलानी वहां जाने से बच रहे हैं। और इसकी वजह से जम्मू कश्मीर के टूरिज्म इंडस्ट्री को करोड़ों रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा है। 18 साल से आतंकवाद की मार झेल रहे कश्मीर में पिछले कुछ सालों में आतंकवादी गतिविधियां थोड़ी कम हुई थी। जिससे धीरे -धीरे वहां आने वाले पर्यटकों की तादात में इजाफा हो रहा था। लेकिन पिछले करीब दो महीनों से अमरनाथ श्राइन जमीन विवाद के चलते घाटी की शांती भंग हो गई है। और इससे टूरिज्म उद्योग लगभग ठप हो गया है। पर्यटकों की वजह से न केवल राज्य सरकार की तगड़ी कमाई होती है बल्कि हजारों घरों में चूल्हे भी चलते हैं। चाहे कश्मीर की डल झील देखने वाले विदेशी पर्यटक हों या वैष्णोदेवी और अमरनाथ जाने वाले पर्यटक सभी से वहां के लोगों को अच्छी कमाई होती हैं। लेकिन अब नजारा बदल गया है दुकानदार, गाइड, सहित डल झील में खड़ी किस्तियां सैलानियों की बाट जोहती नजर आ रही हैं।

भारत में मोबाइल वॉर

एप्पल के आईफोन के लांच होते ही भारतीय मोबाइल बाजार में एक जंग सी छिड़ गई है। अब मोटोरोला, सैमसंग, एचटीसी, ब्लैकबेरी सहित कई मोबाइल कंपनियां अपने प्रोडक्ट लांच को लेकर लाइन में खड़ी है। साथ ही साथ 60 फीसदी भारतीय मोबाइल बाजार पर कब्जा जमाने वाली नोकिया ने तो अफरा-तफरी में आईफोन के लांच से पहले ही एन सीरीज की अपनी नई मोबाइल एन 96 को भारतीय बाजार में लांच कर दी है। ये पहली बार है जब नोकिया ने अपनी किसी प्रोडक्ट को वर्ल्ड लांच से पहले भारत में लांच किया है। जी हां, नोकिया के एन 96 को विश्वभर में अक्टूबर महीने में लांच होना था। आखिर क्या है खास इस आईफोन जिससे घबरा गई हैं मोबाइल की दूसरी कंपनियां हम बताएंगे आपको विस्तार से। साथ ही हम बताएंगे दूसरी कंपनियों ने आईफोन से टक्कर के लिए कौन-कौन से मोबाइल बाजार में उतारे हैं या उतारने की तैयारी में हैं। आईफोनसबसे पहले अगर बात करें एप्पल के आईफोन के स्क्रीन का तो ये काफी बड़ा है। स्क्रीन का साइज है 3.5 इंच और इसका रिजॉल्युशन है 480 इनटू 320 पिक्सेल। इस फोन में टचस्क्रीन है। यानी की स्क्रीन को छूकर आप कोई भी कमांड दे सकते हैं। इसमें बहुत पावरफुल सेंसर लगा है जो इस फोन  के डिस्प्ले और टच स्क्रीन के फंक्शन को उस समय अपने आप ऑफ कर देता है। जबक इसका यूज नहीं हो रहा होता है। इसमें विजुअल व्वाइस मेल की सुविधा है। आईफोन की स्टोरेज क्षमता है 4 जीबी, 8 जीबी और 16 जीबी। इस फोन का वजन है केवल 133 ग्राम। इसके जो सबसे अहम एप्लिकेशन हैं उसमें शामिल है मेल, वेब ब्राउजर, आईपॉड, एसएमएस, कैलेंडर, फोटो, कैमरा, यूट्यूब,स्टॉक्स,गूगल मैप्स, वेदर, क्लॉक, कैलकुलेटर, नोट्स, सेटिंग्स, आई ट्यून्स। इस फोन में कई एड ऑन एप्लिकेशन भी हैं। जिसमें से कुछ फ्री है और कुछ के लिए अलग से पैसे देने होते हैं। इस फोन में केवल 2 मेगपिक्सेल का कैमरा लगा है। जिसमें ऑप्टिकल जूम नहीं है औऱ ना ही फ्लैश और ऑटोफोकस है। साथ ही आईफोन में वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी नहीं है। लेकिन इसमें अलग से सॉफ्टवेयर डालकर वीडियो रिकॉर्डिंग और मैसेज फॉर्वाडिंग जैसी दूसरी सभी सुविधाएं प्राप्त की जा सकती हैं। और इस फोन में एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस यहां तक की एमटीएनएल के सिम का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए इसके कोड को हैक करना होता है। और दिल्ली में इसके लिए हैकर मौजूद हैं। भारत में इसकी मार्केटिंग एयरटेल और वोडाफोन कर रही है। 8 जीबी वाले आईफोन की कीमत है 31000 रुपए और 16 जीबी वाले आईफोन मिलेगा 36100 रुपए में। इसके दो बेहतरीन फीचर्स जिसने दुनियाभर में इसे पॉपुलर बना दिया है वो है फास्टेस्ट इंटरनेट ब्राउजिंग और आईपॉड। नोकिया एन96इसके बाद बारी आती है नोकिया के एन 96 की। नोकिया के अतिआधुनिक फोन एन96 का स्क्रीन साइज है 2.8 इंच। और इसका रिजॉल्यूशन है 240 इनटू 320 पिक्सेल। इसमें टच डिस्प्ले स्क्रीन नहीं लगा है। इसे फोटोग्राफर्स के लिए खासकर डिजाइन किया गया है। इससे फोटो खींचने पर ये फोन खुद ब खुद लोकेशन लगा देता है। यानी की फोटे से जुड़ी जगहों को अब आप नहीं भूल पाएंगे। साथ ही किसी भी सीन के लिए आप सेटिंग बदल सकते हैं। साथ ही इसमें लगा है फ्लैश, सिक्वेंस, सेल्फ- टाइमर, कलर, व्हाइट बैलेंस, कंट्रास्ट और एक्सपोजर कंपोजीशन। इस फोन की स्टोरेज क्षमता है 16 जीबी का। वजन है केवल 125 ग्राम। नकिया एन 96 के दूसरे एप्लिकेशन हैं मेल, वेब ब्राउजर, मल्टीमीडिय, एसएमएस, कैलेंडर, फोटो, कैमरा, नोकिया मैप्स, वेदर, क्लॉक, कैलकुलेटर और नोट्स। इसमें कई एप्लिकेशन जोड़े जा सकते हैं। 150 देशों का मैप फ्री है। इसके  मल्टीमीडिया सिटी गाइड और नेविगेटर को अपग्रेड किया जा सकता है। इसमें व्वाइस गाइडेड कार नेविगेशन लगा सिस्टम लगा सकते हैं। उसके बाद कार चलाते समय मोबाइल बताएगा आपको सही रास्ता। नोकिया एन 96 में 5 मेगापिक्सेल का कैमरा और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा है। इस फोन की कीमत है करीब 32000 रुपए। इस फोन से आप 40 घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकते हैं। सैमसंग इंस्टिंक्टएप्पल के आईफोन के टक्कर में है एक और फोन जिसका नाम है सैमसंग इंस्टिंक्ट। इस फोन का स्क्रीन साइज है 3 इंच। इसमें टच स्क्रीन है। इस फोन के कूल फीचर्स में शामिल हैं स्पीकर इंडिपेंडेंट व्वाइस डायलिंग। इस फोन के कांटैक्ट डिटेल को पीसी के साथ सिंक कर सकते हैं। यानी आपके सारे कांटैक्ट्स फीसी में सुरक्षित रहेंगे। साथ ही उसमें कोई अपडेट होने के बाद पीसी खुद ब खुद उसे अपडेट कर लेगा। इस फोन में 30 चैनल्स के म्युजिक को स्ट्रीम कर सकते हैं। इस फोन की स्टोरेज क्षमता है 2 जीबी जिसे 8 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है। इस फोन का वजन है 120 ग्राम। सैमसंग इंस्टिंक्ट के मुख्य एप्लिकेशन हैं मेल, वेब ब्राउजर, विंडो लाइव सर्च, मल्टीमीडिया, एसएमएस, कैलेंडर, फोटो, कैमरा, ब्लैकबेरी मैप्स, वेदर, क्लॉक, कैलकुलेटर,नोट्स, बैकग्राउंड म्यूजिक प्लेइंग मोड, टीवी इनेबल्ड, ब्लुटूथ कॉलर आईडी, विजुअल व्वाइस मेल। ये फोन 2 मेगापिक्सेल कैमरा से लैस है। इसमें वीडियो रिकॉर्डिंग की भी सुविधा है। इस साल के अंत तक इस फोन को लांच किया जाएगा। सैमसंग इंस्टिंक्ट की अनुमानित कीमत है लगभग 35 हजार रुपए। एचटीसी टच प्रोएप्पल के आईफोन के ही प्रासइ रेंज में आता है एचटीसी का टच प्रो फोन। इस फोन का स्क्रीन साइज है 2.8 इंच। स्क्रीन का रिजॉल्यूशन है 480 इनटू 640 पिक्सेल्स। इस फोन में टचस्क्रीन है। इस फोन में जो कूल फीचर्स हैं उसमें शामिल है कस्टमाइज टचफ्लो थ्री डी। इसके जरिए एलबम, वीडियो, स्टिल और डिजिटल पिक्चर में आर्टवर्क किया जा सकता है। एचटीसी टच प्रो की स्टोरेज क्षमता है 4 जीबी। वजन है 110 ग्राम। इस फोन के प्रमुख एप्लिकेशन  हैं मेल, वेब ब्राउजर, मल्टीमीडिया, एसएमएस, कैलेंडर, फोटो, कैमरा, जीपीएस इनेबल डिवाइस, एचटीसी वेदर, घड़ी, कैलकुलेटर, नोट्स और सेटिंग्स। इचटीसी के इस फोन में 3.2 मेगापिक्सेल का कैमरा है। साथ ही वीडियो रिकॉर्डिंग की भी सुविधा है। ये फोन लांच हो चुका है। इस फोन की कीमत है 32990रुपए। ब्लैकबेरी बोल्ड 9000आईफोन के कुछ करीब एक और फोन है। जिसका नाम है ब्लैकबेरी बोल्ड 9000...आइए देखते हैं इस ब्लैकबेरी में क्या है खास।ब्लैकबेरी की एक सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसके जरिए भेजा जाने वाला मेल सबसे ज्यादा सुरक्षित है। ब्लैकबेरी बोल्ड 9000 का स्क्रीन साइज है 2 इंच का। जिसका रिजॉल्यूशन है 480 इनटू 640 पिक्सेल्स। इसमें टच स्क्रीन नहीं है। इसके फीचर्स में शामिल है फेसबुक। स्टोरेज है 1 जीबी का। ब्लैकबेरी बोल्ड 9000 का वजन है केवल 110 ग्राम। इस ब्लैकबेरी में जो मुख्य एप्लिकेशन हैं उसमें शामिल है मॉल, वेब ब्राउजर, मल्टीमीडिया, एसएमएस, कैलेंडर, फोटो, कैमरा, ब्लैकबेरी मैप्स, वेदर, क्लॉक, कैलकुलेटर, नोट्स, एप्पल आई ट्यून। इस फोन में एडऑन एप्लिकेशन नहीं है। 2 मेगापिक्सेल का कैमरा है। साथ ही इस फोन में वीडियोरिकॉर्डिंग की भी सुविधा है। ये फोन इस साल के अंत में लांच होगा। इस फोन की कीमत होगी करीब 30 हजार से 35 हजार के बीच।

Monday, June 30, 2008

महंगी हुई पढ़ाई - नहीं मिलेगा भाई

पापा एक मिनट...हमें लैपटॉप नहीं एक बहना ला दो

महंगाई ने बिगाड़ कर रख दिया है बच्चों का गणित...पैरेंट्स की कमाई जिस अनुपात से बढ़ रही है उससे कई गुना तेजी से बढ़ रहा बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्च। लग जाता है पैरेंट्स की कमाई का 65 फीसदी एक बच्चे की पढ़ाई में। ऐसे में दूसरे बच्चे की नहीं आ रही है बारी। पैरेंट्स कह रहे हैं..बच्चा एक ही अच्छा।

महंगाई की मार इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि अब लोगों को समय से पहले परिवार नियोजन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। महंगाई की वजह से अब लोग दो बच्चों के बदले एक बच्चा को तरजीह दे रहे हैं। ये बात एसोचैम के एक सर्वे में सामने आई है। अब शायद ही मुन्नी को उसका भाई मिल पाएगा या गुल्लू को बहन। क्योंकि इनके माता पिता इनकी पढ़ाई पर होने वाले खर्चे से इतना परेशान हैं कि घर में दूसरा बच्चा लाने की नहीं सोच रहे।

बच्चों की स्कूली शिक्षा ले लिए माता पिता को परिवार के कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा मुहैया करना पड़ रहा है। जिसकी वजह है लगातार बढ़ती जा रही महंगाई। और इस वजह से लोग एक बच्चे से ज्यादा पैदा नहीं करना चाह रहे हैं। ये बात सामन आई एसोचैम के एक सर्वे में।
 
एसोचैम ने दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, देहरादून, पुणे, और बैंगलुरू जैसे शहरों में 2000 वर्किंग पैरेन्ट से बात कर इस नतीजे पर पहुंचा है। कि अब माता पिता महंगाई की वजह से बच्चे पैदा करने में कोताही बरतने लगे हैं। क्योंकि महंगाई के इस दौर में आज पैरेन्ट्स अपने टेक होम सैलरी का 65 फीसदी अपने बच्चों पर खर्च कर देते हैं। जिससे उनका फैमिली बजट बिगड़ने लगा है।
 
 
पैरेन्ट्स को साल 2000 में एक बच्चे की पढ़ाई पर साल भर 25000 रु खर्च करना पड़ता था जो कि अब बढ़कर 65000 रु पर पहुंच गया है। जबकि इस दौरान पैरेंट्स की कमाई में महज 28 से 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। यही वजह है अब पैरेट्स को एक बच्चे से ही संतोष करना पड़ रहा है।
हम दो हमारा एक...महंगाई की मार के बाद जनहित में जारी 

अगर बच्चों के स्कूल खर्चे की बात करें तो उनके जूते का खर्च उनकी किताबों से ज्यादा आता है। जूतों पर हर साल 3500 रु खर्च होते हैं जबकि टैक्स्ट बुक पर केवल 3000 रु खर्च होते हैं। बैग और बोटल्स में हर साल 1500 रुपए खर्च होते हैं। स्पोर्ट्स किट पर 2000 रु और स्कूल ट्रिप्स पर हर साल 2500 रु खर्च होते हैं। स्कूल क्लब पर 1500 और टेक्नोलॉजी पर 1500 रुपए खर्च होते हैं। खर्च का एक बड़ा हिस्सा  करीब 32800 रु जाता है पैक लंच, ट्रांसपोर्ट और ट्यूशन पर। बिल्डिंग फंड के लिए हर बच्चे से 1000 रुपए लगते हैं। जबिक दूसरे किरए के लए 3000 रु और स्टेशनरी और न्यूज पेपर के लिए 3000 रुपए खर्च करने होते हैं।  
 
महंगाई की आड़ में महंगाई से दो गुना महंगी होती जा रही पढ़ाई से पैरेंट्स परेशान हैं। 60 फीसदी पैरेंट्स की शिकायत है कि एजुकेशन आज कमर्शियल बिजनेस बन चुका है।
 
एक अनुमान के मुताबिक इस समय देश में करीब 3 करोड़ बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। और डे स्कूल के हर बच्चे पर  हर साल 60000 रु पैरेंट्स को खर्च करना पड़ रहा है।  जबकि 3 से 5 साल के बच्चों पर पर पैरेंट्स को हर साल 25000 रु खर्च करना पड़ रहा है। जिसने न्यूक्लियस फैमली की नींव हिला कर रख दी है। ऐसे में अब पैरेंट्स एक बच्चे से आगे परिवार बढ़ाने के  बारे में सोच भी नहीं पर रहे हैं। मजबूरी में ही सही पर कहना पड़ रहा है..एक बच्चा सबसे अच्छा।
 
 
 

Friday, June 27, 2008

बिल की विदाई

दुनिया को ज्ञान की खिड़की दिखाने वाले आज खिड़की से बाहर कूदे

दुनिया का सबसे अमीर आदमी बिल गेट्स आज माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन का पद छोड़ेंगे। दुनिभर में आईटी क्रांति लाने वाले बिल गेट्स इस पद पर भले ही ना रहें लेकिन उन्हें लोग हमेशा याद करेंगे।

आज दुनिया के 90 फीसदी से भी ज्यादा डेस्कटॉप पर होने वाला काम माइक्रोसॉफ्ट विंडो में होता है। और दुनिया की लगभग सभी वर्ड प्रोसेसिंग डॉक्यूमेंट्स, स्प्रीडशीट्स माइक्रोसॉफ्ट सॉफ्टवेयर पर काम करता है। और इनसब के पीछे जिसका हाथ है उसका नाम है बिल गेट्स।
 
अपनी कंपनी को बुलंदी पर पहुंचाने वाले बिल गेट्स ने 1975 में माइक्रोसॉफ्ट की शुरूआत अपने दोस्त  पाउल ऐलेन के साथ मिलकर की। उस समय बिल गेट्स की उम्र 20 साल थी और वो हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में फेल कर गए थे। इसलिए उन्हें यूनिवर्सिटी से बाहर होना पड़ा था।
 
बिल गेट्स ने अपने दोस्त पाउल के साथ मिलकर शुरुआती बेसिक प्रोग्रामिंग ऑल्टेयर 8800 माइक्रोकम्प्यूटर के लिए की। बेसिक के साथ दो और प्रोग्रामिंग के जरिए शुरूआती तीन सालों में ही बिल गेट्स ने अपनी पहली  मिलियन डॉलर की कमाई की।
 
1994 तक बिल गेट्स 9 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति के साथ अमेरिका के सबसे अमीर आदमी बन गए। और तब उन्होंने डलास में रहने वाली मिलिंडा से शादी की।  और अगले ही साल इनकी संपत्ति में करीब 4 अरब डॉलर का इजाफा हो गया और ये दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन गए।
 
बिल गेट्स 2005 में भारत आए औऱ यहां करीब 13 अरब डॉलर की निवेश का ऐलान किया।
 
आज बिल गेट्स के पास 58 अरब डॉलर की संपत्ति है। लेकिन इसे वो अपने बच्चों को नहीं देकर शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए बनाए गए बिल और मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन को देने का ऐलान किया है। गेट्स ने कहा कि वो अपनी संपत्ति को फिर से उस सोसाइटी में बांट देना चाहते हैं जहां उसका ज्यादा असर हो पाए।
 
साल 2006 में  बिल गेट्स ने घोषणा की थी कि वो दो साल बाद  माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन पद छोड़ देंगे। और आज 52 साल की आयु में वो पद से सदा के लिए दूर हो जाएंगे। उनका स्थान लेंगे स्टीव वाल्मर।
 
आज दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट को हर हफ्ते मुनाफा होता है 40 अरब रुपए। जो कि आईटी की सेक्टर की एक बड़ी कंपनी गूगल से चार गुणा ज्यादा है।
 
दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनाने वाला, दुनिया का सबसे अमीर आदमी और चैरिटी में दुनियाभर में सबसे ज्यादा पैसा देने वाले बिल गेट्स आज भले ही माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन का पद छोड़ देंगे। लेकिन दुनियाभर में लोग शायद उन्हें कभी नहीं भुला पाएंगे। क्योंकि दुनियाभर में छा जाने वाली आईटी क्रांति बिल गेट्स के बगैर संभव नहीं थी।
 

Thursday, June 19, 2008

होंडा की हाइड्रोजन कार

एफसीएक्स क्लेरिटी

पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में बढ़ोतरी के बाद आपका कार चलना और महंगा भले ही हो गया हो। लेकिन इससे आपको निजात मिल सकती है। हम बात कर रहे हैं एक ऐसी कार की जो पेट्रोल और डीज़ल से नहीं चलेगी यानी आपकी जेब पर नहीं भारी पड़ेगी। जी हां, होंडा ने नेक्टक्स जेनरेशन कार बनाने में बाजी मार ली है। जापानी कंपनी होंडा ने एक ऐसी कार बनाई है जो पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगी। क्योंकि इस गाड़ी से कार्बन डायऑक्साइड या कोई ग्रीन हाउस गैस नहीं निकलती है। क्योंकि ये गाड़ी हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिसिटी पर चलती है। इस गाड़ी से पानी का इमिशन होता है। होंडा ने इस गाड़ी का नाम एफसीएक्स क्लेरिटी दिया है। हाइड्रोजन कार की लांच पर होंडा मोटर्स के प्रेसिडेंट ताकियो फुकू ने कहा-
'पर्यावरण फ्रेंडली कार बनाने हमने काफी मेहनत की है..क्योंकी आज प्रदूषण एक अहम मुद्दा है।...नई तकनीक पर ही ऑटो इंडस्ट्री का भविष्य टिका है। और हम इसमें सबसे आगे रहना चाहते हैं।'

होंडा के इस नेक्सट जेनेरेशन कार एफसीएक्स क्लेरिटी को खरीदने का मौका फिलहाल कुछ ही लोगों को मिला है। जिसमें हॉलीवुड के कई नाम शामिल हैं। और उसी में एक नाम शामिल है अभिनेत्री लॉरा हैरिक की। लॉरा हैरिस ने हाइड्रोजन कार मिलने पर खुशी जताते हुए कहा-
'मुझे ट्रांसपोर्टिंग के नए विकल्प की तलाश काफी दिनों से थी।...इसलिए मैने ये कार खरीदी है...ये अद्भुत है और इसे चलाने में भी काफी मजा आता है।'

हाइड्रोजन की एक टैंक फुल करा देने पर ये कार 270 मील तक चलेगी। एक गैलन गैस में ये 74 मील की दूरी तक करेगी। होंडा की इस एफसीएक्स क्लेरिटी की स्पीड 100 मील प्रति घंटा है। जापान और अमेरिका में पहले तीन साल तक होंडा अपनी इस 200 कार को लीज पर चलाएगी। और इसके बदले करीब 25 हजार रुपए महीना लेगी।

दुनिया की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी जेनरल मोटर्स को पीछे छोड़ते हुए जापानी कंपनी होंडा ने एक सफल हाइड्रोजन कार बनाने में बाजी मार ली है। हालांकि इस कार को भारत आने में अभी समय लगेगा। क्योंकि होंडा ने अभी हाइड्रोजन कार से कुछ कदम पीछे की हाइब्रिड कार ही भारतीय बाजार में लांच किया है।

Wednesday, June 18, 2008

हाय ! हाइब्रिड कार...वेलकम टू इंडिया

होंडा की हाइब्रिड कार

लगातार महंगी होती जा रही पेट्रोल और डीजल पर से निर्भरता कम करने और ग्रीन हाउस गैस को कम करने के लिए कार कंपनियां हाइब्रिड कार बनाने पर जोर दे रही हैं। भारत में आज पहली हाइब्रिड कार लांच हो गई। जिसे लांच किया किया है जापान की कंपनी होंडा ने। इसकी कीमत है साढ़े इक्कीस लाख रुपए।

कार बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी टोयोटा सहित दुनियभर की ज्यादातर कंपनियों में हाइब्रिड कार बनाने की होड़ में लगी हुई है। और कुछ कंपनियों की हाइब्रिड कारें तो दुनियाभर में काफी पॉपुलर हो चुकी हैं। टोयोटा प्रियस के नाम से हाइब्रिड कार बनाती है। जिसकी कीमत है करीब नौ लाख रुपए हैं। ये कीमत विदेशों में है भारत आने पर इसकी कीमत करीब 100 फीसदी बढ़ जाएगी। प्रियस एक सेडान हाइब्रिड कार है। जिसकी माइलेज है 46 मील प्रति गैलन। यानी करीब 20 किलोमीटर प्रति लीटर। इसका स्पीडोमीटर जीरो से 60 किलोमीटर की स्पीड केवल 10 सेकेंड में पकड़ती है।

होंडा सिविक हाइब्रिड कार की भारत से बाहर कीमत है करीब साढ़े नौ लाख। माइलेज है 18 किमी प्रति घंटा। इंजन की ताकत है 110 हॉर्स पॉवर। निसान अल्टीमा के नाम से हाइब्रिड कार बनाती है। ये भी एक सेडान कार है। जिसकी दूसरी देशों में कीमत है करीब सवा दस लाख रुपए। जानकार इसे टोयोटा हाइब्रिड कार की निसान की पैकेजिंग मानते हैं। इसकी माइलेज है 15किमी प्रति लीटर।

फोर्ड स्केप के नाम से हाइब्रिड कार बनाती है। ये एक स्पोर्ट यूटिलिटी व्हेकिल है। जिसकी माइलेज है 14 किलोमीटर प्रति लीटर।
लैक्सस आरएक्स 400 एच के नाम से हाइब्रिड कार बनाती है। जिसकी कीमत है करीब 17 लाख रुपए। भारत में ये कीमत करीब दोगुनी हो जाएगी टैक्स की वजह से। माइलेज है करीब 9 किलोमीटर प्रति लीटर। ये एक एसयूवी है।

कार कंपनियों का मानना है कि आने वाला जमाना हाइब्रिड कारों का है। इसलिए कोई किसी से पीछे नहीं रहना चाहता। कार कंपनियों की इस होड़ से पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कुछ कम होगी। साथ सड़कों पर धूम मचाते हुए लोग शुद्ध हवा में सांस ले पाएंगे।

अब जानते हैं हाइब्रीड की परिभाषा। आखिर हाइब्रिड है क्या।..दो या दो से अधिक एनर्जी से चलने वाले मोटर्स को हाइब्रीड कहते हैं। हमलोगों ने कहीं न कहीं हाइब्रीड गाड़ी जरूर देखा होगा। याद कीजिए मोपेड को। ये भी एक हाइब्रीड गाड़ी है। मोपेड यानी मोटोराइज्ड पैडल बाइक। जिसमें पेट्रोल और पैडल की एनर्जी का यूज होता है। इसी तरह विदेशों में बड़ी बड़ी कमर्शियल गाड़ियां और बसें हाइब्रीड सिस्टम पर चलती हैं। यानी उसमें डीजल और इलेक्ट्रिक पॉवर साथ साथ रहता है। जहां तक बिजली की तार मिलती है वहां तक बसें बिजली से चलती हैं और जहां बिजली खत्म होती है वहां से डीजल से चलने लगती है। ठीक ऐसे ही अगर कोलकाता के ट्रॉम की इंजन हाइब्रिड कर दी जाए तो उसका दायरा और बढ़ जाएगा। समुद्र में चलने वाली ज्यादातर सबमरीन भी हाइब्रीड इंजन से चलती हैं। क्योंकि उसमें न्यूक्लियर पॉवर और इलेक्ट्रिक पॉवर का यूज होता है।

आखिर क्यों जरूरत हुई हाइब्रिड कार की। प्रति लीटर पेट्रोल भराने के लिए कभी आपको 30 रुपए खर्च करने होते थे। जो अब 35 रुपए 40 रुपए से आगे निकल 50 रुपए पर जा पहुंचा है। साथ ही इससे निकले बाले धूएं से पर्यावण को नुकसान होता है सो अलग। ऐसे में कार बनाने वाली दुनियाभर की कंपनियों ने हाइब्रिड कार की ओर रुख कर लिया है। कुछ कंपनियां केवल इलेक्ट्रिक कार भी बना रही हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक कारों को ज्यादा सफलता नहीं मिल पाईं हैं। क्योंकि 80 से 161 किलोमीटर चलने के बाद इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करना पड़ता है। और इसकी चार्ज करने की प्रक्रिया बहुत धीमी होती है। स्पीड कम होने की वजह से ट्रैफिक में तालमेल बिठाने की समस्या होती है। हालांकि इससे प्रदूषण नहीं फैलता है।

जबकि एक ट्रेडिशनल कार की टैंक एक बार फुल कराने पर करीब 500 किलोमीटर के लिए आप निश्चिंत हो जाते हैं। साथ ही इसकी री फ्युलिंग काफी आसान है। और ट्रैफिक में तालमेल भी अच्छा है। हालांकि ये ज्यादा तेल पीती हैं और धुआं भी उगलती हैं। ऐसे में ऑटो कंपनियों को हाइब्रिड कार में फ्यूचर दिख रहा है। क्योंकि हाइब्रिड इंजन फ्यूल के साथ ही इलेक्ट्रिक से भी चलता है। और एक बार टैंक फुल करने पर 700 किलोमीटर के बाद ही री फ्यूलिंग की जरूरत होती है । साथ ही इससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण भी कम दूषित होगा। यानी कम पैसे में कम धुआं लेकिन ज्यादा दूर तक सवारी भला किसे पसंद नहीं आएगा।

Saturday, June 14, 2008

एमटीएन-आरकॉम के बीच आरआईएल



अनिल अंबानी के रिलायंस कम्युनिकेशंस और दक्षिण अफ्रीकी कंपनी एमटीएन के बीच करार को लेकर चल रही बातचीत के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज और आरकॉम के बीच तलवारें खिंच गई हैं। अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम ने आरोप लगाया है कि एमटीएन के साथ चल रही उनकी डील में मुकेश अंबानी की कंपनी आरआईएल टांग अड़ा रही है। अफ्रीकी कंपनी एमटीएन और आरकॉम के बीच मर्जर को लेकर एक्सक्लुसिव बात चीत चल रही है। जिसमें एमटीएन आरकॉम में बड़ी हिस्सेदारी लेने पर विचार कर रही है।

लेकिन इस बीच आरआईएल ने एमटीएन को ये जानकारी दी कि आरकॉम में बड़ी हिस्सेदारी बेचने से इंकार करने का पहला अधिकार उनके पास है। आरकॉम ने आरआईएल के इस दावे को बेबुनियाद कहा है। और इसे एमटीएन-आरकॉम डील के बीच रोड़े अटकाने की कोशिश कहा है। अनिल अंबानी के एडीएजी ग्रुप के अनुसार आरकॉम की तरक्की को आरआईएल नहीं पचा पा रही है। इसलिए इस डील को किसी भी कीमत पर नहीं होने देना चाहते हैं।

अनिल-मुकेश आमने-सामने
- अनिल ने मुकेश पर लगाया आरकॉम-एमटीएन डील में टांग अड़ाने का आरोप
- आरआईएल ने एमटीएन को कहा वो आरकॉम में बड़ी हिस्सेदारी नहीं ले सकती
- आरआईएल ने कहा कि आरकॉम में बड़ी हिस्सेदारी बेचने से इंकार करने का पहला अधिकार उनके पास है
- आरकॉम ने आरआईएल के दावे को बेबुनियाद करार दिया
- एडीएजी के अनुसार आरकॉम की तरक्की से जल रहे हैं मुकेश अंबानी
- दोनों भाइयों में बंटवारे से पहले आरकॉम आरआईएल के अधीन था
- 12 जनवरी 2006 को मुकेश ने आरकॉम में मालिकाना हक बेचने से इंकार करने का अधिकार अपने पास रख लिया
- हालांकि बांबे हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर 2006 को आरआईएल अधिकार को खारिज कर दिया
- आरकॉम में अनिल अंबानी और प्रोमोटरों की 66 फीसदी हिस्सेदारी
- आरकॉम-एमटीएन मर्जर के बाद दुनिया 6 सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शुमार हो जाएगी
- एमटीएन-आरकॉम के पास 11 करोड़ 60 लाख कस्टमर्स


दोनो भाइयों में बंटवारे से पहले आरकॉम में मालिकाना हिस्सेदारी बेचने या ना बेचने का अधिकार आरआईएल ने अपने पास रख लिया था। और 12 जनवरी 2006 को एक दस्तावेज पर इससे जुड़े लोगों के हस्ताक्षर ले लिए थे। क्योंकि उस समय आरकॉम पर मालिकान हक आरआईएल का हुआ करता था। हालांकि बांबे हाई कोर्ड ने 15 अक्टूबर 2006 को आरआईएल के इस समझौते को गलत करार कर दिया था। फिलहाल आरकॉम में अनिल और प्रोमोटरों की हिस्सेदारी 66 फीसदी है। अगर आरकॉम-एमटीएन मर्ज होती है तो ये दुनिया की छठी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन जाएगी। और इसके कस्टमर्स की संख्यां करीब 12 कोरड़ तक पहुंच जाएगी।

सूत्रों के अनुसार रिलायंस कम्युनिकेशन और एमटीएन के बीच डील पर समझौता लगभग हो चुका है। और बहुत जल्द इसका ऐलान किया जाना था। अनिल अंबानी ने अपनी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन को अफ्रीकी टेलीकॉम कंपनी एमटीएन का सब्सिडियरी बनाने पर सहमति दे दी है।

रिलायंस कम्युनिकेशन एमटीएन सौदा तय ?
- सूत्रों के अनुसार अनिल अंबानी ने आरकॉम को एमटीएन की सब्सिडी बनाने पर सहमति दे दी है
- अनिल आरकॉम में अपनी दो तिहाई शेयर एमटीएन को सौपेंगे
- अलग से 5 अरब डॉलर कैश एमटीएन को देने होंगे
- अनिल को एमटीएन की करीब 40 फीसदी शेयर मिलेंग
- रिलायंस कंम्युनिकेशन का करीब 25 फीसदी शेयर भी अनिल अंबानी के पास होगा
- बहुत जल्द इस सौदे का ऐलान हो सकता है


इसके लिए अनिल अंबानी को रिलायंस कम्युनिकेशन में अपनी दो तिहाई हिस्सेदारी एमटीएन को देनी होगी। और इसके अलावे 4 से 5 अरब डॉलर कैश भी एमटीएन को देना होगा। तब अनिल अंबानी एमटीएन में करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी ले पाएंगे। इसके साथ ही अनिल अंबानी के पास रिलायंस कम्युनिकेशन में भी सबसे बड़ी हिस्सेदारी बरकरार रहेगी। लेकिन आरकॉम पर मालिकाना हक एमटीएन का होगा। हालांकि मुकेश अंबानी के इस मर्जर के बीच कूद जाने से आरकॉम-एमटीएन सौदे में काफी मुश्किलें सामने आ सकती हैं।

Thursday, May 22, 2008

ब्रांडेड तेल का खेल



अब भले ही तेल कंपनियों ने सिर्फ ब्रांडेड तेल बेचने के विचार को फिलहाल ठंढे बस्ते में डाल दिया है लेकिन सवाल ये उठता है कि ऐसा सोचने पर वो मजबूर क्यों हैं। अगर पेट्रोल और डीजल की मार्केटिंग करने वाली कंपनियों देश के सभी मैट्रो सहित बैंगलुरू और पुणे जैसे कुछ 18 शहरों में केवल ब्रांडेड डीजल और पेट्रोल बेचती हैं तो जाहिर तौर पर उनका नुकसान थोड़ा कम होगा।
 
लेकिन ऐसा होने पर इन शहरों में रहने वाले लोगों को प्रति लीटर पेट्रोल पर तीन से चार रुपए ज्यादा खर्च करने होंगे। जबकि प्रति लीटर डीजल पर दो से सवा दो रुपए ज्यादा खर्च करने होंगे। सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का विचार है कि देश के प्रमुख शहरों में केवल ब्रांडेड पेट्रोल और डीजल पर ही जोर दिया जाए। ये कंपनियां ज्यादा से ज्यादा मात्रा में ब्रांडेड तेलों की सप्लाई इन शहरों में बढ़ा चुकी हैं।
 
डीजल के भाव (रु/लीटर)
----------साधारण ----------ब्रांडेड
दिल्ली---- 31.76--------- 35.76
कोलकाता- 33.92------ ---37.92
मुंबई- ----36.08--------- 40.08
चेन्नई --- 34.40-------- -38.40

पेट्रोल के भाव (रु/लीटर)
----------साधारण---------ब्रांडेड
दिल्ली- ---45.52---- ---47.52
कोलकाता- 48.95--- ----50.95
मुंबई----- 50.51--------52.51
चेन्नई---- 49.61------- 51.61


इंडियन ऑयल का ब्रांड है प्रीमियम, जबकि भारत पेट्रोलियम के ब्रांडेड तेल स्पीड के नाम से बिकते हैं। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम पॉवर ब्रांड के नाम से पेट्रोल और डीजल बेचती है। ऐसे में ब्रैंडेड तेल, जिनकी कीमतों की लगाम कंपनियों के हाथ में होगी, और समय पड़ने पर बिना सरकार को मुंत ताके कंपनियां इनकी दाम बढ़ा पाएंगीउनकी ज्यादा बिक्री से उनका नुकसान कम होगा क्योंकि हर लीटर साधारण पेट्रोल पर उन्हें 24 रुपए और साधारण डीजल पर 17 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। 

दुनिया जाए तेल लेने

बाइक की टंकी खाली पड़ी है...शायद इस ऑयल पेंटिंग को निचोड़ने से कुछ तेल निकल आए!

कच्चे तेल के लिए जल्द मारा मारी शुरू होने वाली है। जिस तरह तेल की कीमतों में आग लगी हुई है उससे तो ऐसा ही लग रहा है। अमेरिका में कच्चे तेल के भंडारण में कमी और यूरो के मुकाबले डॉलर की कमजोरी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 135 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों की वजह से अमेरिका ने पिछले पांच महीनों सबसे कम तेल आयात किया है। जिससे उसकी भंडारण क्षमता में 54 लाख बैरल की कमी आई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में केवल इस महीने तेल की कीमतों में 19 फीसदी का इजाफा हुआ है। जबकि जनवरी से अबतक तेल की कीमतों में करबी 50 डॉलर का इजाफा हुआ है। 30 जनवरी को एक बैरल कच्चे तेल की कीमत थी 91 डॉलर। 22 फरवरी को कीमत 98 डॉलर पर पहुंच गई। 5 मार्च को सौ का आंकड़ा पार करते हुए प्रति बैरल कच्चे तेल की कीमत 104 डॉलर पर पहुंच गई। जबकि 16 अप्रैल को प्रति बैरल कच्चे तेल की कीमत थी 114 डॉलर। जो कल यानी 21 मई को 135 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

बढ़ती तेल की कीमतों की वजह से सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठान पड़ रहा है। लेकिन केवल एक साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव और सहयोगी वामपंथी दलों के दवाव के कारण सरकार तेल की कीमत नहीं बढ़ा पा रही है। लेकिन दबाव लगातार बना हुआ है। आठ से ऊपर की ग्रोथ रेट वाले चीन और भारत जैसे देशों में सबसे ज्यादा तेल की खपत बढ़ रही है। भारत की तीन प्रमख तेल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन यानी आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को हर दिन करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। लेकिन अगर सरकार चाहे तो उनकी परेशानी कम हो सकती है और आम लोगों को तेल की बढ़ती कीमतों की मार भी नही सहनी पड़े। इसके लिए कस्टम ड्यूटी को कम करना होगा। वामपंथी पार्टियां भी इसकी मांग कर रही हैं। लेकिन वित्त मंत्री पी चिदंबरम इस बात से सहमत नहीं हैं। क्योंकि वित्त मंत्रालय को कस्टम डयूटी से बहुत बड़ी रकम मिलती जो कि देश की बजट के लिए अहम है।

दुनिया के कुल तेल जरूरतों की 40 फीसदी तेल ओपेक(तेल उत्पादक देशों के संगठन) स्पलाइ करती है। लेकिन फिलहाल ओपेक ने भी उत्पादन बढ़ाने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। दुनियाभर में अफरा तफरी मची है लेकिन ओपेक ने अपना सिड्यूल बैठक समय से ही करने का यानी सितंबर में करने का फैसला किया है। अब उसी बैठक में सप्लाइ पर फैसला हो पाएगा।

एक जमाना था जब तेल के लिए अमेरिका किसी भी देश पर हमला कर देता था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। या हो सकता है अमेरिका अभी चुनावों में बिजी हो। लेकिन इतना तो तय है कि अब पहले वाली बात नहीं रहेगी। आजकल डॉलर अपनी चमक खोती जा रही है। तेल उत्पादक देश पहले जहां डॉलर के मुकाबले किसी दुसरी करेंसी में तेल नहीं बेचना चाहते थे। आज हंसी-खुशी यूरो में तेल बेच रहे हैं।

तेल की समस्या फिलहाल भारत के लिए काफी कस्टकर है। क्योंकि तेल की लगाम थामें बगैर विकास की रफ्तार नहीं पकड़ी जा सकती है। अब जरूरत आ गई है भारत-ईरान तेल पाइप लाईन की। सरकार को जल्द से जल्द इसपर फैसला लेना चाहिए। नहीं तो बैलगाड़ी के सहारे हम विकासशील से विकसित नहीं हो पाएंगे।

Wednesday, May 21, 2008

ब्लॉग से करें कमाई



ज्यादा से ज्यादा लोंगों तक अगर अपनी बात सीधी पहुंचानी हो तो ब्लॉग से बेहतर कोई और दूसरा जरिया नहीं हो सकता। और तुरंत उसपर फर्स्टहैंड रिएक्शन भी मिल जाता है। आखिर क्या है ब्लॉगिंग?

इक्कीसवीं सदी के महानायक यानी बिग बी अमिताभ बच्चान हों या मिस्टर पर्फेक्शनिस्ट आमिर खान ब्लॉग की जादू से नहीं बच पाए। ब्लॉग कम्युनिकेशन का एक ऐसा जरिया है जिससे अपनी दिल की बात सीधा दूसरों के पास पहुंचाया जा सकता है। साथ ही दुनिया के किसी भी मुददे पर अपनी बेबाक राय रखी जा सकती है। क्योंकि ब्लॉग लिखने वाला खुद ही एडिटर होता है खुद ही मालिक होता है। इसलिए उसे अपनी स्टोरी पर कैंची चलने का डर नहीं सताता है। साथ ही वो दुनिया की किसी बुराई के खिलाफ खुलकर लिख सकता है।

दुनियाभर के फिल्मी हस्तियों के अलावे कई जाने माने पत्रकार अपनी ब्लॉग चलाते हैं। एक अमेरिकी पत्रकार ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के अत्याचार को जब अपने पोस्ट में प्रकाशित करना चाहा। तो उसे एडिटर के विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद उसने नौकरी रिजाइन कर अपना ब्लॉग शुरू किया। जहां आज लाखों लोग विजिट करते हैं। यानी ब्लॉग की सच्चाई अब हर किसी को समझ में आने लगी है।

बिग ब्लॉगर

तभी तो सदी के महानायक हर दिन ब्लॉग लिख रहे हैं। और कुछ महीनों में ही बिग बी अमिताभ बच्चन ब्लॉग के भी बादशाह हो गए हैं। आज उनके ब्लॉग, ब्लॉग्स डॉट बिग अड्डा डॉट कॉम पर हर दिन लाखों लोग विजिट करने लगे हैं। 500 से हजार लोगों की तो कमेंट्स उन्हें हर दिन पढ़ने को मिल जाता है।

मल्लिका-ए-ब्लॉग

लेकिन ब्लॉग की मल्लिका कहा जाता है चीनी अभिनेत्री शू चिंगलइ को। शू चिंगलाइ चीनी भाषा में ब्लॉग लिखती हैं। वो मात्र 33 साल की हैं लेकिन अपने अभिनय, गायन,निर्देशन और बलॉगिंग के जरिए लाखों लोगों के दिलों पर राज करती हैं। केवल पौने दो सालों में शू के ब्लॉग को साढे 10 करोड़ लोगों ने पढ़ा है।

आजकल कई कंपनियां ब्लॉग के जरिए अपने उत्पादों को प्रमोट कर रही हैं। और बाकायदा ब्लॉग लिखने वालों को नौकरी पर रख रही हैं। दूसरी नौकरियों में भी ब्लॉग का बहुत अहम स्थान बना गया है। नौकरी की तलाश करने वाला कोई आदमी अगर ब्लॉग लिखता है तो एचआर डिपार्टमेंट ब्लॉग पढ़कर नौकरी पाने वालों की अच्छाई और बुराई को अच्छी तरह से जान लेता है। उसके बाद तय करता है कि नौकरी उसके लायक है या नहीं।

ब्लॉग कमाई का भी एक जरिया बन गया है। बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने एड उन ब्लॉग को देते हैं जो ज्यादा से ज्यादा पढ़े जाते हैं। हालांकि कुछ लोग ब्लॉग को स्पॉयल कर भी कमाई कर रहे हैं। इस तरह की कमाई करने वाले लोगों को स्पलॉगर कहते हैं। स्पलॉगर वो होते है जो फर्जी नामों से हजारों ब्लॉग तैयार करते हैं और उनपर कहीं कहीं से चोरी कर अपना पोस्ट डालते रहते हैं। और उनपर आने वाले एड से लाखों की कमाई करते हैं। हालांकि हमलोग भी किसी आर्टिकल को अच्छी तरह लिखने के लिए इधर उधर से जानकारी जुटाते हैं। जैसा कि मैने इस लेख को लिखने के लिए कुछ जानकारी देश-दुनिया डॉट ब्लॉग स्पॉट डॉट कॉम से जुटाई है। लेकिन स्पलॉगर केवल कॉपी पेस्ट कर अपना काम चला लेते हैं।

आज ब्लॉग को कई तरह की भाषाओं में एक क्लिक मात्र से ट्रांसलेट किया जा सकता है। जिससे इसकी पहुंच कई गुणा बढ़ गई है। आपके ब्लॉग दुनिया के किस कोने में देखी जा रही है। इसे जानने के लिए भी कई फ्री टूल्स इंटरनेट पर उपलब्ध है। जिससे आपको ये अंदाजा लग जाएगा कि आपका ब्लॉग दुनिया के किस कोने तक पहुंच रखता है।

आज का जमाना पालतू लोगों के लिए बना है। जिसे आप फालतू भी कह सकते हैं। अगर आपको विश्वास न हो तो ऑफिस में अपनी चारों ओर नजर घुमा कर देख लीजिए। आपको लगेगा की हर कुर्सी से चिपका हुआ है एक पालतू आदमी। अपनी अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में। सही को गलत बोल रहा है। हंसी न आने पर भी हंस रहा है। क्योंकि उसका बॉस हंस रहा होता है। ऐसे में ब्लॉग एक क्रांति से कम नहीं है। कम से कम अपनी बात खुलकर यहां रखा तो जा ही सकता है। साथ ही अगर आप अच्छी बातें लिखते हैं तो इतना तय है कि आने वाले दिनों में आपकी कमाई भी होने लगेगी। क्योंकि आपके ब्लॉग पर होने वाली हर क्लिक को कोई देख रहा है। जो वहां अपना एड देने को बेताब है।

Thursday, May 15, 2008

लाल हुआ पिंक सिटी



एक के बाद एक आठ बम धमाकों से राजस्थान की राजधानी जयपुर थर्रा उठा। पच्चास से ज्यादा बेकसूर लोग मारे गए। आतंकियों ने राजस्थान को इसलिए भी चुना क्योंकी दुनिया की ज्यादातर देशों में लोग जयपुर को जानते हैं। वर्ल्ड टूरिज्म में जयपुर की अलग पहचाना है। देश में होने वाली टूरिज्म की कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा जयपुर से आता है। साथ ही जयपुर में ऐसी बहुत सी इंडस्ट्री है जिसके सुस्त पड़ जाने या बंद हो जाने से भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ झटका लग सकता है।पहड़ी किलों से घिरा राजस्थान की राजधानी जयपुर का देश के टूरिज्म इंडस्ट्री में अहम स्थान है। इसलिए इसे गोल्डेन ट्रेंगल का हिस्सा बनाया गया है। जहां हर साल लाखों की संख्यां में सैलानी आते हैं। जो राज्य सरकार की कमाई का एक बहुत बड़ा जरिया है। इसके अलावे जयपुर में कई इंडस्ट्री भी हैं।

बड़े और मध्यम स्तर की यहां 48 कंपनियां हैं। जबकि छोटे स्तर की 19544 कंपनियां हैं। जो कि जयपुर की 19 इंडस्ट्रीयल एरिया में फैली हुई हैं। जयपुर में 1300 करोड़ रुपए के महंगे पत्थरों का कारोबार हर साल होता है। केवल पन्ना की कटिंग और पॉलिसिंग से जयपुर को हर साल 300 करोड़ रुपए कीकमाई होती है।

जयपुर के मुख्य इंडस्ट्रीयल प्रोडक्ट हैं
ग्रेनाइट स्लेब्स और टाइल्स, लकड़ी के सामान, पॉटरी, डाइंग और प्रिटिंग, हाथ से बना पेपर, हैंडीक्राफ्ट, हैलोजन ऑटो बल्ब, पर्फ्युम्स, पीवीसी फुटवीयर,कैनवस शूज,पोर्टलैंड सीमेंट, रेडीमेड कपड़े, सिंथेटिक शूटिंग एंड शर्टिंग,रिफाइंड तेल, वनस्पति घी, सूजी, गेहूं का मैदा, सिंथेटिक लेदर।

जयपुर से निर्यात किए जाते हैं
पीतल के समान, जेम्स एंड ज्वैलरी, ग्रेनाइट टाइल्स, हैंडलूम, मार्बल, टेक्सटाइल और प्रिंडेट कपड़े, रेडीमेड कपड़े और वूलेन कार्पेट।

धमाके के बाद कई टूरिस्टों ने अपनी टिकट कैंसिल करा ली। जिससे राज्य के राजस्व पर नाम मात्र का ही असर होगा। धमाके के दो दिन बाद ही आम जिंदगी पटरी आ गयी है। जससे लगता है कि उद्योग धंधों को ज्यादा नुकसान होने की गुंजाइश नहीं है। लेकिन लोगों की अमूल्य जिंदगी की शायद ही भरपाई हो पाएगी। अब सरकार को चाहिए की हर धमाके के बाद किसी संदिग्ध की स्केच बनाकर उनकी लकीरों पर रोटी न सेंकते हुए कोई ठोस कदम उठाए। और एक के बाद एक धमाके के लिए किसी राज्य या किसी खुफिया तंत्र की नाकामी पर कीचर उठाने की बजाए एक अलग पर मजबूत फेडरल सिस्टम की गठन की सोचे।

दवा के रूप में ज़हर

डी फॉर ड्रग्स डी फॉर डेंजर?

दवा जब काम न करे तो दुआ काम करती है। लेकिन जरा सोचिए अगर दवा ही जहर बन जाए तो क्या दुआ काम करेगी। जी हां यही है हकीकत...भारत में बिकने वाली हर पांच दवाओं में से एक नकली है। जो या तो बेअसर है या एकदम उल्टा असर करता है। एसोचैम की एक सर्वे में ये बात सामने आई है। सबसे ज्यादा नकली दवाओं का करोबार देश की राजधानी दिल्ली से सटे राज्यों में हो रहा है। सर्वे के अनुसार गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, गुड़गांव और सोनीपत नकली दवा बनाने का गढ़ बन गया है। यहां बनने वाली दवाओं से न केवल मरीजों को अपनी जीवन से खेलना पड़ रहा है। बल्कि असली दवा कंपनियों की कमाई में भी 25 फसीदी की सेंध लगा रहा है। ज्यादा पॉपुलर और अधिक बिकने वाली दवाएं ही नकली फैक्ट्रियों में तैयार की जा रही हैं। इन दवाओं में क्रोसिन,वोवेरन, बीटाडीन, कैल्सियम की इंजेक्शन, कोसाविल सिरप शामिल हैं। एनसीआर में ड्रग इंस्पेक्टरों की संख्या काफी कम हैं। जबकि वहां करीब 3300 केमिस्ट की दुकानें हैं। जिसमें से 30 फीसदी दुकाने एनसीआर के छोटे-छोटे इलाकों में हैं। जिससे यहां बड़ी तेजी से नकली दवाओं का कारोबार बढ़ रहा है।

भारत में नकली दवाओं का कारोबार 4000 करोड़ रुपए का है जो हर साल 25 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि दुनियाभर में जो नकली दवाएं मौजूद हैं उसमें से तीन चौथाई दवाएं भारत में बनी हैं। नौ कैटेगरी में 68 नामी-गिरामी दवाओं का सर्वे करने के बाद ये बातें सामने आई है। ज्यादातर नकली दवाएं ट्यूबरकुलोसिस, एलर्जी, डायबिटीज, दिल से जुडी बीमारी और मलेरिया के हैं। भारत की फार्मा इंडस्ट्री 6 अरब डॉलर की है। जो कि हर साल 10 फीसदी की दर से बढ़ रही है। वहीं ग्लोबल फार्मा इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट है केवल 7 फीसदी। लेकिन आश्चर्य इस बात की है कि भारत में 1 फीसदी से भी कम दवाओं को सरकार टेस्ट कर पाती है। 26 सरकारी लैब्स में हर साल केवल 2500 सैम्पल्स को ही चेक किया जाता है। नई दवाओं को चेक कराने के लए 6 से 7 महीनों का लंबा इंतजार करना होता है।

इस आंकड़ों को देखकर ड्रग कंट्रोलर जनरल की ऑफिस में खलबली मच गई। और आनन-फानन में ड्रग कंट्रोलर जनरल ने नकली दवाओं का कितना बड़ा बाजार है इसका पता लगाने के लिए दुनिया में अबतक का सबसे बड़ा सर्वे कराने का फैसला कर लिया है। जो कि जल्द शुरू होगा। और इसमें 50 लाख रुपए खर्च होंगे। और इस सर्वे का नतीजा 6 महीनों बाद सामने आएगा। इस सर्वे के लिए ड्रग इंस्पेक्टर मरीज बनकर दवाएं खरीदेंगे। कुल 31 हजार दवाओं के सैम्पल्स जमा किए जाएंगे। और तब जो रिपोर्ट आएगी उसके ऊपर कार्रवाई की जाएगी।

एक अनुमान के मुताबिक देश में कुल 200 कंपनियां नकली दवा कारोबार में लगी हैं। जिनमें से कई कंपनियों के मालिकों के सर राजनेताओं का हाथ है। इसलिए दवा के रूप में ज़हर बेचने वालों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। नकली दवाओं पर बनी माशेलकर कमेटी ने तो मौत के सौदागरों के लिए मौत की सजा की बात कही थी। लेकिन इसे अभीतक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।

Monday, May 12, 2008

बुरे समय में किंग ऑफ गुड टाइम !

खेल का बिजनेस खेल नहीं !

विजय माल्या जिसे किंग ऑफ गुड टाइम कहा जाता है। जो एक पार्टी में उतने पैसे उड़ा देते हैं जितना कोई जिंदगीभर में नहीं कमा पाता है। लेकिन लक्ष्मी हमेशा से उनपर मेहरवन रही है। वो जितना खर्च करते हैं इससे ज्यादा फायदा उन्हें मिल जाता है। लेकिन फिलहाल उनका बुरा फेज चल रहा है। आईपीएल की उनकी टीम रॉयल चैलेंजर्स को लगातार मुंह की खानी पड़ रही है। एक के एक हार ने उन्हें हिला कर रख दिया है। ठीक ऐसा ही हाल एफ वन रेस में भी उनकी टीम की हो रही है।

लेकिन खेल के बिजनेस के अलावे उनका दूसरा बिजनेस काफी चकाचक चल रहा है। विजय माल्या ने 1983 में यूबी ग्रुप यानी यूनाइटेड ब्रुअरीज की कमान अनपे हाथ में ली। तब से लेकर अबतक कंपनी अपनी विस्तार की बदौलत एक मल्टीनेशनल कंपनी का दर्जा हासिल कर चुकी है। इस ग्रुप के अंदर आज एग्रीकल्चर, लाइफ साइंस,केमिकल, आईटी, इंजीनियरिंग और एविएशन जैसी करीब साठ कंपनियां काम कर रही हैं। जिसका टर्नओवर अरबों डॉलर में है। इसके बाद भी कंपनी का अधिग्रहण नहीं रुका है। पिछले साल मई में ही विजय माल्या ने प्रीमियम व्हिस्की बनाने वाली दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंपनी स्कॉटलैंड की व्हाइट एंड मैके को करीब 5 हजार करोड़ रुपए में खरीदा है। माल्या ने 2005 में किंगफिशर एयरलाइंस की शुरूआत की। इसके साथ ही यूरोपियन कंपनी एयरबस को एक साथ 50 एयरक्राफ्ट का अबतक का सबसे बड़ा ऑर्डर दिया। जहाजों का बेड़ा बढ़ाने और ज्यादा जगहों पर पहुंच बनाने के लिए माल्या ने लो कॉस्ट एयरलाइंस एयर डेक्कन को करीब 1000करोड़ रुपए में खरीद लिया।

लेकिन खेल की बात ही कुछ अलग है। स्पीड के दीवाने विजय माल्या ने फॉर्मुला वन रेसिंग टीम स्पाइकर की स्टीयरिंग 8.8 करोड़ यूरो देकर अपने हाथ में ले ली। जिसका नाम बाद में बदलकर फोर्स इंडिया कर दिया। यानी अब एफ वन रेस में एक इंडियन टीम भी हवा से बातें करते हुए दिखने लगी हैं। लेकिन बिजनेस के खिलाड़ी विजय माल्या को खेलों में मुंह की खानी पड़ रही है। स्पेन में हुए एफ वन रेस में उनकी टीम शुरूआती झटके खाने के बाद 10 नंबर पर रही। जबकि आईपीएल में उनकी चेन्नई टीम लगातार हिचकोले खा रही है। यानी विजय माल्या को आज ये कहावत बिल्कुल सही लग रही होगी। मनी केन बाइ हैप्पीनेस, लेकिन पैसे से खेल और प्यार को नहीं जीता जा सकता है।

Thursday, May 8, 2008

भारत में 50 लाख की बाइक !

भारत में बढ़ रहे हैं रफ्तार के दीवाने

बाइक बनाने वाली दुनियाभर की दिग्गज कंपनियों ने भारतीय बाजार में धूम मचाने की ठान ली है। तेजी से तरक्की की राह पर चलने वाले भारत में स्पीड के दीवानों की संख्यां बढ़ती जा रही है। साथ ही भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाइक का बाजार है और इसे कंपनियां नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं। और यही वजह है कि यमाहा, हार्ले डेविडसन के बाद अब इटली की कंपनी दुकाती ने अपनी पच्चास लाख की बाइक भारतीय बाजार में लांच की है। दुकाती की बाइक की इंजन 200 हॉर्स पॉवर की है । दुकाटी दुनिया भर से साठ देशों में छे सेग्मेंट में अपनी बाइक बेचती है। इसकी पावर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछली 17 वर्ल्ड सुपर बाइक चैंपियनशिप में से 14 इसने जीती है।

आइए अब नजर डालते हैं दुनियाभर की कुछ और महंगी बाइक्स पर। जो महंगी तो हैं पर इनकी तूफानी स्पीड को पकड़ने वाला कोई नहीं है।
सुजुकी हायाबुसा

सबसे पहले बात जापानी कंपनी सुजुकी की। जिसकी बाइक हायाबुसा ने पूरी दुनिया तूफान उठा दिया। जी हां प्रति घंटे इसकी स्पीड है 319 किलोमीटर। ताकत है 171 हॉर्स पावर की । 2001 में हुए एक टेस्ट में इस बाइक ने दुनिया की सबसे तेज चलनेवाली बाइक का खिताब जीता है। इसमें 1340 सीसी की इंजन है। 16 वाल्व हैं। यूरो थ्री स्टैंडर्ड का प्रमाण इसे मिला हुआ है। इसे 1999 में लांच किया गया। और तब से पिछले साल तक 1 लाख बाइक बिक चुकी है। कीमत मात्र 5 लाख रुपए हैं। लेकिन 100 फीसदी से ज्यादा कस्टम ड्यूटी अलग से देनी होगी।

यामाहा YZF-R1

इसके बाद बारी आती है यामाहा के yzf-r 1 की। जिसमें 998 सीसी की इंजन लगी है। 16 वाल्व इसमें भी हैं। कीमत है साढ़े चार लाख रुपए। कस्टम ड्यूटी अलग से।

होंडा सीबीआर 1000 आरआर

तूफान से बातें करने में होंडा की cbr1000 rr भी पीछे नहीं है। इसमें 599 सीसी की इंजन लगा है। 16 वाल्व हैं। ताकत है 124 एचपी। इसे 1992 में लांच किया गया। कीमत साढ़े चार लाख के करीब। कस्टम ड्यूटी अलग से।

कावासाकी निंजा

कावासाकी की निंजा बाइक भी दुनियाभर में काफी पॉपुलर है। क्योंकि ये थोड़ी इकॉनोमिकल है। इसमें 4 stroke649 सीसी की इंजन लगी है। 8 वाल्व हैं। यानी दूसरी गाड़ियों के चार सिलंडर के मुकाबले इसमें केवल दो सिलंडर लगे हैं। हर सिलंडर में चार वाल्व लगे हैं। गाड़ी को अच्छी तरह कंट्रोल में करने के लिए इसमें ट्रिपल petal डिजाइन ब्रेक डिस्क लगाया गया है। कीमत है करीब 3 लाख रुपए। कस्टम ट्यूटी एक्सट्रा।

Wednesday, May 7, 2008

ओके टाटा : हॉर्न प्लीज : हर सेग्मेंट में मिलेंगे

ऑटो सम्राट टाटा

कभी दुनियाभर में धूम मचा देने वाली कंपनी लैंडरोवर और जगुआर आखिरकार अगले महीने पूरी तरह टाटा की झोली में आ जाएगी। टाटा मोटर्स ने कार बनाने वाली ब्रिटेन की कंपनी जगुआर और लैंड रोवर को खरीद लिया है। टाटा ने इन कंपनियों को फोर्ड मोटर्स से खरीदा है। क्योंकि अमेरिकी मोटर कंपनी फोर्ड के हाथों में इसका मालिकाना हक था। टाटा को इस बड़ी शॉपिंग के लए 2.3 अरब डॉलर खर्च करने पड़े । अगले महीने तक इस डील की प्रक्रिया को पूरा कर ली जाएगी। फोर्ड को टाटा से मिलने वाली रकम में से 60 करोड़ रुपए लैंड रोवर और जगुआर के पेंशन फंड को देने होंगे। फोर्ड ने करीब 20 साल पहले 2.5 अरब डॉलर में जगुआर को और 8 साल पहले 2.7 अरब डॉलर में लैंड रोवर को खरीदा था। पिछले एक साल से जेएलआऱ(जगुआर- लैंड रोवर) के पीछे टाटा मोटर्स हाथ धो कर पड़ी थी। और इस रेस में टाटा ने भारतीय कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा सहित दुनिया की कई कंपनियों को पीछे छोड़ दिया। जगुआर पिछले कई सालों से नुकसान में चल रहा है जबकि लैंड रोवर का मुनाफा भी नाममात्र है। इसलिए फोर्ड ने इनदोनों कंपनियों को बेच दिया। इसके बदले मिले पैसे से फोर्ड दुनयाभर में अपनी ब्रांड को और मजूबत करेगी।
टाटा : द ऑटो किंग

उधर टाटा इन दोनों कंपनियों के साथ ही ऑटो इंडस्ट्री की लगभग सभी सेग्मेंट में अपनी पैठ बना लेगी। चाहे लखटकिया नैनो हो या इंडिका या सूमो या एवियो या ट्रक या बस या हवा से बातें करने वाली लैंड रोवर और जगुआर। कमर्शिय गाड़ियों में पहले से ही देश में धाक जमा चुकी टाटा ने कोरियाई कंपनी देवु की कमर्शियल गाड़ियों को खरीदकर दुनिया में अपनी पहचान बना ली है। यानी चाहे भारी समान ढ़ोना हो या हवा से बातें करना आप टाटा को टाटा कर आगे नहीं निकल सकते।

क्या है लैंड रोवर?
हवा से बातें करने वाली रैंज रोवर और डिस्कवरी जैसी स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हेकिल बनाने वाली कंपनी लैंड रोवर की जन्म इंग्लैंड के गायदोन में 30 अप्रैल 1948 में हुआ। लैंड रोवर एलआर टू जैसी छोटी कार भी बनाती है। साथ ही मल्टी पर्पस व्हेकिल यानी एमयूवी के क्षेत्र में भी इसका बोलवाला है। ये कंपनी प्रॉफिट में है लेकिन इतना कम कि किसी प्रोडक्ट रिन्यूअल प्रोग्राम को फाइनेंस करना भी इसके बूते में नहीं है। पिछले साल कंपनी की बिक्री में 2006 के मुकाबले 18 फीसदी का इजाफा हुआ है। और इसकी बिक्री बढ़कर सवा दो लाख गाड़ियों तक पहुंच चुकी है। इस कंपनी की शुरूआत रोवर नाम से हुई। साथ ही इसकी गिनती एसयूवी बनाने वाली सबसे पुरानी कंपनियों में होती है।

क्या है जगुआर?
जगुआर का नाम लग्जरी स्पोर्ट्स सेडान बनाने वाली कंपनी की तौर पर जाना जाता है। इसकी लिटिल एक्स टाईप सेडान कार ने 2001 में लांच होते ही पूरी दुनिया में धूम मचा दी थी। और इसकी बिक्री एक साल में 1.5 लाख कार तक पहुंच गई। जबकि जगुआर की कुल कारों की बिक्री 2 से 3 लाख कारें ही थी। जानकार लिटिल एक्स टाईप सेडान कार में काफी पोटेंशियल देख रहे है। आने वाले दिनों में ये कार बीएमडब्ल्यू थ्री सीरीज को टक्कर दे सकती है। इसके बाद कंपनी ने एस टाईप कार लांच की। जिसको बाद में बदलकर एक्स एफ कर दिया गया। और पूरी दुनिया में एक साथ इसे लांच किया गया। लेकिन जापानी और जर्मन कारों मर्सीडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी और तो और लेक्सस से भी इसे कड़ी टक्कर मिल रही है। जगुआर को 1922 में स्वैलो साईडकार कंपनी की तौर पर लांच किया गया था। 1945 में इसका नाम बदल कर जगुआर कर दिया गया। 2006 के मुकाबले पिछली साल कंपनी 16 फीसदी कम यानी केवल 60,485 कारें बेची हैं। और फिलहाल ये कंपनी नुकसान में चल रही है। फोर्ड ने 1989 में इसे 2.5 अरब डॉलर में खरीदा। और तब से फोर्ड को 10 अरब डॉलर की नुकसान हो चुकी है।